2020 दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कर्मी हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट का बड़ा फैसला, ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को मिली उम्रकैद कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए पूरी राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर देने का निर्देश दिया। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा के एक सबसे दर्दनाक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के युवा कर्मचारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के जुर्म में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा से दंडित किया है। विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यद्यपि यह हत्याकांड अत्यंत क्रूर और अमानवीय था, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसे ऐसा दुर्लभ से दुर्लभतम मामला नहीं माना जा सकता जिसमें मृत्युदंड दिया जाए। अदालत ने ताहिर हुसैन के अलावा दोषी नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को हत्या, अपहरण, दंगा भड़काने तथा दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने के विभिन्न अपराधों में दोषी ठहराया है। अदालत का यह भी आदेश है कि सभी दोषियों की सजाएं एक साथ चलेंगी। न्यायालय का फैसला और जुर्माना राशि कड़कड़डूमा कोर्ट ने केवल कारावास की सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी निर्धारित किया है। मुख्य षड्यंत्रकारी ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि अन्य चार दोषियों नाजिम, कासिम, अनस और जावेद पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना तय किया गया है। अदालत ने संवेदनशीलता दिखाते हुए यह निर्देश जारी किया है कि जुर्माना राशि में से पूरे 5 लाख रुपये मृतक अंकित शर्मा के परिजनों को आर्थिक मुआवजे के रूप में सौंपे जाएंगे। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि दंगों के दौरान जिस तरह से एक सरकारी कर्मचारी को निशाना बनाकर मौत के घाट उतारा गया और उनके पूरे शरीर पर 51 गंभीर घाव पहुंचाए गए, वह समाज को झकझोर देने वाला अपराध है और इसमें कोई दया नहीं दिखाई जानी चाहिए। फांसी के बजाय उम्रकैद: अदालत का कानूनी तर्क सजा की अवधि पर बहस के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने फांसी की सजा का विरोध किया था। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यह था कि किसी भी आरोपी की हत्या में सीधी या व्यक्तिगत भूमिका साबित नहीं हो सकी है। सभी अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 149 के तहत सामूहिक उत्तरदायित्व और साझा मंशा के सिद्धांत पर दोषी माना गया है। इसके अतिरिक्त, बचाव पक्ष ने अदालत के सामने दोषियों के जेल के भीतर अच्छे आचरण का हवाला दिया और तर्क दिया कि उनके सुधरने की पूरी संभावनाएं बची हुई हैं। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों का सूक्ष्मता से विश्लेषण करने के बाद अपने निर्णय में कहा कि यद्यपि अंकित शर्मा के साथ हुआ कृत्य बर्बर था, परंतु अभियोजन पक्ष यह अकाट्य रूप से साबित करने में विफल रहा कि दोषियों के सुधरने का मार्ग पूरी तरह बंद हो चुका है। चूंकि किसी भी आरोपी के हाथ से सीधे जानलेवा वार किए जाने की विशिष्ट भूमिका अलग से साबित नहीं हो पाई, इसलिए अदालत ने मृत्युदंड देने के बजाय आजीवन कारावास का विकल्प चुना। घटनाक्रम: 25 फरवरी 2020 की दर्दनाक वारदात इस वीभत्स हत्याकांड की शुरुआत 25 फरवरी 2020 को हुई थी, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली का चांद बाग इलाका सांप्रदायिक तनाव और हिंसक झड़पों की चपेट में था। स्थानीय परिस्थितियों का जायजा लेने और अपने इलाके में भड़की भीड़ को समझाने-बुझाने के उद्देश्य से आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा दोपहर के समय अपने घर से बाहर निकले थे। इसके तुरंत बाद वे संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गए और उनका अपने परिवार से संपर्क टूट गया। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन के बावजूद जब उनका कोई अता-पता नहीं चला, तो आशंकाएं गहरा गईं। अगले दिन 26 फरवरी 2020 को चांद बाग के पास स्थित खजूरी खास नाले से अंकित शर्मा का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। शव के पोस्टमार्टम और मेडिकल परीक्षण से खुलासा हुआ कि उनके शरीर पर धारदार और कुंद हथियारों, भारी छड़ों तथा पत्थरों से किए गए हमले के 51 अलग-अलग घाव मौजूद थे, जो अत्यधिक यातना और जानबूझकर की गई हत्या की पुष्टि करते थे। जांच के खुलासे और ताहिर हुसैन की भूमिका मामले की गहराई से तहकीकात करने वाली जांच एजेंसियों ने अदालत के सामने मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा के दौरान ताहिर हुसैन ने चांद बाग स्थित अपनी बहुमंजिला इमारत को एक रणनीतिक और मजबूत ऑपरेशनल बेस में तब्दील कर रखा था। वह अपनी छत पर खड़े होकर उग्र भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे और उन्हें हिंसा फैलाने के लिए उकसा रहे थे। मुकदमे के दौरान पेश हुए प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से यह साबित हुआ कि उपद्रवियों की भीड़ ने अंकित शर्मा को अकेला देखकर उन्हें घेर लिया और काबू में कर लिया। इसके बाद भीड़ उन्हें जबरन खींचकर ताहिर हुसैन के मकान के पास ले गई, जहां उन पर घातक हथियारों से प्राणघातक हमला किया गया। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि ताहिर हुसैन ने न केवल भीड़ को उकसाया, बल्कि पीड़ित और स्थानीय निवासियों पर हमले का प्रत्यक्ष निर्देश भी दिया। फॉरेंसिक साक्ष्य, जब्त सामान और डिजिटल रिकॉर्ड जांच अधिकारियों ने ताहिर हुसैन के आवास की छत से भारी मात्रा में दंगों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जब्त की थी। तलाशी के दौरान पुलिस को छत से बड़ी संख्या में बने हुए पेट्रोल बम, पत्थरों को दूर तक फेंकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली देसी गुलेल, भारी पत्थरों के ढेर और एसिड से भरे पाउच बरामद हुए थे। इन बरामदगियों से यह स्पष्ट हो गया कि हिंसा की योजना पहले से तैयार की गई थी। इसके अलावा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल सेल टावर लोकेशन डेटा के तकनीकी विश्लेषण ने अपराध के समय घटनास्थल और उसके आसपास आरोपियों की सक्रिय मौजूदगी की पुष्टि कर दी। फॉरेंसिक सबूतों, डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चश्मदीद गवाहों की गवाही के संयुक्त आधार पर कड़कड़डूमा कोर्ट ने सभी पांचों आरोपियों को हत्या और साजिश रचने का दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई। इसका आप पर असर • भारत में: यह फैसला सांप्रदायिक हिंसा और दंगा भड़काने वाले जन प्रतिनिधियों व उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कानूनी संदेश देता है। • दिल्ली में: उत्तर-पूर्वी दिल्ली के 2020 दंगा पीड़ितों और स्थानीय निवासियों के लिए यह न्यायिक फैसला लंबे समय से प्रतीक्षित जवाबदेही लेकर आया है। सवाल-जवाब 1. कड़कड़डूमा कोर्ट ने अंकित शर्मा हत्याकांड में क्या फैसला सुनाया? अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 2. दोषियों पर कितना जुर्माना लगाया गया और मुआवजे की क्या व्यवस्था है? ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये और अन्य चार दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 5 लाख रुपये अंकित शर्मा के परिवार को दिए जाएंगे। 3. अदालत ने फांसी की सजा देने से इनकार क्यों किया? कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि दोषियों में सुधार की गुंजाइश खत्म हो चुकी है या किसी एक आरोपी की अलग से मुख्य भूमिका साबित हुई थी। 4. अंकित शर्मा का शव कब और कहां से बरामद हुआ था? अंकित शर्मा का शव 26 फरवरी 2020 को चांद बाग इलाके के पास खजूरी खास नाले से बरामद हुआ था, जिस पर 51 घाव पाए गए थे। 5. जांच एजेंसियों ने ताहिर हुसैन के घर की छत से क्या-क्या सामान बरामद किया था? पुलिस ने छत से भारी मात्रा में पेट्रोल बम, देसी गुलेल, पत्थर और तेजाब के पाउच जब्त किए थे। https://trendkia.com/delhi/2020-delhi-dngon-ke-daurana-ib-karmi-hatyakanda-men-karkardooma-court-ka-bara-phaisala-tahir-hussain-sameta-5-doshiyon-ko-mili-umr-12529 TrendKia — Har trend, sabse pehle.