उत्तराखंड के नैनीताल में ऐतिहासिक नंदा देवी महोत्सव की तैयारियां शुरू, 23 हजार घरों तक पहुंचेंगे कैलेंडर और झंडे नैनीताल में 124वें श्री नंदा देवी महोत्सव 2026 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार महिलाओं की भागीदारी बढ़ाते हुए शहर के 23 हजार परिवारों तक कैलेंडर और मां नंदा के झंडे घर-घर पहुंचाने की योजना है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल में स्थानीय संस्कृति, गहरी आस्था और समृद्ध परंपराओं के प्रतीक माने जाने वाले 124वें श्री नंदा देवी महोत्सव 2026 के आयोजन को लेकर तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं। इस धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान को अत्यंत भव्य और सुव्यवस्थित रूप देने की जिम्मेदारी श्री राम सेवक सभा ने उठाई है। इस वर्ष के उत्सव की सबसे खास बात यह तय की गई है कि मातृ शक्ति के जरिए शहर के लगभग 23 हजार घरों तक मां नंदा के झंडे और विशेष कैलेंडर पहुंचाए जाएंगे। इस अनोखी पहल का मुख्य उद्देश्य शहर के हर एक परिवार को इस धार्मिक आयोजन की सांस्कृतिक गूंज और आस्था से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है। महोत्सव की रूपरेखा और तैयारियों को अंतिम रूप देने के सिलसिले में हाल ही में सभा भवन में महिलाओं की एक अहम बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में आयोजन की सफलता में महिलाओं के योगदान और उनकी पारंपरिक भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोजकों का मानना है कि नंदा देवी महोत्सव के संचालन में मातृ शक्ति हमेशा से रीढ़ की हड्डी साबित हुई है। इस बार महिलाओं को घर-घर जाकर कैलेंडर और झंडे वितरित करने का सीधा जिम्मा सौंपा गया है। इसके अलावा, पूरे उत्सव के दौरान शहर की साफ-सफाई व्यवस्था को उत्तम बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारी डॉ. ललित तिवारी ने जानकारी दी कि इस बार के महोत्सव के लिए 'संस्कार, संस्कृति, समृद्ध विरासत' जैसी सार्थक थीम निर्धारित की गई है। पंचांग और तय कार्यक्रम के अनुसार, आगामी 16 सितंबर को सभा भवन में आधिकारिक उद्घाटन समारोह के साथ इस धार्मिक मेले का श्रीगणेश होगा। इसी दिन भाद्रपद पंचमी के पावन अवसर पर श्री राम सेवक सभा भवन से एक विशेष दल पारंपरिक अनुष्ठान के तहत कदली वृक्ष लाने के लिए रवाना होगा। अगले दिन यानी 17 सितंबर को यह कदली वृक्ष नैनीताल वापस लाया जाएगा। सूखाताल क्षेत्र में कदली वृक्ष का विधिवत पूजन संपन्न होने के बाद तल्लीताल से इसका भव्य नगर भ्रमण कराया जाएगा और शाम को विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा, जो इस उत्सव की पारंपरिक प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है। परंपरा के अगले चरण में 18 सितंबर को कुशल लोक कलाकार कदली के तनों, रुई, बांस और कपड़े जैसी पारंपरिक सामग्रियों का उपयोग करते हुए मां नंदा और सुनंदा की कलात्मक मूर्तियों का निर्माण करेंगे। इसी दिन छोटे बच्चों के लिए विशेष रूप से क्विज और लोकगीत प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा ताकि इस धार्मिक पर्व के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी कुमाऊं की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ा जा सके। इसके अगले दिन यानी 19 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह लगभग 5 बजे मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा का धार्मिक अनुष्ठान पूरा किया जाएगा। प्राण प्रतिष्ठा के तुरंत बाद मूर्तियों को आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिया जाएगा और मल्लीताल फ्लैट्स परिसर में विशाल मेले का शुभारंभ होगा, जहां धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सांस्कृतिक छटा भी देखने को मिलेगी। महोत्सव के अंतिम चरण के कार्यक्रमों के तहत 20 सितंबर को हवन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु आहुति देंगे। इसके ठीक अगले दिन यानी 21 सितंबर को विशाल महाभंडारे का आयोजन तय किया गया है। इस वर्ष महाभंडारे को लेकर प्रशासन और आयोजकों द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं ताकि उत्सव में भाग लेने वाले दूर-दराज के भक्तों को अनुशासित और व्यवस्थित तरीके से प्रसाद ग्रहण कराया जा सके। इसके बाद 22 सितंबर को भक्तों के लिए सुंदरकांड पाठ और मनमोहक भजन संध्या के कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। उत्सव के अंतिम दिन यानी 23 सितंबर को मां नंदा-सुनंदा की डोला यात्रा पूरे नगर का भ्रमण करेगी और नगर परिक्रमा के पश्चात विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच मूर्तियों का विसर्जन कर दिया जाएगा। इसी के साथ आठ दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महोत्सव का समापन हो जाएगा। डॉ. ललित तिवारी ने इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि श्री राम सेवक सभा की स्थापना सन 1926 में हुई थी, जबकि नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव का आरंभ वर्ष 1903 से माना जाता रहा है। लोक मान्यताओं के अनुसार मां नंदा और सुनंदा को राजराजेश्वरी के रूप में पूजा जाता है। बीते कई दशकों से यह उत्सव नैनीताल की धार्मिक आस्था का मुख्य केंद्र होने के साथ-साथ संपूर्ण कुमाऊं क्षेत्र की लोक संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा संवाहक बना हुआ है। इस बार आयोजकों की यह भी तैयारी है कि महोत्सव के सभी प्रमुख और मुख्य कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध कराया जाए, ताकि जो लोग नैनीताल से दूर देश-दुनिया में रह रहे हैं, वे भी घर बैठे मां नंदा-सुनंदा के दर्शन कर सकें और इन सांस्कृतिक आयोजनों से भावनात्मक रूप से जुड़ सकें। शहर के 23 हजार घरों तक झंडे और कैलेंडर पहुंचाने की यह मुहिम इस बार महोत्सव को एक जन-उत्सव का रूप देने जा रही है। इसका आप पर असर उत्तराखंड और विशेषकर नैनीताल के स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए इस महोत्सव के दौरान यातायात, दर्शन व्यवस्था और शहर की साफ-सफाई से जुड़े बदलावों पर ध्यान देना जरूरी होगा। • भारत में: देश के विभिन्न हिस्सों से उत्तराखंड की संस्कृति और लोक पर्वों में आस्था रखने वाले श्रद्धालु इस आयोजन के सीधे प्रसारण से जुड़ सकेंगे। • नैनीताल में: स्थानीय निवासियों और दुकानदारों को महोत्सव के दौरान शहर में निकलने वाली शोभायात्राओं, मेलों और भारी भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. नैनीताल में 124वां श्री नंदा देवी महोत्सव कब से शुरू हो रहा है? महोत्सव का शुभारंभ 16 सितंबर को सभा भवन में उद्घाटन कार्यक्रम के साथ होगा। 2. इस वर्ष महोत्सव की थीम क्या रखी गई है? इस वर्ष नंदा देवी महोत्सव की थीम 'संस्कार, संस्कृति, समृद्ध विरासत' रखी गई है। 3. कदली वृक्ष लाने और पूजन का कार्यक्रम कब है? कदली वृक्ष लाने के लिए दल 16 सितंबर को रवाना होगा और 17 सितंबर को वृक्ष लाकर सूखाताल में पूजन के बाद तल्लीताल में नगर भ्रमण कराया जाएगा। 4. मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कब होगी? मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा 19 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह करीब 5 बजे की जाएगी। 5. महाभंडारे का आयोजन किस दिन किया जाएगा? महाभंडारे का आयोजन 21 सितंबर को किया जाएगा। 6. नंदा देवी महोत्सव का समापन कब और कैसे होगा? महोत्सव का समापन 23 सितंबर को डोला यात्रा और विधि-विधान के साथ मूर्तियों के विसर्जन के साथ होगा। https://trendkia.com/culture/nainital-prepares-for-124th-nanda-devi-festival-2026-with-23-000-calendars-and-full-schedule-22661 TrendKia — Har trend, sabse pehle.