मयूर विहार से एम्स का सफर अब बिना रुकावट, राजधानी को मिला नया बारापूला एलिवेटेड कॉरिडोर दिल्ली में सराय काले खां से मयूर विहार के बीच बारापूला फेज 3 एलिवेटेड कॉरिडोर की शुरुआत हो गई है, जिससे पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच आवागमन काफी तेज हो जाएगा। पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के बीच रोजाना सफर करने वाले मुसाफिरों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राजधानी के सबसे व्यस्त यातायात मार्गों में शुमार बारापूला एलिवेटेड कॉरिडोर के तीसरे चरण का उद्घाटन होने के साथ ही वर्षों का लंबा इंतजार खत्म हो गया है। इस नए मार्ग के शुरू होने से व्यस्त समय में चालीस मिनट में तय होने वाला सफर सिमटकर महज पंद्रह मिनट का रह जाएगा। पूरे रास्ते पर एक भी ट्रैफिक सिग्नल न होने की वजह से वाहन बिना किसी रुकावट के सीधे अपने गंतव्य की ओर निकल सकेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री ने किया नई परियोजनाओं का लोकार्पण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस नए एलिवेटेड कॉरिडोर को जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने मुकरबा चौक अंडरपास का भी औपचारिक उद्घाटन किया। कार्यक्रम के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश वर्मा तथा मंत्रिमंडल के अन्य वरिष्ठ सहयोगी मौजूद रहे। इस दौरान शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के उद्देश्य से कुल एक हजार नौ सौ इकतालीस करोड़ रुपये की चार प्रमुख विकास परियोजनाओं की सौगात दी गई, जिसमें दो नए फ्लाईओवर और लोनी अंडरपास का शिलान्यास भी शामिल रहा। मयूर विहार से एम्स तक सिग्नल मुक्त कनेक्टिविटी नवनिर्मित कॉरिडोर की मुख्य विशेषता यह है कि यह पूरी तरह सिग्नल फ्री है। चालक जब एक बार इस एलिवेटेड सड़क पर प्रवेश करेंगे, तो उन्हें बीच में किसी लाल बत्ती या चौराहे पर रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे मुख्य रूप से मेट्रो की ब्लू लाइन और येलो लाइन के रूटों पर आने-जाने वाले वाहन चालकों को सीधा लाभ पहुंचेगा। मयूर विहार से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स की ओर जाने वाले लोग भारी जाम से बचते हुए सीधे पंद्रह मिनट में अपनी दूरी पूरी कर सकेंगे। कॉरिडोर का ढांचा और प्रमुख तकनीकी पहलू यह परियोजना सराय काले खां से लेकर मयूर विहार फेज 1 तक तैयार की गई है। मुख्य एलिवेटेड हिस्से की लंबाई करीब साढ़े तीन किलोमीटर है, जबकि प्रवेश और निकास के लिए बनाए गए रैंप और लूप को जोड़ने पर इसकी कुल लंबाई करीब पांच किलोमीटर बैठती है। पहले से संचालित बारापूला कॉरिडोर के साथ जुड़ जाने के बाद इस पूरे मार्ग की कुल सिग्नल मुक्त दूरी करीब नौ किलोमीटर हो जाती है। यह संयोजन रिंग रोड और उससे सटे इलाकों के दबाव को काफी कम कर देगा। लागत और निर्माण के दौरान आईं रुकावटें इस पूरे फ्लाईओवर ढांचे को तैयार करने में लगभग एक हजार छह सौ पैंतीस करोड़ रुपये की लागत आई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव वर्ष 2015 में रखी गई थी और प्राथमिक लक्ष्य के अनुसार इसे वर्ष 2017 तक बनकर तैयार होना था। हालांकि विभिन्न प्रशासनिक और पर्यावरणीय बाधाओं की वजह से इसे पूरा होने में नौ से ग्यारह साल का लंबा वक्त लग गया। निर्माण कार्य के दौरान वन विभाग से मिलने वाली अनिवार्य अनुमतियों में अड़चनें आईं, मध्यस्थता से जुड़े कानूनी विवाद खड़े हुए और कोविड महामारी के चलते जमीनी काम कई महीनों तक पूरी तरह ठप रहा। अब तमाम अड़चनों को पार कर यह सड़क पूरी तरह वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दी गई है। इसका आप पर असर बारापूला फेज 3 के शुरू होने से दैनिक यात्रियों के सफर का समय आधे से भी कम हो जाएगा और ईंधन की बचत होगी। • दिल्ली में: मयूर विहार से एम्स के बीच चालीस मिनट की यात्रा अब सिर्फ पंद्रह मिनट में पूरी होगी। इससे आश्रम और सराय काले खां के आसपास लगने वाले भारी जाम से रोजाना निकलने वाले हजारों कामकाजी लोगों को सीधी राहत मिलेगी। • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में: पूर्वी दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से दक्षिणी दिल्ली जाने वाले वाहन चालकों को सिग्नल मुक्त मार्ग मिलेगा। इसके अलावा लोनी अंडरपास और दो नए प्रस्तावित फ्लाईओवर बनने से सीमावर्ती इलाकों में आवागमन सुगम होगा। • मरीजों और तीमारदारों के लिए: पूर्वी हिस्से से एम्स अस्पताल जाने वाली एंबुलेंस और गंभीर मरीजों को बिना किसी लाल बत्ती के तेज रास्ता मिलेगा। इससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में लगने वाले महत्वपूर्ण मिनटों की बचत होगी। • ईंधन और पर्यावरण पर असर: बार-बार रुकने और चलने वाले ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलने से गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल की खपत घटेगी। सुचारु रूप से गाड़ियां चलने से रिंग रोड के आसपास वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी। ऐसा क्यों हुआ इस बुनियादी ढांचा परियोजना को पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच बढ़ते वाहनों के दबाव को खत्म करने और रिंग रोड पर लगने वाले भारी जाम को समाप्त करने के लिए तैयार किया गया था। निर्माण कार्य में कई तकनीकी, प्रशासनिक और पर्यावरणीय पेच फंसने के कारण इसके पूरा होने में तय समय से लंबा समय लगा। • बढ़ता ट्रैफिक दबाव: सराय काले खां और आश्रम के आसपास हर दिन हजारों वाहनों के फंसने से सफर में चालीस मिनट से अधिक लग रहे थे। इस गंभीर जाम को बाईपास करने के लिए सिग्नल मुक्त एलिवेटेड मार्ग तैयार करने का फैसला लिया गया। • अनुमतियों और विवादों में देरी: योजना 2015 में शुरू हुई थी और इसे 2017 में पूरा होना था, लेकिन वन विभाग से पेड़ काटने और जमीन की मंजूरी मिलने में देरी हुई। इसके साथ ही निर्माण एजेंसियों के बीच मध्यस्थता और वित्तीय विवादों के चलते फाइलें लंबे समय तक अटकी रहीं। • वैश्विक महामारी का प्रभाव: कोविड-19 महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन लगने से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया था। इसके बाद मजदूरों की कमी और सामग्री आपूर्ति प्रभावित होने से समयसीमा कई साल आगे खिसकती चली गई। • आगामी योजनाएं: सरकार ने इस क्षेत्र के समग्र ट्रैफिक को व्यवस्थित करने के लिए मुकरबा चौक अंडरपास और लोनी अंडरपास जैसी परियोजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाया है। इससे पूरे शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर एक समान गतिशीलता सुनिश्चित की जा सकेगी। सवाल-जवाब 1. बारापूला फेज 3 एलिवेटेड कॉरिडोर कहां से कहां तक बना है? यह नया कॉरिडोर सराय काले खां से मयूर विहार फेज 1 तक बनाया गया है, जो पुराने बारापूला मार्ग से जुड़ता है। 2. इस नए मार्ग से मयूर विहार से एम्स जाने में कितना समय लगेगा? इस सिग्नल फ्री एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए मयूर विहार से एम्स का सफर महज पंद्रह मिनट में पूरा हो जाएगा, जिसमें पहले चालीस मिनट लगते थे। 3. इस कॉरिडोर की कुल लंबाई कितनी है? मुख्य एलिवेटेड हिस्सा करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबा है, जबकि लूप और रैंप मिलाकर यह करीब पांच किलोमीटर का है। पूरे पुराने मार्ग को मिलाकर सिग्नल मुक्त दूरी करीब नौ किलोमीटर हो जाती है। 4. बारापूला फेज 3 परियोजना की कुल लागत कितनी आई है? इस पूरे फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगभग एक हजार छह सौ पैंतीस करोड़ रुपये की लागत आई है। 5. इस एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन किसने किया? केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस परियोजना का उद्घाटन किया, जहां दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा भी उपस्थित थे। 6. यह परियोजना अपने तय समय 2017 से इतनी लेट क्यों हुई? परियोजना में वन विभाग की मंजूरी में अड़चनें, कानूनी मध्यस्थता और कोविड महामारी के दौरान काम रुकने की वजह से नौ से ग्यारह साल की देरी हुई। https://trendkia.com/delhi/mayura-vihara-se-aiims-ka-saphara-aba-bina-rukavata-rajadhani-ko-mila-naya-barapullah-eliveteda-koridora-39995 TrendKia — Har trend, sabse pehle.