# दिल्ली में हेरिटेज संपत्तियों पर MCD का चला बुलडोजर, जमरूदपुर में अतिक्रमण हटाने के साथ लुटियंस जोन का ऐतिहासिक रेस क्लब केंद्र ने लिया कब्जे में

> नगर निगम दिल्ली ने जमरूदपुर गांव स्थित धरोहर इमारतों से अवैध गोदाम और तबेले ध्वस्त किए, वहीं केंद्र सरकार ने लीज अवधि समाप्त होने पर 53 एकड़ में फैले लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक रेस क्लब का कब्जा वापस ले लिया।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/delhi-men-heritage-encroachments-para-mcd-ka-chala-bulldozer-jamrudpur-men-encroachments-hatane-ke-satha-lutyens-zone-ka-aitihasik-23324 · **Language:** Hindi
**Tags:** एमसीडी अतिक्रमण हटाओ अभियान, जमरूदपुर हेरिटेज साइट, दिल्ली रेस क्लब, सुप्रीम कोर्ट निर्देश, लुटियंस दिल्ली, राजीव सूरी बनाम एएसआई

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा और सरकारी ज़मीनों से अवैध कब्जे हटाने के उद्देश्य से नगर निगम दिल्ली (MCD) और केंद्र सरकार ने समानांतर रूप से एक व्यापक अभियान चलाया है। दक्षिणी दिल्ली के जमरूदपुर गांव में बरसों पुराने ऐतिहासिक स्मारकों के भीतर जारी अवैध गतिविधियों और अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाकर पूरे परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इसके साथ ही, लुटियंस दिल्ली के सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक ठिकानों में से एक 'दिल्ली रेस क्लब' का स्वामित्व भी दशकों बाद केंद्र सरकार ने अपने आधिकारिक नियंत्रण में वापस ले लिया है। इस दोहरी और कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद पूरी दिल्ली में भू-माफियाओं, अवैध कब्जेदारों और सरकारी संपत्तियों पर अनधिकृत कब्जा जमाए बैठे तत्वों में हड़कंप मच गया है।

 

## जमरूदपुर हेरिटेज साइट में तबेला, अवैध दीवारें और गोदाम पूरी तरह ध्वस्त

दक्षिणी दिल्ली के जमरूदपुर गांव में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक लंबे समय से प्रशासनिक उपेक्षा और अवैध अतिक्रमण का शिकार हो रहे थे। भू-माफियाओं और कब्जाधारियों ने इन धरोहर इमारतों के भीतर अवैध रूप से पक्की दीवारें खड़ी कर ली थीं और परिसर को व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा बना रखा था। नगर निगम दिल्ली की एक विशेष टीम ने भारी पुलिस बल और सुरक्षा बलों की मौजूदगी में गुरुवार को वहां बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान स्मारकों के भीतरी परिसरों में बनाए गए अवैध पक्के ढांचों, व्यावसायिक गोदामों और मवेशियों को रखने के लिए बनाए गए तबेलों को भारी बुलडोजर और मशीनों की मदद से पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।

 अतिक्रमणकारियों ने इन ऐतिहासिक स्मारकों के मुख्य प्रवेश द्वार को भी पूरी तरह बाधित कर रखा था। कार्रवाई के दौरान प्रवेश मार्ग में बड़ी रुकावट बन रहे 3 भारी लोहे के गेटों को बुलडोजर से उखाड़ फेंक दिया गया, ताकि आम जनता और धरोहर प्रेमियों के लिए इन ऐतिहासिक इमारतों तक पहुँच पूरी तरह सुगम और बाधा रहित हो सके। MCD की टीम ने कई घंटों तक चले इस अभियान के दौरान मौके से 10 से अधिक ट्रक मलबा और निर्माण सामग्री हटाई। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया है कि परिसर में पड़ा बाकी मलबा भी अगले कुछ ही दिनों के भीतर पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा।

 

## सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और MCD के 60 से अधिक कर्मियों का विशेष दस्ता

जमरूदपुर गांव में चलाए गए इस कठोर अभियान को सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन 'राजीव सूरी बनाम ASI एवं अन्य' मामले में जारी दिशा-निर्देशों के तहत अंजाम दिया गया है। इस कार्रवाई को बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए नगर निगम दिल्ली ने अपने 60 से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों की एक विशेष टीम तैनात की थी। इस विशेष दस्ते ने स्थानीय पुलिस बल के सहयोग से लगातार कई घंटों तक बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की। स्मारकों के अस्तित्व और सुरक्षा पर गंभीर खतरा बने इन अवैध निर्माणों को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया गया, जिससे इन राष्ट्रीय धरोहरों के मूल ऐतिहासिक स्वरूप और भव्यता को पुनः बहाल किया जा सके।

 नगर निगम दिल्ली के अधिकारियों ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी संपत्तियों को भू-माफियाओं के चंगुल से छुड़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। MCD प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में केवल जमरूदपुर ही नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली में स्थित हेरिटेज साइट्स और सरकारी ज़मीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ निगरानी को अत्यंत सख्त किया जाएगा और इसी तरह का कठोर एक्शन लगातार जारी रहेगा।

 

## लुटियंस दिल्ली के 53 एकड़ में फैले शताब्दी पुराने दिल्ली रेस क्लब पर चला बुलडोजर

उधर, दिल्ली के लुटियंस ज़ोन स्थित अति-विशिष्ट और ऐतिहासिक 'दिल्ली रेस क्लब' पर भी केंद्र सरकार का कड़ा रुख देखने को मिला है। लगभग 53 एकड़ विशाल क्षेत्र में फैले इस शताब्दी पुराने ऐतिहासिक रेसकोर्स पर गुरुवार सुबह केंद्र सरकार ने अपना आधिकारिक कब्जा वापस ले लिया। पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा रेस क्लब प्रबंधन की ओर से दायर बेदखली के खिलाफ अर्जी खारिज किए जाने के तुरंत बाद, केंद्र सरकार की टीमों ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परिसर में बुलडोजर चलाने की कार्रवाई शुरू कर दी।

 बुलडोजर कार्रवाई के दौरान रेस क्लब से जुड़ी कई ऐतिहासिक और बुनियादी संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया गया। इनमें घोड़ों को रखने के लिए बने स्टेबल, सट्टेबाज़ी और दांव लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाली बुकमेकर्स रिंग, रेस की समाप्ति रेखा दर्शाने वाली विनिंग पोस्ट और फोटो-फिनिश कैमरा लगाने के लिए बनाए गए विशेष ढांचे शामिल हैं। इस प्राइम लैंड को वर्ष 1926 में रेस क्लब को लीज पर दिया गया था। इस पट्टे की वैधानिक अवधि वर्ष 1994 में ही समाप्त हो चुकी थी, जिसके बाद से पिछले तीन दशकों से क्लब प्रबंधन इस बहुमूल्य सरकारी जमीन का अनाधिकृत रूप से इस्तेमाल कर रहा था।

 

## कीमती रेस घोड़ों का स्थानांतरण और दिल्ली में घुड़दौड़ के सुनहरे युग का अंत

दिल्ली रेस क्लब के इस विशाल परिसर में लगभग 250 उच्च नस्ल के कीमती रेस घोड़े मौजूद थे। सरकारी कब्जे और बुलडोजर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होते ही विभिन्न घोड़ों के मालिकों ने त्वरित कदम उठाते हुए अपने लगभग 200 घोड़ों को तत्काल वहां से वापस बुला लिया और सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया। परिसर में बचे हुए शेष 50 घोड़ों को 14 सितंबर तक देश के अन्य स्थापित रेसिंग सेंटरों में सुरक्षित रूप से शिफ्ट करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

 लुटियंस दिल्ली में स्थित इस 53 एकड़ के रेसकोर्स पर केंद्र सरकार का कब्जा होने और रेस क्लब के बुनियादी ढांचों को ध्वस्त किए जाने के साथ ही दिल्ली में घुड़दौड़ (हॉर्स रेसिंग) के एक लंबे और सुनहरे युग का औपचारिक रूप से अंत हो गया है। सरकार अब इस बहुमूल्य ज़मीन का उपयोग नए सिरे से सार्वजनिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करने की योजना बना रही है।

## इसका आप पर असर
राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक धरोहरों और सरकारी संपत्तियों से अवैध कब्जे हटने का प्रत्यक्ष प्रभाव आम नागरिकों और नगरीय व्यवस्था पर पड़ेगा।

- **भारत में:** राष्ट्रीय धरोहरों और सरकारी ज़मीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने से देश की सांस्कृतिक विरासत का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित होता है। इससे अवैध निर्माण करने वालों और भू-माफियाओं के खिलाफ कड़ा प्रशासनिक संदेश जाता है।
- **दिल्ली में:** जमरूदपुर और लुटियंस ज़ोन के निवासियों को अब सुगम रास्तों और सुरक्षित ऐतिहासिक परिसरों का लाभ मिलेगा। 14 सितंबर तक रेस क्लब के बचे हुए 50 घोड़ों का स्थानांतरण पूरा होने के बाद 53 एकड़ ज़मीन का नया सार्वजनिक उपयोग शुरू हो सकेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. जमरूदपुर में MCD ने किस मामले के तहत बुलडोजर कार्रवाई की?
नगर निगम दिल्ली ने यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबित ‘राजीव सूरी बनाम ASI एवं अन्य’ मामले के निर्देशों के तहत की।

### 2. जमरूदपुर हेरिटेज साइट के अंदर किस तरह का अतिक्रमण हुआ था?
हेरिटेज परिसर के भीतर अवैध पक्की दीवारें, मवेशियों के लिए तबेले, गोदाम तथा मुख्य द्वार पर रुकावट डालने वाले 3 बड़े लोहे के गेट लगाए गए थे।

### 3. दिल्ली रेस क्लब की जमीन का इतिहास क्या है?
लुटियंस दिल्ली में 53 एकड़ में फैला यह रेसकोर्स 1926 में लीज पर दिया गया था, जिसकी अवधि 1994 में समाप्त हो गई थी।

### 4. रेस क्लब में मौजूद घोड़ों का क्या किया जा रहा है?
कुल 250 रेस घोड़ों में से 200 को उनके मालिकों ने वापस बुला लिया है, जबकि बाकी 50 घोड़ों को 14 सितंबर तक अन्य रेसिंग सेंटरों में भेजा जाएगा।

### 5. जमरूदपुर अभियान में कितनी टीम और मलबा हटाया गया?
MCD के 60 से अधिक कर्मचारियों ने पुलिस बल के साथ मिलकर कार्रवाई की और मौके से 10 से अधिक ट्रक मलबा और अवैध निर्माण सामग्री हटाई।

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