{
  "type": "article",
  "title": "मयूर विहार से एम्स रूट पर रोजाना भीषण जाम, बारापूला फेज 3 को लेकर क्यों उठने लगे बीआरटी जैसे सवाल",
  "summary": "मयूर विहार से एम्स को जोड़ने वाले नवनिर्मित बारापूला फेज 3 एलिवेटेड कॉरिडोर पर रोज लग रहे भयंकर ट्रैफिक जाम ने लोगों को पुराने बीआरटी प्रोजेक्ट की नाकामियों की याद दिला दी है।",
  "content": "देश की राजधानी में मयूर विहार से एम्स तक निर्बाध सफर कराने के उद्देश्य से 29 सितंबर को शुरू किया गया बारापूला फेज 3 एलिवेटेड कॉरिडोर इन दिनों भारी ट्रैफिक जाम के केंद्र में आ गया है। जिस रास्ते को चालकों का कीमती समय बचाने और सिग्नल फ्री आवागमन देने के इरादे से जनता को सौंपा गया था, उसी मार्ग पर अब रोजाना गाड़ियां रेंगती नजर आ रही हैं। जो दूरी कुछ मिनटों में तय हो जानी चाहिए थी, वह अब घंटों के लंबे इंतजार में बदल चुकी है। इस एलिवेटेड सड़क पर वाहनों का दबाव इतना अनियंत्रित हो चुका है कि वाहन चालकों को पुराने पारंपरिक रास्तों की तुलना में यहां से निकलना कहीं ज्यादा महंगा और थकाऊ साबित हो रहा है। लगातार पैदा हो रही इस अव्यवस्था के बीच अब कई लोग इसकी तुलना दिल्ली के पुराने बस रैपिड ट्रांजिट यानी बीआरटी कॉरिडोर से करने लगे हैं, जो शुरुआत में तो शहर के लिए बड़ी सौगात बताया गया था लेकिन बाद में चालकों के लिए आफत बन गया था।\n\nदक्षिण दिल्ली में कैसे शुरू हुआ था बीआरटी का प्रयोग\nराजधानी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को नई गति देने के नाम पर बीआरटी प्रणाली की शुरुआत 20 अप्रैल 2008 को की गई थी। उस दौरान कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार ने दक्षिण दिल्ली इलाके में अंबेडकर नगर से मूलचंद तक करीब 5.8 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क पर इस विशेष लेन कॉरिडोर का निर्माण कराया था। वर्ष 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले तैयार किए गए इस बुनियादी ढांचे पर उस समय करीब 150 करोड़ रुपये का सरकारी खर्च आया था। इसका मुख्य मकसद सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन और बसों को प्राथमिकता देना था, ताकि वे बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार से अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।\n\nविदेशी मॉडलों से ली गई थी प्रेरणा, मकसद था बसों को रफ्तार देना\nउस दौर में दिल्ली की सड़कों पर निजी वाहनों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही थी, जिसकी वजह से प्रमुख चौराहों पर लगने वाला ट्रैफिक जाम रोजमर्रा की सबसे गंभीर समस्या बन चुका था। सड़कों पर चलने वाली सार्वजनिक परिवहन की बसें अक्सर कारों और दोपहिया वाहनों की भीड़ में फंस जाती थीं। बसों के तय समय पर न पहुंचने के कारण आम नागरिक धीरे-धीरे इनसे दूरी बनाने लगे थे। इसी संकट से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने बसों के तीव्र संचालन हेतु एक समर्पित लेन तैयार करने की योजना बनाई। योजना में बसों के अलावा साइकिल चालकों और पैदल चलने वालों के लिए भी अलग जगह सुरक्षित की गई थी।\n\nइस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए दिल्ली सरकार ने कोलंबिया के बोगोटा और ब्राजील के क्यूरिटिबा जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों के कामयाब मॉडलों से सीख ली थी। सरकार का आकलन था कि इस व्यवस्था के लागू होने से न केवल वाहनों का प्रदूषण घटेगा, बल्कि आम लोगों को एक बेहद किफायती, सुरक्षित और तेज यात्रा का विकल्प भी मिल सकेगा।\n\nडिजाइन की खामियों ने बनाया था परेशानी का सबब\nकागजों पर बेहद आकर्षक नजर आने वाला यह प्रयोग धरातल पर उतरते ही भारी परेशानियों का कारण बन गया। सबसे बड़ी दिक्कत यह आई कि बस स्टॉप सड़क के ठीक बीच में बनाए गए थे, जिसके चलते पैदल चलने वाले मुसाफिरों को सड़क पार करने में भारी जोखिम और परेशानी उठानी पड़ती थी। दूसरी तरफ, निजी गाड़ियों के लिए सड़क की चौड़ाई अचानक बेहद कम हो गई, जिससे सामान्य लेन में भीषण जाम लगने लगा। इसके अलावा, ट्रैफिक सिग्नल समुचित तालमेल के साथ काम नहीं कर रहे थे और सड़कों पर लेन अनुशासन का पालन भी नहीं हो पा रहा था। नतीजा यह हुआ कि न तो बसें ही समय पर निकल सकीं और न ही कार चालकों को राहत मिली। इस कॉरिडोर पर कई घातक हादसे भी हुए, जिनमें पैदल यात्रियों ने अपनी जान गंवा दी। लगातार बढ़ते हादसों और जाम से जनता में गुस्सा भड़क उठा और यह पूरा विवाद अदालतों की दहलीज तक पहुंच गया।\n\nआठ साल के सफर के बाद पूरी तरह तोड़ा गया कॉरिडोर\nजनता के भारी विरोध, सड़क हादसों, गलत डिजाइन और अंतहीन ट्रैफिक संकट को देखते हुए वर्ष 2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला लिया। जुलाई 2015 में दिल्ली कैबिनेट ने इसे हटाने की आधिकारिक मंजूरी दी और अंततः 2016 में इस पूरे 5.8 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को पूरी तरह से डिस्मेंटल कर दिया गया। सरकार ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि दुनिया के कई हिस्सों में सफल रहने के बावजूद दिल्ली की परिस्थितियों में यह बीआरटी मॉडल पूरी तरह नाकाम साबित हुआ था। इस तरह आठ वर्षों तक जारी रहा यह प्रयोग आखिरकार समाप्त हो गया।\n\nक्या बारापूला फेज 3 के सामने भी खड़ी है वही चुनौती\nअब बारापूला फेज 3 एलिवेटेड मार्ग पर शुरुआती दिनों से ही दिखाई दे रहे भारी जाम ने शहर के लोगों को एक बार फिर बीआरटी के पुराने दौर की याद दिला दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह नया कॉरिडोर भी उसी तरह की तकनीकी व डिजाइन संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है। हालांकि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि वे इस मार्ग पर लगातार काम कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक मार्ग की निगरानी बढ़ाई जा रही है और गूगल पर भी ट्रैफिक से जुड़े जरूरी अपडेट जारी किए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि जहां भी आवश्यकता होगी, वहां वाहनों का डायवर्जन किया जाएगा ताकि यातायात को सुचारू बनाया जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nनवनिर्मित एलिवेटेड मार्ग पर भारी ट्रैफिक जाम लगने से रोजाना सफर करने वाले मुसाफिरों की यात्रा का समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं।\n\n• भारत में: बड़े शहरी बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में प्लानिंग और ट्रैफिक प्रबंधन की कमियां पूरे देश के नगरीय नियोजन के लिए सबक पेश करती हैं। अगर एलिवेटेड कॉरिडोर पर सही डिजाइन और डायवर्जन न हो तो भारी निवेश के बावजूद जाम की समस्या हल नहीं होती।\n• दिल्ली में: मयूर विहार से एम्स और दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले दैनिक यात्रियों को इस एलिवेटेड रोड पर घंटों फंसे रहना पड़ रहा है। चालकों को सलाह दी जा रही है कि वे निकलने से पहले गूगल मैप्स पर लाइव अपडेट देखें या वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।\n• ईंधन और खर्च पर: एलिवेटेड रोड पर लगातार रेंगते ट्रैफिक की वजह से वाहनों का पेट्रोल और डीजल बेवजह जल रहा है। रोज सफर करने वाले कामकाजी लोगों की जेब पर इससे सीधा अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।\n• यातायात प्रबंधन: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अब इस रूट पर निगरानी बढ़ा रही है और आवश्यकता पड़ने पर डायवर्जन लागू करने की योजना बना रही है। आने वाले दिनों में चालकों को कुछ स्थानों पर बदले हुए ट्रैफिक रूट से गुजरना पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबारापूला फेज 3 कॉरिडोर पर भारी ट्रैफिक दबाव और डिजाइन संबंधी चुनौतियों के चलते जाम की गंभीर स्थिति बन रही है, जिसने पुराने बीआरटी प्रोजेक्ट की याद दिला दी है।\n\n• ट्रैफिक का अप्रत्याशित दबाव: मयूर विहार से दक्षिण दिल्ली की तरफ सीधे जाने वाले वाहनों की अत्यधिक संख्या एक साथ इस एलिवेटेड मार्ग पर पहुंच रही है। रास्ते के दोनों छोरों पर पर्याप्त निकासी न मिल पाने के कारण ऊपर ही वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं।\n• बीआरटी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: वर्ष 2008 में शुरू किया गया 5.8 किलोमीटर लंबा बीआरटी कॉरिडोर बीच सड़क पर बस स्टॉप और निजी वाहनों के लिए संकरी जगह होने के कारण फेल हो गया था। लगातार लगने वाले जाम, हादसों और अदालती मुकदमों के बाद 2016 में उसे पूरी तरह तोड़ दिया गया था।\n• मौजूदा कदम और समाधान: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस रूट पर सुचारू आवागमन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जहां भी जरूरत होगी वहां ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा और गूगल पर रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट उपलब्ध कराया जाएगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बारापूला फेज 3 फ्लाईओवर जनता के लिए कब खोला गया था?\nबारापूला फेज 3 एलिवेटेड कॉरिडोर को 29 सितंबर को आम जनता के यातायात के लिए खोला गया था।\n\n2. बारापूला फेज 3 कॉरिडोर किन प्रमुख इलाकों को जोड़ता है?\nयह एलिवेटेड कॉरिडोर मयूर विहार से एम्स तक सिग्नल फ्री आवागमन की सुविधा देने के लिए बनाया गया है।\n\n3. दिल्ली में पुराना बीआरटी कॉरिडोर कब और किस रूट पर शुरू हुआ था?\nबीआरटी कॉरिडोर को 20 अप्रैल 2008 को दक्षिण दिल्ली के अंबेडकर नगर से मूलचंद के बीच 5.8 किलोमीटर मार्ग पर शुरू किया गया था।\n\n4. पुराने बीआरटी कॉरिडोर के निर्माण पर कितनी लागत आई थी?\nकांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार के कार्यकाल में बने इस 5.8 किलोमीटर लंबे बीआरटी कॉरिडोर की लागत करीब 150 करोड़ रुपये थी।\n\n5. दिल्ली सरकार ने बीआरटी प्रोजेक्ट के लिए किन विदेशी शहरों से प्रेरणा ली थी?\nदिल्ली सरकार ने इस मॉडल के लिए कोलंबिया के बोगोटा और ब्राजील के क्यूरिटिबा शहर के सफल परिवहन सिस्टम से प्रेरणा ली थी।\n\n6. बीआरटी कॉरिडोर को हटाने का फैसला कब लिया गया और यह कब पूरी तरह हटा?\nआम आदमी पार्टी की सरकार ने जुलाई 2015 में इसे बंद करने की मंजूरी दी थी और 2016 में इसे पूरी तरह तोड़कर हटा दिया गया था।\n\n7. बारापूला फेज 3 के ट्रैफिक जाम को सुलझाने के लिए पुलिस क्या कदम उठा रही है?\nदिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार मार्ग की निगरानी की जा रही है, गूगल पर लाइव अपडेट दिए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक डायवर्जन किया जाएगा।",
  "url": "https://trendkia.com/delhi/mayur-vihar-se-aiims-ruta-para-rojana-bhishana-jama-barapullah-phase-3-ko-lekara-kyon-uthane-lage-brt-jaise-savala-43892",
  "category": "दिल्ली",
  "publishedAt": "2026-10-06",
  "tags": [
    "बारापूला फेज 3",
    "दिल्ली ट्रैफिक जाम",
    "बीआरटी कॉरिडोर",
    "मयूर विहार",
    "एम्स दिल्ली",
    "दिल्ली ट्रैफिक पुलिस"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}