दिल्ली प्रदर्शन, बीएनएसएस वैधता और राहुल गांधी की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने तय किया सुनवाई का खाका सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों, बीएनएसएस की धाराओं की संवैधानिक वैधता और राहुल गांधी से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के लिए अलग-अलग तारीखें निर्धारित की हैं। देश की राजधानी में आयोजित विरोध प्रदर्शनों, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस प्रशासन की कार्रवाई, पत्रकारों की सुरक्षा और चुनाव आयोग के एसआईआर अभियान से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद व्यवस्थित रुख अपनाया है। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने 15 अक्टूबर को इन तमाम याचिकाओं पर विचार करते हुए एक साथ सुनवाई करने के बजाय मुद्दों के आधार पर अलग-अलग तारीखें निर्धारित कर दी हैं। शीर्ष अदालत ने न केवल केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, बल्कि विभिन्न मुकदमों के व्यवस्थित निपटारे के लिए विशेष प्रक्रियात्मक निर्देश भी दिए हैं। प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए नोडल वकीलों की नियुक्ति अदालत के समक्ष याचिकाओं की भारी संख्या को देखते हुए पीठ ने सुनवाई की प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार दोनों पक्षों की ओर से नोडल वकीलों की नियुक्ति की है। इन नोडल वकीलों को यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है कि वे 28 अक्टूबर तक सभी समान याचिकाओं को उनकी प्रकृति और विषय के अनुसार अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत करें। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकारी प्रत्येक समूह के लिए एक व्यापक जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकें, जिससे अदालत का समय बचे और हर कानूनी बिंदु पर सटीक बहस हो सके। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई 3 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी में कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर की गई पुलिसिया कार्रवाई और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल से जुड़े बड़े विवाद पर शीर्ष अदालत 3 नवंबर को अगली सुनवाई करेगी। इस मामले में केंद्र सरकार को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है। अदालत इस बात की पड़ताल करेगी कि प्रदर्शनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित किया जाए। इस सुनवाई में मुख्य रूप से विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन द्वारा लागू की गई पाबंदियों, बल प्रयोग की आवश्यकता और नागरिक स्वतंत्रता के हनन के आरोपों की गहन समीक्षा की जाएगी। सबूतों की सुरक्षा और डिजिटल रिकॉर्ड जमा करने के निर्देश मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच और पारदर्शी न्यायिक समीक्षा के लिए डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का कड़ा निर्देश जारी किया है। पीठ ने जांच एजेंसियों को निर्देशित किया है कि उनके पास उपलब्ध सभी सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए ताकि उनसे किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके। इसके अतिरिक्त, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी निजी पक्ष अथवा नागरिक के पास प्रदर्शनों या पुलिस कार्रवाई से संबंधित कोई डिजिटल साक्ष्य, वीडियो या दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो वे उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। इसी क्रम में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को यह आदेश दिया है कि दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 163 के तहत लागू किए गए सभी निषेधाज्ञा आदेशों को रिकॉर्ड पर पेश किया जाए। अदालत ने विशेष रूप से 23 अगस्त 2026 के आदेश और उसके बाद जारी किए गए अन्य संबंधित प्रशासनिक आदेशों की प्रतियां औपचारिक रूप से मांगी हैं, ताकि यह देखा जा सके कि पाबंदियां लगाते समय विधिक प्रक्रियाओं का उचित पालन किया गया था अथवा नहीं। राहुल गांधी और एसआईआर से जुड़े मामले 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध चुनाव आयोग के एसआईआर अभियान तथा कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े मामलों की अगली सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है। पीठ ने इन याचिकाओं पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका आधिकारिक रुख स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने निर्देश दिया है कि इन याचिकाओं को इस विषय पर पहले से लंबित मुख्य याचिका के साथ संलग्न कर दिया जाए ताकि संपूर्ण प्रकरण की समग्रता से सुनवाई हो सके। संजय राउत के आचरण पर अदालत का रुख एसआईआर से जुड़े मामलों की एक याचिका में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत छठे याचिकाकर्ता के रूप में शामिल हैं। सुनवाई के दौरान पीठ ने उनके आचरण पर गंभीर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत को निर्देश दिया है कि वे भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और न्यायपालिका के संबंध में की गई अपनी कथित टिप्पणियों को लेकर अदालत के समक्ष स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। पीठ ने यह साफ कर दिया कि उनकी याचिका को फिलहाल केवल इसी पूर्व शर्त के आधार पर स्वीकार किया गया है कि वे न्यायपालिका पर की गई बयानबाजी के संबंध में अपना संतोषजनक जवाब दाखिल करेंगे। महिला पत्रकार को दंडात्मक कार्रवाई से मिली अंतरिम राहत पत्रकारों के अधिकारों और कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में शीर्ष अदालत ने पीड़िता को फौरी राहत प्रदान की है। कथित छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराने वाली एक महिला पत्रकार के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या सख्त कानूनी कार्रवाई करने पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। पीठ ने केंद्र सरकार को इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है। इस मामले की अगली औपचारिक सुनवाई 5 नवंबर को तय की गई है। अदालत का यह रुख दर्शाता है कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता को किसी अनुचित दबाव अथवा प्रतिशोध की कार्रवाई से बचाना प्राथमिक आवश्यकता है। बीएनएसएस की धारा 163 और 172 की वैधता पर 19 नवंबर को मंथन नए आपराधिक कानूनों के कई प्रावधानों की संवैधानिकता भी अब सुप्रीम कोर्ट की कसौटी पर है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 172 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 19 नवंबर को विशेष रूप से बहस होगी। इसके साथ ही, बीएनएसएस की धारा 163 के तहत कार्यपालिका को प्राप्त व्यापक निषेधाज्ञा अधिकारों और उस अधिकार के तहत जारी किए गए प्रशासनिक आदेशों को चुनौती देने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई भी 19 नवंबर तक के लिए टाल दी गई है। शीर्ष अदालत इस दिन यह तय करेगी कि क्या ये धाराएं नागरिकों के मौलिक अधिकारों के अनुकूल हैं या फिर वे प्रशासन को असीमित विवेकाधिकार प्रदान करती हैं। इसका आप पर असर यह न्यायिक प्रक्रिया नागरिकों के विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार और पुलिस की शक्तियों के कानूनी दायरे को स्पष्ट करेगी। • भारत में: बीएनएसएस की धारा 163 और 172 की संवैधानिक समीक्षा से पूरे देश में पुलिस और प्रशासन की निषेधाज्ञा लागू करने की शक्तियों की सीमाएं तय होंगी। इससे आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों को स्पष्ट कानूनी सुरक्षा मिल सकेगी। • दिल्ली में: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के नियमों और प्रतिबंधात्मक आदेशों की समीक्षा से राजधानी में धरने और रैलियों के आयोजन की प्रक्रिया सुगम हो सकेगी। आयोजकों और नागरिकों को स्थानीय प्रशासन द्वारा लागू किए जाने वाले नियमों और अनुमतियों को लेकर अधिक पारदर्शिता मिलेगी। • डिजिटल साक्ष्य धारकों के लिए: प्रदर्शनों या पुलिस कार्रवाई की फुटेज रखने वाले आम लोग अदालत के समक्ष सीधे साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके लिए याचिकाकर्ताओं या नोडल वकीलों के माध्यम से साक्ष्य जमा करने की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। • पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के लिए: अदालत का रुख रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को प्रशासनिक और दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान करता है। मीडिया पेशेवर बिना किसी उत्पीड़न के भय के संवेदनशील घटनाओं को कवर करने के लिए न्यायिक सुरक्षा पा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विभिन्न पक्षों ने दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनों, पुलिस की कार्रवाई, निषेधाज्ञा आदेशों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की थीं। अलग-अलग याचिकाओं में उठाए गए विधिक मुद्दों की विविधता को देखते हुए अदालत ने एक एकीकृत और समयबद्ध रूपरेखा तैयार की है। • याचिकाओं की अत्यधिक संख्या: एक ही घटनाक्रम और विभिन्न धाराओं को चुनौती देने वाली दर्जनों याचिकाएं दायर की गई थीं, जिससे नियमित सुनवाई बाधित हो रही थी। अदालत ने मामलों को सुगम बनाने के लिए नोडल वकीलों को 28 अक्टूबर तक याचिकाओं के वर्गीकरण का निर्देश दिया। • डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका: प्रदर्शनों के दौरान हुए विवादों और पुलिस कार्रवाई की सत्यता जांचने के लिए प्राथमिक साक्ष्यों की सुरक्षा अनिवार्य थी। इसी कारण पीठ ने एजेंसियों को सीसीटीवी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तुरंत सुरक्षित करने का आदेश दिया। • बीएनएसएस के नए प्रावधानों पर संवैधानिक सवाल: हाल ही में लागू की गई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं 163 और 172 के दुरुपयोग और व्यापकता को चुनौती दी गई थी। अदालत ने इन महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों पर विस्तृत और अलग बहस के लिए 19 नवंबर का दिन निर्धारित किया। • व्यक्तिगत आचरण पर संज्ञान: संजय राउत द्वारा न्यायपालिका पर की गई टिप्पणियों के कारण पीठ ने उनकी याचिका की सुनवाई को उनके औपचारिक स्पष्टीकरण से जोड़ दिया। सवाल-जवाब 1. सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली प्रदर्शनों से जुड़े मामले की अगली सुनवाई कब होगी? दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुख्य मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित की गई है। 2. राहुल गांधी से संबंधित याचिकाओं पर अदालत कब विचार करेगी? चुनाव आयोग के एसआईआर अभियान और राहुल गांधी से जुड़ी याचिकाओं पर शीर्ष अदालत 27 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। 3. बीएनएसएस की धारा 172 और 163 की वैधता पर सुनवाई किस तारीख को होगी? भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 172 की संवैधानिक वैधता और धारा 163 से संबंधित याचिकाओं पर 19 नवंबर को सुनवाई होगी। 4. सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत को क्या निर्देश दिया है? अदालत ने संजय राउत से कहा है कि वे मुख्य न्यायाधीश और न्यायपालिका पर की गई अपनी कथित टिप्पणियों को लेकर अपने आचरण पर स्पष्टीकरण दें। 5. महिला पत्रकार के मामले में अदालत ने क्या राहत दी है? सुप्रीम कोर्ट ने कथित छेड़छाड़ की शिकायत करने वाली महिला पत्रकार के खिलाफ किसी भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। 6. नोडल वकीलों को क्या कार्य सौंपा गया है? नोडल वकीलों को 28 अक्टूबर तक समान याचिकाओं को अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत करने का दायित्व दिया गया है ताकि व्यवस्थित जवाब दाखिल किए जा सकें। https://trendkia.com/delhi/delhi-pradarshana-bnss-vaidhata-aura-rahul-gandhi-ki-yachikaon-para-suprima-korta-ne-taya-kiya-sunavai-ka-khaka-48095 TrendKia — Har trend, sabse pehle.