# कौन हैं प्राची अग्रवाल और राघव अग्रवाल, जिनके भजन क्लबिंग अंदाज ने खींचा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान

> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में एक भजन क्लबिंग इवेंट में शामिल हुए, जहाँ उन्होंने प्राची अग्रवाल और राघव अग्रवाल के आधुनिक आध्यात्मिक अंदाज की सराहना की। भाई-बहन की यह जोड़ी पारंपरिक भजनों को इलेक्ट्रॉनिक बीट्स के साथ नया रूप दे रही है।

**Type:** article · **Category:** कल्चर · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/culture/kauna-hain-prachi-agarwal-aura-raghav-agarwal-jinake-bhajana-klabinga-andaja-ne-khincha-pradhanamntri-narendra-modi-ka-dhyana-38741 · **Language:** Hindi
**Tags:** भजन क्लबिंग, प्राची अग्रवाल, राघव अग्रवाल, मन की बात, नरेंद्र मोदी, हनुमान अंश, पंडित दीनदयाल उपाध्याय

नई दिल्ली में आयोजित एक अनूठे सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की, जहाँ आधुनिकता और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम देखने को मिला। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष್ಯ में आयोजित इस कार्यक्रम में भजन क्लबिंग का आयोजन किया गया था। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिल्म हनुमान अंश के लोकप्रिय गीत जब जिद पर आई पार्वती का आनंद लिया और पारंपरिक खंजरी भी बजाई। इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य भक्ति संगीत को देश की युवा पीढ़ी तक प्रभावी तरीके से पहुँचाना था, जिसने दर्शकों का भरपूर ध्यान खींचा।

## कौन हैं प्राची अग्रवाल और राघव अग्रवाल
इस पूरे कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बनीं युवा गायिका प्राची अग्रवाल, जो मंच पर अपनी सुरीली आवाज में भजन प्रस्तुत कर रही थीं। प्राची इस सफर में अकेली नहीं हैं, बल्कि उनके साथ उनके भाई राघव अग्रवाल भी मंच साझा करते हैं। इस भाई-बहन की जोड़ी का देश में भजन क्लबिंग मूवमेंट को लोकप्रिय बनाने में सबसे बड़ा योगदान माना जाता है। दोनों पारंपरिक और शास्त्रीय भजनों को आधुनिक कॉन्सर्ट की तर्ज पर स्टेज लाइट्स और इलेक्ट्रॉनिक बीट्स के साथ जोड़कर जेन जी यानी आज की युवा पीढ़ी के सामने पेश करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इनके इस आधुनिक और अनूठे आध्यात्मिक कॉन्सेप्ट की तारीफ अपने मन की बात प्रोग्राम में कर चुके हैं।

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## मंच पर गजब का तालमेल और असल जिंदगी की खटपट
राघव और प्राची अपने इस खास म्यूजिक शो के सिलसिले में देश भर में काफी यात्राएँ करते हैं। मंच पर दोनों के बीच का पेशेवर तालमेल जितना शानदार दिखता है, पर्दे के पीछे उनकी केमिस्ट्री बिल्कुल आम भाई-बहन जैसी है। राघव का कहना है कि जब वे स्टेज से दूर होते हैं, तो वे किसी भी सामान्य भाई-बहन की तरह छोटी-छोटी बातों पर नोकझोंक करते रहते हैं। हालांकि, मंच पर कदम रखते ही यह सारी आपसी तकरार एक गहरे और आध्यात्मिक जुड़ाव में बदल जाती है। मात्र 23 वर्ष की प्राची अपने भाई से उम्र में छोटी हैं और हँसते हुए बताती हैं कि शो शुरू होने से पहले तक उनकी लड़ाइयाँ चलती रहती हैं। यहाँ तक कि उनके मैनेजर का मुख्य काम उन्हें संभालने से ज्यादा उन दोनों की आपसी बहसों पर नियंत्रण रखना होता है.

## कॉर्पोरेट की दुनिया को अलविदा कह चुना संगीत का रास्ता
इस मुकाम तक पहुँचने के लिए राघव और प्राची ने अपनी स्थिर कॉर्पोरेट जिंदगी को पीछे छोड़ा था। दोनों ने आज से डेढ़ साल पहले अपनी-अपनी कॉर्पोरेट फाइनेंस की अच्छी-खासी नौकरियां छोड़कर पूरी तरह से संगीत को अपना करियर बनाने का फैसला किया। जब माता-पिता को इस बड़े बदलाव के बारे में बताने की बारी आई, तो बड़े भाई होने के नाते राघव ने यह कठिन जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने मजाकिया अंदाज में साझा किया कि उन्होंने पहले खुद अपनी नौकरी छोड़ी और फिर एक साल बीतने के बाद प्राची से भी उसकी नौकरी छुड़वा दी। उनके माता-पिता ने इस फैसले का कड़ा विरोध करने के बजाय पूरा समर्थन किया और स्थिति को सहजता से समझ लिया, जिसके बाद से यह जोड़ी भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने के साथ संगीत के जरिए नई ऊँचाइयाँ छू रही है।

## इसका आप पर असर
यह सांस्कृतिक घटना देश में पारंपरिक कला और आधुनिक संगीत के मेल को बढ़ावा दे रही है, जिससे युवाओं के बीच आध्यात्मिक आयोजनों का दायरा बढ़ रहा है।

- **भारत में:** पारंपरिक भक्ति संगीत और युवाओं की पसंद का यह अनूठा फ्यूजन देश भर के कलाकारों और इवेंट ऑर्गेनाइजर्स के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा कर रहा है।
- **नई दिल्ली:** राजधानी में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम से स्थानीय सांस्कृतिक मंचों और कलाकारों को बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय पहचान मिल रही है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक भक्ति संगीत को आधुनिक युवा पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से इस तरह के कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

- **सांस्कृतिक पहल:** पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के जश्न के हिस्से के रूप में इस अनूठे संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
- **संगीत का नया रूप:** युवा कलाकारों द्वारा पारंपरिक भजनों में इलेक्ट्रॉनिक बीट्स और कॉन्सर्ट लाइट्स का उपयोग करने से यह शैली जेन जी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
- **शीर्ष स्तर पर प्रोत्साहन:** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में इस अनूठे कॉन्सेप्ट की सराहना किए जाने के बाद इस विधा को राष्ट्रव्यापी पहचान मिली।

## सवाल-जवाब

### 1. भजन क्लबिंग इवेंट में कौन से प्रसिद्ध गीत की प्रस्तुति दी गई?
इस इवेंट के दौरान फिल्म हनुमान अंश का प्रसिद्ध गाना जब जिद पर आई पार्वती सुनाया गया।

### 2. प्राची और राघव अग्रवाल का संबंध किस कला से है?
ये दोनों भाई-बहन पारंपरिक भजनों को इलेक्ट्रॉनिक बीट्स और आधुनिक कॉन्सर्ट स्टाइल के साथ पेश करने के लिए जाने जाते हैं।

### 3. संगीत में आने से पहले प्राची और राघव क्या करते थे?
संगीत में फुल-टाइम आने से पहले दोनों कॉर्पोरेट फाइनेंस की नौकरी करते थे।

### 4. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जोड़ी की तारीफ कहाँ की थी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात प्रोग्राम में इनके आधुनिक आध्यात्मिक कॉन्सेप्ट की तारीफ की थी।

## प्रेरणा और सबक
प्राची और राघव अग्रवाल की यह सफलता साबित करती है कि लीक से हटकर जोखिम उठाने और अपने जुनून को फॉलो करने से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

- **जुनून और करियर:** यदि आप अपनी कला या काम के प्रति समर्पित हैं, तो सुरक्षित कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर अपने सपने को पूरा करना संभव है।
- **परिवार का साथ:** बड़े फैसलों में माता-पिता का विश्वास और समर्थन हासिल करना मानसिक शांति और आगे बढ़ने की ताकत देता है।
- **पारंपरिक मूल्यों का आधुनिकीकरण:** पुरानी और पारंपरिक विधाओं में आधुनिक तकनीकों का तड़का लगाकर उन्हें आज की पीढ़ी के अनुकूल बनाया जा सकता है।
- **आपसी तालमेल:** कामकाजी जीवन या कलात्मक मंच पर व्यक्तिगत मतभेदों को पीछे छोड़कर एक साझा लक्ष्य के लिए साथ काम करना सफलता की कुंजी है।

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