# जामिया में लिखित गारंटी पर अड़े छात्र, भूख हड़ताल के बीच कक्षाएं ऑनलाइन

> जामिया मिलिया इस्लामिया में सुलह के दावों के उलट छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने कक्षाएं ऑनलाइन कर प्रदर्शनकारियों को लॉन खाली करने का अल्टीमेटम दिया है।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-10-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/jamia-men-likhita-garnti-para-are-chhatra-bhukha-haratala-ke-bicha-kakshaen-nalaina-52133 · **Language:** Hindi
**Tags:** जामिया मिलिया इस्लामिया, छात्र आंदोलन, भूख हड़ताल, छात्र संघ चुनाव, एसएफआई, दिल्ली विश्वविद्यालय समाचार

जामिया मिलिया इस्लामिया के परिसर में जारी छात्र आंदोलन खत्म होने के बजाय और अधिक आक्रामक रूप ले चुका है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 26 अक्टूबर को यह दावा किया गया था कि छात्रों की प्रमुख मांगें मान ली गई हैं और इसके बाद गतिरोध समाप्त हो गया है। हालांकि प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस आधिकारिक बयान को पूरी तरह खारिज करते हुए अपने तेवर और तीखे कर लिए हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक मांगों को लेकर ठोस और पारदर्शी लिखित भरोसा नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन किसी भी सूरत में वापस नहीं लिया जाएगा। कैंपस के भीतर बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने तुरंत प्रभाव से सभी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई को डिजिटल यानी ऑनलाइन माध्यम पर स्थानांतरित कर दिया है।

## भूख हड़ताल से आंदोलन को मिली नई धार
प्रशासन की ओर से सामने आए सुलह के दावों को सिरे से नकारते हुए छात्रों ने अपने संघर्ष को जारी रखने का खुला एलान किया है। इस विरोध को और अधिक मजबूत करने के लिए एसएफआई और जामिया के छात्र कार्यकर्ता अबूजर ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का रास्ता चुना है। अबूजर छात्र संघ की तत्काल बहाली की मांग को लेकर इस अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन में शामिल अन्य विद्यार्थियों का भी यही कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से बात नहीं बनेगी। जब तक उनकी सभी मांगों पर औपचारिक, स्पष्ट और पारदर्शी लिखित समझौता नहीं होता, तब तक परिसर में धरना और विरोध प्रदर्शन अनवरत चलता रहेगा।

## प्रशासन के दावों पर प्रदर्शनकारियों का कड़ा रुख
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने यह बात कही थी कि छात्रों ने कथित तौर पर मानहानिकारक बयानों के लिए माफी मांगने और सोशल मीडिया पर डाली गई विवादित पोस्ट को हटाने पर सहमति दे दी है। इसके जवाब में छात्रों ने इन बातों को पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा ठहराया है। आंदोलनकारी विद्यार्थियों का गंभीर आरोप है कि प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव कराने या उसके संविधान को औपचारिक स्वीकृति देने के लिए कोई भी स्पष्ट और तय समयसीमा तय नहीं की है। इसके अतिरिक्त छात्रों ने अपनी पूर्व मांगों को दोहराते हुए विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर और सिक्योरिटी एडवाइजर के तत्काल इस्तीफे की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई है।

## प्रशासन की आखिरी चेतावनी और कड़ी कार्रवाई का अल्टीमेटम
विश्वविद्यालय परिसर में कानून और सुरक्षा व्यवस्था बहाल रखने के लिए प्रबंधन ने अगले आधिकारिक आदेश तक सभी शैक्षणिक सत्रों को ऑनलाइन संचालित करने का फैसला लागू किया है। इसके साथ ही प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों को नॉर्थ कैंपस स्थित गुलिस्तान-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉन को फौरन खाली करने की आखिरी चेतावनी जारी की है। प्रबंधन ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि छात्र तय समयसीमा के भीतर इस निर्देश का पालन नहीं करते हैं और धरना स्थल खाली नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

## इसका आप पर असर
जामिया मिलिया इस्लामिया में जारी विरोध प्रदर्शन और शैक्षणिक व्यवस्था में बदलाव का सीधा असर विद्यार्थियों और परिसर की सामान्य गतिविधियों पर पड़ रहा है।

- **भारत में:** केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र संघ बहाली और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर चल रही बहसों पर देश भर के छात्रों की नजर बनी हुई है। छात्र राजनीति और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े इस मुद्दे से अन्य संस्थानों में भी छात्र संघ चुनावों की मांग तेज हो सकती है।
- **दिल्ली में:** जामिया के सभी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई अगले आदेश तक पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम पर स्थानांतरित कर दी गई है। इसके चलते नियमित रूप से कैंपस जाने वाले छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों की दैनिक दिनचर्या और प्रयोगशाला कार्य प्रभावित रहेंगे।
- **छात्रों के लिए:** गुलिस्तान-ए-गालिब और गालिब लॉन में डटे आंदोलनकारियों के सामने प्रशासनिक चेतावनी के बाद निलंबन और कानूनी मुकदमों का सीधा जोखिम खड़ा हो गया है। तय समय पर परिसर खाली न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई उनके अकादमिक करियर को प्रभावित कर सकती है।
- **अभिभावकों के लिए:** परिसर में भूख हड़ताल और गतिरोध के कारण सुरक्षा चिंताओं के बीच विद्यार्थियों की नियमित कक्षाओं का संचालन घर से इंटरनेट के जरिए होगा। अभिभावकों को डिजिटल कक्षाओं के नए शैड्यूल और विश्वविद्यालय के आधिकारिक निर्देशों पर नजर रखनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
जामिया परिसर में यह तनाव प्रशासनिक आश्वासनों के बावजूद लिखित गारंटी न मिलने और छात्र संघ बहाली की स्पष्ट समयसीमा तय न होने के कारण उपजा है।

- **सीधा कारण:** प्रशासन द्वारा पूर्व में दिए गए मौखिक आश्वासनों के विपरीत छात्रों ने लिखित और पारदर्शी सहमति की मांग की है। 26 अक्टूबर को सुलह की घोषणा के बाद भी लिखित आदेश न मिलने से आक्रोश भड़क गया।
- **मुख्य मांगें:** छात्र संघ चुनाव कराने और उसके संविधान को मंजूर करने की कोई निश्चित समयसीमा प्रशासन ने घोषित नहीं की है। इसके अतिरिक्त प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग पर सहमति न बनने से विवाद और गहरा गया।
- **सहमति पर असहमति:** प्रशासन ने दावा किया था कि छात्रों ने मानहानिकारक टिप्पणियों पर माफी मांगने और सोशल मीडिया सामग्री हटाने का वादा किया है, जिसे आंदोलनकारियों ने पूरी तरह असत्य बताया।
- **आगे की स्थिति:** भूख हड़ताल शुरू होने और प्रशासन द्वारा अंतिम अल्टीमेटम जारी किए जाने से गतिरोध कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा बलों के संभावित हस्तक्षेप की ओर बढ़ रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?
छात्र मुख्य रूप से छात्र संघ की बहाली, पारदर्शी लिखित आश्वासन, तथा प्रॉक्टर और सिक्योरिटी एडवाइजर के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

### 2. भूख हड़ताल पर कौन बैठा है?
एसएफआई और जामिया के छात्र कार्यकर्ता अबूजर ने छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है।

### 3. विश्वविद्यालय प्रशासन ने कक्षाओं को लेकर क्या फैसला लिया है?
परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने अगले आदेश तक सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन मोड में चलाने का निर्णय लिया है।

### 4. प्रशासन ने प्रदर्शनकारी छात्रों को क्या चेतावनी दी है?
प्रशासन ने छात्रों को नॉर्थ कैंपस की गुलिस्तान-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉन तुरंत खाली करने की आखिरी चेतावनी दी है, अन्यथा अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

### 5. प्रशासन के किन दावों को छात्रों ने झूठा बताया है?
छात्रों ने माफी मांगने और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के प्रशासन के दावों को पूरी तरह झूठा करार दिया है।

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