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  "type": "article",
  "title": "दिल्ली हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय क्षमता में पचास फीसदी उछाल की तैयारी, टर्मिनल तीन और एक का विस्तार करेगा डायल",
  "summary": "दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के 10 वर्षीय मास्टर प्लान के तहत टर्मिनल 3 पर नया इंटरनेशनल पियर और टर्मिनल 1 पर अतिरिक्त काउंटरों से सालाना यात्री क्षमता 12.5 करोड़ पार होगी।",
  "content": "देश की राजधानी स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आने वाले चार सालों के भीतर विदेशी उड़ानों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को संभालने की क्षमता में पचास प्रतिशत से अधिक की बड़ी वृद्धि होने वाली है। इस महत्वाकांक्षी विस्तार योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए टर्मिनल तीन पर एक नया इंटरनेशनल पियर तैयार करने का खाका खींचा गया है। इसके साथ ही घरेलू यात्रियों की आवाजाही को और सुगम बनाने के उद्देश्य से टर्मिनल एक में बिना किसी भारी भरकम निर्माण के केवल चेक-इन और सुरक्षा जांच काउंटरों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इन कदमों से दिल्ली हवाई अड्डा वैश्विक स्तर के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एविएशन हब के रूप में और अधिक सशक्त होकर उभरेगा।\n\nमास्टर प्लान से बढ़ेगी कुल यात्री क्षमता\nदिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के दस वर्षीय मास्टर प्लान में स्पष्ट किया गया है कि इन सभी बदलावों और नए निर्माण कार्यों के पूरा होने के बाद हवाई अड्डे की कुल सालाना क्षमता मौजूदा 10.4 करोड़ से छलांग लगाकर साल 2030 की शुरुआत तक 12.5 करोड़ यात्रियों से भी अधिक पहुंच जाएगी। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस समय टर्मिनल एक की क्षमता लगभग चार करोड़, टर्मिनल दो की 1.4 करोड़ और टर्मिनल तीन की पांच करोड़ यात्री प्रति वर्ष है। टर्मिनल तीन की वर्तमान पांच करोड़ की क्षमता में से करीब तीन करोड़ अंतरराष्ट्रीय मुसाफिरों और दो करोड़ घरेलू यात्रियों के लिए आरक्षित है।\n\nटर्मिनल तीन पर बनेगा नया पियर और टी वन में बढ़ेंगे काउंटर\nटर्मिनल तीन पर तैयार होने वाला नया अंतरराष्ट्रीय पियर हर साल करीब 1.6 करोड़ यात्रियों की आवाजाही संभालने में सक्षम होगा। इस पियर के अस्तित्व में आने के बाद टर्मिनल तीन की कुल यात्री क्षमता बढ़कर 6.6 करोड़ प्रति वर्ष हो जाएगी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का हिस्सा 4.6 करोड़ और घरेलू यात्रियों का हिस्सा दो करोड़ रहेगा। वहीं दूसरी तरफ टर्मिनल एक की वार्षिक क्षमता को चार करोड़ से बढ़ाकर 4.5 करोड़ करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए वहां अतिरिक्त सुरक्षा जांच और चेक-इन डेस्क लगाए जाएंगे, जिससे किसी बड़े ढांचागत बदलाव के बिना ही कामकाज की गति बढ़ जाएगी।\n\nटर्मिनल दो का भविष्य और ग्रेटर नोएडा हवाई अड्डे की स्थिति\nडायल की दीर्घकालिक रणनीति के अनुसार टर्मिनल दो को फिलहाल कुछ वर्षों तक वर्तमान व्यवस्था में ही संचालित किया जाता रहेगा। भविष्य में हवाई यात्रा की मांग में आने वाले उछाल को देखते हुए अगले दशक में टर्मिनल दो को हटाकर उसकी जगह एक विशाल टर्मिनल चार बनाने का रास्ता साफ किया जा सकता है। इधर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेटर नोएडा का दूसरा हवाई अड्डा शुरू हो चुका है, मगर संचालन के शुरुआती दौर में उसे पर्याप्त संख्या में उड़ानों और यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने के मामले में कड़ी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।\n\nमंजूरी की समयसीमा और अनुमानित लागत\nविस्तार के इस मास्टर प्लान को लेकर डायल ने 16 अगस्त को सभी संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श पूरा किया था। इस व्यापक योजना को इस महीने नागर विमानन मंत्रालय के समक्ष औपचारिक रूप से प्रस्तुत किए जाने की तैयारी है। इसके पश्चात विभिन्न सरकारी एजेंसियों से उनके सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले साल मार्च के महीने तक इस परियोजना को सभी आवश्यक सरकारी मंजूरियां हासिल हो जाएंगी। एक बार औपचारिक हरी झंडी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा और इसे पूरा होने में लगभग तीन साल का समय लगेगा। वित्तीय आकलन के अनुसार टर्मिनल तीन के नए पियर पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जबकि टर्मिनल एक में काउंटर विस्तार और जरूरी सुधारों पर करीब 100 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।\n\nसड़क संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए नए फ्लाइओवर और सुरंग\nयात्रियों की तादाद में लगातार इजाफे के साथ-साथ एयरपोर्ट परिसर के इर्द-गिर्द सड़क नेटवर्क पर वाहनों का दबाव भी तेजी से बढ़ेगा। इसके अलावा एयरोसिटी का दायरा बढ़ने और वहां बड़े शॉपिंग मॉल खुलने से ट्रैफिक की समस्या और गंभीर हो सकती है। इस संभावित जाम से निपटने के लिए दिल्ली सरकार के निर्देश पर राइट्स ने विशेष तकनीकी अध्ययन किया था, जिसकी रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी को सौंपी जा चुकी है। इस प्रस्ताव में टर्मिनल एक और टर्मिनल तीन के मध्य वाई आकार का फ्लाइओवर बनाने, मौजूदा संपर्क सड़कों को चौड़ा करने और हवाई पट्टी के नीचे बनी सुरंग मार्ग के विस्तार की ठोस रूपरेखा शामिल की गई है।\n\nटर्मिनल एक और तीन के बीच सीधा एयरसाइड ट्रांसफर\nटर्मिनल एक और टर्मिनल तीन के बीच सफर करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए डायल ने आंतरिक एयरसाइड ट्रांसफर की सभी जरूरी तैयारियां मुकम्मल कर ली हैं। इस सेवा को धरातल पर उतारने के लिए अब केवल नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो से अंतिम सुरक्षा मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा की जा रही है। सुरक्षा मंजूरी मिलते ही कनेक्टिंग उड़ानों वाले यात्री मुख्य एयरपोर्ट परिसर से बाहर निकले बिना सीधे रनवे क्षेत्र के भीतर से ही दोनों टर्मिनलों के बीच आ-जा सकेंगे। इस समर्पित आंतरिक परिवहन सेवा को संचालित करने के लिए डायल ने यात्रियों के सामान रखने की विशेष सुविधा वाली छह लो-फ्लोर वोल्वो बसें पहले ही खरीद ली हैं।\n\nइसका आप पर असर\nदिल्ली हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्षमता बढ़ने से यात्रियों को चेक-इन और सुरक्षा जांच में लगने वाले समय से बड़ी राहत मिलेगी।\n\n• भारत में: विदेशी दौरों पर जाने वाले और कनेक्टिंग उड़ानें पकड़ने वाले देश भर के यात्रियों को दिल्ली में भीड़भाड़ और उड़ानों की देरी से निजात मिलेगी। टर्मिनल 3 पर नई अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं शुरू होने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विकल्प बढ़ेंगे।\n• दिल्ली-एनसीआर में: एयरपोर्ट के आसपास वाई-आकार के फ्लाईओवर और सड़क चौड़ीकरण से महिपालपुर और एयरोसिटी के आसपास लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। टर्मिनल 1 और 3 के बीच सीधी वोल्वो बस सेवा शुरू होने से यात्रियों को टर्मिनल बदलने के लिए बाहर टैक्सी या सड़क का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।\n• घरेलू यात्रियों के लिए: टर्मिनल 1 पर अतिरिक्त सुरक्षा और चेक-इन काउंटर शुरू होने से पीक आवर्स के दौरान लंबी कतारें घटेंगी। इससे बोर्डिंग गेट तक पहुंचने में लगने वाले अतिरिक्त समय की बचत होगी।\n• कनेक्टिंग उड़ानों के लिए: दोनों टर्मिनलों के बीच आंतरिक एयरसाइड ट्रांसफर शुरू होने के बाद यात्रियों का सामान और सफर बिना सुरक्षा घेरे से बाहर निकले पूरा हो सकेगा। इससे टर्मिनल बदलने का समय और भागदौड़ काफी कम हो जाएगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nहवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या और दिल्ली एयरपोर्ट पर उड़ानों के बढ़ते दबाव के चलते डायल ने 10 वर्षीय मास्टर प्लान तैयार किया है। मौजूदा टर्मिनलों की क्षमता चरम पर पहुंचने और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए यह विस्तार जरूरी हो गया था।\n\n• यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी: हवाई अड्डे पर मौजूदा वार्षिक क्षमता 10.4 करोड़ पहुंच चुकी है और 2030 तक इसके 12.5 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को संभालने के लिए टर्मिनल 3 का मौजूदा ढांचा नाकाफी साबित हो रहा था।\n• ग्रेटर नोएडा एयरपोर्ट की सुस्त शुरुआत: दिल्ली-एनसीआर में ग्रेटर नोएडा का दूसरा हवाई अड्डा शुरू होने के बावजूद वह अभी पर्याप्त उड़ानों और यात्रियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा है। इस वजह से राजधानी के मुख्य हवाई अड्डे पर ही यातायात का पूरा बोझ बना हुआ है।\n• सड़क जाम और एयरोसिटी का फैलाव: एयरपोर्ट के आसपास नए व्यावसायिक मॉल खुलने और एयरोसिटी के विस्तार से टर्मिनल 1 और 3 के बीच सड़क मार्ग पर जाम का खतरा गहरा गया है। इसलिए सड़क चौड़ीकरण और नए फ्लाइओवर की योजना को भी मास्टर प्लान का हिस्सा बनाया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दिल्ली एयरपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय क्षमता में कितनी बढ़ोतरी की योजना है?\nअगले 4 वर्षों में टर्मिनल 3 पर नया पियर बनाकर अंतरराष्ट्रीय क्षमता में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की जाएगी।\n\n2. मास्टर प्लान लागू होने के बाद हवाई अड्डे की कुल क्षमता कितनी हो जाएगी?\nसाल 2030 की शुरुआत तक हवाई अड्डे की वार्षिक क्षमता मौजूदा 10.4 करोड़ से बढ़कर 12.5 करोड़ से अधिक हो जाएगी।\n\n3. टर्मिनल 3 के नए पियर और टर्मिनल 1 के विस्तार पर कितना खर्च आएगा?\nटर्मिनल 3 के नए पियर पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये और टर्मिनल 1 के विस्तार पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।\n\n4. टर्मिनल 1 और टर्मिनल 3 के बीच यात्रियों के आने-जाने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?\nडायल ने दोनों टर्मिनलों के बीच आंतरिक एयरसाइड ट्रांसफर के लिए सामान रखने की सुविधा वाली 6 लो-फ्लोर वोल्वो बसें खरीदी हैं।\n\n5. इस मास्टर प्लान को सरकारी मंजूरी कब तक मिलने की संभावना है?\nयोजना इस महीने नागर विमानन मंत्रालय को सौंपी जाएगी और अगले साल मार्च तक इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है।\n\n6. टर्मिनल 2 को लेकर डायल की क्या योजना है?\nटर्मिनल 2 को फिलहाल कुछ वर्षों तक ऐसे ही चलाया जाएगा और अगले दशक में मांग बढ़ने पर इसे हटाकर टर्मिनल 4 बनाया जा सकता है।",
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  "category": "दिल्ली",
  "publishedAt": "2026-10-05",
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