# सुल्तान हुसैन शर्की की देन राग जौनपुरी ने शास्त्रीय संगीत में अमर की जौनपुर की पहचान

> 15वीं शताब्दी में शर्की शासक सुल्तान हुसैन शर्की द्वारा विकसित राग जौनपुरी आज भी जौनपुर की सांस्कृतिक विरासत और संगीत परंपरा का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** कल्चर · **Published:** 2026-08-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/culture/sultan-hussain-sharqi-ki-dena-raag-jaunpuri-ne-shastriya-sngita-men-amara-ki-jaunpur-ki-pahachana-17222 · **Language:** Hindi
**Tags:** जौनपुर, राग जौनपुरी, सुल्तान हुसैन शर्की, शास्त्रीय संगीत, उत्तर प्रदेश इतिहास, आसावरी थाट, शर्की राजवंश

भारत का ऐतिहासिक शहर जौनपुर अपनी भव्य प्राचीन इमारतों, विशिष्ट संस्कृति और समृद्ध परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। हालांकि, इस शहर का योगदान केवल स्थापत्य कला तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में भी इसकी एक विशिष्ट और अनूठी पहचान रही है। शास्त्रीय संगीत का एक बेहद प्रसिद्ध और लोकप्रिय राग इस शहर के नाम पर रचा गया है, जिसे राग जौनपुरी कहा जाता है। यह राग उस दौर की याद दिलाता है जब जौनपुर कला, साहित्य और संगीत का एक महान केंद्र हुआ करता था।

## 15वीं शताब्दी और सुल्तान हुसैन शर्की का संगीत प्रेम
संगीत के इतिहास और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, राग जौनपुरी की रचना और इसके विकास का मुख्य श्रेय जौनपुर के तत्कालीन शर्की शासक सुल्तान हुसैन शर्की को दिया जाता है। 15वीं शताब्दी के दौरान जब जौनपुर पर शर्की राजवंश का शासन था, तब यह जनपद कला और संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक बनकर उभरा था। ऐतिहासिक अभिलेखों और स्रोतों में सुल्तान हुसैन शर्की के संगीत के प्रति अगाध प्रेम और कई शास्त्रीय रागों के साथ उनके गहरे जुड़ाव का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

## आसावरी थाट और भावपूर्ण गायकी की विशेषताएं
शास्त्रीय संगीत के विशेषज्ञों के अनुसार, राग जौनपुरी को मुख्य रूप से आसावरी थाट का राग माना जाता है। इस राग की गायकी की सबसे बड़ी खासियत इसकी गंभीरता, विरह का भाव और गहरी भावनात्मकता है। जब भी शास्त्रीय संगीत की महफिलों और सभाओं में राग जौनपुरी के सुर गूंजते हैं, तो वे श्रोताओं के मन में जौनपुर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना और कलात्मक विरासत की जीवंत तस्वीर उकेर देते हैं।

## स्थापत्य से परे संगीत की अमर विरासत
जौनपुर के ऐतिहासिक ताने-बाने में शर्की काल को शिक्षा, साहित्य, स्थापत्य और संगीत के स्वर्णिम दौर के रूप में देखा जाता है। जिला प्रशासन के ऐतिहासिक दस्तावेजों में भी जौनपुर की पहचान एक ऐसे जनपद के रूप में दर्ज है, जिसने शिक्षा और कला के क्षेत्र में अहम छाप छोड़ी है। यही कारण है कि यह शहर केवल शाही पुल, अटाला मस्जिद और शर्की स्थापत्य कला के लिए ही नहीं, बल्कि संगीत जगत में गूंजने वाले राग जौनपुरी के लिए भी आदर से याद किया जाता है।

प्रसिद्ध गायक सूर्यप्रकाश मिश्र बल्ला गुरु जी के अनुसार, जौनपुर का नाम केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राग देश-विदेश के संगीत प्रेमियों के दिलों में जौनपुर की पहचान को हमेशा तरोताजा रखता है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा, **"नई पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ना जरूरी है, ताकि जौनपुर के नाम से जुड़ी यह संगीत परंपरा आगे भी इसी तरह जीवित रहे।"**

## इसका आप पर असर
- **भारत भर में:** भारतीय शास्त्रीय संगीत के छात्र और प्रेमी राग जौनपुरी के माध्यम से 15वीं शताब्दी की सांस्कृतिक विरासत और आसावरी थाट के ऐतिहासिक महत्व को समझ सकते हैं।
- **जौनपुर में:** स्थानीय निवासियों और युवाओं के लिए यह ऐतिहासिक इमारतों के साथ-साथ शहर की प्राचीन संगीत परंपरा को सहेजने और बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. राग जौनपुरी के विकास और रचना का श्रेय किसे दिया जाता है?
राग जौनपुरी के विकास का श्रेय 15वीं शताब्दी में जौनपुर के शर्की शासक सुल्तान हुसैन शर्की को दिया जाता है।

### 2. राग जौनपुरी किस थाट से संबंधित है?
शास्त्रीय संगीत की परंपरा में राग जौनपुरी को आसावरी थाट का राग माना जाता है।

### 3. राग जौनपुरी की गायकी की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
इस राग की गायकी में गंभीरता, विरह का भाव और गहरी भावनात्मकता का विशेष रंग देखने को मिलता है।

### 4. संगीत के अलावा जौनपुर किन ऐतिहासिक इमारतों के लिए प्रसिद्ध है?
जौनपुर अपनी ऐतिहासिक इमारतों जैसे शाही पुल, अवाला मस्जिद और शर्की स्थापत्य कला की संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है।

### 5. गायक सूर्यप्रकाश मिश्र बल्ला गुरु जी ने इस विरासत पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ना जरूरी है ताकि जौनपुर के नाम से जुड़ी यह संगीत परंपरा आगे भी जीवित रहे।

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