# ड्रोन और फाइटर जेट्स को एक साथ तैनात करेगी भारतीय वायुसेना, रक्षा क्षेत्र के सामने रखा नया रोडमैप

> भारतीय वायुसेना ने भविष्य की लड़ाइयों के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत 16 प्रकार के आधुनिक ड्रोन सिस्टम को शामिल किया जाएगा। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान 100 से अधिक रक्षा उद्योगों और स्टार्टअप्स के प्रतिनिधियों को इसकी रूपरेखा समझाई गई।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/indian-air-force-unveils-roadmap-to-deploy-killer-drone-swarms-alongside-fighter-jets-50298 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय वायुसेना, ड्रोन स्वार्म, आत्मनिर्भर भारत, रक्षा मंत्रालय, ऑटोनॉमस सिस्टम, विज्ञान भवन, प्रेमकुमार कृष्णस्वामी

आने वाले समय में हवाई संघर्षों का स्वरूप पूरी तरह बदलने जा रहा है, जहां मानवरहित और ऑटोमेटेड तकनीक युद्ध के मैदान में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरेंगी। इसी बदलाव को स्वीकार करते हुए भारतीय वायुसेना ने अपनी आक्रमण क्षमता को नए आयाम देने की दिशा में गंभीर कदम उठाए हैं। वायुसेना ने मानवरहित प्रणालियों और आधुनिक ऑटोनॉमस गैजेट्स को लेकर अपना महत्वाकांक्षी खाका देश के घरेलू रक्षा उद्योग के सामने पेश कर दिया है। इस विस्तृत योजना के अंतर्गत कुल 16 तरह की उन्नत ड्रोन प्रणालियों को जगह दी गई है, जिन्हें जरूरत और उपयोग के आधार पर चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में इस सिलसिले में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी, जिसमें रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 100 से ज्यादा औद्योगिक घरानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य देश की अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना और विदेशों पर निर्भरता को कम करना है। वायुसेना अब पारंपरिक लड़ाकू विमानों के बेड़े के साथ आधुनिक ड्रोनों की ताकत को मिलाकर एक ऐसी मजबूत रक्षा पंक्ति तैयार करना चाहती है जिसे भेद पाना दुश्मन के लिए असंभव हो।

## ड्रोन प्रणालियों का वर्गीकरण और पोखरण कनेक्शन
युद्ध के बदलते तौर-तरीकों को देखते हुए केवल पारंपरिक जेट विमानों के सहारे जीत हासिल करना अब मुमकिन नहीं रह गया है। इसी जमीनी हकीकत को समझते हुए वायुसेना ने अपनी प्राथमिकताओं का दायरा काफी व्यापक कर दिया है। नई रूपरेखा में जिन 16 तरह की प्रणालियों को चिन्हित किया गया है, उन्हें रणनीतिक, अभियानगत, सामरिक और किफायती श्रेणियों में बांटा गया है। यह पूरा खाका असल में 14 सितंबर 2026 को पोखरण में संपन्न हुए ड्रोनाथॉन आयोजन का ही अगला और उन्नत चरण है। अब इस पूरी कार्ययोजना को एक विशेष पुस्तिका के रूप में देश के छोटे उद्योगों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स तक औपचारिक रूप से पहुंचा दिया गया है। इसके जरिए युवा रचनाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों को स्पष्ट संकेत दे दिए गए हैं कि आने वाले दिनों में सेना को किस तरह के अत्याधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होगी ताकि वे उसी दिशा में अनुसंधान कर सकें।

## मानवयुक्त और मानवरहित विमानों की साझा उड़ान
भविष्य के हवाई अभियानों की रूपरेखा कुछ इस तरह तैयार की जा रही है कि मानवयुक्त लड़ाकू विमान और मानवरहित ड्रोन एक साथ मिलकर शत्रु पर हमला बोल सकें। वायुसेना की यह योजना एक ऐसे एकीकृत नेटवर्क पर आधारित है जहां फाइटर जेट सीधे तौर पर ड्रोनों के झुंड को नियंत्रित और निर्देशित कर सकेंगे। इस तकनीक के इस्तेमाल से सीमा के उस पार बैठे विरोधी खेमे के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को आसानी से गच्चा दिया जा सकता है। विज्ञान भवन में हुई इस कार्यशाला के दौरान उद्योग जगत के दिग्गजों को यह भी समझाया गया कि देश को इस समय स्वदेशी प्रोपल्शन तकनीक और ऑटोनॉमस सॉफ्टवेयर की सबसे ज्यादा जरूरत है। यदि ये सभी तकनीकें देश के भीतर ही विकसित कर ली जाती हैं, तो किसी भी बाहरी आपूर्तिकर्ता देश के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी विकट या आपात परिस्थिति में हमारी हथियारों और उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला पर कभी कोई आंच न आए।

## आत्मनिर्भरता और समय पर तकनीक मिलने का संदेश
वायुसेना मुख्यालय में वेपन सिस्टम्स के महानिदेशक एयर मार्शल प्रेमकुमार कृष्णस्वामी ने इस पूरी रणनीति का खाका देश के सामने विस्तार से रखा। उन्होंने बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में कहा कि ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम्स के मामले में आत्मनिर्भर होना अब केवल एक वैकल्पिक विचार नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारी सीधी ऑपरेशनल मजबूरी बन चुका है। एयर मार्शल ने यह भी रेखांकित किया कि देश की वायु शक्ति अब तीव्र गति से पूरी तरह ऑटोमेशन की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने देश की सभी रक्षा निर्माण कंपनियों और प्रमुख अनुसंधान संस्थानों से पुरजोर अपील की है कि वे अपने कामकाज की रफ्तार को और तेज करें। उनका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रयोगशालाओं में तैयार होने वाला हर एक नया नवाचार जल्द से जल्द मैदानी सैन्य अभियानों का व्यावहारिक हिस्सा बन सके। जब सही तकनीक तय समय पर सीधे सैनिकों और पायलटों के हाथ लगेगी, तभी देश की भौगोलिक सीमाएं पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो पाएंगी।

## इसका आप पर असर
भारतीय वायुसेना के इस नए रक्षा रोडमैप का सीधा असर देश के घरेलू रक्षा उद्योगों, स्टार्टअप्स और कुल राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाला है।

- **भारत में:** देश भर की रक्षा कंपनियों और एमएसएमई को स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास और निर्माण के लिए नए अनुबंध मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे भविष्य के सैन्य अभियानों में विदेशी सप्लायरों पर निर्भरता कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुरक्षित बनेगी।
- **नई दिल्ली में:** राजधानी क्षेत्र में स्थित रक्षा अनुसंधान संस्थानों और नीति निर्माताओं को स्टार्टअप्स के साथ सीधे समन्वय स्थापित करने के नए अवसर मिलेंगे। इससे आधुनिक सैन्य उपकरणों के परीक्षण और उत्पादन की गति में उल्लेखनीय तेजी आएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक युद्धक विमानों की सीमाओं और आधुनिक युद्ध में तकनीक की बदलती जरूरतों के कारण यह नया रोडमैप तैयार किया गया है।

- **रणनीतिक बदलाव:** आधुनिक युद्धक्षेत्र में दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए मानवरहित प्रणालियों और पारंपरिक विमानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
- **आपूर्ति सुरक्षा:** विदेशी निर्माताओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण उत्पन्न होने वाली बाधाओं से बचने के लिए घरेलू स्तर पर प्रोपल्शन और सॉफ्टवेयर तकनीक विकसित करना अनिवार्य हो गया था।
- **अनुसंधान का विस्तार:** सितंबर 2026 के पोखरण कार्यक्रम की सफलता के बाद इस पूरी परिकल्पना को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए स्टार्टअप्स को स्पष्ट दिशा निर्देश देने की जरूरत थी।

## सवाल-जवाब

### 1. भारतीय वायुसेना के नए रोडमैप में कितने प्रकार के ड्रोन सिस्टम शामिल हैं?
वायुसेना के इस नए रोडमैप में कुल 16 प्रकार के आधुनिक ड्रोन सिस्टम शामिल हैं।

### 2. इन ड्रोन सिस्टम्स को कितनी श्रेणियों में बांटा गया है?
इन सभी 16 प्रणालियों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।

### 3. यह विशेष कार्यक्रम कहाँ आयोजित किया गया था?
यह कार्यक्रम नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया गया था।

### 4. यह रोडमैप किस पुराने कार्यक्रम का अगला चरण है?
यह रोडमैप 14 सितंबर 2026 को पोखरण में आयोजित ड्रोनाथॉन कार्यक्रम का अगला चरण है।

### 5. इस बैठक में वायुसेना की रणनीति किसने साझा की?
वायुसेना मुख्यालय में वेपन सिस्टम्स के डायरेक्टर जनरल एयर मार्शल प्रेमकुमार कृष्णस्वामी ने यह रणनीति साझा की।

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