नेताजी सुभाष प्लेस से चल रहे फर्जी वीजा सिंडिकेट पर शिकंजा, इजरायल और इराक में नौकरी के नाम पर ठगे 46 लोग दिल्ली में खाड़ी और पश्चिमी एशियाई देशों में नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठने वाले एक बड़े वीजा फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने नेताजी सुभाष प्लेस स्थित दफ्तर से काम कर रहे दो मुख्य आरोपियों को दबोचकर भारी मात्रा में पासपोर्ट, सोना और नकदी संबंधी दस्तावेज जब्त किए हैं। रोजगार की तलाश में खाड़ी और पश्चिम एशिया का रुख करने वाले युवाओं को निशाना बनाने वाले एक अंतरराज्यीय वीजा गिरोह का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। नेताजी सुभाष प्लेस इलाके में स्थित एक वाणिज्यिक परिसर से संचालित हो रही एक फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए कम से कम 46 बेरोजगार लोगों को इजरायल और इराक में आकर्षक नौकरियों का झूठा सब्जबाग दिखाकर भारी रकम ऐंठ ली गई थी। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए इस सिंडिकेट के सरगना समेत दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से दर्जनों पासपोर्ट, सोने के सिक्के, आभूषण, डिजिटल उपकरण और फर्जी मोहरें बरामद की गई हैं। जन सुनवाई में खुली थी धांधली की पोल इस पूरे गोरखधंधे की परतें तब खुलीं जब ठगी का शिकार हुए पीड़ितों ने सुभाष प्लेस थाने में आयोजित जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान अपनी आपबीती अधिकारियों के सामने रखी। पीड़ितों ने लिखित शिकायत में बताया कि एक निजी कंसल्टेंसी फर्म ने उनसे विदेश में काम दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूल ली, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो उन्हें वीजा मिला और न ही रोजगार। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद तकनीकी निगरानी, बैंक खातों के फॉरेंसिक ऑडिट और डिजिटल ट्रेल के सहारे जांच का दायरा बढ़ाया गया। वित्तीय कड़ियों का मिलान करते हुए पुलिस टीम ने उस गुप्त ठिकाने की पहचान कर ली जहां से यह पूरा नेटवर्क चलाया जा रहा था। देश के हिसाब से तय थी ठगी की दरें पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बाकायदा नेताजी सुभाष प्लेस में डायनेमिक ओवरसीज नाम से एक दफ्तर खोलकर बैठे थे ताकि ग्राहकों को यह एक वास्तविक और पंजीकृत एजेंसी लगे। पूछताछ और दस्तावेजों की छानबीन से खुलासा हुआ कि आरोपियों ने अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग रेट कार्ड तय कर रखे थे। इजरायल में काम दिलाने और वहां का वीजा जारी करवाने के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 1.70 लाख रुपये वसूले जाते थे, जबकि इराक भेजने के लिए प्रत्येक व्यक्ति से 70 हजार रुपये ऐंठे जाते थे। विदेशी धरती पर अच्छी तनख्वाह मिलने की उम्मीद में कई जरूरतमंद परिवारों ने अपनी जमापूंजी इन ठगों के हवाले कर दी थी। पुलिस अब पीड़ितों को दी गई फर्जी रसीदों और भुगतान रिकॉर्ड का गहन मिलान कर रही है ताकि धोखाधड़ी के कुल वित्तीय आकार का सटीक आकलन किया जा सके। सोने के सिक्के और इलेक्ट्रॉनिक साजो-सामान जब्त छापेमारी के दौरान पुलिस ने गिरोह के 45 वर्षीय मुख्य संचालक अबीर पोइलान को गिरफ्तार किया, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। तलाशी के दौरान उसके पास से 31 ग्राम सोने के सिक्के मिले, जिनके बारे में संदेह है कि वे पीड़ितों से ऐंठी गई रकम से खरीदे गए थे। इसके अतिरिक्त मौके से 19 पासपोर्ट, पांच मोबाइल हैंडसेट, तीन डेस्कटॉप कंप्यूटर, एक रंगीन प्रिंटर और डायनेमिक ओवरसीज की कई आधिकारिक मोहरें जब्त की गईं। जांच अधिकारी इस पहलू की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या आरोपी ने ठगी के पैसों से खरीदा गया सोना किसी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी में गिरवी रखकर गोल्ड लोन लिया था। इस संबंध में दो सोने की अंगूठियां, एक सोने की चेन और एक जोड़ी बालियों के लेन-देन से जुड़े वित्तीय सुराग खंगाले जा रहे हैं। दूसरे आरोपी से बरामद हुए नेपाली नागरिकों के पासपोर्ट सिंडिकेट के खिलाफ की गई इस कार्रवाई में संगम विहार के रहने वाले 38 वर्षीय मुस्तकीम को भी सह-आरोपी के तौर पर गिरफ्तार किया गया है। मुस्तकीम के पास से तलाशी के दौरान दो सोने की चेन, छह स्मार्टफोन, विभिन्न बैंकों के 10 एटीएम कार्ड और तीन पासपोर्ट बरामद किए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि उसके पास से मिले पासपोर्ट में से दो पासपोर्ट नेपाल के नागरिकों के हैं, जिससे यह आशंका गहरा गई है कि इस गिरोह के तार सीमा पार मानव तस्करी या अंतरराष्ट्रीय वीजा धोखाधड़ी से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस रिकॉर्ड की जांच से पता चला है कि मुख्य अभियुक्त अबीर पोइलान पर पहले से वर्ष 2020 में गोविंदपुरी थाने में धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज है, जबकि मुस्तकीम का इससे पहले कोई औपचारिक पुलिस रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। दोनों से आगे की पूछताछ जारी है। इसका आप पर असर विदेश में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं और उनके परिवारों के लिए यह मामला एक गंभीर चेतावनी है कि अनधिकृत एजेंसियों के चक्कर में पड़कर जीवन भर की बचत गंवाई जा सकती है। • भारत में: विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकृत रिक्रूटमेंट एजेंटों की सूची देखना और केवल अधिकृत माध्यमों से ही आवेदन करना अनिवार्य है। बिना सत्यापन के किसी भी अनधिकृत परामर्श एजेंसी को सीधे नकद या खाते में राशि हस्तांतरित न करें। • दिल्ली में: स्थानीय स्तर पर संचालित फर्जी कंसल्टेंसी फर्मों से बचने के लिए कार्यालय का वाणिज्यिक पंजीकरण और लाइसेंस अवश्य जांचें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या जबरन वसूली की शिकायत नजदीकी थाने या नियमित जन सुनवाई मंच पर तुरंत दर्ज कराएं। • नौकरी के आवेदकों के लिए: कोई भी वास्तविक विदेशी नियोक्ता बिना वैध कार्य अनुबंध और आधिकारिक दूतावास प्रक्रिया के नकद राशि की मांग नहीं करता है। हमेशा जारी किए गए वीजा का सत्यापन संबंधित देश के आधिकारिक दूतावास पोर्टल पर जाकर स्वयं करें। • आर्थिक सुरक्षा: ठगी की स्थिति में त्वरित वित्तीय मदद के लिए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क किया जाना चाहिए। इससे धोखेबाजों द्वारा बैंक खातों से निकाली जा रही राशि को समय रहते फ्रीज कराया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह धोखाधड़ी संगठित रूप से इसलिए चल सकी क्योंकि विदेश जाने के इच्छुक कई युवा उचित प्रक्रियाओं से अनजान रहते हैं और बिचौलियों पर भरोसा कर लेते हैं। • आकर्षक वेतन का लालच: इजरायल और इराक जैसे देशों में श्रमिकों और कामगारों की मांग का फायदा उठाकर धोखेबाजों ने आसान वर्क वीजा का वादा किया था। खाड़ी देशों में उच्च मजदूरी मिलने की चाहत के कारण युवाओं ने बिना जांच-पड़ताल के अग्रिम भुगतान कर दिया। • फर्जी कार्यालय का सहारा: आरोपियों ने नेताजी सुभाष प्लेस जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्र में बाकायदा कार्यालय खोल रखा था जिससे वह एक वैध संस्थान नजर आए। इस तरह के दफ्तर ग्राहकों के मन में प्रामाणिकता का झूठा भरोसा पैदा करने के लिए तैयार किए जाते हैं। • प्रशासनिक निगरानी की कमी: अनधिकृत प्लेसमेंट एजेंसियों का स्थानीय स्तर पर समय-समय पर ऑडिट न होना ऐसे सिंडिकेट्स को पनपने का मौका देता है। जब पीड़ितों ने औपचारिक जन सुनवाई में शिकायत दर्ज कराई, तब जाकर इस बड़े पैमाने के रैकेट का भंडाफोड़ संभव हुआ। सवाल-जवाब 1. दिल्ली में इस फर्जी वीजा सिंडिकेट के कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है? दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों अबीर पोइलान और मुस्तकीम को गिरफ्तार किया है। 2. आरोपियों ने कुल कितने लोगों से विदेश में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी की? आरोपियों ने इजरायल और इराक का वीजा दिलाने का झांसा देकर कम से कम 46 लोगों से ठगी की है। 3. आरोपी वीजा दिलाने के बदले पीड़ितों से कितनी रकम वसूल रहे थे? वे इजरायल के वीजा के लिए प्रति व्यक्ति 1.70 लाख रुपये और इराक के वीजा के लिए 70 हजार रुपये वसूलते थे। 4. आरोपियों के दफ्तर और ठिकानों से क्या सामान बरामद किया गया? पुलिस ने 31 ग्राम सोने के सिक्के, सोने के आभूषण, 10 एटीएम कार्ड, 22 पासपोर्ट, कई मोबाइल फोन, कंप्यूटर और डायनेमिक ओवरसीज की मुहरें बरामद की हैं। 5. क्या गिरफ्तार आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास रहा है? मुख्य आरोपी अबीर पोइलान पर वर्ष 2020 में गोविंदपुरी थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था, जबकि मुस्तकीम का कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं है। 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