# म्यांमार ड्रोन मामले में अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को कोर्ट से मिली वतन वापसी की अस्थायी छूट

> दिल्ली की विशेष अदालत ने छह महीने तक जेल में बंद रहने के बाद अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को कड़ी शर्तों के साथ 30 दिनों के लिए अपने देश जाने की इजाजत दी है।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/myanmara-drona-mamale-men-us-aura-6-ukrainian-nagarikon-ko-court-se-mili-vatana-vapasi-ki-asthayi-chhuta-38178 · **Language:** Hindi
**Tags:** विशेष एनआईए अदालत, मैथ्यू वैनडाइक, राउज एवेन्यू कोर्ट, तिहाड़ जेल, म्यांमार ड्रोन केस, विदेशी नागरिक

म्यांमार से जुड़े संदिग्ध ड्रोन प्रशिक्षण विवाद में फंसे विदेशी नागरिकों को दिल्ली स्थित विशेष अदालत ने बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। छह महीने तक सलाखों के पीछे रहने के बाद अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक समेत यूक्रेन के छह नागरिकों को अपने परिवारों से मिलने के लिए एक महीने की अवधि तक स्वदेश लौटने की मंजूरी मिल चुकी है। अदालत का यह आदेश संबंधित मुसाफिरों द्वारा भारत से अपनी-अपनी उड़ानों में सवार होने के दिन से ठीक एक माह के लिए प्रभावी माना जाएगा।

## संवैधानिक स्वतंत्रता और यात्रा दस्तावेजों की वापसी का फैसला
राउज एवेन्यू परिसर में कार्यरत विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की पीठ ने मामले की समीक्षा करते हुए स्पष्ट टिप्पणी की कि सीमाओं से परे यात्रा करने का अधिकार भारतीय संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों के दायरे का ही अभिन्न हिस्सा है। इसी आधार पर अदालत ने अभियुक्तों की याचिका को स्वीकार करते हुए उनके जब्त पासपोर्ट वापस सौंपने के निर्देश जारी किए। तिहाड़ जेल से रिहाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी को अपने वतन रवाना होने का रास्ता साफ हुआ है, क्योंकि वे पहले ही वैधानिक डिफॉल्ट जमानत हासिल करने में सफल रहे थे।

## वापसी की सख्त मियाद और अनिवार्य रिपोर्टिंग की समयसीमा
अदालत द्वारा दी गई यह छूट पूर्णतया अस्थायी है और इसके साथ कई कड़े कानूनी बंधन जोड़े गए हैं। आदेश के प्रावधानों के मुताबिक, निर्धारित तीस दिनों की अवधि समाप्त होते ही सभी सातों व्यक्तियों को भारत की धरती पर लौटना अनिवार्य होगा। दिल्ली लौटने के बाद ठीक 72 घंटों की तय मोहलत के भीतर उन्हें न्यायिक पीठ के समक्ष अपनी वापसी की आधिकारिक सूचना दर्ज करानी होगी, ताकि कानूनी रिकॉर्ड अद्यतन रह सके।

## जांच एजेंसी के समक्ष हाजिरी और संपर्क साधनों का ब्योरा
मामले की पड़ताल कर रही केंद्रीय एजेंसी जब भी इन विदेशी नागरिकों को पूछताछ या साक्ष्य जुटाने के लिए तलब करेगी, तब उन्हें अनिवार्य रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। यह उपस्थिति स्थिति की गंभीरता के अनुसार सशरीर अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनिश्चित की जा सकती है। इसके अलावा, आदेश पारित होने के 24 घंटों के भीतर प्रत्येक अभियुक्त को अपना मौजूदा ठिकाना, सक्रिय मोबाइल नंबर और ई-मेल पता जांच अधिकारियों को साझा करना होगा। यदि किसी के पास तुरंत चालू सिम कार्ड उपलब्ध न हो, तो वे परिवार के किसी सदस्य का संपर्क सूत्र दे सकते हैं, लेकिन अपने मुल्क पहुंचने के सात दिनों के भीतर उन्हें अपना निजी सक्रिय नंबर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा।

## अभियोजन पक्ष का रुख और जांच की मौजूदा स्थिति
अदालती सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी और अधिवक्ता अमित रोहिला उपस्थित हुए। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि पूरे प्रकरण में छानबीन का काम अभी बंद नहीं हुआ है और अनुसंधान लगातार जारी है। हालांकि, जांच टीम ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान चरण में इन सातों व्यक्तियों की भौतिक उपस्थिति तुरंत अपेक्षित नहीं है। एजेंसी के वकीलों ने सुझाव दिया कि आरोपियों से आवश्यक औपचारिक वचनपत्र और लिखित आश्वासन लेकर उन्हें जाने दिया जा सकता है, जिसके बाद कोर्ट ने आवेदन स्वीकार कर लिया।

## इमिग्रेशन कानून के तहत वैनडाइक को मिली अतिरिक्त रियायत
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक के पक्ष में अलग से पैरवी करते हुए अधिवक्ता रोहित दंडरियाल और रोहित गौर ने आव्रजन तथा विदेशी नागरिक कानून से जुड़े विशिष्ट आरोपों से राहत देने के लिए एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। बचाव पक्ष के वकीलों ने 18 सितंबर को संपन्न हुए निपटारे की विधिक स्थिति सामने रखी, जिसके आधार पर अदालत ने उन आरोपों को समाप्त करने की अर्जी को भी स्वीकृति दे दी। विदेशी नागरिकों को अपने गृह देश जाने की अनुमति देने वाला यह व्यापक न्यायिक आदेश 24 सितंबर को जारी किया गया था।

## इसका आप पर असर
यह अदालती आदेश भारत में विदेशी नागरिकों के मौलिक अधिकारों और न्यायिक प्रक्रियाओं के कड़े नियमों को रेखांकित करता है।

- **कानूनी नजीर:** अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत विदेश यात्रा का अधिकार बुनियादी स्वतंत्रता का हिस्सा है। इससे भविष्य में समान कानूनी मामलों में जमानत और पासपोर्ट वापसी के लिए विधिक मिसाल कायम होती है।
- **सुरक्षा प्रोटोकॉल:** राहत मिलने के बावजूद अभियुक्तों पर डिजिटल निगरानी और 72 घंटे की रिपोर्टिंग जैसी कठोर शर्तें लागू रहेंगी। यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में जांच एजेंसियों की पहुंच को कमजोर किए बिना मानवीय राहत दी जा सकती है।
- **वैधानिक अधिकार:** समयसीमा में आरोप पत्र दाखिल न होने पर मिलने वाली डिफॉल्ट जमानत के महत्व की पुष्टि होती है। इससे विचाराधीन बंदियों के अधिकारों की न्यायिक रक्षा सुनिश्चित होती है।
- **प्रशासनिक समन्वय:** विदेशी नागरिकों के पते और फोन नंबरों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सत्यापन अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था जांच एजेंसियों के लिए विदेशी अभियुक्तों की निगरानी का मानक खाका प्रस्तुत करती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अदालती आदेश आरोपियों की लंबी न्यायिक हिरासत, डिफॉल्ट जमानत और जांच एजेंसी द्वारा तत्काल शारीरिक उपस्थिति की आवश्यकता न जताने के कारण संभव हुआ।

- **डिफॉल्ट जमानत का आधार:** सातों विदेशी आरोपी पिछले छह महीने से तिहाड़ जेल में बंद थे और उन्हें कानूनी नियमों के तहत पहले ही वैधानिक जमानत मिल चुकी थी। न्यायिक हिरासत की समयसीमा पूरी होने के कारण वे कानूनी रूप से रिहाई के हकदार थे।
- **जांच में तात्कालिक आवश्यकता का अभाव:** केंद्रीय एजेंसी ने अदालत में स्पष्ट किया कि मामले की छानबीन जारी होने के बावजूद इन व्यक्तियों की तत्काल व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है। अभियोजन पक्ष द्वारा विरोध न किए जाने से अदालत का रास्ता सुगम हो गया।
- **संवैधानिक अधिकार की व्याख्या:** अदालत ने माना कि परिवार से मिलने के लिए विदेश यात्रा करना बुनियादी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विस्तार है। इसी आधार पर अभियुक्तों के जब्त पासपोर्ट लौटाने और एक माह की अस्थायी छूट देने का निर्णय लिया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. कोर्ट ने किन विदेशी नागरिकों को स्वदेश जाने की अनुमति दी है?
अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और यूक्रेन के छह नागरिकों को अपने-अपने देश जाने की इजाजत दी है।

### 2. यह यात्रा छूट कितने दिनों के लिए मान्य होगी?
यह अनुमति संबंधित उड़ान पर सवार होने की तारीख से एक महीने की अवधि तक प्रभावी रहेगी।

### 3. वापस लौटने के बाद आरोपियों को क्या करना होगा?
भारत लौटने के 72 घंटे के भीतर सभी सातों आरोपियों को अदालत को अपनी आमद की सूचना देनी होगी।

### 4. विदेश में रहने के दौरान जांच में शामिल होने के लिए क्या निर्देश हैं?
जब भी जांच एजेंसी बुलाएगी, उन्हें व्यक्तिगत तौर पर या वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जांच में शामिल होना पड़ेगा।

### 5. यह फैसला किस अदालत और किस न्यायाधीश द्वारा सुनाया गया?
यह फैसला दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश प्रशांत शर्मा द्वारा सुनाया गया।

### 6. मैथ्यू वैनडाइक को इमिग्रेशन कानून में क्या राहत मिली?
18 सितंबर को हुए समझौते के आधार पर कोर्ट ने वैनडाइक को इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट के कुछ आरोपों से मुक्त कर दिया।

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