महिपालपुर में चलती बस से गिरकर जान गंवाने वाले यात्री के परिजनों को 67.4 लाख का मुआवजा दक्षिण दिल्ली में बस से उतरते समय चालक की लापरवाही के कारण जान गंवाने वाले 41 वर्षीय नैन सिंह बिष्ट के आश्रितों को दिल्ली ट्रिब्यूनल ने राहत दी है। दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर इलाके में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले यात्री के आश्रितों को न्याय मिला है। दिल्ली मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने 41 वर्षीय नैन सिंह बिष्ट की सड़क दुर्घटना में मौत के मामले में उनके परिजनों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए लगभग 67.4 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह पूरी दुर्घटना बस चालक की तेज गति और घोर लापरवाही से वाहन चलाने का सीधा परिणाम थी। दक्षिण दिल्ली में रात के वक्त हुआ था भीषण हादसा ट्रिब्यूनल के समक्ष रखे गए विवरण के अनुसार, यह घटना 14 मई 2025 को देर रात लगभग 2 बजे घटी थी। 41 वर्षीय नैन सिंह बिष्ट दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 (NH-48) पर एक बस से नीचे उतरने का प्रयास कर रहे थे। उसी दौरान बस चालक ने वाहन को पहले धीमा किया, लेकिन यात्री के पूरी तरह उतरने से पहले ही अचानक एक्सीलेटर दबाकर रफ्तार बढ़ा दी। गति में आए इस अचानक बदलाव के कारण नैन सिंह संतुलन खोकर नीचे सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद बस का बायां पिछला पहिया उनके ऊपर से निकल गया, जिससे उन्हें बेहद गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के संदर्भ में वसंत कुंज साउथ थाने की पुलिस ने प्राथमिक प्राथमिकी दर्ज की थी। पीठासीन अधिकारी शिरीष अग्रवाल ने 23 सितंबर को विस्तृत कानूनी तर्कों की समीक्षा के बाद यह आदेश पारित किया। बीमा कंपनी के तर्कों को अदालत ने किया खारिज इस मामले की सुनवाई के दौरान ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने मुआवजे की जवाबदेही से बचने के लिए कई कानूनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। बीमा कंपनी का मुख्य तर्क यह था कि मृतक की अपनी भी लापरवाही थी क्योंकि वह किसी निर्धारित बस स्टॉप के बजाय अनधिकृत स्थान पर चलती बस से उतरने की कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा बीमा कंपनी ने यह भी दावा किया कि हादसे के समय चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद नहीं था और वाहन बिना मान्य परमिट के संचालित किया जा रहा था। ट्रिब्यूनल ने इन सभी दलीलों को तथ्यहीन पाते हुए सिरे से नकार दिया। पीठासीन अधिकारी ने पाया कि रिकॉर्ड में चालक का लाइसेंस तथा बस का फिटनेस सर्टिफिकेट दोनों मौजूद थे और हादसे के दिन पूरी तरह वैध थे। यात्री पर साझी लापरवाही का आरोप नहीं टिक सका अदालत ने यह व्यवस्था दी कि यदि कोई चालक किसी यात्री के अनुरोध पर उसे घर के पास छोड़ने के लिए निर्धारित बस स्टॉप के अलावा किसी स्थान पर गाड़ी धीमी करने को तैयार होता है, तो इसके लिए यात्री को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। ट्रिब्यूनल ने कहा कि मृतक यह अनुमान नहीं लगा सकते थे कि वहां उतरने पर उनकी जान को खतरा हो सकता है। यदि चालक ने गाड़ी को पूरी तरह रोक दिया होता और उतरने की प्रक्रिया के बीच में गति न बढ़ाई होती, तो यह अनहोनी कभी नहीं होती। मामले में मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी गवाह के बयान को भी बेहद अहम माना गया। गवाह ने बताया था कि बस लगभग रुकने की अंतिम अवस्था में पहुंच चुकी थी, जिससे यह साफ होता है कि यात्री गाड़ी के पूरी तरह थमने पर ही उतरना चाहता था, लेकिन चालक की जल्दबाजी ने उसकी जान ले ली। मुआवजे की रकम और परिवार में वितरण का खाका ट्रिब्यूनल ने चालक, बस मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से इस क्षतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार ठहराया, हालांकि अंतिम भुगतान राशि जमा कराने की पूरी जिम्मेदारी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर डाली गई। निर्धारित करीब 67.4 लाख रुपये के कुल मुआवजे में ब्याज सहित आश्रितता की हानि, वैवाहिक अधिकारों से जुड़ी क्षति, संपत्ति का नुकसान और अंतिम संस्कार के मद में तय खर्च शामिल किए गए हैं। मृतक नैन सिंह बिष्ट अपने पीछे पत्नी हारु देवी बिष्ट, तीन बेटियों और एक बेटे को छोड़ गए हैं। अदालत ने आदेश दिया कि मुआवजे का 60 प्रतिशत हिस्सा पत्नी को दिया जाएगा, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि में से 10-10 प्रतिशत हिस्सा प्रत्येक बच्चे के हिस्से में आएगा। इसका आप पर असर यह फैसला स्पष्ट करता है कि सार्वजनिक परिवहन में चालकों की हड़बड़ी और लापरवाही पर बीमा कंपनियों तथा वाहन मालिकों को पूरी जवाबदेही उठानी होगी। • भारत में: यह कानूनी नजीर साबित करती है कि गैर-निर्धारित स्टॉप पर उतरते समय भी चालक द्वारा अचानक गति बढ़ाए जाने पर पीड़ित को लापरवाह नहीं माना जा सकता। इससे सड़क दुर्घटना के दावों में बीमा कंपनियों द्वारा साझी लापरवाही का बहाना बनाकर भुगतान रोकने की कोशिशों पर रोक लगेगी। • दिल्ली में: दक्षिण दिल्ली और राष्ट्रीय राजमार्गों पर रात में बस पकड़ने या उतरने वाले दैनिक यात्रियों के कानूनी अधिकारों को मजबूती मिली है। पीड़ित परिवारों को यह भरोसा मिलता है कि उचित साक्ष्यों के जरिए ट्रिब्यूनल से समय पर आर्थिक संबल हासिल किया जा सकता है। • परिजनों के लिए: मृतक के परिवार को करीब 67.4 लाख रुपये की वित्तीय सहायता सीधे प्राप्त होगी। इसमें पत्नी को 60 प्रतिशत और चारों बच्चों को 10-10 प्रतिशत राशि का विभाजन तय किया गया है। • बस चालकों के लिए: व्यावसायिक वाहन चालकों को यह चेतावनी मिलती है कि वाहन पूरी तरह रुकने से पहले आगे बढ़ाने पर कानूनी और वित्तीय परिणाम गंभीर होंगे। पुलिस थानों में दर्ज प्राथमिकी और अदालती रिकॉर्ड भविष्य में चालकों पर भी जिम्मेदारी तय करते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह दुर्घटना 14 मई 2025 की देर रात दक्षिण दिल्ली में उस समय हुई जब एक बस चालक ने यात्री के उतरते वक्त गाड़ी को पूरी तरह रोके बिना गति बढ़ा दी। ट्रिब्यूनल की विस्तृत जांच और प्रत्यक्षदर्शी के बयान से यह तथ्य साबित हुआ कि लापरवाही पूरी तरह चालक की ओर से हुई थी। • चालक की जल्दबाजी: बस चालक ने वाहन को पहले धीमा किया परंतु यात्री के सड़क पर पूरी तरह पैर रखने से पहले ही अचानक एक्सीलेटर दबा दिया। इस झटके से यात्री सड़क पर गिर पड़ा और बस का पिछला पहिया उसके ऊपर चढ़ गया। • गाड़ी का पूरी तरह न रुकना: अदालत में प्रत्यक्षदर्शी गवाह ने गवाही दी कि बस रुकने की अंतिम प्रक्रिया में थी लेकिन पूरी तरह ठहरी नहीं थी। चालक ने यात्री के उतरने का इंतजार करने के बजाय अचानक रफ्तार बढ़ा दी जिससे हादसा टल नहीं सका। • साझी लापरवाही की गैरमौजूदगी: ट्रिब्यूनल ने पाया कि यात्री अपनी सुविधा के अनुसार उतर रहा था और उसे चालक के अचानक रफ्तार बढ़ाने का कोई पूर्व अनुमान नहीं था। इसलिए इस दुर्घटना का एकमात्र कारण चालक का लापरवाह आचरण ही सिद्ध हुआ। सवाल-जवाब 1. दिल्ली ट्रिब्यूनल ने कितना मुआवजा देने का आदेश दिया? ट्रिब्यूनल ने मृतक नैन सिंह बिष्ट के परिवार को लगभग 67.4 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। 2. यह सड़क हादसा कब और कहां हुआ था? यह हादसा 14 मई 2025 को देर रात लगभग 2 बजे दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर के पास NH-48 पर हुआ था। 3. हादसे के समय नैन सिंह बिष्ट के साथ क्या हुआ था? बस से उतरते समय चालक ने अचानक गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी, जिससे वह नीचे गिर पड़े और पिछला पहिया उनके ऊपर चढ़ गया। 4. बीमा कंपनी ने क्या दलील देकर भुगतान का विरोध किया था? कंपनी ने दावा किया था कि यात्री अनधिकृत जगह पर उतर रहा था और चालक के पास वैध लाइसेंस व परमिट नहीं था। 5. ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी की आपत्तियों को क्यों खारिज किया? अदालत ने पाया कि चालक का लाइसेंस और बस की फिटनेस वैध थी, और अचानक गति बढ़ाने के लिए यात्री को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। 6. मुआवजे की राशि परिवार के सदस्यों के बीच कैसे बांटी जाएगी? कुल मुआवजे का 60 प्रतिशत हिस्सा पत्नी हारु देवी बिष्ट को मिलेगा और 10-10 प्रतिशत राशि प्रत्येक बच्चे को दी जाएगी। https://trendkia.com/delhi/mahipalpur-men-chalati-basa-se-girakara-jana-gnvane-vale-yatri-ke-parijanon-ko-67-4-lakha-ka-muavaja-45006 TrendKia — Har trend, sabse pehle.