अमित शाह ने दिल्ली में सुरक्षा समीक्षा की, विपक्ष के प्रदर्शन से पहले 250 से अधिक सीएपीएफ कंपनियां तैनात गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी गठबंधन के 1 नवंबर के प्रस्तावित मार्च से पहले राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा प्रबंधों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। शहर की सीमाओं और संवेदनशील इलाकों में सीएपीएफ की 250 से ज्यादा कंपनियां तैनात की गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी में आगामी राजनीतिक हलचलों और विपक्षी दलों के शक्ति प्रदर्शन से पहले सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय पहुंचकर एक व्यापक सुरक्षा समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि आगामी 1 नवंबर को होने वाले विपक्षी प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करने वाले किसी भी अराजक तत्व से बेहद सख्ती से निबटा जाए। शीर्ष अधिकारियों के साथ सुरक्षा रणनीति पर मंथन इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो प्रमुख महेश दीक्षित सहित गृह मंत्रालय और नगर पुलिस के आला अधिकारी शामिल हुए। बैठक का प्राथमिक एजेंडा राष्ट्रीय राजधानी के भीतर शांति व्यवस्था बनाए रखना और प्रस्तावित राजनीतिक जमावड़ों के दौरान किसी भी आकस्मिक अप्रिय घटना को रोकने की पूर्व तैयारी सुनिश्चित करना था। संवेदनशील इलाकों में निगरानी और तकनीकी बंदोबस्त विगत समय में विरोध प्रदर्शनों को संयमित तरीके से संभालने के लिए पुलिस तंत्र की भूमिका की सराहना की गई। साथ ही यह साफ रेखांकित किया गया कि किसी भी समूह अथवा व्यक्ति को कानून व्यवस्था हाथ में लेने की छूट नहीं दी जा सकती। पुलिस तंत्र को निर्देशित किया गया है कि वे शहर के संवेदनशील हिस्सों में अपनी गश्त बढ़ाएं और सार्वजनिक परिसरों में महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें। संदिग्ध गतिविधियों और चेहरों की पहचान के लिए सीसीटीवी कैमरों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI आधारित तकनीकों के व्यापक इस्तेमाल पर बल दिया गया। सीमाओं पर सख्त पहरा और सुरक्षा बलों का भारी जमावड़ा बाहरी अराजक तत्वों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए दिल्ली के सभी सीमावर्ती प्रवेश द्वारों पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। शहर की आंतरिक और सीमा सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों यानी सीएपीएफ की 250 से अधिक कंपनियां तैनात की जा चुकी हैं। इस तैनाती में सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और रैपिड एक्शन फोर्स यानी आरएएफ की टुकड़ियां शामिल हैं। महिला कर्मियों से लैस इन सुरक्षा दस्तों की ड्यूटी अवधि को 31 अक्टूबर तक बढ़ाया गया है, जिसकी समीक्षा कर जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। विपक्षी कार्यक्रम और व्यापारिक संगठनों की चिंता कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव से जुड़े मुद्दे पर 30 अक्टूबर को एक प्रतीकात्मक संसदीय सत्र आयोजित करने की योजना बनाई है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए 1 नवंबर को रामलीला मैदान तक एक विशाल मार्च निकालने का कार्यक्रम तय किया गया है। दूसरी तरफ, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी सीटीआई सहित दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने 1 नवंबर को होने वाले इस जमावड़े को टालने की अपील की है। व्यापारियों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बाकायदा पत्र भेजकर रैली को 10 नवंबर के बाद रखने का आग्रह किया है, क्योंकि उनका मानना है कि त्योहारी सीजन में ऐसे बड़े आयोजनों से उनके कारोबार पर विपरीत आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन जारी रहेगा। इसका आप पर असर राजधानी में सुरक्षा की कड़ी घेराबंदी और आगामी राजनीतिक मार्च के कारण सामान्य नागरिकों के आवागमन और व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: देश के विभिन्न हिस्सों से दिल्ली आने वाले यात्रियों को अंतरराज्यीय सीमाओं पर सघन तलाशी और देरी का सामना करना पड़ सकता है। लंबी दूरी की यात्रा या माल ढुलाई की योजना बनाने वालों को सीमावर्ती जांच के कारण अतिरिक्त समय लेकर चलना होगा। • दिल्ली में: मध्य दिल्ली और रामलीला मैदान के आसपास के इलाकों में 1 नवंबर के आसपास यातायात में भारी बदलाव और जाम की स्थिति बन सकती है। स्थानीय बाजारों में खरीदारी करने वाले लोगों और वाहन चालकों को पुलिस की डायवर्जन एडवाइजरी देखकर ही घर से निकलना चाहिए। • व्यापारियों के लिए: त्योहारी सीजन के दौरान सुरक्षा बंदोबस्त और रैलियों से बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। सीटीआई ने इस संभावित नुकसान को देखते हुए आयोजन की तारीख 10 नवंबर के बाद करने की मांग रखी है। • महिलाओं और बुजुर्गों के लिए: सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा बलों और महिला कर्मियों की मौजूदगी बढ़ाने के निर्देश से सुरक्षा कवच मजबूत होगा। पुलिस को विशेष रूप से कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। ऐसा क्यों हुआ यह सुरक्षा समीक्षा विपक्षी इंडिया गठबंधन द्वारा घोषित दो दिवसीय राजनीतिक अभियानों और त्योहारों के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने की अनिवार्यता के कारण आयोजित की गई। • सीधे कारण: विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने 30 अक्टूबर को एक सांकेतिक संसदीय सत्र और उसके तुरंत बाद 1 नवंबर को रामलीला मैदान तक बड़े पैमाने पर मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसी प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस और सुरक्षा बलों को संभावित अव्यवस्था रोकने के निर्देश दिए गए। • राजनीतिक पृष्ठभूमि: विपक्ष का यह विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव के मुद्दे पर केंद्रित है। इस राजनीतिक टकराव के चलते सार्वजनिक शांति पर कोई असर न पड़े, इसी वजह से शीर्ष स्तर पर समीक्षा जरूरी समझी गई। • व्यापारिक चिंताएं: दीवाली और त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में भारी भीड़ रहती है, जिसे लेकर सीटीआई और अन्य व्यापारिक संगठनों ने आर्थिक नुकसान की आशंका जताई है। व्यापारियों ने इस मार्च को टालने की औपचारिक मांग की है, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। • सुरक्षा तैयारियां: असामाजिक तत्वों के प्रवेश को रोकने और भीड़ नियंत्रण के लिए 250 से अधिक सीएपीएफ कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है, जिसकी आगे भी समीक्षा होगी। सवाल-जवाब 1. गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में सुरक्षा समीक्षा बैठक क्यों बुलाई? उन्होंने 1 नवंबर को होने वाले विपक्षी इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन से पहले राजधानी में शांति बनाए रखने और सुरक्षा की समीक्षा करने के लिए यह बैठक ली। 2. इस समीक्षा बैठक में कौन-कौन से प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे? बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो प्रमुख महेश दीक्षित तथा गृह मंत्रालय और पुलिस के आला अधिकारी शामिल हुए। 3. राजधानी की सुरक्षा के लिए कितने केंद्रीय बल तैनात किए गए हैं? सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और आरएएफ समेत सीएपीएफ की 250 से अधिक कंपनियों को तैनात किया गया है। 4. केंद्रीय सशस्त्र बलों की यह तैनाती कब तक बढ़ाई गई है? महिला कर्मियों सहित इन सुरक्षा बलों की तैनाती को 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया है, जिसे जरूरत के अनुसार आगे भी बढ़ाया जा सकता है। 5. विपक्षी गठबंधन ने किन कार्यक्रमों की घोषणा की है? विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग के मुद्दे पर 30 अक्टूबर को सांकेतिक संसद सत्र और 1 नवंबर को रामलीला मैदान तक मार्च निकालने की योजना बनाई है। 6. दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने क्या मांग रखी है? चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री सहित व्यापारियों ने त्योहारी सीजन में आर्थिक नुकसान का हवाला देते हुए राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की मांग की है। https://trendkia.com/delhi/amit-shah-ne-delhi-men-suraksha-samiksha-ki-vipaksha-ke-pradarshana-se-pahale-250-se-adhika-capf-knpaniyan-tainata-51437 TrendKia — Har trend, sabse pehle.