# राष्ट्रीय राजधानी से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई, सामान्य तारीख से दो दिन पहले बारिश का दौर थमा

> मौसम विभाग ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर दिल्ली से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की पुष्टि कर दी है। इस बार मानसून सामान्य तारीख 25 सितंबर से दो दिन पहले विदा हुआ, जबकि सफदरजंग वेधशाला में कुल वर्षा सामान्य से 16 फीसदी अधिक दर्ज की गई।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/rashtriya-rajadhani-se-dakshina-pashchima-monsoon-ki-vidai-samanya-tarikha-se-do-dina-pahale-barisha-ka-daura-thama-37212 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली मानसून, मौसम विभाग, सफदरजंग बारिश, दक्षिण पश्चिम मानसून, मानसून विदाई, दिल्ली मौसम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस वर्ष के मानसूनी सीजन का दौर अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। मौसम विभाग ने बुधवार को आधिकारिक पुष्टि करते हुए जानकारी दी कि दक्षिण-पश्चिम मानसून दिल्ली से पूरी तरह विदा हो चुका है। आमतौर पर राजधानी से इसके हटने की सामान्य तारीख 25 सितंबर निर्धारित है, लेकिन इस बार हवाओं के बदलते रुख और बारिश थमने के चलते यह दो दिन पहले ही लौट गया। इसके साथ ही दिल्ली और आसपास के इलाकों में मानसूनी फुहारों का सिलसिला समाप्त हो गया है।

## देरी से दस्तक देने के बाद वक्त से पहले विदा
इस मानसूनी सत्र का सफर काफी दिलचस्प रहा। आमतौर पर दिल्ली में मानसूनी हवाओं का आगमन 27 जून के आसपास होता है, लेकिन इस साल मानसूनी बादलों ने करीब पांच दिन की देरी से यानी 2 जुलाई को राजधानी में प्रवेश किया था। भले ही शुरुआत में बादलों के आने में विलंब हुआ, लेकिन वापसी का समय आने पर इसने सामान्य समय से पहले ही विदाई ले ली। वर्ष 1971 से 2019 के दीर्घावधि आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार दिल्ली से मानसून हटने की सामान्य तारीख 25 सितंबर मानी जाती है। बीते साल की बात करें तो राष्ट्रीय राजधानी से मानसून की रवानगी 24 सितंबर को दर्ज की गई थी।

## पड़ोसी राज्यों से भी हटी मानसूनी हवाएं
मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि बुधवार को मानसून की वापसी केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रही। पूरी राष्ट्रीय राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान के अधिकांश इलाकों से भी दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएं पीछे हट चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश और गुजरात के भी कुछ हिस्सों से मानसूनी हवाओं की विदाई दर्ज की गई है। इस बदलाव का सीधा अर्थ यह है कि अब इन सभी क्षेत्रों में मानसूनी बारिश की गतिविधियां पूरी तरह बंद हो जाएंगी और मौसम शुष्क होने लगेगा।

## सफदरजंग में सामान्य से 16 प्रतिशत अधिक वर्षा
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार राजधानी में पर्याप्त पानी बरसा है। 1 जून से 23 सितंबर के दौरान सफदरजंग वेधशाला में कुल 728.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस समयावधि का सामान्य औसत 629.7 मिमी रहता है। यह आंकड़ा सामान्य से 16 प्रतिशत अधिक रहा और इसे मौसम विभाग के पैमानों पर सामान्य वर्षा की श्रेणी में रखा गया है।

## इतिहास के पन्नों में सबसे जल्दी और देर से वापसी के रिकॉर्ड
राजधानी से मानसूनी हवाओं की वापसी का रिकॉर्ड काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 1961 के बाद के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली से मानसून की सबसे जल्दी रवानगी 1982 में देखी गई थी, जब 3 सितंबर को ही मानसून विदा हो गया था। दूसरी तरफ सबसे देर से वापसी का ऐतिहासिक रिकॉर्ड वर्ष 2013 में बना था, जब मानसूनी हवाएं 17 अक्टूबर तक सक्रिय रही थीं और उसके बाद ही वापस लौटी थीं।

## इसका आप पर असर
मानसून की विदाई से दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम में बड़ा बदलाव आएगा और उमस भरी गर्मी के बाद मौसम धीरे-धीरे करवट लेगा।

- **दिल्ली में:** बारिश का दौर थमने से अब दिन में तेज धूप और शुष्क मौसम देखने को मिलेगा। रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी, जिससे सुबह और शाम हल्की ठंडक का अहसास शुरू हो जाएगा।
- **किसानों के लिए:** बारिश रुकने से खेतों में तैयार खड़ी खरीफ फसलों की कटाई और सुखाने का काम आसान होगा। नमी कम होने से कटी फसलों के सड़े-गले नुकसान का जोखिम भी खत्म हो जाएगा।
- **स्वास्थ्य और उमस:** मानसूनी नमी घटने से चिपचिपी उमस से राहत मिलेगी। हालांकि, मौसम बदलने के इस दौर में मौसमी फ्लू और सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए सावधानी बरतनी जरूरी होगी।
- **वायु गुणवत्ता:** बारिश रुकने और हवा की गति धीमी होने से आने वाले हफ्तों में धूल और स्थानीय प्रदूषण के कण हवा में टिकने लगेंगे। इससे सांस के मरीजों को सुबह की सैर के समय अतिरिक्त सतर्कता रखनी पड़ सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं की विदाई उत्तर-पश्चिम भारत में हवा के रुख में बदलाव और वायुमंडलीय नमी में लगातार आ रही कमी के कारण हुई है। मौसम विज्ञान की दृष्टि से यह बदलाव एक निर्धारित मौसमी चक्र का स्वाभाविक हिस्सा है।

- **हवाओं की दिशा में बदलाव:** बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी युक्त पुरवैया हवाओं की जगह उत्तर-पश्चिम से चलने वाली शुष्क पछुआ हवाओं ने ले ली। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में बादलों का बनना और बरसना पूरी तरह बंद हो गया।
- **वायुमंडल में नमी की कमी:** पिछले कुछ दिनों से उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां नहीं हुई थीं। सतह और मध्य वायुमंडल में सापेक्षिक आर्द्रता काफी गिर गई, जिसने मानसून वापसी की आधिकारिक घोषणा के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाईं।
- **मौसमी चक्र और पूर्व रिकॉर्ड:** 1971 से 2019 के ऐतिहासिक डेटा के मुताबिक 25 सितंबर को वापसी सामान्य मानी जाती है। वातावरण में मौजूद मौसमी दबाव तंत्र के कमजोर पड़ने से इस साल यह प्रक्रिया निर्धारित तारीख से दो दिन पहले 23 सितंबर को ही पूरी हो गई।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक विदाई कब हुई?
मौसम विभाग ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर दिल्ली से दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी विदाई की घोषणा की।

### 2. दिल्ली से मानसून लौटने की सामान्य तारीख क्या मानी जाती है?
1971 से 2019 के मौसम आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली से मानसून की वापसी की सामान्य तारीख 25 सितंबर है।

### 3. इस वर्ष दिल्ली में मानसून ने कब दस्तक दी थी?
इस साल मानसूनी हवाओं ने अपनी सामान्य तारीख 27 जून के बजाय 2 जुलाई को दिल्ली में दस्तक दी थी।

### 4. इस सीजन में सफदरजंग वेधशाला में कितनी बारिश दर्ज की गई?
सफदरजंग में 1 जून से 23 सितंबर के बीच 728.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 16 प्रतिशत अधिक है।

### 5. 1961 के बाद दिल्ली से मानसून की सबसे जल्दी और सबसे देर से वापसी कब हुई थी?
दिल्ली से सबसे जल्दी विदाई 1982 में 3 सितंबर को दर्ज हुई थी, जबकि सबसे देर से विदाई 2013 में 17 अक्टूबर को हुई थी।

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