# राजस्थान के टोंक में दो बेटियों ने सिर पर टोकरी उठाकर मां को कराए भगवान लकड़ेश्वर महादेव के दर्शन, 30 किलोमीटर पैदल चलीं

> राजस्थान के टोंक जिले के देवली में दो बहनों नंदू और नोरती ने अपनी बुजुर्ग एवं अस्वस्थ मां बोली देवी वर्मा की मन्नत पूरी करने के लिए उन्हें टोकरी में बिठाकर सिर पर उठाया और 30 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर लकड़ेश्वर महादेव मंदिर पहुंचाया।

**Type:** article · **Category:** कल्चर · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/culture/rajasthan-ke-tonk-men-do-betiyon-ne-sira-para-tokari-uthakara-man-ko-karae-bhagavana-lakedeshwar-mahadev-ke-darshana-30-kilomitara-23254 · **Language:** Hindi
**Tags:** टोंक, राजस्थान, लकड़ेश्वर महादेव, सावन, मातृभक्ति, देवली, शिव मंदिर, श्रवण कुमार

आज के दौर में जहां कई बार पारिवारिक रिश्तों की अनदेखी देखने को मिलती है, वहीं राजस्थान के टोंक जिले से मातृभक्ति की एक ऐसी सुखद और प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है जिसने सभी का दिल जीत लिया है। टोंक जिले के देवली शहर में दो बेटियों ने अपनी बुजुर्ग मां की इच्छा पूरी करने के लिए एक बेहद कठिन और अनोखा संकल्प लिया। सावन के पवित्र महीने में इन बेटियों ने अपनी मां को एक बड़ी टोकरी में बिठाया और बारी-बारी से अपने सिर पर उठाकर करीब 30 किलोमीटर लंबी कठिन पैदल यात्रा पूरी की। इस भक्तिपूर्ण यात्रा के माध्यम से उन्होंने अपनी मां को प्रसिद्ध लकड़ेश्वर महादेव मंदिर पहुंचाया और भगवान शिव का दर्शन कराकर जलाभिषेक भी संपन्न कराया।

 

## मातृ प्रेम और अटूट भक्ति की अनोखी मिसाल

यह पूरा वाकया टोंक जिले के अंतर्गत आने वाले देवली शहर की तेजाजी कॉलोनी स्थित प्रताप नगर क्षेत्र का है। यहां निवास करने वाली बुजुर्ग महिला बोली देवी वर्मा भगवान भोलेनाथ की परम भक्त हैं। सावन के पवित्र महीने में उनकी हार्दिक इच्छा थी कि वे लकड़ेश्वर महादेव मंदिर जाकर भगवान शिव के दर्शन करें, क्योंकि उन्होंने इसके लिए एक विशेष धार्मिक मन्नत भी मांग रखी थी। हालांकि, बढ़ती उम्र और कमजोर स्वास्थ्य के कारण उनके लिए इतनी लंबी दूरी पैदल तय करना बिल्कुल भी संभव नहीं था। अपनी मां की इस इच्छा और उनके स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनकी दो बेटियों, नंदू और नोरती ने मां के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने का फैसला किया। दोनों बहनों ने तय किया कि वे किसी भी स्थिति में अपनी मां की मन्नत को अधूरा नहीं रहने देंगी। इसके बाद बेटियों ने एक बड़ी टोकरी का इंतजाम किया, उसमें मां को ससम्मान और सुरक्षित बैठाया और फिर दोनों बहनों ने बारी-बारी से टोकरी को अपने सिर पर उठाकर 30 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की।

 

## भक्तिमय वातावरण और राहगीरों का मिला भरपूर समर्थन

जब नंदू और नोरती अपनी मां बोली देवी को सिर पर टोकरी में बिठाकर लकड़ेश्वर महादेव मंदिर की ओर बढ़ीं, तो पूरा मार्ग शिव भक्ति के रंग में रंग गया। सावन की सुहावनी फुहारों के बीच इस पदयात्रा में शामिल अन्य महिलाएं DJ पर बज रहे सुरीले शिव भजनों की धुनों पर नाचते-गाते आगे बढ़ रही थीं। यात्रा के दौरान रास्ते भर हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे। इस अद्भुत और भावुक कर देने वाले दृश्य को जिसने भी देखा, वह देखता ही रह गया। राहगीरों और स्थानीय निवासियों ने बेटियों के इस असीम मातृ प्रेम, अटूट जज्बे और समर्पण की खुले दिल से प्रशंसा की। यात्रा के दौरान कई स्थानों पर लोगों ने इन बेटियों पर पुष्प वर्षा करके उनका उत्साह बढ़ाया और इस महान कार्य के लिए उन्हें नमन किया।

 

## लकड़ेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना और भावुक क्षण

करीब 30 किलोमीटर की लंबी और कठिन दूरी तय करने के बाद दोनों बेटियां अपनी मां को लेकर सुरक्षित और ससम्मान लकड़ेश्वर महादेव मंदिर परिसर पहुंचीं। मंदिर प्रांगण में प्रवेश करने के बाद बेटियों ने सबसे पहले अपनी मां बोली देवी वर्मा को भगवान भोलेनाथ के दिव्य दर्शन कराए। इसके पश्चात पूरे विधिविधान के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। नंदू और नोरती ने महादेव के चरणों में हाजिरी लगाकर अपनी मां की लंबी उम्र, बेहतर स्वास्थ्य और पूरे परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना की। बेटियों का अपनी मां के प्रति यह अनूठा समर्पण और सेवा भाव देखकर मंदिर में मौजूद हर श्रद्धालु की आंखें नम हो गईं। समाज में बेटियों के मान-सम्मान और उनकी ताकत को दर्शाने वाली यह घटना हर किसी के लिए एक गहरी सीख बन गई है।

## इसका आप पर असर
यह घटना समाज में बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और बेटियों की महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर एक सकारात्मक और व्यावहारिक संदेश देती है।

- **भारत में:** यह प्रेरणादायक वाकया देश भर के लोगों के बीच बुजुर्गों के प्रति सेवा भावना और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देता है। यह संदेश देता है कि बेटियां अपने माता-पिता के मान-सम्मान और उनकी देखभाल में बेटों से कम नहीं हैं।

- **टोंक (राजस्थान) में:** स्थानीय समुदाय में इस घटना ने धार्मिक और सामाजिक चेतना को मजबूत किया है। देवली और आसपास के क्षेत्रों के लोग इन बेटियों के इस साहसिक और भक्तिपूर्ण कदम को सामाजिक प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं।

- **पारिवारिक मूल्यों पर प्रभाव:** यह वाकया आधुनिक समय में एकांकी होते परिवारों के लिए एक गहरी सीख है। यह युवाओं को अपने बुजुर्ग माता-पिता की इच्छाओं और स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए प्रेरित करता है।

- **श्रद्धालुओं के लिए संदेश:** सावन मास में भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का यह अनोखा रूप अन्य भक्तों को भी निस्वार्थ भक्ति और सेवा मार्ग अपनाने का संदेश देता है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना कहां की है और इसमें कौन शामिल था?
यह घटना राजस्थान के टोंक जिले के देवली शहर की है, जहां प्रताप नगर निवासी बुजुर्ग महिला बोली देवी वर्मा की बेटियों नंदू और नोरती ने अपनी मां को टोकरी में बिठाकर यात्रा कराई।

### 2. बेटियों ने अपनी मां को टोकरी में बैठाकर कितनी दूरी तय की?
नंदू और नोरती ने अपनी मां को टोकरी में बिठाकर अपने सिर पर उठाते हुए करीब 30 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा पूरी की।

### 3. यह यात्रा किस मंदिर और किस अवसर पर की गई?
यह यात्रा सावन के पवित्र महीने में प्रसिद्ध लकड़ेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन और भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए की गई।

### 4. बेटियों को अपनी मां को टोकरी में ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
बुजुर्ग मां बोली देवी वर्मा की सावन में मंदिर जाने की मन्नत थी, लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं और कमजोरी के कारण वे पैदल चलने में असमर्थ थीं।

### 5. रास्ते में आम लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी?
रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय लोगों ने बेटियों की मातृभक्ति की प्रशंसा की और कई स्थानों पर उन पर पुष्प वर्षा की।

## प्रेरणा और सबक
टोंक की नंदू और नोरती की यह कहानी समाज के लिए कई बहुमूल्य और प्रेरणादायक सीख देती है।

- **मातृभक्ति और कर्तव्य सर्वोपरि:** परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, सच्चे मन से उठाया गया संकल्प हर बाधा को दूर कर देता है।

- **बेटियों का मान-सम्मान:** बेटियों की शक्ति और समर्पण समाज के लिए एक बड़ा स्तंभ है, जो हर परिस्थिति में परिवार का संबल बनती हैं।

- **निस्वार्थ सेवा भाव:** बिना किसी स्वार्थ के बुजुर्गों की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म और जीवन का मूल उद्देश्य है।

- **कठिनाइयों के आगे न झुकना:** 30 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा में शारीरिक थकान के बावजूद दोनों बहनों ने अपने लक्ष्य को पूरा किया।

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