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  "title": "दिल्ली हाईकोर्ट क्रॉसिंग सुधार पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 25 नवंबर तक काम न होने पर धरने की दी चेतावनी",
  "summary": "दिल्ली हाईकोर्ट के सामने सड़क सुरक्षा और क्रॉसिंग सुधार के काम में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 25 नवंबर 2026 तक की अंतिम समयसीमा तय कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि काम पूरा न होने पर जज और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल खुद मुख्य द्वार पर धरने पर बैठेंगे।",
  "content": "देश की राजधानी में दिल्ली हाईकोर्ट के ठीक सामने मौजूद सड़क क्रॉसिंग पर ट्रैफिक व्यवस्था और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अत्यंत सख्त रुख अख्तियार किया है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलों के चक्कर और निर्माण कार्य में हो रही लगातार देरी पर शीर्ष अदालत की एक पीठ ने गहरी नाराजगी जाहिर की। सुनवाई के दौरान दो जजों की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी को स्पष्ट शब्दों में चेताया कि अगर तय समयसीमा के भीतर यह काम पूरा नहीं किया गया, तो वे दोनों जज खुद हाईकोर्ट के मुख्य द्वार के सामने धरने पर बैठ जाएंगे और किसी को भी घर नहीं जाने दिया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने जमीनी काम पूरा करने के लिए 25 नवंबर 2026 की अंतिम समयसीमा मुकर्रर कर दी है।\n\nप्रशासनिक हीलाहवाली और कमेटियों के गठन पर अदालत का रोष\nदिल्ली हाईकोर्ट के सामने वाले व्यस्त चौराहे पर सड़क सुरक्षा और बुनियादी इंजीनियरिंग सुधार का मामला लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ था। अदालत में जब इस विषय पर सुनवाई आगे बढ़ी, तो अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने पीठ को अवगत कराया कि मसले के समाधान के लिए एक समिति गठित की गई है और वह इस संदर्भ में काम कर रही है। सरकार की तरफ से कमेटी बनाए जाने की बात सुनते ही अदालत ने कड़ा ऐतराज जताया। पीठ ने दो टूक सवाल किया कि सड़क सुधार जैसे सीधे काम के लिए कमेटी बनाने की क्या आवश्यकता है और क्या प्रशासन को जरूरी इंजीनियर भी नहीं मिल रहे हैं। अदालत ने साफ किया कि आम जनता के जीवन और सुरक्षा से जुड़े मसलों पर प्रशासनिक देरी अब कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।\n\nधरने की अनोखी चेतावनी और अधिकारियों की जवाबदेही तय\nअदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद अनूठे अंदाज में चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने तत्परता से काम पूरा नहीं किया, तो दोनों जज स्वयं दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य गेट पर पहुंचेंगे और जब तक काम खत्म नहीं होता, वे वहां से नहीं हटेंगे। पीठ ने यह भी जोड़ दिया कि वे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को भी वहीं रोकेंगे और किसी को घर लौटने की अनुमति नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि इस तरह के छोटे इंजीनियरिंग सुधारों के लिए लंबी-चौड़ी कमेटियों के जाल में उलझने के बजाय सीधे जमीनी स्तर पर समाधान खोजा जाना चाहिए।\n\nएमिकस क्यूरी की भूमिका और मुख्य सचिव को पेश करने की हिदायत\nप्रक्रिया को तेज करने के लिए अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल को शामिल किया जाए। एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल मौके पर जाकर वस्तुस्थिति का जायजा लेंगे और यह रेखांकित करेंगे कि असल समस्या कहां आ रही है। शीर्ष अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि इसके लिए किसी उच्च स्तरीय कमेटी के बहाने नहीं चलेंगे। 25 नवंबर से पहले हर हाल में जमीनी काम पूरा होना चाहिए। इसके साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि तय तारीख तक काम मुकम्मल नहीं हुआ, तो अगली सुनवाई पर दिल्ली के मुख्य सचिव को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के साथ अदालत के कटघरे में व्यक्तिगत रूप से खड़ा होना पड़ेगा।\n\nपैदल यात्रियों की सुरक्षा और समयसीमा की चुनौती\nदिल्ली हाईकोर्ट के आसपास के इलाके में पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग, डिजाइन संबंधी खामियां और गंभीर ट्रैफिक जाम की दिक्कतें वर्षों से आम लोगों को परेशान कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायपालिका सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कार्यों में सुस्ती पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगी। अब प्रशासन के सामने 25 नवंबर 2026 से पहले कंक्रीट का वास्तविक निर्माण कार्य पूरा करने की कड़ी चुनौती है।\n\nइसका आप पर असर\nदिल्ली हाईकोर्ट के सामने सुरक्षित सड़क क्रॉसिंग बनने से पैदल यात्रियों और वकीलों की दैनिक आवाजाही काफी सुगम और सुरक्षित हो जाएगी।\n\n• राष्ट्रीय स्तर पर: यह अदालती आदेश देश भर के सरकारी विभागों को कड़ा संदेश देता है कि जनसुरक्षा से जुड़ी नागरिक परियोजनाओं को कमेटियों के नाम पर वर्षों तक टाला नहीं जा सकता। इससे प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की न्यायिक मिसाल मजबूत होती है।\n• दिल्ली में: दिल्ली हाईकोर्ट के आसपास रोज आने-जाने वाले हजारों वकीलों, वादकारियों और पैदल यात्रियों को 25 नवंबर 2026 तक सुरक्षित क्रॉसिंग मिल सकेगी। यदि प्रशासन निर्धारित समय पर काम नहीं करता है तो मुख्य सचिव को स्वयं अदालत में जवाबदेह होना पड़ेगा।\n• पैदल यात्रियों के लिए: व्यस्त सड़क पर उचित इंजीनियरिंग डिजाइन लागू होने से जानलेवा दुर्घटनाओं का खतरा समाप्त होगा। लोग बिना ट्रैफिक जाम में फंसे आसानी से सड़क पार कर सकेंगे।\n• प्रशासनिक कार्यप्रणाली: नागरिक कार्यों के लिए अनावश्यक उच्च स्तरीय कमेटियों के गठन पर रोक लगेगी। सीधे तकनीकी इंजीनियरों और विशेषज्ञों को स्थल पर उतारकर समस्याओं का तुरंत समाधान होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य द्वार के सामने सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक जाम और पैदल यात्रियों की क्रॉसिंग का मामला वर्षों से लंबित था, लेकिन प्रशासन इसे हल करने के बजाय केवल कमेटियां बना रहा था। अदालत की अत्यधिक नाराजगी इसी प्रशासनिक टालमटोल की वजह से फूटी।\n\n• लगातार प्रशासनिक देरी: दिल्ली हाईकोर्ट के सामने सुरक्षित क्रॉसिंग का मामला वर्षों से फाइलों में दबा हुआ था और जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं किया गया था। इस निरंतर अनदेखी ने न्यायपालिका को कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर किया।\n• कमेटियों का बहाना: जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि समाधान के लिए एक समिति गठित की गई है, तो अदालत नाराज हो गई क्योंकि छोटे इंजीनियरिंग सुधार के लिए कमेटियों का गठन सिर्फ काम टालने का जरिया बन गया था। अदालत ने सीधे इंजीनियरों से काम कराने की बात कही।\n• जवाबदेही का अभाव: सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कार्यों में अधिकारियों द्वारा कोई समयसीमा तय न करने के कारण सुप्रीम कोर्ट को 25 नवंबर 2026 की अंतिम समयसीमा तय करनी पड़ी और मुख्य सचिव को तलब करने की चेतावनी देनी पड़ी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट क्रॉसिंग मामले में क्या चेतावनी दी?\nसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि 25 नवंबर 2026 तक सड़क सुरक्षा का काम पूरा नहीं हुआ, तो दोनों जज और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल हाईकोर्ट के मुख्य गेट पर धरने पर बैठेंगे।\n\n2. अदालत ने कमेटी बनाए जाने पर क्या सवाल उठाए?\nअदालत ने पूछा कि सड़क सुधार के लिए कमेटी की क्या जरूरत है और क्या सरकार को जरूरी काम के लिए इंजीनियर नहीं मिलते।\n\n3. इस मामले में एमिकस क्यूरी की क्या जिम्मेदारी तय की गई है?\nअदालत ने एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल को मौके पर जाकर जमीनी समस्या का निरीक्षण करने और वास्तविक खामियों की पहचान करने का निर्देश दिया है।\n\n4. तय समय पर काम न होने पर किस अधिकारी को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा?\nयदि 25 नवंबर तक काम पूरा नहीं हुआ, तो दिल्ली के मुख्य सचिव को अदालत के कटघरे में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के साथ खड़ा होना पड़ेगा।",
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  "category": "दिल्ली",
  "publishedAt": "2026-10-16",
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