दिल्ली में दो करोड़ पेंडिंग चालानों के लिए नई योजना, अब नजदीकी SDM दफ्तर में हो सकेगा निपटारा दिल्ली सरकार दो करोड़ लंबित ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए 13 जिलों के 39 SDM और परिवहन कार्यालयों को जुर्माना वसूलने की शक्ति देने की तैयारी कर रही है। राजधानी में लंबित यातायात दंड के त्वरित निस्तारण के लिए दिल्ली सरकार एक नई और सुगम प्रणाली लागू करने जा रही है। इस योजना के धरातल पर उतरने के बाद वाहन चालकों को वर्षों से लटके चालानों के भुगतान के लिए लोक अदालत के चक्कर काटने और लंबी कतारों में इंतजार करने से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। नए तंत्र के जरिए नागरिक अपने क्षेत्र में स्थित प्रशासनिक कार्यालयों में जाकर किसी भी कार्यदिवस पर आसानी से जुर्माना राशि जमा कर सकेंगे। SDM और परिवहन दफ्तरों को दिए जाएंगे अधिकार प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत रेखा गुप्ता सरकार 13 प्रशासनिक जिलों में तैनात 39 SDM अधिकारियों को लंबित चालान की राशि स्वीकार करने की कानूनी शक्तियां सौंपने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा और उन्हें दंड वसूलने के लिए अधिकृत किया जाएगा। इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि वाहन मालिकों को अपने नजदीकी SDM कार्यालय या परिवहन विभाग के दफ्तर में जाकर भुगतान करने का अवसर मिलेगा। लोक अदालत की तिथियों पर निर्भर रहने के बजाय नागरिक अपनी सुविधा अनुसार किसी भी सामान्य दिन वहां पहुंचकर अपने बकाए का निस्तारण कर पाएंगे। डिजिटल पोर्टल और ट्रैफिक पुलिस सिस्टम का एकीकरण भुगतान की इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस नए पोर्टल को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मौजूदा केंद्रीय डेटाबेस से सीधे जोड़ा जाएगा। जैसे ही कोई वाहन मालिक अपने नजदीकी एसडीएम या परिवहन कार्यालय में चालान का भुगतान करेगा, उसकी सूचना तुरंत ट्रैफिक पुलिस के सिस्टम में खुद-ब-खुद अपडेट हो जाएगी। इसके साथ ही चुकता किया गया चालान पोर्टल की एक्टिव पेंडिंग सूची से तुरंत हटा दिया जाएगा, जिससे वाहन चालकों को किसी तरह की कागजी परेशानी का सामना न करना पड़े। लंबित मामलों का बड़ा बैकलॉग और विधायी प्रक्रिया दिल्ली में हर साल जारी होने वाले कुल यातायात चालानों में से लगभग 80% चालान बिना भुगतान के पेंडिंग रह जाते हैं। इस वजह से समय के साथ लंबित मामलों का आंकड़ा बढ़कर लगभग दो करोड़ तक पहुंच गया है। इसी विशाल बैकलॉग को समाप्त करने और नागरिकों के लिए भुगतान को आसान बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है। हालांकि इस विकेंद्रीकृत व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम में आवश्यक संशोधन करने होंगे। इस संबंध में तैयार किए गए प्रस्ताव को दिल्ली विधानसभा से पारित कराना अनिवार्य होगा। विधानसभा की मंजूरी मिलने के पश्चात इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर लागू करने में लगभग छह महीने का समय निर्धारित किया गया है। उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान भी ऐसी व्यवस्था पर विचार-विमर्श हुआ था, परंतु उस समय यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी थी। इसका आप पर असर • भारत में: यातायात नियमों के पालन और डिजिटल चालान प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए अन्य राज्य भी इस विकेंद्रीकृत मॉडल को लागू कर सकते हैं। • दिल्ली में: वाहन चालकों को वर्षों पुराने पेंडिंग चालान भरने के लिए लोक अदालत के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और वे अपने नजदीकी SDM दफ्तर से आसानी से निपटारा कर सकेंगे। सवाल-जवाब 1. दिल्ली में कितने ट्रैफिक चालान लंबित पड़े हैं? दिल्ली में फिलहाल लगभग दो करोड़ ट्रैफिक चालान पेंडिंग पड़े हैं, जिन्हें निपटाने के लिए नई व्यवस्था बनाई जा रही है। 2. चालान की राशि जमा करने का अधिकार किन्हें दिया जाएगा? दिल्ली के 13 जिलों के 39 SDM अधिकारियों और परिवहन विभाग के अफसरों को लंबित चालान जमा करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। 3. भुगतान करने के बाद चालान सिस्टम में कैसे अपडेट होगा? एक विशेष पोर्टल बनाकर उसे दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे भुगतान होते ही चालान पोर्टल से खुद अपडेट होकर हट जाएगा। 4. इस नई व्यवस्था को लागू होने में कितना समय लगेगा? मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन और विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद इस व्यवस्था को लागू करने में लगभग छह महीने का समय लगेगा। 5. दिल्ली में हर साल कितने प्रतिशत चालान पेंडिंग रह जाते हैं? आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में हर साल लगभग 80 प्रतिशत यातायात चालान बिन भरे पेंडिंग रह जाते हैं। https://trendkia.com/delhi/delhi-men-do-karora-pendinga-chalanon-ke-lie-nai-yojana-aba-najadiki-sdm-daphtara-men-ho-sakega-nipatara-22313 TrendKia — Har trend, sabse pehle.