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  "type": "article",
  "title": "कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम को दी 7 दिन की अंतरिम जमानत, पारिवारिक विवाह में होंगे शामिल",
  "summary": "दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने शरजील इमाम को 4 से 10 अक्टूबर तक सात दिनों की अंतरिम जमानत दी है, जिससे वह अपने चचेरे भाई-बहन के विवाह समारोहों में हिस्सा ले सकेंगे।",
  "content": "वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में बंद शरजील इमाम को राजधानी की एक स्थानीय अदालत से फौरी राहत मिली है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए उन्हें सात दिनों की सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। यह अनुमति 4 अक्टूबर से प्रभावी होकर 10 अक्टूबर तक लागू रहेगी, ताकि वह अपने परिवार के मांगलिक आयोजनों में शिरकत कर सकें।\n\nविवाह आयोजनों में शामिल होने के लिए मिली राहत\nअदालत में दायर याचिका के अनुसार, शरजील इमाम के दो चचेरे भाई-बहनों का विवाह तय हुआ है। इन पारिवारिक आयोजनों का कार्यक्रम दिल्ली के अलावा बिहार में भी आयोजित किया जा रहा है। शादी से जुड़े विभिन्न रस्मों-रिवाजों के बाद बिहार के जहानाबाद में 9 अक्टूबर को एक भव्य रिसेप्शन समारोह तय किया गया है। शरजील के वकील ने अदालत के समक्ष दलील रखी कि अलग-अलग शहरों में आयोजित हो रहे इन समारोहों में भाग लेने के लिए उन्हें कुछ दिनों की मोहलत दी जानी चाहिए, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।\n\nअवधि समाप्त होते ही लौटना होगा जेल\nअदालत के निर्देशानुसार शरजील इमाम 4 अक्टूबर से लेकर 10 अक्टूबर तक ही कारागार से बाहर रह सकेंगे। यह आदेश उनकी नियमित जमानत नहीं है, बल्कि एक अत्यंत सीमित और तयशुदा पारिवारिक कार्य के लिए दी गई फौरी रियायत है। तय समय सीमा खत्म होते ही उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में संबंधित जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। इससे पहले मार्च 2026 में भी अदालत ने उन्हें उनके भाई के निकाह में शामिल होने के लिए 10 दिनों की अंतरिम राहत प्रदान की थी।\n\nसाजिश से जुड़ा मुकदमा और यूएपीए की धाराएं\nशरजील इमाम वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित व्यापक साजिश के गंभीर मामले में आरोपी हैं। इस प्रकरण में जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए समेत कई अन्य आपराधिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर रखा है। इसी केस के चलते वह लंबे अरसे से सलाखों के पीछे हैं।\n\nहाईकोर्ट में नियमित जमानत की अर्जी पर 30 सितंबर को सुनवाई\nजहां एक ओर पारिवारिक समारोह के लिए उन्हें कुछ दिनों की अंतरिम राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर उनकी नियमित जमानत का मुख्य मामला दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है। शरजील इमाम और उमर खालिद की नियमित रिहाई से जुड़ी याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट 30 सितंबर 2026 को सुनवाई करेगा। दिल्ली पुलिस लगातार इन दोनों की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध कर रही है। इससे पूर्व जुलाई के महीने में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के एक आदेश को आधार बनाते हुए दोनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।\n\nइसका आप पर असर\nयह कानूनी फैसला रेखांकित करता है कि गंभीर आरोपों में विचाराधीन कैदियों को भी मानवीय और पारिवारिक आधार पर सीमित न्यायिक राहत मिल सकती है।\n\n• राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: देश भर के विचाराधीन मामलों में यह स्पष्ट होता है कि यूएपीए जैसे कड़े कानूनों के तहत जेल में बंद आरोपी भी विशेष पारिवारिक अवसरों के लिए अंतरिम जमानत का आग्रह कर सकते हैं। कानूनी प्रक्रियाएं कठोर होने के बावजूद अदालतें आपात या पारिवारिक आधार पर सीमित राहत का रास्ता खुला रखती हैं।\n• दिल्ली में: 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मुकदमों की सुनवाई पर अदालत का सख्त रुख कायम है क्योंकि यह नियमित रिहाई नहीं है। 30 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई नियमित जमानत की दिशा तय करेगी, जिस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।\n• आरोपी के परिवार के लिए: परिवार के सदस्यों को दिल्ली और जहानाबाद में आयोजित वैवाहिक रस्मों में आरोपी की मौजूदगी का अवसर मिला है। हालांकि, 10 अक्टूबर को तय समय सीमा पूरी होते ही उन्हें बिना किसी देरी के दोबारा आत्मसमर्पण करना होगा।\n• न्यायिक निगरानी: अंतरिम अवधि के दौरान आरोपी को अदालत द्वारा निर्धारित सख्त निगरानी और नियमों का पालन करना अनिवार्य रहता है। किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर अंतरिम राहत रद्द कर तुरंत हिरासत में भेजा जा सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा यह अंतरिम जमानत विशुद्ध रूप से पारिवारिक वैवाहिक कार्यक्रमों में शामिल होने की मानवीय प्रार्थना के आधार पर प्रदान की गई है।\n\n• पारिवारिक विवाह का आधार: आरोपी के दो चचेरे भाई-बहनों का विवाह दिल्ली तथा बिहार में आयोजित हो रहा है, जिसमें 9 अक्टूबर को जहानाबाद में रिसेप्शन भी शामिल है। वकील द्वारा कार्यक्रमों के विवरण और तिथियां पेश करने के बाद अदालत ने सीमित उपस्थिति की अनुमति दी।\n• पूर्व उदाहरण: इससे पहले भी अदालत मानवीय आधार पर ऐसी अल्पकालिक राहत दे चुकी है, जिसमें मार्च 2026 में भाई की शादी के लिए मिली 10 दिन की अंतरिम जमानत शामिल थी। पूर्व में नियमों का पालन किए जाने के ट्रैक रिकॉर्ड को भी ऐसे निर्णयों में संज्ञान में लिया जाता है।\n• नियमित जमानत से भिन्नता: अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह नियमित जमानत नहीं है क्योंकि नियमित याचिकाएं पहले जुलाई में निचली अदालत से खारिज हो चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के निर्देशों के तहत मामले की गंभीरता को देखते हुए नियमित अर्जी अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शरजील इमाम को कितने दिनों की अंतरिम जमानत मिली है?\nकड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम को 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक कुल 7 दिनों की अंतरिम जमानत दी है।\n\n2. अदालत ने उन्हें जेल से बाहर आने की अनुमति किस कारण से दी?\nउन्हें अपने दो चचेरे भाई-बहनों के विवाह समारोहों और 9 अक्टूबर को बिहार के जहानाबाद में होने वाले रिसेप्शन में शामिल होने के लिए यह राहत मिली है।\n\n3. क्या यह शरजील इमाम की नियमित जमानत है?\nनहीं, यह केवल सीमित समय के लिए दी गई अंतरिम जमानत है और अवधि समाप्त होते ही उन्हें वापस जेल लौटना होगा।\n\n4. नियमित जमानत याचिका पर अगली सुनवाई कब होगी?\nदिल्ली हाईकोर्ट में शरजील इमाम और उमर खालिद की नियमित जमानत याचिकाओं पर 30 सितंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित है।\n\n5. शरजील इमाम पर मुख्य रूप से किस मामले में मुकदमा चल रहा है?\nउन पर वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में यूएपीए सहित विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है।",
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  "category": "दिल्ली",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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    "कड़कड़डूमा कोर्ट",
    "अंतरिम जमानत",
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