# नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह नवंबर में करेंगे नई दिल्ली का दौरा, नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय वार्ता संभव

> नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह नवंबर के उत्तरार्ध में तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत आ सकते हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे, ऊर्जा परियोजनाओं, सीमा मामलों और बाढ़ राहत पुनर्निर्माण पर उच्चस्तरीय बातचीत होगी।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/nepala-ke-pradhanamntri-balen-shah-navnbara-men-karenge-new-delhi-ka-daura-narendra-modi-se-dvipakshiya-varta-snbhava-47820 · **Language:** Hindi
**Tags:** बालेन शाह, नरेंद्र मोदी, भारत नेपाल संबंध, द्विपक्षीय वार्ता, जलविद्युत परियोजनाएं, कालापानी विवाद, नेपाल बाढ़ राहत, एनएचपीसी

नेपाल में सरकार की कमान संभालने के करीब आठ महीने बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह (बालेंद्र शाह) अपने पहले आधिकारिक द्विपक्षीय विदेश दौरे पर भारत आने की तैयारी में हैं। दोनों देशों के राजनयिक गलियारों में चल रही बातचीत के तहत यह तीन दिवसीय यात्रा नवंबर के तीसरे अथवा चौथे सप्ताह में प्रस्तावित की गई है। इस यात्रा के दौरान बालेन शाह नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस शिखर वार्ता में सीमा पार कनेक्टिविटी, प्रमुख बुनियादी ढांचा योजनाओं, जलविद्युत उत्पादन, सीमा विवादों के समाधान और हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं के बाद पुनर्निर्माण सहयोग जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श होने की प्रबल संभावना है।

द्विपक्षीय तंत्र से जुड़े दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन सभी परियोजनाओं की सूची साझा की है जिनका उद्घाटन या आधारशिला इस प्रस्तावित यात्रा के दौरान रखी जा सकती है। यद्यपि दोनों सरकारों की ओर से अभी तक यात्रा की विशिष्ट औपचारिक तारीखों की घोषणा नहीं की गई है, परंतु प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। राजनयिक प्राथमिकताओं के लिहाज से बालेन शाह का यह दौरा दोनों पड़ोसी मुल्कों के भविष्य के समीकरणों की रूपरेखा तय करने वाला माना जा रहा है।

## पारंपरिक कूटनीति की राह पर बालेन शाह का फैसला
नेपाल के राजनीतिक इतिहास में नव-निर्वाचित प्रधानमंत्रियों के लिए पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के रूप में भारत का चयन करना एक सुदीर्घ पारंपरिक व्यवस्था रही है। हालांकि विगत वर्षों में कुछ नेताओं ने इस स्थापित परिपाटी से भिन्न मार्ग चुना था। वर्ष 2008 में पुष्प कमल दहल प्रचंड ने प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा चीन की थी। इसके उपरांत दिसंबर 2024 में सत्ता में पुनर्वापसी के पश्चात केपी शर्मा ओली ने भी अपने पहले विदेशी गंतव्य के रूप में चीन को प्राथमिकता दी थी। इस पृष्ठभूमि में बालेन शाह द्वारा अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा के लिए भारत को चुनना एक बड़ा कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।

मार्च महीने में पदभार ग्रहण करने वाले बालेन शाह इससे पहले सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र में सहभागिता के लिए अमेरिका गए थे। परंतु बहुपक्षीय सम्मेलनों से इतर द्विपक्षीय स्तर पर नई दिल्ली का यह प्रस्तावित दौरा उनका पहला आधिकारिक पड़ाव होगा। अपने कार्यकाल के आरंभिक दौर में बालेन शाह विदेशी राजनयिकों के साथ सीधी मुलाकातों के संदर्भ में काफी संयमित रहे थे। इसके बाद उन्होंने भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग संवाद स्थापित किया। अगस्त के महीने में बालेन शाह ने भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ अपनी पहली व्यक्तिगत राजनयिक बैठक आयोजित की थी, जिसने उच्चस्तरीय संपर्कों का मार्ग प्रशस्त किया।

## विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और नए समझौतों की रूपरेखा
प्रस्तावित शिखर वार्ता के केंद्र में भारत के आर्थिक व तकनीकी सहयोग से नेपाल में संचालित अनेक विकास योजनाओं की प्रगति रहेगी। दोनों नेताओं की उपस्थिति में पनौती स्थित नेपाल पुलिस अकादमी, उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे भैरहवा इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट तथा पश्चिमी नेपाल के दार्चुला जिले में निर्मित आधुनिक पुलों के आधिकारिक उद्घाटन की तैयारी है। इसके अतिरिक्त महाकाली नदी पर आवागमन सुगम बनाने वाले नए पुलों से जुड़े प्रोजेक्ट भी औपचारिक एजेंडे में शामिल रहेंगे।

कनेक्टिविटी और व्यापारिक सुविधाओं के विस्तार हेतु डोधारा चांदनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट की आधारशिला, लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना के क्रियान्वयन और सिलीगुड़ी-झापा पेट्रोलियम पाइपलाइन निर्माण के औपचारिक शुभारंभ पर भी दोनों पक्षों की सहमति बन सकती है। ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को गति देने के लिए भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनएचपीसी से संबंधित 750 मेगावाट की वेस्ट सेती, 480 मेगावाट की फुकोट कर्णाली और 450 मेगावाट क्षमता वाली सेती नदी-6 जलविद्युत परियोजनाओं पर भी गहन चर्चा होने की संभावना है। द्विपक्षीय वार्ता में कोशी नदी से जुड़े नियामक कार्य, प्रस्तावित अयोध्या-जनकपुर रेल संपर्क और नेपाल की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विकास योजनाओं में तकनीकी मदद के प्रस्तावों पर भी विचार किया जा सकता है।

## अनसुलझे सीमा विषय और व्यापार असंतुलन की चुनौतियां
भारत और नेपाल के पारस्परिक संबंधों में व्यापक विकास साझेदारी के साथ-साथ कुछ जटिल और संवेदनशील मुद्दे भी विद्यमान हैं। वार्ता की मेज पर कालापानी-लिपुलेख क्षेत्र से संबंधित सीमा मतभेद, नेपाल के नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्ग, लगातार बढ़ता व्यापार असंतुलन और पारगमन व्यवस्था के नवीनीकरण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की अपेक्षा की जा रही है।

नेपाल के विदेश मंत्रालय से जुड़े उच्चाधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के मध्य सीमा प्रबंधन, नए हवाई मार्गों की उपलब्धता और व्यापारिक असंतुलन को पाटने जैसे गंभीर मसलों पर रचनात्मक बातचीत अत्यंत आवश्यक है। दशैं पर्व की समाप्ति के तत्काल बाद दोनों राजधानियों में इस यात्रा के एजेंडे को अंतिम रूप देने के लिए बहुस्तरीय परामर्श प्रक्रिया तेज की गई। इसके अतिरिक्त दोनों देशों के बीच दशकों से अनिर्णीत पड़ी पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना को पुनर्जीवित करने पर भी जोर दिया जा सकता है। क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी विश्वास के लिए सीमा मामलों पर किसी ठोस प्रगति को इस यात्रा की एक प्रमुख कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जाएगा।

## आपदा उपरांत पुनर्निर्माण और वित्तीय सहयोग की दरकार
प्राकृतिक आपदाओं के समय दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग का एक मजबूत इतिहास रहा है। नेपाल में 26 अगस्त को भोतेकोशी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ के तुरंत बाद भारत सरकार ने त्वरित बचाव एवं राहत अभियान में उल्लेखनीय सहयोग दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से बालेन शाह से वार्तालाप कर भारत की ओर से संपूर्ण मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का वचन दिया था। इस आपदा के उपरांत भारत ने 130 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई और खोज, बचाव तथा फोरेंसिक कार्यों में सहयोग देने के लिए 54 विशेषज्ञ नेपाल में तैनात किए थे।

बालेन शाह ने 2 सितंबर को नेपाल की संसद को संबोधित करते हुए भारत सहित उन सभी राष्ट्रों का सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया था जिन्होंने आपदा के समय सहायता प्रदान की थी। अब नेपाल बाढ़ के कारण तबाह हुई प्रमुख सड़कों, पुलों और जलविद्युत संयंत्रों के पुनर्निर्माण हेतु भारत सरकार से वित्तीय अनुदान तथा रियायती ऋण सहायता की उम्मीद कर रहा है। वित्तीय सहयोग के इसी खाके को आगे बढ़ाने के लिए नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले पूर्व में ही नई दिल्ली आकर संबंधित मंत्रालयों के साथ प्रारंभिक बातचीत कर चुके हैं।

## भावी कूटनीति और क्षेत्रीय साझेदारी का नया दौर
बालेन शाह की यह प्रस्तावित भारत यात्रा ऐसे समय में घटित हो रही है जब दोनों देश अपने पारंपरिक रिश्तों को आधुनिक आर्थिक, ऊर्जा और डिजिटल साझेदारी में रूपांतरित करना चाहते हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 30 सितंबर को दिए अपने बयान में स्पष्ट किया था कि दोनों ही देश प्रधानमंत्री बालेन शाह की इस यात्रा को ठोस नतीजों पर आधारित और सार्थक बनाने के लिए उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं।

सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने संबोधन में बालेन शाह ने भारत, नेपाल और चीन के मध्य एक साझा जलवायु सहयोग तंत्र स्थापित करने का अभिनव विचार प्रस्तुत किया था। उन्होंने विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में निवास करने वाले सीमांत समुदायों की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रेखांकित किया था। अब नई दिल्ली की इस प्रस्तावित यात्रा में दोनों पक्षों की कूटनीतिक परिपक्वता इस बात पर परखी जाएगी कि बालेन शाह की क्षेत्रीय नीतियां और भारत के साथ रणनीतिक प्राथमिकताएं किस प्रकार ठोस समझौतों और दीर्घकालिक परियोजनाओं का रूप लेती हैं।

## इसका आप पर असर
नेपाल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच सीमा पार व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और बुनियादी संपर्क में तेजी आने की उम्मीद है।

- **व्यापार और यात्रा:** भैरहवा और डोधारा चांदनी चेक पोस्ट के विस्तार से सीमा पार माल ढुलाई और आवागमन सुगम होगा। इससे दोनों देशों के सीमावर्ती व्यापारियों और यात्रियों को औपचारिक सुविधाओं का त्वरित लाभ मिलेगा।
- **ऊर्जा आपूर्ति:** वेस्ट सेती, फुकोट कर्णाली और लोअर अरुण जैसी परियोजनाओं में प्रगति से क्षेत्रीय बिजली ग्रिड मजबूत होगा। इससे स्वच्छ जलविद्युत का उत्पादन बढ़ेगा और औद्योगिक इकाइयों को निर्बाध बिजली उपलब्ध हो सकेगी।
- **कनेक्टिविटी:** प्रस्तावित अयोध्या-जनकपुर रेल संपर्क और दार्चुला पुलों के चालू होने से धार्मिक पर्यटन को गति मिलेगी। श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक कम समय और कम खर्च में सीमा पार यात्रा कर सकेंगे।
- **आपदा प्रबंधन:** भोतेकोशी बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण से सीमावर्ती परिवहन मार्ग पुनः सुरक्षित होंगे। इससे स्थानीय निवासियों को आवश्यक वस्तुओं और आपातकालीन सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह यात्रा पारंपरिक कूटनीतिक निरंतरता को बहाल करने और दोनों देशों के बीच अटकी परियोजनाओं को वित्तीय व रणनीतिक गति प्रदान करने के उद्देश्य से की जा रही है।

- **कूटनीतिक प्राथमिकता:** पूर्ववर्ती कुछ प्रधानमंत्रियों द्वारा पहले चीन की यात्रा करने के बाद बालेन शाह ने भारत को अपना पहला द्विपक्षीय पड़ाव चुनकर ऐतिहासिक संबंधों को तरजीह दी है। इससे नई दिल्ली के साथ विश्वास बहाली का अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है।
- **बुनियादी ढांचे की अनिवार्यता:** सीमा चौकियों, पेट्रोलियम पाइपलाइनों और जलविद्युत संयंत्रों के निर्माण में भारतीय निवेश की केंद्रीय भूमिका है। इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए दोनों शीर्ष नेताओं की सीधी सहमति आवश्यक मानी जा रही है।
- **प्राकृतिक आपदा से उपजी जरूरत:** अगस्त में भोतेकोशी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ के बाद नेपाल को पुनर्निर्माण के लिए बाहरी वित्तीय सहायता की दरकार है। भारत द्वारा दिए गए त्वरित राहत सहयोग के बाद अब दीर्घकालिक ऋण और अनुदान सहायता पर औपचारिक सहमति बनानी है।

## सवाल-जवाब

### 1. नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की भारत यात्रा कब प्रस्तावित है?
बालेन शाह की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा नवंबर के तीसरे या चौथे सप्ताह में प्रस्तावित है।

### 2. बालेन शाह नेपाल के प्रधानमंत्री कब बने थे?
बालेन शाह मार्च में नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे।

### 3. इस यात्रा के दौरान किन प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन हो सकता है?
पनौती स्थित नेपाल पुलिस अकादमी, भैरहवा इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और पश्चिमी नेपाल के दार्चुला जिले में पुलों के उद्घाटन की संभावना है।

### 4. ऊर्जा क्षेत्र में किन जलविद्युत परियोजनाओं पर चर्चा होगी?
वार्ता में 750 मेगावाट की वेस्ट सेती, 480 मेगावाट की फुकोट कर्णाली, 450 मेगावाट की सेती नदी-6 और लोअर अरुण परियोजना पर चर्चा होने की संभावना है।

### 5. नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ के दौरान भारत ने क्या सहायता दी थी?
भारत ने 130 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी थी और राहत व फोरेंसिक कार्यों के लिए 54 विशेषज्ञों की टीम तैनात की थी।

### 6. सीमा संबंधी किन विवादों पर बातचीत होने की संभावना है?
दोनों देशों के बीच कालापानी-लिपुलेख सीमा विवाद, अतिरिक्त हवाई मार्ग और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हो सकता है।

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