# सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के PG में मिलीं सुरक्षा में बड़ी खामियां, किराया 17 हजार फिर भी सुविधा नदारद

> दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद आसपास के PG की पड़ताल में सुरक्षा के गंभीर इंतजाम नदारद मिले, जहां 17 हजार रुपये किराए वाले कमरे में भी सिर्फ एक सीढ़ी और एक ही रास्ता है।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-09-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/satya-niketan-hadase-ke-bada-delhi-ke-pg-men-milin-suraksha-men-bari-khamiyan-kiraya-17-hajara-phira-bhi-suvidha-nadarada-28937 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली बिल्डिंग हादसा, सत्य निकेतन, पीजी सुरक्षा, दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र, फायर सेफ्टी नियम, किराए के कमरे

राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए पांच मंजिला इमारत हादसे में मलबे के नीचे दबकर अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। इस हादसे के तुरंत बाद आसपास बने दूसरे पीजी और किराए के मकानों की हकीकत जानने के लिए मौके पर मौजूद टीम ने इलाके की पड़ताल शुरू की। हादसे वाली जगह के ठीक सामने बनी एक पांच मंजिला इमारत में जब टीम पहुंची तो वहां भी हैरान करने वाले हालात सामने आए। यह इमारत भी किराए पर चलती है और यहां बने अकेले कमरे दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों को रहने के लिए दिए जाते हैं।

## एक ही सीढ़ी, एक ही रास्ता, आग के नियमों की खुली अनदेखी
इस इमारत में घुसते ही सबसे पहले उसकी बनावट पर सवाल खड़ा होता है। ऊपर की मंजिलों तक जाने के लिए बनी सीढ़ियां बेहद संकरी हैं और पूरी बिल्डिंग में आने-जाने का रास्ता भी एक ही है, यानी न कोई अलग एंट्री है और न कोई अलग एग्जिट। आग या किसी हादसे की सूरत में लोगों को बाहर निकलने का दूसरा कोई विकल्प नहीं मिलेगा। यह सीधे तौर पर फायर सेफ्टी के तय नियमों का उल्लंघन है, जो हर बहुमंजिला इमारत में अलग निकासी रास्ते की मांग करते हैं।

## 17 हजार किराए के कमरे में सुविधा के नाम पर सिर्फ टंकी और स्लैब
इसी इमारत में रह रहे दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र शारांश विश्वकर्मा के कमरे में जब टीम पहुंची तो पता चला कि यह डबल शेयरिंग वाला कमरा है, जिसमें दो छात्र साथ रहते हैं। हर बेड का किराया 8000 रुपये है, यानी दोनों बेड मिलाकर पूरे कमरे का किराया करीब 17000 रुपये बैठता है। इतने भारी किराए के बावजूद कमरे के भीतर सुविधा के नाम पर सिर्फ एक पानी की टंकी लगी है और एक स्लैब बिछाकर वहीं कोने में छोटा किचन बना दिया गया है, जहां आरओ भी लगाया गया है। शारांश ने बताया कि पूरी बिल्डिंग में इसी तरीके से बाकी किराएदार भी रह रहे हैं, यानी उनका कमरा कोई अपवाद नहीं बल्कि पूरी इमारत की आम तस्वीर है।

## हादसे के बाद अब यहां रहने से डरने लगे छात्र
पड़ताल में यह भी सामने आया कि इस पीजी में सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं दिखे। ऊपर जाने वाली सीढ़ियां इतनी छोटी और तंग हैं कि अगर भगदड़ जैसी नौबत आए या कोई हादसा हो जाए, तो दो से तीन लोग भी एक साथ उनसे नहीं गुजर सकते। सत्य निकेतन की इस घटना के बाद शारांश के मन में भी अब यहां रहने को लेकर डर बैठ गया है। उन्होंने कहा कि इलाका छोड़कर कहीं और शिफ्ट होने का खयाल जरूर आता है, लेकिन यह तय नहीं हो पा रहा कि आखिर जाएं तो जाएं कहां। कॉलेज के नजदीक होने की वजह से यह जगह उनके लिए सुविधाजनक बनी हुई है, इसलिए फिलहाल वह असमंजस में हैं।

## इसका आप पर असर
यह घटना सीधे तौर पर दिल्ली में किराए के कमरों में रहने वाले लाखों छात्रों और नौकरीपेशा लोगों की सुरक्षा से जुड़ी है।

- **भारत में:** देश भर के बड़े शहरों में पीजी और किराए के कमरों में रहने वाले छात्र-छात्राएं अक्सर सुरक्षा मानकों की जांच किए बिना ही कमरा बुक कर लेते हैं। इस पड़ताल के बाद जरूरी है कि कमरा लेने से पहले इमारत में कम से कम दो अलग निकासी रास्तों की मौजूदगी जरूर देखी जाए।
- **दिल्ली में:** सत्य निकेतन जैसे इलाकों में, जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के आसपास बड़ी संख्या में पीजी चल रहे हैं, वहां रहने वाले छात्रों को अपनी इमारत की सीढ़ियों और निकासी रास्तों की खुद जांच करनी चाहिए और किसी भी खामी की शिकायत स्थानीय प्रशासन से करनी चाहिए।
- **किराया बनाम सुविधा:** 17000 रुपये जैसे भारी किराए के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का न मिलना बताता है कि छात्रों को कमरा लेने से पहले लिखित में सुविधाओं की सूची मांगनी चाहिए।
- **अभिभावकों के लिए:** बाहर पढ़ने भेजे गए बच्चों के पीजी की सुरक्षा व्यवस्था खुद जाकर देखना जरूरी हो गया है, सिर्फ फोटो या दलाल के भरोसे कमरा फाइनल न करें।

## सवाल-जवाब

### 1. सत्य निकेतन इमारत हादसे में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
मलबे में दबकर अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।

### 2. पड़ताल में किस इमारत की जांच की गई?
हादसे वाली जगह के ठीक सामने की एक पांच मंजिला किराए की इमारत की, जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र रहते हैं।

### 3. कमरे का किराया कितना था?
एक बेड का किराया 8000 रुपये था, यानी दो बेड वाले डबल शेयरिंग कमरे का किराया करीब 17000 रुपये बैठता था।

### 4. इमारत में सुरक्षा को लेकर क्या बड़ी खामी मिली?
सीढ़ियां बेहद संकरी थीं और पूरी बिल्डिंग में आने-जाने का सिर्फ एक ही एंट्री-एग्जिट रास्ता था।

### 5. छात्र शारांश विश्वकर्मा ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि हादसे के बाद अब उन्हें यहां रहने से डर लगता है, लेकिन कॉलेज पास होने के कारण वे मूव करने का फैसला नहीं कर पा रहे।

### 6. कमरे में क्या सुविधाएं दी गई थीं?
सिर्फ एक पानी की टंकी और एक स्लैब लगाकर बनाया गया छोटा किचन था, साथ में एक आरओ भी लगा था।

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