मलेशियाई कला प्रदर्शनी में दिखेगी पूर्णिया के प्रोफेसर ध्रुव कुमार की अनूठी तिरंगा पेंटिंग पूर्णिया के असिस्टेंट प्रोफेसर ध्रुव कुमार की 24×30 इंच की तिरंगा पेंटिंग मलेशिया में अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में प्रदर्शित की जाएगी। बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले कलाकार और शिक्षाविद ध्रुव कुमार की एक विशेष कलाकृति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने जा रही है। कैनवास पर उकेरी गई 24×30 इंच की यह पेंटिंग जल्द ही मलेशिया में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का हिस्सा बनेगी। भारतीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता के प्रतीकों को जीवंत करती इस कलाकृति ने पूर्णिया और पूरे बिहार प्रदेश का मान बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन से पहले लोकायता आर्ट गैलरी में दिखेगी झलक मलेशिया के इस बड़े आयोजन से पहले देश के कला प्रेमियों को यह कलाकृति देखने का अवसर मिलेगा। यह पेंटिंग 7 अगस्त से 10 अगस्त तक दिल्ली स्थित लोकायता आर्ट गैलरी में प्रदर्शित की जाएगी। इस प्रदर्शनी का आयोजन रेम्बो आर्ट वर्ल्ड द्वारा किया जा रहा है। इसके ठीक दो महीने बाद इस पेंटिंग को मलेशिया में होने वाले भव्य अंतरराष्ट्रीय आर्ट एग्जीबिशन के लिए भेजा जाएगा, जहां विभिन्न देशों के दर्शक भारतीय कला और स्वाधीनता के भावों को देख सकेंगे। कैनवास पर तिरंगा और जलीय जीवन का अनोखा संगम ध्रुव कुमार की इस रचना में एक भारतीय कैटफिश को दिखाया गया है, जो अपने मुंह में भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को थामे हुए है। चित्र के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जलचर भी देश की आजादी का उत्सव मना रहा है और भारतीय होने पर गर्व का अनुभव कर रहा है। यह कलाकृति स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और राष्ट्रीय चेतना की याद दिलाती है। इस अनूठी अवधारणा को कैनवास पर साकार करने के लिए कलाकार को लगातार चार महीने तक दिन-रात कठिन परिश्रम करना पड़ा है। अध्यापन के साथ कला साधना और भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन मूल रूप से पूर्णिया के एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत ध्रुव कुमार का कला से जुड़ाव बचपन से ही रहा है। उन्हें छोटे पर्दे या साधारण चित्रों की जगह बड़े और मनमोहक चित्र बनाने का शौक रहा है। अपनी लगन, निरंतर अभ्यास और रचनात्मक क्षमता के बल पर उन्होंने कला जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अपने शैक्षणिक दायित्वों को निभाने के साथ-साथ वे छोटे बच्चों को भी चित्रकला की शिक्षा देते हैं, ताकि क्षेत्र में नई कलात्मक प्रतिभाओं को तराशा जा सके। इसका आप पर असर भारत में: यह उपलब्धि देश के क्षेत्रीय कलाकारों और शिक्षकों को अपनी कलात्मक प्रतिभा अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के लिए प्रेरित करेगी। बिहार और पूर्णिया में: स्थानीय कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से क्षेत्र के युवा कलाकारों का उत्साह बढ़ेगा। सवाल-जवाब 1. ध्रुव कुमार कौन हैं और वे क्या कार्य करते हैं? ध्रुव कुमार बिहार के पूर्णिया स्थित एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, जो अध्यापन के साथ-साथ एक कुशल चित्रकार भी हैं। 2. ध्रुव कुमार की इस विशेष पेंटिंग का विषय क्या है? इस पेंटिंग में एक भारतीय कैटफिश को मुंह में तिरंगा दबाए स्वतंत्रता का जश्न मनाते और राष्ट्रीय गौरव दर्शाते हुए चित्रित किया गया है। 3. पेंटिंग का आकार क्या है और इसे बनाने में कितना समय लगा? यह पेंटिंग 24×30 इंच के कैनवास पर बनी है और इसे तैयार करने में चार महीने की दिन-रात की मेहनत लगी है। 4. यह पेंटिंग किन प्रदर्शनियों में दिखाई जाएगी? यह 7 से 10 अगस्त तक लोकायता आर्ट गैलरी में रेम्बो आर्ट वर्ल्ड द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में दिखाई जाएगी और इसके दो महीने बाद मलेशिया के अंतरराष्ट्रीय आर्ट एग्जीबिशन में प्रदर्शित होगी। प्रेरणा और सबक 1. सतत लगन और कड़ी मेहनत: चार महीने का अनवरत प्रयास दर्शाता है कि उत्कृष्ट कलाकृति के निर्माण के लिए धैर्य और निरंतर समर्पण आवश्यक है। 2. राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ाव: देशभक्ति और स्वाधीनता जैसे विषयों पर आधारित कलाकृतियों के माध्यम से वैश्विक पहचान बनाई जा सकती है। 3. ज्ञान और कला का प्रसार: व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ-साथ नई पीढ़ी को कला की शिक्षा देना समाज और संस्कृति को समृद्ध बनाता है। https://trendkia.com/culture/malaysia-kala-pradarshani-men-dikhegi-purnia-ke-prophesara-dhruv-kumar-ki-anuthi-tirnga-pentinga-14861 TrendKia — Har trend, sabse pehle.