# आठ टेक कंपनियों के निलंबन और उपराष्ट्रपति की टिप्पणी पर भारत ने वाशिंगटन के सामने दर्ज कराया कड़ा विरोध

> अमेरिका द्वारा पीईआरएम कार्यक्रम से आठ दिग्गज टेक फर्मों को बाहर करने और भारतीय पेशेवरों पर जेडी वेंस की विवादास्पद टिप्पणी पर नई दिल्ली ने सख्त ऐतराज जताया है.

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/atha-teka-knpaniyon-ke-nilnbana-aura-uparashtrapati-ki-tippani-para-india-ne-washington-ke-samane-darja-karaya-kara-virodha-45280 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारत अमेरिका संबंध, पीईआरएम प्रोग्राम, जेडी वेंस, भारतीय पेशेवर, ग्रीन कार्ड, कूटनीति, टेक कंपनियां

अमेरिकी प्रशासन द्वारा आठ प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों को पीईआरएम (परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन) कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के फैसले के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तल्खी बढ़ गई है. भारत ने इस कदम पर बेहद सख्त विरोध दर्ज कराते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी पाबंदियां दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं, साझेदारी और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने में कतई मददगार साबित नहीं होंगी. तकनीकी क्षेत्र के बड़े वैश्विक संस्थानों पर अचानक की गई इस प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई दिल्ली ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है.

## उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया
विवाद का दायरा केवल तकनीकी कंपनियों पर लगी पाबंदियों तक सीमित नहीं रहा. भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा भारतीय पेशेवरों को लेकर दिए गए बयानों पर भी बहुत गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है. नई दिल्ली ने इस तरह की टिप्पणियों को बेहद अपमानजनक करार दिया है. साथ ही कड़े शब्दों में संदेश दिया है कि वैश्विक स्तर पर अपनी कार्यकुशलता साबित करने वाले भारतीय हुनर और पेशेवरों के योगदान को लेकर ऐसी भाषा किसी भी रूप में स्वीकार नहीं की जाएगी.

## द्विपक्षीय और रणनीतिक रिश्तों के नाजुक मोड़ पर नया तनाव
भारत की तरफ से यह कड़ा राजनयिक रुख ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देश तकनीक, व्यापार और रणनीतिक मोर्चे पर अपनी साझेदारी को एक नई ऊंचाई देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं. जब दोनों पक्ष आपसी सहयोग के विस्तार की रूपरेखा तय कर रहे थे, ठीक उसी वक्त वॉशिंगटन की इस कार्रवाई और अमेरिकी शीर्ष नेतृत्व की असंसदीय भाषा ने द्विपक्षीय संबंधों में एक नई कड़वाहट पैदा कर दी है. इस टकराव ने दोनों देशों के बीच भविष्य के तकनीकी और आर्थिक तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

## इसका आप पर असर
यह राजनयिक विवाद अमेरिका में काम कर रहे भारतीय तकनीकी पेशेवरों और वहां विस्तार कर रही टेक कंपनियों के भविष्य को सीधे प्रभावित करता है.

- **भारतीय कामगारों पर असर:** पीईआरएम प्रक्रिया रुकने से संबंधित आठ टेक कंपनियों में कार्यरत हजारों भारतीय आईटी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड और स्थायी निवास के आवेदनों में देरी हो सकती है. इसके चलते प्रभावित कर्मचारियों को अपने वीजा विस्तार और अमेरिका में ठहरने के नियमों को लेकर कानूनी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ेगा.
- **कंपनियों की भर्ती योजनाओं पर प्रभाव:** इन आठ बड़ी तकनीकी कंपनियों में विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करने और उनकी स्थायी नागरिकता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर तत्काल रुकावट आ गई है. ऐसे में इन फर्मों को अपनी भर्ती रणनीति और वर्कफोर्स प्लानिंग में तुरंत बदलाव करने पड़ेंगे.
- **द्विपक्षीय व्यापारिक माहौल पर असर:** दोनों देशों के बीच तकनीक और रणनीतिक साझेदारी के दौर में बढ़ा यह तनाव उच्च-स्तरीय नीतिगत चर्चाओं की गति को धीमा कर सकता है. इससे दोनों देशों की सरकारों और तकनीकी कंपनियों के बीच चल रहे संयुक्त प्रोजेक्ट्स पर बातचीत लंबी खिंच सकती है.
- **वैश्विक प्रतिभाओं की गरिमा:** शीर्ष नेतृत्व के बयानों पर भारत के कड़े ऐतराज के बाद विदेशों में काम कर रहे भारतीय कामगारों के अधिकारों और सम्मान पर ध्यान बढ़ा है. इससे विदेशों में काम करने वाले दक्ष पेशेवरों के कार्य वातावरण और वीजा नीतियों पर वैश्विक स्तर पर नई बहस शुरू हो सकती है.

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम अमेरिकी प्रशासन द्वारा आठ बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित करने और अमेरिकी नेतृत्व की बयानबाजी के चलते शुरू हुआ.

- **प्रशासनिक कार्रवाई:** अमेरिकी अधिकारियों ने स्थायी लेबर सर्टिफिकेशन से जुड़ी पीईआरएम प्रणाली से आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को निलंबित कर दिया. इस प्रतिबंध के कारण संबंधित कंपनियों में काम करने वाले विदेशी कामगारों के स्थायी निवास से जुड़े दस्तावेज अटक गए.
- **आपत्तिजनक टिप्पणी:** अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारतीय पेशेवरों के संदर्भ में बयान दिए, जिन्हें भारत ने बेहद अपमानजनक माना. इसी बयानबाजी और कंपनियों पर कार्रवाई के संयुक्त असर ने भारतीय विदेश नीति को कड़ा रुख अपनाने पर विवश किया.
- **साझा लक्ष्यों में टकराव:** भारत और अमेरिका तकनीक, रणनीतिक साझेदारी और व्यापार को मजबूत करने में जुटे थे. इसके विपरीत आए एकतरफा प्रतिबंधों और टिप्पणियों ने दोनों देशों के साझा एजेंडे को झटका दिया, जिससे यह कूटनीतिक विरोध दर्ज हुआ.

## सवाल-जवाब

### 1. भारत ने अमेरिका के किस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है?
भारत ने अमेरिका द्वारा आठ बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित किए जाने और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की विवादास्पद टिप्पणियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है.

### 2. पीईआरएम (PERM) कार्यक्रम से कितनी कंपनियों को बाहर किया गया है?
अमेरिकी प्रशासन ने टेक्नोलॉजी सेक्टर की कुल आठ प्रमुख कंपनियों को इस कार्यक्रम से निलंबित किया है.

### 3. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान पर भारत का क्या रुख है?
भारत ने भारतीय पेशेवरों को लेकर की गई उनकी टिप्पणियों को बेहद अपमानजनक बताया है और कहा है कि ऐसी भाषा पूरी तरह अस्वीकार्य है.

### 4. इस विवाद का दोनों देशों के रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
भारत ने स्पष्ट किया है कि यह कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं और व्यापार व तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद नहीं करता.

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