हैदराबाद का ऐतिहासिक हिल फोर्ट पैलेस हुआ खस्ताहाल, शाही विरासत से खंडहर बनने की पूरी कहानी तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में नौबत पहाड़ पर स्थित 1915 में बना हिल फोर्ट पैलेस देखरेख के अभाव में खंडहर बन चुका है। सर निज़ामत जंग से लेकर निज़ाम घराने और फिर रिट्ज़ होटल तक का सफर तय करने वाली यह ऐतिहासिक इमारत पिछले ढाई दशकों से वीरान पड़ी है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में स्थित प्रसिद्ध नौबत पहाड़ की वादियों में बना हिल फोर्ट पैलेस आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कभी अपनी बेजोड़ गोथिक वास्तुकला, भव्यता और शाही आतिथ्य के लिए मशहूर रही यह ऐतिहासिक इमारत आज पूरी तरह उपेक्षा की शिकार हो चुकी है। दशकों की देखरेख के अभाव और प्रशासनिक अनदेखी के कारण यह भव्य महल धीरे-धीरे जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो चुका है। 1915 में रखी गई थी इस भव्य महल की नींव इस ऐतिहासिक महल का निर्माण कार्य साल 1915 में सर निज़ामत जंग द्वारा शुरू करवाया गया था। उन्होंने इस इमारत को विशेष रूप से गोथिक शैली के वास्तुकला आधार पर तैयार करवाया था। निर्माण के बाद सर निज़ामत जंग इस महल में लगभग 15 वर्षों तक रहे। उस ज़माने में यह महल अपनी अनूठी संरचना और सुंदरता के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात था। यह महल हैदराबाद के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक ताने-बाने का एक महत्वपूर्ण अंग रहा है। नौबत पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित यह परिसर दूर से ही अपनी ओर आकर्षित करता था। इसकी ऊंची गोथिक मेहराबें और विशाल स्तंभ उस दौर के कारीगरों की वास्तुकला कुशलता को प्रदर्शित करते थे। 40 कमरों की विशालता के साथ-साथ स्विमिंग पूल और 3 बड़े बैंक्वेट हॉल तत्कालीन हैदराबाद के उच्च वर्ग की भव्य जीवन शैली का प्रतीक थे। निज़ाम घराने के निवास से लेकर होटल बनने तक का सफर साल 1929 में जब सर निज़ामत जंग हज की धार्मिक यात्रा पूरी करके लौटे, तो उन्होंने सादगीपूर्ण जीवन अपनाने का निर्णय लिया। इसके पश्चात हैदराबाद के सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली खान ने इस महल को अपने छोटे बेटे प्रिंस मोअज्जम जाह के लिए खरीद लिया। इसके बाद यह इमारत शाही परिवार का आधिकारिक निवास स्थल बन गई। भारत संघ में हैदराबाद के विलय के उद्देश्य से चलाए गए ऑपरेशन पोलो के बाद भारत सरकार ने इस ऐतिहासिक संपत्ति को अपने नियंत्रण में ले लिया। बाद में साल 1955 में सरकार ने इस परिसर को लीज पर 'रिट्ज़ होटल कंपनी' को सौंप दिया। इसके बाद कई दशकों तक यहां रिट्ज़ होटल का सफल संचालन हुआ, जहां देश और विदेश से आने वाले नामी पर्यटक तथा विशिष्ट अतिथि ठहरते थे। पिछले ढाई दशकों से वीरान पड़ी है यह ऐतिहासिक इमारत साल 1997 के अंत में राज्य सरकार और होटल कंपनी के बीच हुआ लीज समझौता समाप्त कर दिया गया। इसके बाद से ही इस पूरे विशाल परिसर को खाली छोड़ दिया गया और वहां ताला लग गया। पिछले 25 से अधिक वर्षों से वीरान पड़े रहने के कारण इस महल की दीवारें अब दरकने लगी हैं। इमारत की छतें बेहद जर्जर हो चुकी हैं और पूरे परिसर में चारों तरफ मलबा और कचरा फैला हुआ है। कभी हैदराबाद की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर का मुख्य हिस्सा रहा यह महल अब अपनी पुरानी भव्यता का केवल एक धुंधला अवशेष बनकर रह गया है। इसका आप पर असर भारत में: देश की ऐतिहासिक इमारतों और वास्तुकला धरोहरों के संरक्षण को लेकर प्रशासनिक उदासीनता की ओर ध्यान आकर्षित करता है। हैदराबाद में: नौबत पहाड़ क्षेत्र में स्थित इस ऐतिहासिक स्थल की जर्जर हालत स्थानीय निवासियों और विरासत प्रेमियों के लिए चिंता का विषय है। सवाल-जवाब 1. हिल फोर्ट पैलेस का निर्माण कब और किसने करवाया था? हिल फोर्ट पैलेस की नींव साल 1915 में सर निज़ामत जंग ने रखी थी। 2. यह महल हैदराबाद में कहां स्थित है? यह महल तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के नौबत पहाड़ इलाके की वादियों में स्थित है। 3. निज़ाम घराने के पास यह महल कैसे आया? साल 1929 में सर निज़ामत जंग के सादगीपूर्ण जीवन अपनाने के बाद सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली खान ने इसे अपने छोटे बेटे प्रिंस मोअज्जम जाह के लिए खरीद लिया था। 4. हिल फोर्ट पैलेस में रिट्ज़ होटल की शुरुआत कब हुई थी? ऑपरेशन पोलो के बाद भारत सरकार ने इसका नियंत्रण लिया और साल 1955 में इसे रिट्ज़ होटल कंपनी को लीज पर दे दिया था। 5. यह महल कब से वीरान और बंद पड़ा है? साल 1997 के अंत में सरकार द्वारा लीज समाप्त किए जाने के बाद से यह परिसर पिछले ढाई दशकों से बंद और वीरान पड़ा है। https://trendkia.com/culture/hyderabad-ka-aitihasika-hill-fort-palace-hua-khastahala-shahi-virasata-se-khndahara-banane-ki-puri-kahani-20197 TrendKia — Har trend, sabse pehle.