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  "type": "article",
  "title": "गंभीर प्रदूषण के बीच राजधानी क्षेत्र में ग्रेप का दूसरा चरण प्रभावी, पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी और दफ्तरों के समय में बदलाव की तैयारी",
  "summary": "दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 324 पार पहुंचने के बाद सीएक्यूएम ने ग्रैप-2 की पाबंदियां लागू कर दी हैं। निजी वाहनों को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग दरें बढ़ाने, सड़कों पर पानी का छिड़काव करने और दफ्तरों के समय में बदलाव जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।",
  "content": "दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई के 324 के आंकड़े को पार करते ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के दूसरे चरण की पाबंदियों को पूरे इलाके में तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है। हवा में फैले इस दमघोंटू प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न प्रशासनिक एजेंसियों ने समन्वित कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसमें सड़कों की साफ-सफाई से लेकर वाहनों के आवागमन को सीमित करने के उपाय शामिल हैं।\n\nसड़कों पर धूल नियंत्रण और मशीनी सफाई अभियान\nप्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए सड़कों से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण पाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता बन गया है। इसके तहत निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं\n\n• सड़कों की रोजाना मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग कराई जाएगी ताकि सतह पर जमी धूल हवा में न घुले।\n• सड़कों पर पानी और धूल दबाने वाले डस्ट सप्रेसेंट रसायनों का नियमित छिड़काव सुनिश्चित किया जाएगा।\n• प्रदूषण के लिहाज से संवेदनशील चिह्नित हॉटस्पॉट इलाकों में विशेष सघन अभियान चलाए जाएंगे।\n• निर्माण स्थलों पर धूल रोकथाम से जुड़े नियमों के पालन की सख्त और निरंतर जांच की जाएगी।\n\nवाहनों पर नियंत्रण और पार्किंग दरों में बढ़ोतरी\nसड़कों पर निजी गाड़ियों की संख्या घटाने और यातायात से होने वाले उत्सर्जन को रोकने के लिए आर्थिक कदम भी उठाए गए हैं। प्रशासन ने निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से पार्किंग फीस बढ़ाने का फैसला किया है। इसके साथ ही लोगों को सलाह दी गई है कि वे निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें, सफर के लिए कम जाम वाले रास्तों का चुनाव करें और अपनी गाड़ियों के एयर फिल्टर समय पर बदलते रहें।\n\nदफ्तरों के कामकाज और समय सारिणी में फेरबदल\nसड़कों पर एक साथ वाहनों का दबाव कम करने के लिए कार्यालयों के संचालन में भी बदलाव की योजना बनाई गई है। दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में स्थित सरकारी कार्यालयों तथा नगर निकायों के काम के घंटों में बदलाव (स्टैगर्ड टाइमिंग) किया जाएगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित अपने केंद्रीय सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव को लेकर अलग से निर्णय ले सकती है। जिन कर्मचारियों की नौकरियों की प्रकृति इसकी अनुमति देती है, उन्हें घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने का विकल्प भी दिया जा सकता है।\n\nसर्दियों में बायोमास जलाने पर रोक और आरडब्ल्यूए को निर्देश\nतापमान गिरने के साथ खुले में आग जलाने से होने वाले धुएं को रोकने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। आरडब्ल्यूए को अपने सुरक्षा गार्डों और सफाई कर्मचारियों के लिए रात के समय इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराने होंगे, जिससे कड़ाके की ठंड से बचने के लिए कोई भी खुले में कचरा या बायोमास न जलाए। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे अक्टूबर से जनवरी के बीच धूल पैदा करने वाले निर्माण कार्यों से दूर रहें और खुले में धुआं छोड़ने वाली हीटिंग या कुकिंग गतिविधियों पर पूरी तरह विराम लगाएं।\n\nइसका आप पर असर\nदिल्ली-एनसीआर में ग्रैप का दूसरा चरण लागू होने से दैनिक यात्रियों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और सोसायटियों के निवासियों के जीवन पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• भारत में: उत्तर भारत में बढ़ते प्रदूषण के कारण सर्दियों के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परामर्श और राष्ट्रीय स्तर पर उत्सर्जन निगरानी को कड़ा किया जा रहा है। इससे अन्य राज्यों में भी स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण तंत्र सक्रिय हो रहे हैं।\n• दिल्ली-एनसीआर में: निजी गाड़ियों से निकलने वाले लोगों को अब अधिक पार्किंग शुल्क चुकाना होगा, जिससे जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसके अलावा सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव और घर से काम करने की छूट मिलने से दैनिक आवागमन के तौर-तरीके बदलेंगे।\n• आवासीय सोसायटियों के लिए: आरडब्ल्यूए को रात की ड्यूटी वाले कर्मचारियों के लिए हीटर की व्यवस्था करनी होगी ताकि बायोमास जलाने पर रोक लग सके। ऐसा न करने पर संबंधित आवासीय सोसायटियों और एजेंसियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।\n• निर्माण क्षेत्र के लिए: बिल्डरों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को धूल दबाने वाले सभी नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। लापरवाही पाए जाने पर निर्माण स्थलों को बंद करने और भारी जुर्माना लगाने का सामना करना पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-2 की पाबंदियां वायु गुणवत्ता सूचकांक के तेजी से बिगड़ने और वायुमंडल में प्रदूषकों के जमा होने की वजह से लगाई गई हैं।\n\n• सीएक्यूएम की सीमा पार होना: वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्तर 324 पार दर्ज किया गया, जो अत्यंत खराब श्रेणी में आता है। पहले से तय पर्यावरण नियमावली के तहत 300 से अधिक एक्यूआई दर्ज होते ही ग्रैप का दूसरा चरण स्वतः लागू किया जाना अनिवार्य है।\n• सर्दियों का मौसमी चक्र: सर्दियों की शुरुआत के साथ हवा की गति धीमी हो जाती है और तापमान में गिरावट आती है। इसके चलते वाहनों का धुआं, सड़कों की धूल और निर्माण कार्यों से उठने वाले कण वातावरण में नीचे ही फंसे रह जाते हैं।\n• स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन: भारी ट्रैफिक जाम, निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और खुले में कचरा या बायोमास जलाने जैसी गतिविधियां मिलकर इस स्थिति को और गंभीर बना देती हैं। इन स्रोतों को तत्काल नियंत्रित करने के लिए ही यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-2 क्यों लागू किया गया है?\nवायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के 324 पार पहुंचते ही सीएक्यूएम ने प्रदूषण को रोकने के लिए ग्रैप-2 की पाबंदियां लागू की हैं।\n\n2. सड़कों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?\nप्रशासन सड़कों पर रोजाना मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग कराएगा और धूल दबाने के लिए पानी व डस्ट सप्रेसेंट का छिड़काव करेगा।\n\n3. निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए क्या कदम उठाया गया है?\nनिजी वाहनों को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग फीस बढ़ाने का फैसला लिया गया है और लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने को कहा गया है।\n\n4. सरकारी कार्यालयों के समय में क्या बदलाव होगा?\nदिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में सरकारी दफ्तरों व नगर निकायों के समय में बदलाव (स्टैगर्ड टाइमिंग) किया जाएगा।\n\n5. आरडब्ल्यूए को क्या विशेष निर्देश दिए गए हैं?\nआरडब्ल्यूए को निर्देश दिया गया है कि वे ठंड के समय सुरक्षा गार्डों और सफाई कर्मियों को इलेक्ट्रिक हीटर दें ताकि कोई बायोमास न जलाए।\n\n6. क्या कर्मचारियों को घर से काम करने की छूट मिलेगी?\nजिन नौकरियों में संभव है, उन कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का सुझाव दिया गया है।",
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