दिल्ली में गिरफ्तारियों के खिलाफ सोनम वांगचुक का अल्टीमेटम, 24 घंटे में रिहाई न होने पर अनशन और पदयात्रा का ऐलान लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने राजधानी में हुए प्रदर्शनों के दौरान व्यापक स्तर पर हुई धरपकड़ को अघोषित आपातकाल करार देते हुए 24 घंटे की मोहलत दी है। उन्होंने साफ किया कि यदि हिरासत में लिए गए लोगों को नहीं छोड़ा गया, तो वे लेह या दिल्ली में पदयात्रा अथवा भूख हड़ताल शुरू करेंगे। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने राजधानी दिल्ली में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई व्यापक धरपकड़ पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान कई वर्गों के लोगों की हिरासत को लेकर उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी किया। अपने इस बयान में उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए मौजूदा हालात की तुलना देश में अघोषित आपातकाल की स्थिति से की है। 24 घंटे का अल्टीमेटम और शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी सोनम वांगचुक ने साझा किए गए वीडियो में बताया कि जब वे वापस लौटे, तो उन्हें राजधानी में बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों की जानकारी मिली। इन हिरासत में लिए गए लोगों में छात्र नेता, युवा प्रतिनिधि, वकील, पत्रकार और संसद सदस्य शामिल हैं। वांगचुक ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने प्रदर्शन से पहले सभी से शांति और एकता बनाए रखने की अपील की थी, क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार मिलना स्वाभाविक माना जाता है। देश के मौजूदा वातावरण पर गहरी चिंता जताते हुए सोनम वांगचुक ने कहा, "अब लग रहा है कि कोई अघोषित इमरजेंसी देश में लगी हुई है। मैं इस बात की कड़ी निंदा करता हूं।" उन्होंने सरकार से पुरजोर आग्रह किया कि आज शाम तक इन सभी गिरफ्तारियों को निरस्त किया जाए और उत्पन्न स्थिति का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाए। सामाजिक कार्यकर्ता ने चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया गया, तो वे स्वयं शांतिपूर्ण आंदोलन की राह पकड़ने पर विचार करने के लिए विवश हो जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम चाहे लेह में उठाया जाए या दिल्ली में, वह धरना, भूख हड़ताल या फिर पदयात्रा के रूप में सामने आ सकता है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन समय रहते संवाद स्थापित कर मसलों को सुलझा लेगा और ऐसी नौबत नहीं आने देगा। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन राजधानी दिल्ली में यह सारा तनाव एसआईआर के विरोध और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित प्रदर्शन के बाद उपजा। इस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने कई स्थानों पर कार्रवाई की। पुलिस ने सीजेपी के तीन प्रमुख नेताओं अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को दिल्ली हवाई अड्डे पर ही विमान से उतरते वक्त हिरासत में ले लिया। सीजेपी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। शहर भर में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने और पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। विरोध स्थलों पर उस वक्त स्थिति और बिगड़ गई जब वामपंथी और दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए और उनके बीच झड़प देखने को मिली। इसका आप पर असर दिल्ली में 7,000 से अधिक लोगों की हिरासत और सोनम वांगचुक द्वारा नए आंदोलन की चेतावनी से राजधानी और लद्दाख में प्रशासनिक व नागरिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। • भारत में: लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शनों की स्वतंत्रता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। विभिन्न नागरिक संगठनों और छात्र समूहों द्वारा आगामी दिनों में एकजुटता कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। • दिल्ली और लेह में: जंतर-मंतर, हवाई अड्डे और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने से आम यात्रियों को आवाजाही में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। यदि अगले 24 घंटों में समाधान नहीं निकला, तो लेह अथवा दिल्ली में संभावित पदयात्रा या अनशन से स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित हो सकता है। • छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए: हिरासत में लिए गए छात्र नेताओं, वकीलों और पत्रकारों के कानूनी मामलों की पैरवी को लेकर अदालतों और पुलिस स्टेशनों में हलचल बढ़ सकती है। प्रदर्शनों में शामिल होने वाले लोगों को प्रशासन की कड़ी निगरानी का ध्यान रखना होगा। • राजनीतिक दलों के लिए: सीजेपी के शीर्ष नेताओं की विमान से धरपकड़ और अन्य गुटों के बीच आपसी भिड़ंत से राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के प्रयास तेज कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर को वापस लेने की मांगों को लेकर आयोजित प्रदर्शन पर प्रशासन की कड़ी कार्रवाई के बाद सामने आया है। • सीईसी और एसआईआर के खिलाफ असंतोष: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर व्यवस्था के विरोध में सीजेपी सहित विभिन्न संगठनों ने दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर लोगों को रोकना शुरू किया। • हवाई अड्डे और जंतर-मंतर पर कार्रवाई: प्रदर्शन को बड़ा रूप लेने से रोकने के लिए पुलिस ने सीजेपी के मुख्य नेताओं को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से ही हिरासत में ले लिया और जंतर-मंतर पर 7,000 से अधिक लोगों को पकड़ लिया। इसमें सांसद, वकील, पत्रकार और छात्र नेता भी शामिल थे। • सोनम वांगचुक की सीधी प्रतिक्रिया: बड़े पैमाने पर धरपकड़ और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति न मिलने से नाराज होकर सोनम वांगचुक ने स्थिति को अघोषित आपातकाल करार देते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। सवाल-जवाब 1. सोनम वांगचुक ने सरकार को क्या चेतावनी दी है? उन्होंने कहा है कि यदि 24 घंटे के भीतर हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा नहीं किया गया, तो वे लेह या दिल्ली में अनशन, धरना या पदयात्रा करने पर विचार करेंगे। 2. दिल्ली में किन मांगों को लेकर प्रदर्शन हुआ था? प्रदर्शनकारी एसआईआर के विरोध में और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में एकत्र हुए थे। 3. दिल्ली में कितने लोगों को हिरासत में लिया गया? दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 7,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। 4. हवाई अड्डे पर किन नेताओं को हिरासत में लिया गया? सीजेपी के नेता अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से उतरते ही हिरासत में लिया गया। 5. सोनम वांगचुक ने देश के मौजूदा हालात पर क्या टिप्पणी की? उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि देश में अघोषित आपातकाल लगा हुआ है। https://trendkia.com/delhi/delhi-men-giraphtariyon-ke-khilapha-sonam-wangchuk-ka-altimetama-24-ghnte-men-rihai-na-hone-para-anashana-aura-padayatra-ka-ailana-46068 TrendKia 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