# न्यायाधीश पर ऑनलाइन टिप्पणी को लेकर घिरीं सीजेपी नेता रत्ना सिंह, आपराधिक अवमानना केस को दिल्ली सरकार की हरी झंडी

> दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील अमोल सिन्हा ने कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना शुरू करने की मंजूरी दे दी है। साकेत कोर्ट से राहत न मिलने पर रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर जज के निष्पक्ष आचरण पर सवाल खड़े किए थे।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/nyayadhisha-para-nalaina-tippani-ko-lekara-ghirin-cjp-neta-ratna-singh-aparadhika-avamanana-kesa-ko-delhi-sarakara-ki-hari-jhndi-56431 · **Language:** Hindi
**Tags:** रत्ना सिंह, सीजेपी, आपराधिक अवमानना, दिल्ली सरकार, साकेत कोर्ट, अमोल सिन्हा, ममता बनर्जी, अभिजीत दीपके

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की वरिष्ठ नेता और पार्टी की कानूनी शाखा की प्रमुख रत्ना सिंह की कानूनी अड़चनें काफी बढ़ गई हैं। दिल्ली सरकार ने उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना की अदालती कार्यवाही शुरू करने के लिए औपचारिक सहमति प्रदान कर दी है। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील अमोल सिन्हा ने मामले का परीक्षण करने के बाद यह विधिक अनुमति दी। रत्ना सिंह संगठन में लीगल विंग का प्रभार संभालती हैं और पार्टी से जुड़े विभिन्न अदालती मामलों की मुख्य पैरोकार रही हैं।

## न्यायिक स्वतंत्रता पर आक्षेप लगाने का आरोप
यह पूरा मामला रत्ना सिंह द्वारा इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर की गई तीखी टिप्पणियों से जुड़ा हुआ है। अपने पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया था कि अदालत के एक पीठासीन जज किसी अज्ञात 'मालिक' के इशारे पर काम कर रहे हैं। दिल्ली सरकार की विधिक राय में स्पष्ट रेखांकित किया गया कि इस तरह के बेबुनियाद आक्षेप प्रथम दृष्टया न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी निष्पक्षता पर सीधा आघात करते हैं। सरकारी वकील ने कहा कि ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों से सामान्य नागरिकों का अदालत और पूरी न्याय प्रणाली से भरोसा डिग सकता है। सहमति मिलने के साथ ही अब रत्ना सिंह के विरुद्ध अवमानना कानून के तहत मुकदमा चलाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

## साकेत अदालत के फैसले के बाद उपजा था विवाद
विवाद की पृष्ठभूमि 10 अक्टूबर को उस वक्त तैयार हुई जब साकेत कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव पांडे ने दिल्ली पुलिस द्वारा रत्ना सिंह की कथित हिरासत के मामले में उन्हें किसी भी तरह की कानूनी राहत देने से साफ मना कर दिया था। अदालत से राहत की अर्जी खारिज होने के तत्काल बाद रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई और न्यायिक अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। सिंह ने अपने एक पोस्ट में सीधे लिखा कि न्यायाधीश किसी मालिक की सेवा में जुटे थे, जबकि अपने एक अन्य संदेश में उन्होंने दावा किया कि पुलिस और न्यायाधीश दोनों ही एक ही मालिक के आदेशों का पालन कर रहे थे।

## अदालती फैसलों की आलोचना और व्यक्तिगत आक्षेप में फर्क
सरकारी वकील अमोल सिन्हा ने 2 नवंबर को दर्ज अपनी आधिकारिक राय में कहा कि रत्ना सिंह के आरोप प्रथम दृष्टया न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और स्वतंत्रता को सीधे निशाना बनाते हैं। उनके अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के आपराधिक अवमानना अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। सिन्हा ने विधिक अंतर समझाते हुए कहा कि किसी भी नागरिक को अदालती आदेशों की आलोचना करने का अधिकार है, किंतु किसी पीठासीन अधिकारी पर बाहरी प्रभाव या अनुचित मंसूबों का आरोप मढ़ना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

सिन्हा ने अपनी राय में आगे कहा कि यह प्रचारित करना कि कोई न्यायाधीश अपने स्वतंत्र विवेक से काम करने के बजाय बाहरी निर्देशों पर चल रहा है, न्यायिक संस्था में जनता के अटूट विश्वास को गहरी चोट पहुंचाता है। अब यह पूरा कानूनी मामला अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(2) के निर्धारित प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाया जाएगा, जिस पर अंतिम निर्णय दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा लिया जाएगा।

## राजनीतिक गलियारों में हलचल, ममता बनर्जी से मिले अभिजीत दीपके
दूसरी तरफ, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नई दिल्ली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से शिष्टाचार भेंट की। इस बैठक के दौरान उन्होंने नीट पेपर लीक विवाद और युवाओं के व्यापक आंदोलन में समर्थन देने के लिए ममता बनर्जी का आभार व्यक्त किया। मुलाकात के उपरांत दीपके ने बताया कि वे व्यक्तिगत रूप से उनका धन्यवाद करने पहुंचे थे, क्योंकि जब जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर सीजेपी का पहला छात्र आंदोलन हुआ था, तब ममता बनर्जी ने युवाओं की आवाज को बेहद मजबूती से उठाया था।

## इसका आप पर असर
अदालत और न्यायपालिका पर की गई टिप्पणियों को लेकर सरकार का यह कदम सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं और वकीलों के लिए कड़ा संदेश है।

- **भारत में:** यह मामला साफ करता है कि इंटरनेट मीडिया पर न्यायाधीशों के फैसलों या निष्पक्षता पर व्यक्तिगत हमले करने पर आपराधिक अवमानना का सामना करना पड़ सकता है। कोई भी नागरिक अदालती आदेशों की आलोचना कर सकता है, लेकिन जजों की नीयत पर सवाल उठाना कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है।
- **दिल्ली में:** राजधानी दिल्ली की साकेत अदालत और दिल्ली हाई कोर्ट से जुड़े इस मामले के चलते राजनीतिक दलों की कानूनी इकाइयों पर नजरें और सख्त होंगी। संगठन से जुड़े वकीलों और नेताओं को अपने सार्वजनिक बयानों में अतिरिक्त कानूनी सावधानी बरतनी होगी।
- **आम वादियों पर प्रभाव:** अदालत में विचाराधीन मामलों में राहत न मिलने पर सार्वजनिक मंचों पर गुस्सा निकालने वाले पक्षों के लिए यह सख्त नजीर है। न्यायिक तंत्र में भरोसा बनाए रखने के लिए ऐसी कार्रवाई आगे भी त्वरित रूप से देखने को मिल सकती है।
- **छात्रों और युवाओं के लिए:** सीजेपी द्वारा उठाए जा रहे नीट पेपर लीक और अन्य छात्र आंदोलनों पर इस कानूनी विवाद का असर दिख सकता है। पार्टी नेतृत्व की कानूनी व्यस्तताएं बढ़ने से आंदोलन के संचालन पर प्रभाव पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कानूनी कार्रवाई किसी सामान्य असहमति का नतीजा नहीं है, बल्कि अदालत के फैसले के बाद न्यायाधीश पर सीधे व्यक्तिगत और बाहरी दबाव में काम करने के गंभीर आरोप लगाने के कारण शुरू हुई है।

- **सीधा कारण:** साकेत कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव पांडे द्वारा 10 अक्टूबर को कथित पुलिस हिरासत मामले में राहत देने से इनकार करने के बाद रत्ना सिंह ने एक्स पर न्यायाधीश को किसी अज्ञात मालिक का आदेश मानने वाला बताया था।
- **कानूनी आधार:** दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील अमोल सिन्हा ने 2 नवंबर को दी अपनी राय में पाया कि ये टिप्पणियां प्रथम दृष्टया न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर हमला करती हैं।
- **अवमानना कानून का दायरा:** विधिक सिद्धांतों के तहत फैसलों की समीक्षा या आलोचना की जा सकती है, लेकिन पीठासीन जज पर बाहरी प्रभाव या पक्षपात का लांछन लगाना अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(2) के तहत दंडनीय कृत्य बनता है।
- **आगामी प्रक्रिया:** दिल्ली सरकार की औपचारिक अनुमति मिलने के बाद अब यह मामला सीधे दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष आपराधिक अवमानना के अधिकार क्षेत्र के तहत विचारार्थ जाएगा, जहां अंतिम फैसला होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. रत्ना सिंह कौन हैं और उन पर क्या आरोप है?
रत्ना सिंह कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल टीम की प्रमुख हैं। उन पर साकेत कोर्ट के एक न्यायाधीश पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।

### 2. रत्ना सिंह ने न्यायाधीश को लेकर क्या पोस्ट किया था?
उन्होंने एक्स पर लिखा था कि न्यायाधीश किसी 'मालिक' की सेवा कर रहे थे और पुलिस व जज दोनों उसी मालिक के आदेश का पालन कर रहे थे।

### 3. दिल्ली सरकार के किस अधिकारी ने अवमानना कार्रवाई को मंजूरी दी?
दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील अमोल सिन्हा ने 2 नवंबर को मामले में आपराधिक अवमानना शुरू करने की सहमति दी।

### 4. यह विवाद किस तारीख के अदालती आदेश से शुरू हुआ?
यह विवाद 10 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब साकेत कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव पांडे ने कथित पुलिस हिरासत को लेकर रत्ना सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया था।

### 5. यह मामला अब किस कानून और किस अदालत में चलेगा?
यह कार्यवाही अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(2) के तहत दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष चलेगी।

### 6. अभिजीत दीपके ने ममता बनर्जी से मुलाकात क्यों की?
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने नीट पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर पर हुए युवा आंदोलन में साथ देने के लिए ममता बनर्जी का धन्यवाद करने मुलाकात की।

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