# सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी फैलाने पर दिल्ली नगर निगम का बड़ा शिकंजा, पांच महीनों में 2.31 करोड़ का जुर्माना

> जन विश्वास अधिनियम लागू होने के बाद दिल्ली नगर निगम ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी और खुले में पेशाब करने वालों पर सख्ती करते हुए करीब 28,000 चालान जारी किए हैं।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/sarvajanika-sthalon-para-gndagi-phailane-para-delhi-municipal-corporation-ka-bara-shiknja-pancha-mahinon-men-2-31-karora-ka-jurman-55680 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली नगर निगम, जन विश्वास अधिनियम, एमसीडी 311 ऐप, स्वच्छता अभियान, सिविल जुर्माना, पुरानी दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी को स्वच्छ बनाने की दिशा में दिल्ली नगर निगम ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जन विश्वास अधिनियम लागू होने के बाद के पांच महीनों में नगर निकाय ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत मई के अंत से लेकर 28 अक्टूबर के बीच कुल 27,915 चालान जारी किए गए, जिनके जरिए कुल 2.31 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि जारी किए गए लगभग हर चौथे चालान का संबंध खुले में शौच या पेशाब करने, कचरा फेंकने अथवा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे उल्लंघनों से रहा है।

## सार्वजनिक उपद्रव और धारा 397 के तहत कार्रवाई
नागरिक व्यवस्था को बिगाड़ने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 397 का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। कुल मामलों में से लगभग 7,000 चालान सीधे तौर पर सार्वजनिक उपद्रव यानी 'न्यूसेंस' की श्रेणी में दर्ज किए गए। इस श्रेणी में दीवारों पर अवैध पोस्टर चिपकाना, खुले में मूत्र विसर्जन करना, रास्तों पर कूड़ा फेंकना और अधिनियम द्वारा प्रतिबंधित अन्य गतिविधियां शामिल हैं।

अगस्त से अक्टूबर के महीनों के बीच की स्थिति पर नजर डालें तो अकेले धारा 397 के तहत 3,633 चालान काटे गए, जिन पर 18.16 लाख रुपये की जुर्माना राशि तय की गई थी। इनमें से 1,810 चालानों का मौके पर अथवा तय प्रक्रिया से भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा 24 घंटे से अधिक समय तक सार्वजनिक स्थानों पर कचरा या गंदगी जमा रखने के मामले में 3,180 चालान जारी किए गए, जबकि सड़कों पर गंदा पानी या कचरा बहने देने पर 2,764 चालान लगाए गए।

## जुर्माना वसूली और राजस्व का ब्योरा
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार जारी किए गए कुल चालानों में से 16,281 मामलों का निपटारा हो चुका है, जिसके तहत 99.15 लाख रुपये की राशि वसूली जा चुकी है। हालांकि अभी भी 11,634 चालान लंबित पड़े हैं, जिन पर 1.32 करोड़ रुपये का बकाया जुर्माना वसूला जाना बाकी है। निगम प्रशासन बाकी बकायेदारों से भी यह राशि वसूलने की तैयारी में जुटा है।

## जन विश्वास अधिनियम और बदले हुए नियम
नागरिक कानूनों में सुधार लाने के उद्देश्य से गृह मंत्रालय ने 15 मई को जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम 2026 को अधिसूचित किया था। इस नए कानून के प्रभावी होने से दिल्ली नगर निगम अधिनियम के कई पुराने कानूनी प्रावधान बदल गए हैं। पूर्व में जहां कई छोटे नागरिक अपराधों में आपराधिक कार्रवाई का डर दिखाया जाता था, वहीं अब इसे अपराधमुक्त करके मौद्रिक जुर्माने की व्यवस्था में बदल दिया गया है।

इस कानूनी संशोधन के बाद दिल्ली नगर निगम ने 19 मई को अपने फील्ड अधिकारियों को सीधे सिविल जुर्माना लगाने का आधिकारिक अधिकार सौंपा। नए नियमों के लागू होते ही जुर्माने की दरों में भारी वृद्धि की गई है। उदाहरण के तौर पर पहले जहां खुले में पेशाब करने पर अधिकतम 50 रुपये तक का प्रतीकात्मक जुर्माना लगता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह बिना पट्टे के पालतू या आवारा कुत्ते को खुला छोड़ने पर लगने वाले जुर्माने को भी 50 रुपये से सीधे बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दिया गया है।

## विभागों और जोनों के स्तर पर हुई कार्रवाई
नगर निगम के विभिन्न प्रशासनिक अंगों में पर्यावरण प्रबंधन सेवा विभाग (डीईएमएस) ने स्वच्छता अभियान की मुख्य कमान संभाली और सबसे ज्यादा 15,961 चालान काटे। इस विभाग द्वारा लगाए गए जुर्मानों में से 10,773 मामलों का भुगतान नागरिक कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त मलेरिया विभाग ने मच्छरों के पनपने और जलभराव जैसी लापरवाहियों पर 5,599 चालान जारी किए, जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की ओर से 3,904 चालान किए गए।

क्षेत्रीय स्तर पर पुरानी दिल्ली के घनी आबादी वाले सिटी-एसपी जोन में सबसे ज्यादा 6,066 चालान दर्ज किए गए, जो यह दर्शाता है कि व्यावसायिक और पुराने इलाकों में नियमों की अनदेखी अधिक देखी गई। एक निगम अधिकारी ने स्पष्ट किया कि केवल कागजी जुर्माना लगाने से नागरिकों की आदतों में बदलाव नहीं आएगा, बल्कि बार-बार उल्लंघन करने वालों पर ऐसी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जो भविष्य के लिए मिसाल बने। अधिकारी ने इंदौर मॉडल का संदर्भ दिया, जहां स्वच्छता नियमों के पालन पर नागरिकों को प्रोत्साहन और जानबूझकर उल्लंघन करने वालों पर कड़ी प्रशासनिक सख्ती दोनों का संतुलन बनाया जाता है।

## डिजिटल चालान और निगरानी तंत्र
प्रवर्तन प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए दिल्ली नगर निगम ने एक आधुनिक डिजिटल चालान प्रणाली शुरू की है। यह पूरी प्रणाली एमसीडी 311 मोबाइल ऐप से एकीकृत है। इस तकनीकी व्यवस्था के माध्यम से जमीनी स्तर पर होने वाले उल्लंघनों और नागरिकों की शिकायतों को सीधे डिजिटल रूप में दर्ज किया जाता है। इससे मामलों की लगातार ट्रैकिंग और वसूली की निगरानी करना आसान हो जाता है, जिससे दिल्ली को स्वच्छ रखने के प्रयासों को जमीनी स्तर पर बल मिल रहा है।

## इसका आप पर असर
सार्वजनिक स्थानों पर सफाई नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की दरों में भारी वृद्धि की गई है और डिजिटल ट्रैकिंग से बचने की गुंजाइश खत्म हो गई है।

- **भारत में:** जन विश्वास कानून के तहत छोटे नागरिक उल्लंघनों को अपराधमुक्त कर केवल मौद्रिक जुर्माने तक सीमित करने की नई व्यवस्था लागू हो रही है। इससे अदालती मुकदमों का बोझ कम होगा और नागरिक नियमों को आर्थिक जवाबदेही से जोड़ा जाएगा।
- **दिल्ली में:** खुले में पेशाब करने, सड़क पर कचरा फेंकने या गंदा पानी बहाने पर अब 500 से 1,000 रुपये तक का भारी जुर्माना चुकाना पड़ सकता है। एमसीडी 311 ऐप और डिजिटल चालान के जरिए उल्लंघनों की सीधी निगरानी की जा रही है, इसलिए नागरिकों को सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखनी होगी।
- **पालतू जानवरों के मालिकों पर असर:** बिना पट्टे के कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर घुमाने या खुला छोड़ने पर अब 1,000 रुपये का चालान कटेगा। पेट ओनर्स को अब सार्वजनिक सुरक्षा और स्वच्छता का ध्यान रखते हुए नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
- **दुकानदारों और मकान मालिकों के लिए:** 24 घंटे से अधिक समय तक सड़क पर कचरा छोड़ने या रास्तों पर गंदा पानी बहने देने पर सीधे चालान जारी किए जा रहे हैं। रिहायशी और व्यावसायिक परिसरों के बाहर सफाई रखना अब अनिवार्य जिम्मेदारी बन गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह सख्त कार्रवाई जन विश्वास संशोधन अधिनियम के प्रभावी होने और दिल्ली में स्वच्छता मानकों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

- **सीधा कारण:** गृह मंत्रालय द्वारा 15 मई को जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम 2026 अधिसूचित किए जाने के बाद दिल्ली नगर निगम अधिनियम में संशोधन हुआ, जिसके तहत आपराधिक मुकदमों के स्थान पर सिविल मौद्रिक जुर्माना लगाने की नई व्यवस्था शुरू हुई।
- **प्रशासनिक अधिकार और जुर्माना वृद्धि:** नगर निगम ने 19 मई को अपने फील्ड अधिकारियों को मौके पर जुर्माना लगाने की शक्ति दी और खुले में पेशाब करने पर जुर्माने को 50 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये तथा खुले कुत्ते पर 1,000 रुपये कर दिया।
- **डिजिटल निगरानी व्यवस्था:** एमसीडी 311 मोबाइल ऐप से जुड़े डिजिटल चालान सिस्टम की शुरुआत से उल्लंघनों को तुरंत दर्ज करना और बकायेदारों का फॉलो-अप करना संभव हो सका है।
- **व्यवहार परिवर्तन का लक्ष्य:** बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ आर्थिक दंडात्मक कार्रवाई करके स्वच्छ भारत और इंदौर मॉडल जैसी जवाबदेह नागरिक संस्कृति स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली में खुले में पेशाब करने पर अब कितना जुर्माना लगता है?
नए नियमों के तहत खुले में पेशाब करने पर जुर्माने की राशि 50 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दी गई है।

### 2. पिछले पांच महीनों में कुल कितने चालान जारी किए गए और कितना जुर्माना लगा?
मई के अंत से 28 अक्टूबर तक कुल 27,915 चालान जारी किए गए, जिन पर 2.31 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।

### 3. सार्वजनिक अशांति या उपद्रव की श्रेणी में कितने चालान दर्ज हुए?
धारा 397 के तहत सार्वजनिक उपद्रव के लगभग 7,000 चालान जारी हुए, जिनमें खुले में पेशाब करना, पोस्टर चिपकाना और कचरा फेंकना शामिल है।

### 4. बिना पट्टा लगाए कुत्ता खुला छोड़ने पर क्या जुर्माना तय है?
बिना पट्टे के कुत्ता घुमाने या खुला छोड़ने पर जुर्माना 50 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दिया गया है।

### 5. किस विभाग ने सबसे अधिक चालान जारी किए?
पर्यावरण प्रबंधन सेवा विभाग (डीईएमएस) ने सबसे अधिक 15,961 चालान जारी किए।

### 6. दिल्ली के किस जोन में सबसे ज्यादा चालान काटे गए?
पुरानी दिल्ली के सिटी-एसपी जोन में सबसे ज्यादा 6,066 चालान दर्ज किए गए।

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