दिल्ली हवाई अड्डे पर रनवे 11R/29L का कायाकल्प पूरा, 20 सितंबर से फिर भरेंगी उड़ानें इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का करीब 17 साल पुराना तीसरा रनवे सात महीने के सघन सुधार कार्य के बाद 20 सितंबर से पूरी तरह सक्रिय हो रहा है, जिससे उड़ानों की लेटलतीफी और हवाई जाम में कमी आएगी। देश के सबसे व्यस्त इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सफर करने वाले यात्रियों के लिए परिचालन के मोर्चे पर एक राहत भरी खबर सामने आई है। हवाई यातायात के भारी दबाव और विमानों के हवा में चक्कर काटने यानी होल्डिंग पैटर्न की समस्या को कम करने के लिए तैयार किया गया तीसरा रनवे 11R/29L अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। सात महीने तक चले सघन मरम्मत और ढांचागत सुधार कार्यक्रम के पूरा होने के बाद 20 सितंबर से इस पट्टी पर दोबारा नियमित टेकऑफ और लैंडिंग शुरू की जा रही है। विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए सहित सभी संबंधित संस्थाओं से इस रनवे को आवश्यक नियामकीय मंजूरियां मिल चुकी हैं। 17 साल की निरंतर सेवा के बाद पूरा हुआ व्यापक जीर्णोद्धार हवाई अड्डा संचालक दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) के विवरण के अनुसार, इस तीसरे रनवे को पहली बार साल 2008 में वाणिज्यिक उड़ानों के लिए चालू किया गया था। शुरुआत के बाद से ही यह पट्टी बिना रुके भारी यातायात को संभाल रही थी। वर्ष 2017 में इसका सामान्य रखरखाव कार्य कराया गया था, परंतु वर्षों के भारी दबाव और विमानों के पहियों के लगातार घर्षण के कारण रनवे की संरचनात्मक मजबूती को नए सिरे से संवारना अनिवार्य हो गया था। इसी वजह से फरवरी 2026 में इसके संपूर्ण पुनर्वास और आधुनिकीकरण की विस्तृत परियोजना शुरू की गई थी, जिसे लगभग सात महीने के भीतर तय मानकों के अनुसार पूरा कर लिया गया। रनवे के बुनियादी ढांचे और तकनीक में किए गए अहम बदलाव इस बड़े नवीनीकरण अभियान के दौरान हवाई पट्टी की संरचना को आधुनिक विमानन आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला गया है। रनवे की सतह को मजबूत करने के लिए पेवमेंट स्ट्रेंथनिंग और रिसर्फेसिंग का काम किया गया है, ताकि भारी से भारी वाणिज्यिक विमान बिना किसी झटके के सुगम और सुरक्षित लैंडिंग कर सकें। इसके अलावा परिचालन की रफ्तार बढ़ाने के लिए नया रैपिड एग्जिट टैक्सीवे (RET Z1) तैयार किया गया है। इस नए टैक्सीवे के चालू होने से उतरने वाले विमान रनवे पर अधिक समय बिताए बिना तेजी से खाली कर सकेंगे, जिससे रनवे ऑक्यूपेंसी टाइम में उल्लेखनीय कमी आएगी और पीछे आने वाले विमानों को तुरंत रास्ता मिल सकेगा। खराब मौसम और सर्दियों के दौरान छाने वाले घने कोहरे से निपटने के लिए उन्नत एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम स्थापित किया गया है, जो कम दृश्यता में भी पायलटों को स्पष्ट मार्गदर्शन देगा और परिचालन सुरक्षा को कई गुना बढ़ाएगा। साथ ही रनवे 29L पर स्थाई थ्रेशोल्ड डिस्प्लेसमेंट का कार्य भी संपन्न कर लिया गया है, जिससे टेकऑफ और लैंडिंग के समय विमानों की दूरी और ऊंचाई के मानक और अधिक सुदृढ़ हो गए हैं। हवाई जाम से राहत और एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सुगमता व्यस्त घंटों के दौरान दिल्ली के आसमान में अक्सर उड़ानों की कतार लग जाती थी और रनवे की अनुपलब्धता के कारण एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को विमानों को हवा में चक्कर कटवाने पर मजबूर होना पड़ता था। एक प्रमुख रनवे के बंद रहने से हवाई अड्डे की कुल विमान हैंडलिंग क्षमता सीधे तौर पर प्रभावित हो रही थी। अब रनवे 11R/29L के पूरी क्षमता के साथ दोबारा जुड़ने से हवाई यातायात नियंत्रकों को विमानों के आवागमन का प्रबंधन करने में बड़ा विकल्प मिलेगा। यह सुधार राजधानी के हवाई अड्डे को भविष्य की बढ़ती विमानन जरूरतों के लिए तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे यात्रियों की यात्रा समय पर और अधिक आरामदायक हो सकेगी। इसका आप पर असर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तीसरे रनवे के दोबारा खुलने से विमानों की लेटलतीफी और हवाई क्षेत्र में लगने वाले जाम में बड़ी कमी आएगी। • भारत में: देश भर के विभिन्न शहरों से दिल्ली आने-जाने वाली उड़ानों के समय पालन में उल्लेखनीय सुधार होगा। पीक आवर्स के दौरान कनेक्टिंग उड़ानों के छूटने का जोखिम काफी हद तक घट जाएगा। • दिल्ली-एनसीआर में: राजधानी के हवाई अड्डे पर उड़ानों के हवा में चक्कर काटने का समय खत्म होने से यात्रियों का कुल यात्रा समय बचेगा। सर्दियों के मौसम में उन्नत लाइटिंग सिस्टम की मदद से कोहरे के दौरान भी उड़ानों का संचालन अधिक सुचारु रहेगा। • विमान यात्रियों के लिए: टेकऑफ और लैंडिंग के लिए रनवे पर विमानों की लंबी कतारों में लगने वाले अतिरिक्त समय से राहत मिलेगी। रैपिड एग्जिट टैक्सीवे की वजह से विमान तेजी से टर्मिनल गेट तक पहुंच सकेंगे। • विमानन कंपनियों के लिए: उड़ानों को हवा में होल्डिंग पैटर्न में न रखने से एयरलाइंस के ईंधन की बचत होगी। इसके साथ ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल को उड़ानों के दैनिक शेड्यूल को समयबद्ध रखने में आसानी होगी। ऐसा क्यों हुआ इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के तीसरे रनवे को लगभग 17 वर्षों के निरंतर संचालन के कारण आए संरचनात्मक तनाव को दूर करने के लिए बंद कर नवीनीकृत किया गया था। • लगातार उड़ानों का दबाव: साल 2008 में चालू होने के बाद से यह रनवे बिना किसी लंबे विराम के देश के सबसे भारी हवाई यातायात को संभाल रहा था। भारी विमानों की लगातार लैंडिंग से रनवे की ऊपरी परत और बुनियादी संरचना में स्वाभाविक घिसाव आ गया था। • व्यापक जीर्णोद्धार की अनिवार्यता: वर्ष 2017 के सामान्य रखरखाव के बाद लंबे समय से किसी बड़े संरचनात्मक सुधार का अभाव था। भविष्य की आधुनिक विमानन जरूरतों और भारी चौड़े आकार वाले विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फरवरी 2026 में सात महीने का व्यापक पुनर्वास कार्यक्रम शुरू किया गया। • आधुनिक तकनीक की आवश्यकता: घने कोहरे के दौरान बेहतर दृश्यता के लिए उन्नत लाइटिंग और विमानों को तेजी से बाहर निकालने के लिए नए रैपिड एग्जिट टैक्सीवे का निर्माण करना जरूरी था। सभी तकनीकी कार्यों और डीजीसीए की औपचारिक समीक्षा के बाद इसे 20 सितंबर से खोलने की मंजूरी दी गई। सवाल-जवाब 1. दिल्ली एयरपोर्ट का तीसरा रनवे उड़ानों के लिए कब से दोबारा शुरू हो रहा है? इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का तीसरा रनवे 11R/29L सात महीने के नवीनीकरण के बाद 20 सितंबर से पुनः चालू हो रहा है। 2. तीसरे रनवे पर मरम्मत और पुनर्वास का काम कब शुरू किया गया था? लगातार उड़ानों के दबाव के चलते रनवे की थकान मिटाने के लिए फरवरी 2026 में यह व्यापक जीर्णोद्धार कार्यक्रम शुरू किया गया था। 3. इस रनवे को पहली बार कब चालू किया गया था और इससे पहले कब मेंटेनेंस हुआ था? यह रनवे पहली बार वर्ष 2008 में शुरू किया गया था और इससे पूर्व 2017 में इसका मेंटेनेंस कार्य कराया गया था। 4. अपग्रेड के बाद रनवे में क्या प्रमुख तकनीकी बदलाव किए गए हैं? रनवे पर पेवमेंट स्ट्रेंथनिंग, नया रैपिड एग्जिट टैक्सीवे (RET Z1), उन्नत एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग और रनवे 29L पर स्थाई थ्रेशोल्ड डिस्प्लेसमेंट का काम पूरा किया गया है। 5. नए रैपिड एग्जिट टैक्सीवे (RET Z1) से क्या फायदा होगा? इस टैक्सीवे की मदद से विमान लैंडिंग के तुरंत बाद रनवे खाली कर सकेंगे, जिससे रनवे ऑक्यूपेंसी टाइम में काफी कमी आएगी। 6. क्या इस रनवे को दोबारा खोलने के लिए सभी नियामक मंजूरियां मिल चुकी हैं? हां, डीजीसीए सहित सभी संबंधित नियामकों से रनवे के संचालन के लिए औपचारिक मंजूरियां प्राप्त हो चुकी हैं। https://trendkia.com/delhi/delhi-havai-adde-para-ranave-11r-29l-ka-kayakalpa-pura-20-sitnbara-se-phira-bharengi-uranen-34391 TrendKia — Har trend, sabse pehle.