# दिल्ली में जर्जर और अवैध निर्माण का कहर, इस साल 5 हादसों में 16 लोगों की मौत

> राजधानी दिल्ली में चालू वर्ष के दौरान अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों के ढहने की 5 अलग-अलग घटनाओं में कुल 16 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है, जबकि दर्जनों घायल हुए हैं।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/delhi-men-jarjara-aura-avaidha-nirmana-ka-kahara-isa-sala-5-hadason-men-16-logon-ki-mauta-30379 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली, इमारत हादसा, सत्य निकेतन, साकेत हादसा, एमसीडी, अवैध निर्माण, रोहिणी

राजधानी दिल्ली में जर्जर ढाँचों और अवैध निर्माण के कारण जानलेवा हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। दक्षिणी दिल्ली के घनी आबादी वाले सत्य निकेतन क्षेत्र में 6 सितंबर को एक पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से 7 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के निकट हुई इस दुखद घटना के साथ ही चालू वर्ष के दौरान दिल्ली में इमारतें गिरने से जान गँवाने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 16 हो गई है। सरकारी आँकड़ों और पुलिस जानकारी के अनुसार, ये सभी मौतें तीन प्रमुख हादसों में हुई हैं।

## साकेत से रोहिणी तक हादसों की श्रृंखला
चालू वर्ष में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में इमारतें गिरने से भारी तबाही देखने को मिली है। मई माह के दौरान साकेत क्षेत्र में हुए हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी। इसके पश्चात जुलाई महीने में रोहिणी में एक निर्माणाधीन इमारत गिरने से 3 लोगों ने अपनी जान गँवाई। वहीं सितंबर की शुरुआत में सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे ने 7 और जिंदगियाँ छीन लीं। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इन सभी हादसों के पीछे सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नियमों का उल्लंघन ही मुख्य वजह रही है।

## साकेत हादसे में प्रशासनिक लापरवाही और सीलिंग विफलता
दक्षिणी दिल्ली के साकेत इलाके में 30 मई को एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी। इस इमारत में कोचिंग सेंटर, दफ्तर और कैफे संचालित हो रहे थे, जिसके चलते मारे गए 6 लोगों में से अधिकतर प्रतियोगी छात्र थे। घटना के बाद दिल्ली सरकार द्वारा कराई गई मजिस्ट्रेट जाँच में दिल्ली नगर निगम (MCD) की गंभीर लापरवाही उजागर हुई। जाँच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इमारत की तीसरी और चौथी मंजिल का निर्माण पूरी तरह अवैध रूप से किया गया था।

स्थानीय नागरिकों द्वारा अवैध निर्माण की शिकायत दो महीने पहले ही दर्ज कराई गई थी, परंतु संबंधित निकाय ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हादसे के बाद अपना बचाव करने के लिए अधिकारियों ने कागजों में हेरफेर कर फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने का प्रयास भी किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम ने अपने 2 इंजीनियरों को तुरंत निलंबित कर दिया, जबकि पुलिस ने इमारत के मालिक तथा 2 ठेकेदारों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई शुरू की।

## रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत ढहने से 3 मौतें
मानसून के दौरान 8 जुलाई को रोहिणी के सेक्टर-16 इलाके में तेज बारिश के बीच एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत अचानक गिर गई। इस हादसे में 3 लोगों की जान चली गई और कई अन्य मजदूर मलबे के नीचे दब गए। इस मामले पर सफाई देते हुए नगर निगम ने बताया कि उक्त इमारत का नक्शा सरल योजना के तहत स्वीकृत किया गया था। इस योजना के अंतर्गत संपत्ति मालिक किसी पंजीकृत आर्किटेक्ट या इंजीनियर के सत्यापन पत्र के आधार पर स्वतः निर्माण अनुमति प्राप्त कर सकते हैं।

## मुकुंदपुर और करावल नगर में ढाँचे ढहे
जानलेवा हादसों के अलावा शहर में दो अन्य स्थानों पर भी इमारतें ढहने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचा। उत्तर दिल्ली के मुकुंदपुर क्षेत्र में 2 जून को एक गैर-कानूनी बर्तन रंगने की इकाई में एलपीजी सिलेंडर फटने के बाद पूरी इमारत गिर गई, जिससे 11 कामगार गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके ठीक अगले दिन 3 जून को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर में नाले के सुंदरीकरण और मरम्मत कार्य के दौरान एक चार मंजिला मकान में गहरी दरारें आ गईं और वह ढह गया। गनीमत यह रही कि हादसा होने से ठीक पहले स्थानीय निवासियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

## इसका आप पर असर
**मुख्य प्रभाव:** दिल्ली में जर्जर इमारतों और अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम द्वारा सख्त डिमोलिशन और सीलिंग अभियान शुरू किया गया है, जिसका सीधा असर निवासियों और किरायेदारों पर पड़ेगा।

- **भारत में:** देश भर के शहरी स्थानीय निकायों द्वारा व्यावसायिक और आवासीय भवनों की स्ट्रक्चरल ऑडिट नियमों को कड़ा किए जाने की संभावना है। इससे बिल्डरों के लिए सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य हो जाएगा।
- **दिल्ली में:** दक्षिण दिल्ली नगर निगम (MCD) ने सत्य निकेतन में चिह्नित 51 जर्जर इमारतों में से 27 को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन इमारतों में रहने वाले लोगों को तुरंत मकान खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
- **छात्रों और पीजी निवासियों के लिए:** साउथ कैंपस और साकेत जैसे शैक्षणिक हब में रहने वाले छात्रों को नए पीजी या कमरे लेने से पहले इमारत का सुरक्षा प्रमाणपत्र और एमसीडी अप्रूवल जांचना अनिवार्य होगा।
- **मकान मालिकों के लिए:** बिना नक्शा पास कराए अतिरिक्त मंजिलें बनाने वाले संपत्ति मालिकों पर आपराधिक मामले दर्ज होंगे और इमारत को तुरंत सील या ध्वस्त किया जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
दिल्ली में लगातार इमारतों के गिरने की मुख्य वजह अनियंत्रित अवैध निर्माण, प्रशासनिक अनदेखी और जर्जर संरचनाओं की सुरक्षा जांच का न होना है। घने इलाकों में नियमों का उल्लंघन कर बहुमंजिला ढाँचे बनाए जा रहे हैं।

- **अवैध अतिरिक्त मंजिलें:** इमारत की कमजोर नींव के बावजूद मालिकों द्वारा बिना इजाजत तीसरी और चौथी मंजिलें बना ली जाती हैं, जिससे ढाँचे पर अत्यधिक वजन पड़ता है।
- **नगर निगम अधिकारियों की अनदेखी:** नागरिकों द्वारा अवैध निर्माण की शिकायतें दिए जाने के बावजूद MCD अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न करना और बाद में फर्जी रिकॉर्ड बनाना हादसों को बढ़ावा देता है।
- **पुराने ढाँचे और स्ट्रक्चरल ऑडिट की कमी:** दशकों पुरानी इमारतों की नियमित मरम्मत और मजबूती की जांच (स्ट्रक्चरल ऑडिट) नहीं कराई जाती, जिससे वे बारिश या आसपास की खुदाई के दौरान ढह जाती हैं।
- **स्व-प्रमाणन योजनाओं का दुरुपयोग:** सरल योजना जैसी प्रक्रियाओं के तहत गलत हलफनामा जमा कर मानक से परे निर्माण कर लिया जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. इस साल दिल्ली में इमारत गिरने से कुल कितनी मौतें हुई हैं?
दिल्ली में इस साल इमारत ढहने की 5 घटनाओं में से 3 जानलेवा हादसों में कुल 16 लोगों की मौत दर्ज की गई है।

### 2. 6 सितंबर को सत्य निकेतन में क्या हादसा हुआ?
सत्य निकेतन में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास एक 5 मंजिला पीजी इमारत ढह गई, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई।

### 3. साकेत इमारत हादसे में जांच के दौरान क्या प्रशासनिक खामियां पाई गईं?
साकेत की इमारत में तीसरी और चौथी मंजिल अवैध थी। शिकायतों के बावजूद MCD ने कार्रवाई नहीं की और हादसे के बाद फर्जी रिकॉर्ड बनाए, जिससे 2 इंजीनियर निलंबित और 3 लोग गिरफ्तार हुए।

### 4. रोहिणी में इमारत ढहने की क्या वजह थी?
रोहिणी सेक्टर-16 में भारी बारिश के दौरान 8 जुलाई को एक निर्माणाधीन 4 मंजिला इमारत ढह गई थी, जिसमें 3 लोगों की जान चली गई।

### 5. क्या बिना किसी हताहत के भी इमारत ढहने की घटनाएं हुईं?
हाँ, मुकुंदपुर में सिलेंडर ब्लास्ट से फैक्ट्री ढहने पर 11 मजदूर घायल हुए थे, जबकि करावल नगर में नाला मरम्मत के दौरान दरारें आने पर 4 मंजिला इमारत गिरी थी, जहां समय रहते निकासी कर ली गई थी।

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