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  "type": "article",
  "title": "जंतर-मंतर पर सीजेपी के धरने में पहुंचे अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, पुलिस पहरे के बीच उठाया चुनावी जवाबदेही का मुद्दा",
  "summary": "दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान जाने-माने अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज शामिल हुए। उन्होंने भारी सुरक्षा पहरे के बीच नागरिकों के वोटिंग अधिकार और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की वकालत की।",
  "content": "राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आयोजित एक राजनीतिक धरने में जानी-मानी शख्सियत ज्यां द्रेज की आमद ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी द्वारा आहूत इस विरोध प्रदर्शन स्थल पर चारों तरफ सुरक्षा बलों की कड़ी घेराबंदी थी। सख्त पुलिस बंदोबस्त के बावजूद अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज वहां पहुंचे और कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होकर अपनी आवाज बुलंद की। यूरोपीय मूल के होने के कारण आम लोग अक्सर उन्हें विदेशी समझ लेते हैं, जबकि वे लंबे समय से भारतीय नागरिक के रूप में देश के जनहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।\n\nहवाई अड्डे पर नेताओं की धरपकड़ के बाद पहुंचे धरना स्थल\nशनिवार को हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए थे जब इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके और उनके कई सहयोगी नेताओं को सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी हिरासत में ले लिया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की धरपकड़ के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध फीका पड़ जाएगा। इसके उलट, द्रेज ने स्वयं धरना स्थल पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया और नागरिक अधिकारों के प्रति अपना खुला समर्थन प्रकट किया।\n\nबेल्जियम की पृष्ठभूमि और भारतीय नागरिकता का सफर\nयूरोप के देश बेल्जियम में पैदा हुए ज्यां द्रेज दशकों पूर्व भारत आ गए थे और यहीं के समाज का अभिन्न हिस्सा बन गए। देश के प्रति अपनी गहरी निष्ठा के चलते उन्होंने वर्ष 2002 में अपनी पुरानी नागरिकता का परित्याग करते हुए औपचारिक रूप से भारत की नागरिकता अंगीकार की थी। शैक्षणिक जगत में वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स तथा रांची विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्राध्यापक के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।\n\nअर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात विद्वान अमर्त्य सेन के साथ मिलकर उन्होंने कई विचारोत्तेजक और महत्वपूर्ण शोध पुस्तकें लिखी हैं। इन कृतियों में जनसामान्य से जुड़ी भुखमरी, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा की दशा और निर्धनता निवारण के उपायों पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया गया है। विशेषकर झारखंड के सुदूर इलाकों में कमजोर तबकों के अधिकारों के लिए वे एक मुखर सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर लगातार काम करते रहे हैं।\n\nनीति निर्माण और कानूनी अधिकारों में अहम भूमिका\nभारत में ग्रामीण आजीविका को सुरक्षित करने वाली देशव्यापी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के मूल ढांचे और उसकी वैचारिक बुनियाद को तैयार करने में द्रेज का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके साथ ही वे केंद्र सरकार द्वारा गठित पूर्ववर्ती राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में बतौर सदस्य भी शामिल रहे हैं, जहां उन्होंने जनहितकारी नीतियों को शक्ल देने में मदद की थी।\n\nप्रदर्शन का मूल उद्देश्य और द्रेज का दृष्टिकोण\nजंतर-मंतर पर सीजेपी का यह जमावड़ा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से त्यागपत्र की मांग को लेकर रखा गया था। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे थे। धरना स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए द्रेज ने प्रशासन द्वारा की गई व्यापक पुलिस घेराबंदी को गैर-जरूरी बताया।\n\nउनका कहना था कि सत्ता तंत्र को किसी किस्म की हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की चिंता नहीं है, बल्कि भय इस बात का है कि अवाम अपने मताधिकार की सुरक्षा को लेकर जागरूक हो रही है। उन्होंने साफ किया कि पाबंदियों के कारण जो नागरिक कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच सके, उनके हक की बात सामने रखना बेहद जरूरी है। उनकी इस भागीदारी ने दलगत विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक जवाबदेही और व्यापक नागरिक अधिकारों की राष्ट्रीय बहस में तब्दील कर दिया।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और विरोध प्रदर्शन के बुनियादी नागरिक अधिकारों से सीधे तौर पर जुड़ी है।\n\n• भारत में: मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण पर उठ रहे सवाल देश भर के मतदाताओं के नाम दर्ज रहने या कटने की निष्पक्षता से जुड़े हैं। यदि मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों पर सार्वजनिक विमर्श बढ़ता है, तो आम नागरिकों को अपने मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा।\n• दिल्ली में: नई दिल्ली क्षेत्र और जंतर-मंतर के आसपास राजनीतिक जमावड़ों और कड़ी पुलिस निगरानी के कारण आवागमन प्रभावित हो सकता है। शहर में प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर रोक और प्रमुख नेताओं की धरपकड़ से राजधानी के सुरक्षा प्रबंध कड़े बने रह सकते हैं।\n• सामाजिक नीतियों पर: जाने-माने अर्थशास्त्री के शामिल होने से चुनावी सुधारों की मांग को बौद्धिक और नीतिगत स्तर पर व्यापक समर्थन मिल सकता है। आम जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर चल रही बहस और तेज होने की संभावना है।\n• नागरिक समाज के लिए: प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बावजूद स्वतंत्र आवाजों का आगे आना यह दिखाता है कि असहमति जताने के मंच सीमित नहीं होते। इससे आम कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने की प्रेरणा मिलती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह विरोध प्रदर्शन और अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज की भागीदारी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे विवादों और मुख्य नेताओं की धरपकड़ के कारण सामने आई।\n\n• मुख्य कारण: कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में खामियों के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था। इसी दौरान हवाई अड्डे पर सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके समेत अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया गया।\n• द्रेज की मौजूदगी की पृष्ठभूमि: अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज दशकों से लोकतांत्रिक अधिकारों, पारदर्शिता और सामाजिक जवाबदेही के पक्षधर रहे हैं। जब प्रमुख नेताओं को धरना स्थल पर आने से रोका गया, तो वे प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने और चुनावी जवाबदेही का मुद्दा उठाने खुद वहां पहुंचे।\n• प्रशासनिक कदम: पुलिस ने जंतर-मंतर को चारों तरफ से घेर रखा था ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। इसी सख्त पहरे को द्रेज ने गैर-जरूरी बताते हुए कहा कि यह लोगों की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को दबाने जैसा कदम है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ज्यां द्रेज कौन हैं?\nज्यां द्रेज बेल्जियम में जन्मे जाने-माने अर्थशास्त्री हैं, जिन्होंने 2002 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी और वे ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के प्रारूपण से जुड़े रहे हैं।\n\n2. जंतर-मंतर पर किस संगठन का प्रदर्शन चल रहा था?\nजंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था।\n\n3. सीजेपी नेताओं के साथ हवाई अड्डे पर क्या हुआ?\nसीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और अन्य नेताओं को शनिवार को आईजीआई हवाई अड्डे पर सुरक्षा बलों ने हिरासत में ले लिया था।\n\n4. सीजेपी प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या थी?\nप्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठा रहे थे।\n\n5. ज्यां द्रेज ने अमर्त्य सेन के साथ किन विषयों पर काम किया है?\nउन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के साथ मिलकर गरीबी, भुखमरी, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं।\n\n6. जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल के बारे में ज्यां द्रेज ने क्या कहा?\nउन्होंने भारी पुलिस तैनाती को अनुचित बताया और कहा कि सरकार को सुरक्षा का नहीं, बल्कि लोगों द्वारा अपने मताधिकार पर सवाल उठाने का भय है।",
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  "publishedAt": "2026-10-10",
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