महिला पुलिसकर्मियों की सुविधाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, 6 हफ्ते में मांगी थानों की पूरी रिपोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला पुलिसकर्मियों के लिए सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनों की कमी को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली पुलिस, केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है, और पुलिस आयुक्त को 6 हफ्ते में सभी थानों का सर्वे पूरा करने का निर्देश दिया है। दिल्ली की सभी पुलिस चौकियों और थानों में तैनात महिला पुलिसकर्मियों को अब सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है, और इसी मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। कोर्ट में दाखिल याचिका में महिला पुलिसकर्मियों के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं की लगातार कमी का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई की। 6 हफ्ते में पूरा करना होगा सर्वे मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि राजधानी के हर थाने में यह पता लगाया जाए कि वहां कितनी सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगी हैं और इनमें से कितनी वाकई में चालू हालत में काम कर रही हैं। इसके लिए कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को 6 हफ्ते के भीतर पूरे शहर में यह सर्वे पूरा करने का समय दिया है, ताकि असल तस्वीर सामने आ सके कि कितने थानों में यह सुविधा मौजूद ही नहीं है। स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश, अगली सुनवाई सितंबर में कोर्ट ने सिर्फ सर्वे तक ही बात सीमित नहीं रखी। दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन से यह भी कहा है कि वह एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें यह बताया जाए कि थानों में यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आगे क्या-क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी, जब अदालत के सामने पुलिस प्रशासन की रिपोर्ट भी होगी। संविधान के अनुच्छेद-21 का हवाला यह याचिका जस्टिस फॉर राइट्स एसोसिएशन नाम की संस्था ने दायर की थी। याचिका में दलील दी गई कि थानों में तैनात महिला पुलिसकर्मियों को इस तरह की बुनियादी सुविधाएं देना कोई एहसान नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत उनका हक है। संस्था ने कहा कि यह सुविधा सिर्फ स्वच्छता का मसला नहीं है, बल्कि महिला कर्मियों के सम्मान, सेहत, प्राइवेसी और काम की जगह पर मानवीय परिस्थितियों के साथ जीने के अधिकार से सीधे जुड़ी हुई है। थानों में अलग शौचालय तक नहीं, केंद्र और दिल्ली सरकार से भी मांगा जवाब याचिका में यह भी बताया गया कि दिल्ली के तमाम थानों और पुलिस इकाइयों में तैनात महिला कर्मियों को मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता सुविधाओं के साथ-साथ अलग शौचालयों की भी गंभीर कमी झेलनी पड़ रही है। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सिर्फ दिल्ली पुलिस ही नहीं, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि महिला पुलिसकर्मियों से कठिन हालात में लगातार ड्यूटी करवाई जाती है, लेकिन पीरियड्स के दौरान उन्हें जरूरी सुविधाएं तक मुहैया नहीं कराई जातीं। संस्था ने इसे महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान, निजता और सुरक्षित कार्यस्थल के अधिकार का सीधा उल्लंघन बताया। याचिका के मुताबिक, दिल्ली के सैकड़ों थानों में हजारों महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं, लेकिन सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें गिनी-चुनी जगहों पर ही उपलब्ध हैं, जिससे बड़ी संख्या में महिला कर्मियों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। इसका आप पर असर यह फैसला सीधे तौर पर दिल्ली की महिला पुलिसकर्मियों की रोजमर्रा की ड्यूटी की स्थितियों से जुड़ा है। • भारत में: अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद-21 से जोड़ा है, इसलिए यह मामला बाकी राज्यों की पुलिस फोर्स में भी महिला कर्मियों के लिए बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं को लेकर बहस छेड़ सकता है। • दिल्ली में: सर्वे और स्टेटस रिपोर्ट के बाद अगर अदालत के निर्देशों पर अमल होता है, तो दिल्ली के थानों में तैनात हजारों महिला पुलिसकर्मियों को आने वाले कुछ महीनों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन और अलग शौचालय जैसी सुविधाएं मिलनी शुरू हो सकती हैं। सवाल-जवाब 1. दिल्ली हाईकोर्ट ने किसे नोटिस जारी किया है? दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 2. सर्वे कितने समय में पूरा करना होगा? दिल्ली पुलिस आयुक्त को 6 हफ्ते के भीतर सभी थानों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनों की स्थिति का सर्वे पूरा करना होगा। 3. याचिका किसने दायर की है? यह याचिका जस्टिस फॉर राइट्स एसोसिएशन नाम की संस्था ने दायर की है। 4. याचिका में किस अनुच्छेद का हवाला दिया गया है? याचिका में संविधान के अनुच्छेद-21 का हवाला देते हुए कहा गया है कि ये सुविधाएं महिला पुलिसकर्मियों के सम्मान, सेहत और प्राइवेसी के अधिकार का हिस्सा हैं। 5. मामले की अगली सुनवाई कब होगी? मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी। 6. याचिका में और क्या समस्याएं बताई गई हैं? याचिका में कहा गया है कि थानों में महिला कर्मियों के लिए अलग शौचालयों की भी गंभीर कमी है और सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें सिर्फ कुछ ही थानों में उपलब्ध हैं। https://trendkia.com/delhi/mahila-pulisakarmiyon-ki-suvidhaon-para-delhi-high-court-sakhta-6-haphte-men-mangi-thanon-ki-puri-riporta-14081 TrendKia — Har trend, sabse pehle.