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  "title": "सिरोही का युवा कलाकार, हाथ की कठपुतली 'चिंटू बंदर' से बच्चों और युवाओं को नशे से लड़ना सिखा रहा",
  "summary": "सिरोही के आशीष माली अपने हैंड पपेट 'चिंटू' बंदर के जरिए स्कूल, कॉलेज और नशामुक्ति केंद्रों में हंसी के साथ नशे से दूर रहने का संदेश दे रहे हैं, जिसकी प्रेरणा उन्हें संत प्रेमानंद जी महाराज से मिली।",
  "content": "राजस्थान के सिरोही जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जहां मनोरंजन और समाज सुधार एक साथ चल रहे हैं। यहां के युवा कलाकार आशीष माली हाथ की कठपुतली यानी हैंड पपेट कला को हथियार बनाकर बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन अपनाने की सीख दे रहे हैं। उनकी इस अनोखी कोशिश को सिर्फ मंच पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी खूब सराहा जा रहा है।\n\nमाली काफी समय से हैंड पपेट शो के जरिए अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं और दर्शकों से वाहवाही बटोर रहे हैं। उनके इस सफर का असली किरदार है चिंटू नाम का एक बंदर, जो हाथ की कठपुतली के रूप में बच्चों को हंसाता भी है और साथ ही उन्हें नशे से बचने तथा सेहतमंद जिंदगी जीने के तरीके भी सिखाता है। माली अब तक स्कूल और कॉलेज ही नहीं, बल्कि नशामुक्ति केंद्रों पर भी अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।\n\nप्रेमानंद महाराज से मिली राह\nइस पूरी कला की प्रेरणा आशीष को संत प्रेमानंद जी महाराज से मिली। माली बताते हैं कि प्रेमानंद जी महाराज के एक सत्संग के दौरान जब एक हैंड पपेट आर्टिस्ट ने अपनी प्रस्तुति दी तो महाराज बेहद प्रसन्न हुए थे। प्रेमानंद जी के भक्ति भाव ने उनके जीवन में सकारात्मकता भर दी। महाराज जी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने लोक कला, भजन-कीर्तन और हास्य व्यंग्य को जोड़ती एक नई विधा को अपना लिया।\n\nलगातार कड़ी मेहनत और अभ्यास का नतीजा यह है कि आज उनकी हर प्रस्तुति में भक्ति, सामाजिक संदेश और मनोरंजन तीनों का मेल नजर आता है। इस कलात्मक बदलाव ने आशीष को स्थानीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई है और उनकी कला अब समाज सुधार का एक सशक्त जरिया बन चुकी है।\n\nजयपुर और जोधपुर तक पहुंची धमक\nआशीष माली के वीडियो और लाइव कार्यक्रम अब राजस्थान के कोने कोने तक पहुंच चुके हैं। गांव-देहात से लेकर जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े शहरों तक लोग उनके अंदाज के दीवाने हैं। दर्शकों का कहना है कि उनकी कला में हंसी भी है और सीख भी, यही वजह है कि हर उम्र के लोग इसे पसंद करते हैं।\n\nमाली कहते हैं कि प्रेमानंद जी महाराज ने उन्हें यह सिखाया कि कला का मकसद सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि समाज को जोड़ना और उसे सही दिशा दिखाना भी है। इसी सोच के साथ वह काम कर रहे हैं और अपनी कला के माध्यम से युवाओं तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचा रहे हैं।\n\nजनगणना जागरूकता और राजस्थानी संस्कृति की चिंता\nहाल ही में जब प्रशासन की ओर से जनगणना का काम चल रहा था, तब आशीष ने इसमें सहयोग करते हुए आम लोगों को जागरूक करने के लिए एक हैंड पपेट के साथ खास वीडियो भी तैयार किया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया।\n\nआशीष चाहते हैं कि कलाकारों को उनकी प्रतिभा दिखाने के लिए उचित मंच मिले और राजस्थान की संस्कृति तथा कला को आगे बढ़ाया जाए, ताकि युवा अपने हुनर को सही जगह तक पहुंचा सकें। इस तरह वह न सिर्फ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व के प्रशासनिक कामों और कला के संरक्षण के लिए भी लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह कहानी बताती है कि कला और मनोरंजन को नशामुक्ति जैसे सामाजिक संदेश से जोड़कर युवाओं तक असरदार तरीके से पहुंचा जा सकता है।\n• सिरोही में: स्थानीय स्कूलों, कॉलेजों और नशामुक्ति केंद्रों के बच्चों और युवाओं को आशीष माली के शो के जरिए हंसी के साथ नशे से दूर रहने की सीख मुफ्त में मिल रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आशीष माली कौन हैं?\nवे राजस्थान के सिरोही जिले के एक युवा कलाकार हैं जो हाथ की कठपुतली कला के जरिए बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हैं।\n\n2. चिंटू कौन है?\nचिंटू आशीष माली का एक बंदर के रूप में बना हैंड पपेट है, जिसके जरिए वे बच्चों को हंसाते हुए नशामुक्ति और स्वस्थ जीवन की सीख देते हैं।\n\n3. आशीष को इस कला की प्रेरणा कहां से मिली?\nउन्हें यह प्रेरणा संत प्रेमानंद जी महाराज से मिली, जिनके एक सत्संग में हैंड पपेट प्रस्तुति देखकर महाराज प्रसन्न हुए थे।\n\n4. आशीष कहां-कहां प्रस्तुति देते हैं?\nवे स्कूल, कॉलेज और नशामुक्ति केंद्रों पर प्रस्तुति देते हैं, और उनके वीडियो व लाइव कार्यक्रम जयपुर-जोधपुर समेत पूरे राजस्थान में पहुंच चुके हैं।",
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  "category": "कल्चर",
  "publishedAt": "2026-06-17",
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    "आशीष माली",
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