# कनॉट प्लेस में दुकानदारों का अनोखा प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस के समर्थन में लगाए नारे

> दिल्ली के कनॉट प्लेस और खान मार्केट में बार-बार होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों से व्यापारियों का कारोबार ठप हो गया है। त्योहार के सीजन में भारी नुकसान से परेशान दुकानदारों ने पुलिस के पक्ष में आवाज उठाई है।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/delhi-shopkeepers-rally-behind-police-in-connaught-place-amid-business-disruptions-48312 · **Language:** Hindi
**Tags:** कनॉट प्लेस, दिल्ली पुलिस, व्यापारी, खान मार्केट, सौरभ भारद्वाज, प्रदर्शन

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध कनॉट प्लेस इलाके में हाल ही में एक नया नजारा देखने को मिला, जहां व्यापारियों ने विरोध के बजाय प्रशासन का साथ देने का फैसला किया। पिछले पंद्रह दिनों में यह पहला ऐसा मौका था जब प्रदर्शन के दौरान बाजार के रेस्तरां और दुकानें पूरी तरह खुले रहे और आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया। इस दौरान कारोबारियों ने एकजुट होकर दिल्ली पुलिस के समर्थन में नारेबाजी की और कहा कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने वालों के साथ हैं। सेंट्रल दिल्ली में लगातार होने वाले धरने-प्रदर्शनों और उसके चलते बाजारों के बार-बार बंद होने से व्यापारी वर्ग भारी मानसिक और आर्थिक तनाव से गुजर रहा है। उनका कहना है कि विरोध-प्रदर्शन की आड़ में शहर के मुख्य वाणिज्यिक केंद्रों को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।

## राजनीतिक दलों पर प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को ठप करने का आरोप

शहर की विभिन्न ट्रेड यूनियंस का यह पक्का मानना है कि राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता आए दिन सेंट्रल दिल्ली की सड़कों पर उतर आते हैं। व्यापारियों का आरोप है कि प्रदर्शन के लिए जानबूझकर कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त व्यावसायिक हब को चुना जाता है, जिसका सीधा असर दुकानों के गल्ले पर पड़ता है। बार-बार होने वाले हंगामे और तनाव के माहौल के कारण उनका व्यापार लगभग पंगु बन चुका है। हालांकि व्यापारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी के भी विरोध जताने के लोकतांत्रिक अधिकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में बाजारों को जबरन बंद कराना और व्यापार को चौपट करना पूरी तरह गलत है। इस मनमानी से उनकी रोजी-रोटी पर हर वक्त संकट के बादल मंडराते रहते हैं।

## त्योहारों के सीजन में भी ग्राहकों से सूने पड़े हैं शोरूम

व्यापारियों के अनुसार, साल भर में आने वाला यह त्योहारों का समय ही वह अवधि होती है जब सबसे अधिक बिक्री होती है और दुकानदार इसी सीजन के भरोसे पूरा साल निकालते हैं। लेकिन मौजूदा हालात इसके पूरी तरह विपरीत चल रहे हैं। कनॉट प्लेस के तमाम शोरूम और भोजनालय इस समय खरीदारों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। दुकानदारों का दर्द है कि उनकी बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और त्योहारों के इस खास मौके पर भी उन्हें मुनाफे के बजाय केवल घाटा उठाना पड़ रहा है। उनका यह भी दावा है कि जब भी किसी राजनीतिक संगठन द्वारा प्रदर्शन का ऐलान किया जाता है, तो एहतियातन उन्हें अपनी दुकानें बंद रखनी पड़ती हैं। इसके अलावा, जब कोई प्रदर्शन नहीं भी होता है, तब भी आम लोग सेंट्रल दिल्ली आने से कतराने लगे हैं। ग्राहकों के मन में हमेशा यह डर बना रहता है कि कब कोई दल अचानक बैनर-झंडे लेकर पहुंच जाए और उन्हें किसी मुसीबत का सामना करना पड़े।

## खान मार्केट में भी गहराता जा रहा है मंदी और नुकसान का संकट

कारोबार पर पड़ने वाले इन बुरे प्रभावों का दायरा केवल कनॉट प्लेस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे सटा हुआ खान मार्केट भी इस मार से अछूता नहीं है। वहां के दुकानदार भी भारी वित्तीय नुकसान की शिकायतें लगातार कर रहे हैं। खान मार्केट ट्रेडर्स यूनियन अब इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार के समक्ष मुआवजे की औपचारिक मांग रखने पर विचार कर रही है। यूनियन का कहना है कि जहां पहले के फेस्टिव सीजन में दुकानदारों की अच्छी खासी कमाई हो जाती थी, वहीं इस बार उन्हें सिर्फ नुकसान ही झेलना पड़ रहा है। खान मार्केट ट्रेडर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव मेहरा का कहना है कि स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि बड़े व्यापारी भी इस इलाके को छोड़कर अन्य सुरक्षित जगहों पर जाने का विचार करने लगे हैं।

## सौरभ भारद्वाज का दावा, प्रदर्शनों से बढ़ता है वाणिज्यिक लाभ

इस पूरे घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी की तरफ से प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इसके लिए सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका दावा है कि प्रदर्शन होने से दुकानदारों का कारोबार दरअसल बढ़ता है क्योंकि इससे बड़ी संख्या में लोग उस इलाके में आकर्षित होते हैं और बिक्री में तेजी आती है। भारद्वाज का यह भी कहना था कि सरकार प्रदर्शनों को होने से रोक रही है, जिसकी वजह से दुकानदारों को घाटा सहना पड़ रहा है। हालांकि, व्यापारियों का जमीनी अनुभव इसके बिल्कुल विपरीत है। उनका साफ कहना है कि विरोध-प्रदर्शनों की वजह से खरीदार बाजारों तक पहुंच ही नहीं पाते हैं, जिसके कारण उन्हें अपनी दुकानें बंद रखने पर मजबूर होना पड़ता है और अंततः व्यापार तबाह हो जाता है।

## छोटे समूहों के हंगामे से रोजाना करोड़ों का आर्थिक नुकसान

शुक्रवार को कनॉट प्लेस में दुकानें चालू रखते हुए व्यापारियों ने पुलिस के पक्ष में जो नारे लगाए, उनमें क्षेत्र के तमाम स्थानीय दुकानदार और रेस्तरां संचालक बड़ी संख्या में शामिल थे। इन व्यापारियों का यह भी कहना है कि कई बार महज 20-25 लोग भी कहीं इकट्ठा होकर हंगामा करने लगते हैं, जिसके कारण पूरे बाजार के दुकानदारों को अपनी दुकानें गिराकर बंद करनी पड़ जाती हैं। इस तरह के आयोजनों से उन्हें एक दिन में करोड़ों रुपये की चपत लग सकती है। नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन का अनुमान है कि इन प्रदर्शनों के कारण केवल नई दिल्ली इलाके में हर दिन लगभग 100 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसी भारी आर्थिक नुकसान और बार-बार बाजार बंद होने की त्रासदी से आजिज आकर व्यापारियों ने अंततः पुलिस के समर्थन में आवाज बुलंद की है।

## बाजारों को विरोध प्रदर्शनों के दुष्प्रभावों से बचाने की पुरजोर मांग

व्यापारियों की सबसे बड़ी और मुख्य चिंता यह है कि राजनीतिक ड्रामेबाजी और प्रदर्शनों की भेंट दिल्ली के मुख्य बाजार नहीं चढ़ने चाहिए। उनका मानना है कि जब आम ग्राहक सुरक्षित तरीके से बाजार तक नहीं पहुंच पाएगा, तो दुकानदारों के साथ-साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों और इस सेक्टर से जुड़ी अन्य आजीविकाओं पर भी सीधा असर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में कारोबार करना बेहद कठिन हो गया है। इस बीच पुलिस प्रशासन द्वारा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए हैं ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

## इसका आप पर असर
कनॉट प्लेस और खान मार्केट के दुकानदारों के लिए विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे त्योहारी सीजन में भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

- **भारत में:** देश के अन्य बड़े महानगरों के व्यापारिक केंद्र भी राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान इसी तरह की लॉजिस्टिक और वित्तीय चुनौतियों का सामना करते हैं। ऐसे हालात से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर वैकल्पिक मार्ग और व्यापार सुरक्षा नीतियों की आवश्यकता महसूस की जाती है।

- **नई दिल्ली में:** कनॉट प्लेस और खान मार्केट के व्यापारियों को रोजाना लगभग 100 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान झेलना पड़ रहा है। स्थानीय दुकानदारों और रेस्तरां संचालकों को अपनी आजीविका बचाने के लिए अब प्रशासन और पुलिस का खुलकर समर्थन करना पड़ रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
सेंट्रल दिल्ली में बार-बार होने वाले धरने-प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों के कारण स्थानीय बाजार लगातार प्रभावित हो रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह वाणिज्यिक केंद्रों का राजनीतिक आयोजनों के लिए पसंदीदा स्थल होना है।

- **व्यावसायिक क्षेत्रों का चयन:** राजनीतिक दल प्रदर्शनों के लिए कनॉट प्लेस और खान मार्केट जैसे प्रमुख हब को जानबूझकर चुनते हैं ताकि उनका संदेश तेजी से प्रचारित हो सके।

- **ग्राहकों की अनुपस्थिति:** अचानक होने वाले हंगामे और बाजार बंद होने के डर से आम ग्राहक इन इलाकों में आने से बचते हैं, जिससे बिक्री गिर जाती है।

- **सुरक्षात्मक कार्रवाई:** कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा एहतियातन हिरासत और नियंत्रण के कदम उठाए जा रहे हैं, जो विरोध-प्रदर्शनों के चक्र को प्रभावित करते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. कनॉट प्लेस के दुकानदारों ने किस बात का विरोध किया?
दुकानदारों ने बार-बार होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों और बाजार बंद होने के कारण हो रहे भारी कारोबार के नुकसान का विरोध किया।

### 2. व्यापारियों ने किसके समर्थन में नारे लगाए?
व्यापारियों ने 'दिल्ली पुलिस आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं' के नारे लगाकर पुलिस का समर्थन किया।

### 3. खान मार्केट ट्रेडर्स यूनियन के अध्यक्ष कौन हैं?
खान मार्केट ट्रेडर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव मेहरा हैं।

### 4. नई दिल्ली इलाके में रोजाना कितने कारोबार का नुकसान हो रहा है?
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार प्रदर्शनों के कारण रोजाना करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

### 5. सौरभ भारद्वाज ने प्रदर्शनों को लेकर क्या दावा किया?
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि प्रदर्शन होने से दुकानदारों का कारोबार बढ़ता है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचते हैं।

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