राजधानी में प्रदर्शनों और पाबंदियों पर बोले सीजेआई सूर्यकांत, कहा- कानून व्यवस्था अदालत का विषय नहीं प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शनों पर टिप्पणी से इनकार करते हुए इसे कानून-व्यवस्था का मामला बताया है। साथ ही उन्होंने विपक्षी नेताओं से मुलाकात से भी मना कर दिया। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों और राजधानी में लगाई गई पाबंदियों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के 33वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीजेआई ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनों से निपटना कानून-व्यवस्था का विषय है, जो अदालत के दायरे में नहीं आता। राजनीतिक मुलाकातों और विपक्षी मार्च पर रुख मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीजेआई से मुलाकात का समय मांगा था। दोनों नेताओं ने सोमवार को शाम चार से पांच बजे के बीच का समय मांगते हुए एक पत्र भेजा था, जिसमें 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर एक ज्ञापन सौंपने की बात कही गई थी। इस ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को तुरंत रोकने और भविष्य के चुनाव मतपत्रों के माध्यम से कराने की मांग शामिल थी। हालांकि, सीजेआई ने इस मुलाकात से इनकार कर दिया है। मुलाकात न करने के सवाल पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि उन्होंने अपने लिखित जवाब में स्थिति स्पष्ट कर दी है और पत्र की गोपनीयता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक आयोजित मार्च पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया। अदालत के दरवाजे हर नागरिक के लिए खुले कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं और सांसदों द्वारा लगातार चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेआई ने कहा कि देश का न्याय तंत्र सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चाहे कोई आम नागरिक हो या फिर किसी निर्वाचित संस्था का प्रतिनिधि, प्रत्येक भारतीय को अदालत का दरवाजा खटखटाने का पूरा अधिकार है। यदि कोई पक्ष न्याय के लिए याचिका दायर करता है, तो सुप्रीम कोर्ट कानून के दायरे में रहकर उस पर सुनवाई करेगा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा। सुरक्षा कड़ाई और एक साथ चुनाव पर जेपीसी का मामला हाल के दिनों में दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त कर दी गई थी। 10 अक्टूबर को राजधानी के 45 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए थे और सीमावर्ती क्षेत्रों में वाहनों की गहन चेकिंग की गई थी। इस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। वहीं, 'एक साथ चुनाव' कराने के मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के साथ न्यायाधीशों की बैठक रद्द होने के मामले में सीजेआई ने कहा कि यह निर्णय हितों के टकराव से बचने के लिए लिया गया था। चूंकि यह मामला भविष्य में कानूनी चुनौती के रूप में अदालत के सामने आ सकता है, इसलिए सीजेआई और उनके साथी न्यायाधीशों की राय थी कि ऐसी किसी भी अनौपचारिक वार्ता से दूर रहना ही उचित होगा। जेपीसी अध्यक्ष पी पी चौधरी ने भी स्वीकार किया था कि शुरुआत में प्रस्तावित अनौपचारिक चर्चा को सुप्रीम कोर्ट ने बाद में अनुचित मानते हुए रद्द कर दिया था। इसका आप पर असर दिल्ली में प्रदर्शनों के कारण लगे प्रतिबंधों और न्यायपालिका की भूमिका से आम नागरिकों के अधिकारों और आवाजाही पर सीधा असर पड़ा है। • भारत में: नागरिक न्याय पाने के लिए कभी भी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं। राजनीतिक विवादों के बावजूद अदालत हर व्यक्ति के लिए खुली है। • दिल्ली में: मेट्रो स्टेशनों की बंदी और चेकिंग से यात्रा का समय बढ़ सकता है। प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा इंतजामों को देखते हुए यात्रियों को पहले से योजना बनानी चाहिए। • मतदाताओं के लिए: चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची पर विवाद जारी रहने से अनिश्चितता की स्थिति है। नागरिकों को अपने मतदाता विवरण को समय-समय पर सत्यापित करते रहना चाहिए। • प्रदर्शनकारियों के लिए: कानून-व्यवस्था बिगाड़ने पर हिरासत में लिए जाने का जोखिम बना रहता है। अपनी मांगों को रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना ही सुरक्षित विकल्प है। ऐसा क्यों हुआ यह स्थिति निर्वाचन आयोग के फैसलों के खिलाफ विपक्ष के विरोध और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिशों के कारण उत्पन्न हुई है। • विपक्ष का विरोध: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और 'वोट चोरी' के आरोपों पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। • सुरक्षा उपाय: विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और सीमाओं पर चेकिंग जैसे कड़े सुरक्षा कदम उठाए। • न्यायपालिका की तटस्थता: सीजेआई ने राजनीतिक बैठकों और संसदीय समितियों से दूरी बनाकर अदालती स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने का फैसला किया। सवाल-जवाब 1. सीजेआई सूर्यकांत ने दिल्ली में प्रदर्शनों और पाबंदियों के बारे में क्या कहा? सीजेआई ने कहा कि पाबंदियां और प्रदर्शन कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय हैं और यह उनकी अदालत का मुद्दा नहीं है। 2. कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं की सीजेआई से मुख्य मांग क्या थी? विपक्षी नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे, मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर रोक और मतपत्र से चुनाव कराने की मांग की थी। 3. सीजेआई ने विपक्षी नेताओं से मिलने से क्यों इनकार किया? सीजेआई ने अपने पत्र के माध्यम से गोपनीयता का हवाला देते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया और कारणों का विवरण साझा नहीं किया। 4. सुप्रीम कोर्ट ने जेपीसी के साथ बैठक क्यों रद्द की? एक साथ चुनाव कराने से जुड़ा मामला भविष्य में अदालत में आ सकता है, इसलिए हितों के टकराव से बचने के लिए न्यायाधीशों ने बैठक रद्द की। https://trendkia.com/delhi/rajadhani-men-pradarshanon-aura-pabndiyon-para-bole-cji-surya-kant-kaha-kanuna-vyavastha-adalata-ka-vishaya-nahin-46983 TrendKia — Har trend, sabse pehle.