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  "type": "article",
  "title": "चुनाव आयोग मार्च के दौरान राहुल गांधी को हिरासत में लेने पर बर्लिन से बोले शशि थरूर, सरकार के रवैये को बताया शर्मनाक",
  "summary": "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद से चुनाव आयोग तक मार्च कर रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने रोका। जर्मनी में मौजूद सांसद शशि थरूर ने इस पुलिस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई।",
  "content": "नई दिल्ली में संसद परिसर से निर्वाचन आयोग कार्यालय की तरफ बढ़ रहे विपक्षी सांसदों के काफिले को पुलिस ने आकाशवाणी भवन के पास रोककर कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 6 अक्टूबर 2026 को इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर यह विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। मार्च के दौरान पुलिसकर्मियों और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई। इस घटनाक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद जर्मनी की राजधानी बर्लिन में मौजूद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की और अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।\n\nविपक्ष का विरोध मार्च और पुलिस की कार्रवाई\nइंडिया गठबंधन के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल उठाते हुए संसद भवन से चुनाव आयोग के दफ्तर तक पैदल मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारी जब आकाशवाणी भवन के समीप पहुंचे, तब सुरक्षा बलों ने बैरिकेड लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग मुख्यालय की तरफ जाने के लिए परिसर के गेट को धक्का देकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जो वहां से महज 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बाद आकाशवाणी भवन की तरफ से पुलिस नियंत्रण कक्ष यानी पीसीआर को सूचना दी गई कि नेता जबरन परिसर में दाखिल हुए हैं।\n\n \nपुलिस के साथ हुई गहमागहमी के बाद राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा, पवन खेड़ा और इमरान प्रतापगढ़ी आकाशवाणी भवन परिसर के अंदर एक पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए। कुछ ही देर बाद पुलिस ने नेताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें गाड़ियों में बैठाकर किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइन ले जाया गया। देर रात राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा समेत सभी विपक्षी नेताओं को किंग्सवे कैंप से रिहा कर दिया गया, जिसके बाद दोनों नेता वहां से रवाना हो गए।\n\nसात समंदर पार बर्लिन से शशि थरूर की प्रतिक्रिया\nइस पूरे मामले पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह चार महीने पहले बर्लिन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने की तय प्रतिबद्धता के कारण दिल्ली में सांसदों के इस मार्च में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके। थरूर ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ हुई हाथापाई और उन्हें हिरासत में लिए जाने के दृश्यों ने उन्हें भीतर तक परेशान कर दिया है।\n\nथरूर ने साफ किया कि भौगोलिक रूप से भले ही वह जर्मनी में बैठकर केवल अपनी एकजुटता दर्शा सकते हैं, लेकिन उनका दिल इस समय नई दिल्ली में अपने साथियों के साथ धड़क रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस लड़ाई में अंततः न्याय की जीत जरूर होगी। थरूर ने आगे कहा कि 13 करोड़ मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किए जाने के विरोध में उठाई गई आवाज पर सरकार का इस प्रकार का रवैया पूरी तरह शर्मनाक है।\n\nराहुल गांधी और पवन खेड़ा ने दागे तीखे सवाल\nहिरासत में लिए जाने से पूर्व मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने प्रशासन के इस रवैये पर भारी रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 300 सांसदों को आकाशवाणी भवन के पास रोक दिया गया, जबकि निर्वाचन आयोग का दफ्तर वहां से केवल 50 गज की दूरी पर स्थित है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न कराने की है, फिर भी ज्ञानेश कुमार चुने हुए जनप्रतिनिधियों से मिलने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब संसद के 300 प्रतिनिधि चुनाव आयोग से मिलकर अपनी बात नहीं रख सकते, तो देश में लोकतंत्र के मायने ही क्या रह जाते हैं।\n\nराहुल गांधी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मतदाताओं के साथ जो किया गया है वह देशद्रोह के समान है और वोट चोरी के जरिए पूरे तंत्र को हाईजैक किया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि इस मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सवाल उठाया कि जब चुनाव आयोग का दफ्तर बिल्कुल पास था, तब लोकसभा में नेता विपक्ष को वहां जाने से रोकना प्रशासनिक मनमानी को दर्शाता है।\n\nइसका आप पर असर\nसंसद से चुनाव आयोग तक हुए इस विरोध मार्च और विपक्षी नेताओं की हिरासत से राष्ट्रीय राजनीति तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• राष्ट्रीय स्तर पर: विपक्ष द्वारा 13 करोड़ मतदाताओं के कथित मताधिकार हनन और वोट चोरी के आरोप उठाने से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जनसंवाद तेज होगा। इससे आने वाले चुनावों में मतगणना और मतदाता सूचियों की पारदर्शिता को लेकर नागरिकों की निगरानी और सतर्कता बढ़ेगी।\n• दिल्ली और संसद मार्ग क्षेत्र में: राजनीतिक मार्च और धरने के चलते लुटियंस दिल्ली, संसद मार्ग और आकाशवाणी भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। इसके कारण मध्य दिल्ली के मार्गों पर सामान्य यात्रियों और दैनिक कर्मचारियों को आवागमन में देरी और रूट डायवर्जन का सामना करना पड़ा।\n• संसदीय कार्यवाही और संवाद: विपक्ष के 300 सांसदों और निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच तनातनी बढ़ने से नीतिगत चर्चाओं में टकराव और बढ़ सकता है। नागरिक समाज और मतदाताओं के बीच चुनावी निष्पक्षता को लेकर चल रही बहस और तीखी होगी।\n• राजनीतिक विरोध प्रदर्शन: प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में विपक्षी दल देश भर में विरोध रैलियां और जनसंपर्क अभियान तेज कर सकते हैं। इसके चलते स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बैठकों और धरनों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइंडिया गठबंधन के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और 13 करोड़ मतदाताओं के अधिकारों के मुद्दे को लेकर यह मार्च निकाला था।\n\n• प्रत्यक्ष कारण: विपक्षी सांसदों का आरोप था कि 13 करोड़ नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित किया गया है और वोट चोरी हुई है। इसी के विरोध में इंडिया गठबंधन ने संसद से निर्वाचन आयोग कार्यालय तक मार्च कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।\n• आकाशवाणी भवन पर टकराव: जब पुलिस ने विपक्षी सांसदों के काफिले को चुनाव आयोग मुख्यालय से लगभग 300 मीटर पहले रोक दिया, तो नेताओं ने आगे बढ़ने के लिए गेट धकेला। इसके बाद संस्थान से पुलिस कंट्रोल रूम को शिकायत दी गई, जिसके चलते पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया।\n• शशि थरूर की अनुपस्थिति की वजह: कांग्रेस सांसद शशि थरूर चार महीने पहले से तय एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए जर्मनी के बर्लिन गए हुए थे। इस पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण वह प्रत्यक्ष रूप से मार्च में शामिल नहीं हो सके और उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना समर्थन व्यक्त किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इंडिया गठबंधन के सांसदों ने यह विरोध मार्च कब और क्यों निकाला था?\nयह विरोध मार्च 6 अक्टूबर 2026 को संसद से चुनाव आयोग तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कथित वोट चोरी के विरोध में निकाला गया था।\n\n2. राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को कहां से हिरासत में लिया गया?\nनेताओं को निर्वाचन आयोग कार्यालय से कुछ मीटर पहले आकाशवाणी भवन परिसर से हिरासत में लिया गया था।\n\n3. हिरासत में लिए जाने के बाद विपक्षी नेताओं को कहां ले जाया गया?\nराहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा समेत अन्य नेताओं को किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइन ले जाया गया था, जहां से उन्हें देर रात रिहा कर दिया गया।\n\n4. शशि थरूर इस विरोध मार्च में शामिल क्यों नहीं हो सके?\nशशि थरूर चार महीने पहले तय एक सम्मेलन की प्रतिबद्धता के कारण जर्मनी के बर्लिन में थे, इसलिए वह व्यक्तिगत रूप से मार्च में शामिल नहीं हो पाए।\n\n5. राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए क्या मुख्य आरोप लगाए?\nराहुल गांधी ने कहा कि 300 सांसदों को आयोग से मिलने नहीं दिया गया और आरोप लगाया कि वोट चोरी कर लोकतंत्र खत्म किया जा रहा है।",
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  "category": "दिल्ली",
  "publishedAt": "2026-10-07",
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