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  "type": "article",
  "title": "फर्जी ट्रैफिक चालान और रिवॉर्ड ऐप से 10 करोड़ रुपये की साइबर ठगी, पांच राज्यों से 5 जालसाज पकड़े गए",
  "summary": "दिल्ली पुलिस ने जाली ट्रैफिक चालान और रिवॉर्ड ऐप के जरिए 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को दबोचा है।",
  "content": "गाड़ियों के फर्जी चालान और आकर्षक नकद पुरस्कारों का झांसा देकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी में सक्रिय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने साइबर अपराधियों के इस सुनियोजित नेटवर्क की जड़ों को खंगालते हुए पांच प्रमुख सदस्यों को हिरासत में लिया है। प्राथमिक पड़ताल के दौरान सामने आया कि यह संगठित रैकेट 544 से अधिक औपचारिक शिकायतों में शामिल था, जिसके जरिए अब तक 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की चपत लगाई जा चुकी है। यह पूरा फ्रॉड एक विदेशी एप्लिकेशन और ऑटोमेटेड फिशिंग संदेशों के जरिए संचालित किया जा रहा था।\n\nधोखाधड़ी का डिजिटल तरीका और छिपे हुए लिंक\nइस पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिराना थी। गिरोह के सदस्य एक विदेशी मोबाइल सॉफ्टवेयर की मदद लेते थे, जिसके माध्यम से साधारण उपयोगकर्ताओं के फोन पर फिशिंग संदेश पहुंचाए जाते थे। इस व्यवस्था में शामिल लोगों को अपने फोन पर नकद प्रोत्साहन यानी 1 से 3 रुपये का छोटा इनाम दिया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति इस कथित इनाम को भुनाने या रिडीम करने का प्रयास करता, उसका फोन कुछ पलों के लिए अपराधियों के इशारे पर काम करने लगता था। इसके बाद वही डिवाइस अनजान संपर्कों को भ्रामक संदेश भेजने का औजार बन जाता था।\n\nएक शिकायत से खुली पूरे नेटवर्क की परतें\nइस बड़े साइबर गिरोह का सुराग तब मिला जब नवंबर 2025 में एक नागरिक ने अपने फोन पर आए चालान भुगतान संदेश पर भरोसा कर लिया। पीड़ित ने जैसे ही बकाया जुर्माना समझकर उस लिंक को खोला, उसके क्रेडिट कार्ड खाते से 2.21 लाख रुपये की अनाधिकृत निकासी हो गई। जब तकनीकी विशेषज्ञों ने अपराध में प्रयुक्त सिम कार्ड और टेलीकॉम डेटा का विश्लेषण किया, तो वह नंबर मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी नितेश पटेल के विवरण पर दर्ज पाया गया। आगे की जांच में पुलिस की टीम नितेश पटेल के भतीजे के पास पहुंची। उसके स्मार्टफोन की पड़ताल करने पर विंगो कैश नाम का एक विशेष एप्लिकेशन बरामद हुआ, जिसे उसने एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से डाउनलोड किया था।\n\nऑटोमेटेड एसएमएस और विदेशी बैंक खातों का जाल\nतकनीकी विश्लेषण में सामने आया कि जब भी कोई यूजर इस एप्लिकेशन पर मौजूद रिवॉर्ड को क्लेम करता था, तो उसका सॉफ्टवेयर बैकग्राउंड में एक्टिव हो जाता था। इस प्रक्रिया के दौरान मोबाइल की स्क्रीन करीब 30 सेकंड के लिए लॉक हो जाती थी। उसी आधे मिनट के भीतर फोन बिना यूजर की अनुमति के खुद-ब-खुद 9 से 12 फिशिंग संदेश दूसरे नंबरों पर प्रसारित कर देता था। इन संदेशों में चालान के फर्जी निपटारे, पार्सल डिलीवरी वेरिफिकेशन और लॉयल्टी रिवॉर्ड से जुड़े लिंक चिपकाए जाते थे। पुलिस ने जांच के क्रम में ऐसे लगभग 3,300 संदेशों की पहचान की है। ठगी के जरिए जुटाई गई रकम को एक अंतरराष्ट्रीय बैंक खाते में जमा कराया गया था। इसमें म्यूल बैंक खातों की बड़ी श्रृंखला का पता चला है, जहां महज तीन दिनों में ऐप के 41,000 से अधिक उपयोगकर्ताओं को लगभग 2 करोड़ रुपये बांटे गए थे।\n\nकई राज्यों में छापेमारी और बरामदगी\nइस सिंडिकेट के तार देश के कई कोनों से जुड़े थे। पुलिस ने सघन अभियान चलाते हुए मुंबई, लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब से मोती सिंह बघेला, हर्षपाल, विक्की, विशाल दास वैष्णव और बर्जेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के ठिकानों से अपराध में इस्तेमाल होने वाली व्यापक सामग्री बरामद की गई है। जब्त किए गए सामान में 15 डिजिटल उपकरण, 59 डेबिट कार्ड, 52 बैंक पासबुक एवं चेक बुक, विभिन्न व्यावसायिक कंपनियों की 14 मुहरें, 5 पीओएस मशीनें, 8 क्यूआर कोड स्कैनर, एक सोने की चेन और एक कार शामिल हैं।\n\nइसका आप पर असर\nअज्ञात नंबरों से आने वाले किसी भी चालान भुगतान संदेश पर बिना जांचे क्लिक करने से बैंक खाता तुरंत खाली हो सकता है।\n\n• भारत में: वाहन चालकों को एसएमएस में आए किसी भी लिंक के बजाय हमेशा आधिकारिक सरकारी परिवहन पोर्टल का ही इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी अनजान ऐप या अचानक आए जुर्माने के नोटिस पर सीधे वित्तीय लेनदेन करने से बचें।\n• दिल्ली में: ट्रैफिक पुलिस से मिलते-जुलते फर्जी यूआरएल से सतर्क रहें और अपने चालान की स्थिति सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट पर सत्यापित करें। अगर क्रेडिट कार्ड या खाते से कोई संदिग्ध लेनदेन होता है, तो फौरन साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।\n• मोबाइल सुरक्षा: किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप से अनजान एपीके फाइल या रिवॉर्ड देने वाले ऐप को फोन में कभी इंस्टॉल न करें। ऐसा करने पर आपका फोन हैक होकर खुद दूसरों को फर्जी मैसेज भेजने का जरिया बन सकता है।\n• वित्तीय सतर्कता: छोटे नकद इनाम या 1 से 3 रुपये के कैशबैक के लालच में आकर किसी थर्ड पार्टी ऐप को फोन की अनुमति न दें। बैंक पासबुक, एटीएम पिन और ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारियां किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा न करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह धोखाधड़ी वाहन चालकों की जल्दबाजी, अनजान सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने की आदत और व्यवस्थित म्यूल अकाउंट नेटवर्क के कारण संभव हुई।\n\n• सीधा कारण: पीड़ितों ने बिना जांचे फर्जी एसएमएस लिंक पर क्लिक किया और अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी असुरक्षित वेब पेज पर दर्ज कर दी। इससे अपराधियों को सीधे खातों से निकासी करने की पहुंच मिल गई।\n• मैलवेयर का प्रसार: व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए फैलाया गया विंगो कैश ऐप मामूली इनाम देकर उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करता था। यह ऐप फोन की स्क्रीन फ्रीज करके अपने आप नए शिकारों को 9 से 12 फिशिंग संदेश भेज देता था।\n• म्यूल खातों का उपयोग: चुराए गए 10 करोड़ रुपये को छुपाने के लिए आरोपियों ने दर्जनों फर्जी बैंक खातों और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग माध्यमों का सहारा लिया। इसके जरिए हजारों उपयोगकर्ताओं में छोटे-छोटे फंड ट्रांसफर करके रकम का लेन-देन छिपाया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इस साइबर धोखाधड़ी में कुल कितने रुपये की ठगी हुई है?\nइस पूरे मामले में 544 शिकायतों के माध्यम से 10 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी सामने आई है।\n\n2. पुलिस ने किन-किन राज्यों से आरोपियों को पकड़ा है?\nआरोपियों को मुंबई, लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब से गिरफ्तार किया गया है।\n\n3. फर्जी चालान वाले संदेश लोगों के फोन से कैसे भेजे जा रहे थे?\nविंगो कैश नामक ऐप रिवॉर्ड क्लेम करते समय फोन की स्क्रीन 30 सेकंड लॉक करके खुद ब खुद 9 से 12 फिशिंग एसएमएस भेज देता था।\n\n4. गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम क्या हैं?\nपकड़े गए पांच आरोपियों के नाम मोती सिंह बघेला, हर्षपाल, विक्की, विशाल दास वैष्णव और बर्जेश कुमार हैं।\n\n5. पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या-क्या सामान बरामद किया है?\nपुलिस ने 15 डिजिटल उपकरण, 59 डेबिट कार्ड, 52 पासबुक व चेक बुक, 14 मुहरें, 5 पीओएस मशीनें, 8 क्यूआर कोड स्कैनर, सोने की चेन और एक कार जब्त की है।",
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