उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी का दिल्ली पुलिस ने किया विरोध, हाईकोर्ट में बताया साजिश का मुख्य सूत्रधार दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की नई जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है। पुलिस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित अनिवार्य शर्तें अभी पूरी नहीं हुई हैं और UAPA के तहत दोनों को राहत नहीं दी जा सकती। वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा की साजिश से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करते हुए आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है। अदालत में पेश किए गए अपने हलफनामे में पुलिस ने स्पष्ट तौर पर कहा कि दोनों आरोपी इस पूरे घटनाक्रम की योजना बनाने और उसे जमीन पर उतारने वाले मुख्य सूत्रधार रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने याचिकाकर्ताओं की नई अर्जियों को गैरकानूनी और अदालती प्रक्रिया को भ्रमित करने वाला करार दिया है तथा अदालत से अनुरोध किया है कि मौजूदा चरण में इनकी जमानत पर कोई सुनवाई न की जाए। हाईकोर्ट में दिल्ली पुलिस की दलीलें और गंभीर आरोप अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने 31 जुलाई को हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए निर्देशों का अनुपालन करते हुए अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। पुलिस ने कहा कि उनके पास उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं जो दर्शाते हैं कि उन्होंने दंगों की विस्तृत रणनीति तैयार की, लोगों को भड़काकर एकत्रित किया और हिंसा फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाई। जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों व्यक्तियों की भूमिका महज प्रदर्शन में शामिल होने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे पूरी साजिश के केंद्र में रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी फैसले और UAPA की सख्त धारा 43D(5) का हवाला अपनी आपत्तियों को मजबूती से रखते हुए दिल्ली पुलिस ने इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय का संदर्भ दिया। पुलिस ने ध्यान दिलाया कि सर्वोच्च अदालत ने इसी मामले में अन्य सहआरोपियों को जमानत प्रदान कर दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत देने से इनकार कर दिया था। सर्वोच्च अदालत ने माना था कि इन दोनों की भूमिका केस के अन्य आरोपियों की तुलना में पूरी तरह से अलग और कहीं अधिक गंभीर है। इसके अतिरिक्त पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि मामले में गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम यानी UAPA की धारा 43D(5) लागू होती है, जिसके अंतर्गत जमानत प्रदान करने के नियम अत्यंत कठोर और सीमित हैं। जमानत की अधूरी पूर्वशर्तें और दिल्ली हिंसा का घटनाक्रम दिल्ली पुलिस ने अपने तर्क में इस बात पर विशेष बल दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी के आदेश में नई जमानत याचिका दायर करने के लिए स्पष्ट शर्तें निर्धारित की थीं। शीर्ष अदालत ने कहा था कि आरोपी केवल दो परिस्थितियों में ही दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं, पहला मुख्य अभियोजन गवाहों की गवाही संपन्न होने के पश्चात और दूसरा उस आदेश की तिथि से एक पूरा वर्ष बीत जाने के बाद। पुलिस का कहना है कि वर्तमान में इनमें से कोई भी शर्त पूरी नहीं हुई है, इसलिए अर्जी पर विचार करना अनुचित होगा। उल्लेखनीय है कि 2020 में नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे, जिसके बाद से दोनों आरोपी लगातार हिरासत में बंद हैं। इसका आप पर असर इस अदालती कार्यवाही और दिल्ली दंगा साजिश मामले का आम नागरिकों तथा कानूनी व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है। • भारत में: UAPA जैसे कड़े कानूनों के तहत जब किसी मामले में मुकदमे की प्रक्रिया शुरू होती है, तो जमानत की शर्तें बेहद सख्त होती हैं। इससे यह संदेश मिलता है कि गंभीर आरोपों में कानूनी प्रक्रियाओं और अदालती आदेशों का पालन अनिवार्य होता है। • दिल्ली में: 2020 की हिंसा से प्रभावित उत्तर-पूर्वी दिल्ली के निवासियों के लिए अदालती कार्यवाही शांति और न्याय सुनिश्चित करने का एक प्रमुख माध्यम है। स्थानीय लोग कानूनी घटनाक्रम पर करीब से नजर रखते हैं। • न्यायिक प्रक्रियाओं का पालन: याचिकाकर्ताओं के लिए अदालती निर्देशों का पालन आवश्यक होता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि तय समयसीमा से पहले लगाई गई अर्जियां खारिज हो सकती हैं। • सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक शांति: कानून प्रवर्तन एजेंसियों का कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने से जुड़ी गतिविधियों पर कानूनी सख्ती बरती जाएगी। सवाल-जवाब 1. दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में उमर खालिद और शरजील इमाम के बारे में क्या कहा? दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मुख्य मास्टरमाइंड थे और उनके खिलाफ रणनीतिक योजना बनाने के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। 2. पुलिस ने उनकी जमानत का विरोध किस आधार पर किया? पुलिस का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई दो जरूरी शर्तें अभी पूरी नहीं हुई हैं और UAPA की धारा 43D(5) के तहत वे जमानत पाने के हकदार नहीं हैं। 3. सुप्रीम कोर्ट ने नई जमानत याचिका दायर करने के लिए क्या शर्तें रखी थीं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद या उस आदेश के एक साल पूरा होने पर ही नई जमानत याचिकाएं लगाई जा सकती हैं। 4. यह मामला किस घटनाक्रम से संबंधित है? यह मामला वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है, जिसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। https://trendkia.com/delhi/north-east-delhi-hinsa-mamale-men-umar-khalid-aura-sharjeel-imam-ki-jamanata-arji-ka-delhi-police-ne-kiya-virodha-high-court-men-b-23060 TrendKia — Har trend, sabse pehle.