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  "type": "article",
  "title": "दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों का घोटाला: पूर्व महानिदेशक समेत 3 अधिकारी गिरफ्तार",
  "summary": "दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय में हुए एक बड़े वित्तीय अनियमितता मामले में पूर्व डायरेक्टर जनरल डॉ. वत्सला अग्रवाल सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया है।",
  "content": "दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच यानी एसीबी ने स्वास्थ्य विभाग में सामने आए एक गंभीर भ्रष्टाचार मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस जांच के दौरान स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय यानी डीजीएचएस की पूर्व महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया है। गुरुवार को हुई इस गिरफ्तारी के साथ ही एजेंसी ने विभाग के डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को भी हिरासत में लिया है।\n\nजांच का दायरा और गिरफ्तारियां\nयह मामला उस समय गरमाया जब इस घोटाले से जुड़े डॉ. विनोद कुमार रंगा को एसीबी ने गिरफ्तार किया था। डॉ. रंगा की चार दिन की पुलिस रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिसके आधार पर डॉ. वत्सला अग्रवाल और नीरज चोपड़ा पर कार्रवाई की गई। विभाग के भीतर चल रही इस जांच का मुख्य केंद्र सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी यानी सीपीए के जरिए की गई खरीद प्रक्रिया है। यह एजेंसी सीधे डीजीएचएस के अधीन काम करती है और कई सौ करोड़ रुपये का बजट इसके नियंत्रण में रहता है।\n\nखरीद प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं\nएसीबी की जांच में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में बड़े पैमाने पर धांधली के संकेत मिले हैं। आरोप है कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरणों, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन और शल्य चिकित्सा सामग्री की खरीद के लिए नियम कायदों को ताक पर रखा गया। इसके अलावा बेडशीट और लिनेन जैसे सामान्य सामानों के टेंडर में भी हेरफेर की गई।\n\nजांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि निविदा की शर्तें जानबूझकर कुछ चुनिंदा सप्लायर्स को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई थीं। इन शर्तों के कारण योग्य और वास्तविक बोलीदाता प्रक्रिया से बाहर हो गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और वस्तुओं को बाजार मूल्य से कहीं ज्यादा कीमत पर खरीदा गया।\n\nप्रशासनिक कार्रवाई और निलंबन\nइस घोटाले के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाए गए हैं। एसीबी ने 2 जून को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया था। डॉ. वत्सला अग्रवाल को 21 मई को ही उनके पद से हटाकर वेटिंग में डाल दिया गया था, जिसके बाद उनका तबादला गुरु तेग बहादुर अस्पताल कर दिया गया था। बाद में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल के निर्देश पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने आंतरिक जांच के बाद दवाओं के रखरखाव और खरीद में लापरवाही बरतने के आरोप में पांच फार्मासिस्टों और सीपीए के दो अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में होने वाले ऐसे बड़े घोटाले करदाताओं के पैसे की बर्बादी का कारण बनते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।\n\nदिल्ली में: दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और गुणवत्ता को लेकर चल रही जांच का असर आने वाले समय में खरीद के नए नियमों में बदलाव के रूप में दिख सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इस घोटाले में मुख्य रूप से कौन गिरफ्तार हुए हैं?\nइस मामले में पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज डॉ. वत्सला अग्रवाल, डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा और डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार किया गया है।\n\n2. एसीबी ने किस आधार पर कार्रवाई की?\nएसीबी ने डॉ. विनोद कुमार रंगा की चार दिन की पुलिस रिमांड के दौरान हुई पूछताछ और सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी के माध्यम से की गई खरीद में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर ये गिरफ्तारियां की हैं।\n\n3. किन वस्तुओं की खरीद में गड़बड़ी हुई?\nजांच में पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, बेडशीट, लिनेन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरणों और दवाओं की खरीद में हेरफेर के सबूत मिले हैं।\n\n4. इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई हुई है?\nडॉ. वत्सला अग्रवाल को निलंबित कर दिया गया है, साथ ही पांच फार्मासिस्ट और सीपीए के दो अधिकारियों को भी आंतरिक जांच के बाद निलंबित किया गया है।",
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  "category": "दिल्ली",
  "publishedAt": "2026-06-28",
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    "दिल्ली भ्रष्टाचार",
    "एसीबी कार्रवाई",
    "डॉ वत्सला अग्रवाल",
    "स्वास्थ्य घोटाला",
    "केंद्रीय खरीद एजेंसी"
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  "site": "TrendKia"
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