शालीमार बाग में सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद पर आधी रात चला बुलडोजर, एआईएमआईएम ने जताया कड़ा विरोध दिल्ली के शालीमार बाग में सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत देर रात एक मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई की गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों और एआईएमआईएम नेताओं ने भारी हंगामा किया। देश की राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में सड़क चौड़ीकरण की योजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक अमले ने देर रात एक मस्जिद के ढांचे पर बुलडोजर चला दिया। रात के अंधेरे में अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई की जानकारी फैलते ही आसपास के इलाकों में हलचल मच गई और स्थानीय निवासियों ने मौके पर एकत्रित होकर गहरा असंतोष व्यक्त किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के स्थानीय प्रतिनिधि भी घटनास्थल पर जमा हो गए और प्रशासनिक निर्णय का कड़ा विरोध करने लगे। देर रात तीन बजे की कार्रवाई और सहारनपुर की घटना से तुलना ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की दिल्ली इकाई के प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमई ने प्रशासनिक कदम पर तीखा ऐतराज जताते हुए दावा किया कि यह ध्वस्तीकरण रात करीब 3 बजे अंजाम दिया गया। उन्होंने इस घटनाक्रम की तुलना उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुए पुराने विवाद से करते हुए इसे सहारनपुर पार्ट-2 का नाम दिया। जमई के मुताबिक स्थानीय आबादी और धार्मिक स्थल की देखरेख करने वालों को किसी भी तरह की पूर्व सूचना या मोहलत दिए बिना एकाएक यह कदम उठाया गया, जिससे इलाके में भारी तनाव फैल गया। इमाम से मुलाकात पर रोक और धार्मिक ग्रंथों को हटाने की अपील शोएब जमई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए साझा किया कि पार्टी अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी से मिले निर्देशों के बाद उनकी टीम तुरंत शालीमार बाग पहुंची थी। जमई ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों और पुलिस अमले ने उन्हें मस्जिद के इमाम से मिलने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि घटनास्थल के चारों तरफ 100 से 200 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग करके आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई थी। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में जमई ने प्रशासन से यह विनती की कि कम से कम पवित्र ग्रंथ कुरान को ढांचे से सुरक्षित बाहर निकालने की इजाजत दी जाए। उन्होंने मस्जिद प्रबंधन समिति के डर का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों को आशंका है कि पूरे निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाएगा। अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि संविधान की शपथ लेकर काम करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को नियमों और संवेदनशील प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। राजधानी में पहले भी हो चुकी हैं ऐसी प्रशासनिक कार्रवाइयां दिल्ली के भीतर सार्वजनिक रास्तों और सरकारी जमीनों पर बने अनधिकृत कब्जों को हटाने के क्रम में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के नजदीकी क्षेत्रों में भी नगर निगम और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया था। उस दौरान सार्वजनिक पार्कों के भीतर गैरकानूनी तरीके से तैयार की गई दुकानों और अस्थायी ढांचों को बुलडोजर की मदद से जमींदोज किया गया था। सड़क नेटवर्क को व्यवस्थित करने और यातायात को सुगम बनाने के नाम पर लगातार चल रही इन कार्रवाइयों को लेकर समय-समय पर विवाद और विरोध प्रदर्शन सामने आते रहे हैं। इसका आप पर असर शालीमार बाग में हुई बुलडोजर कार्रवाई और उसके बाद उपजे तनाव का सीधा असर स्थानीय आवाजाही और नागरिक व्यवस्था पर देखा जा रहा है। • शालीमार बाग और उत्तर-पश्चिम दिल्ली में: इलाके में 100 से 200 मीटर के दायरे में की गई बैरिकेडिंग से दैनिक आवाजाही प्रभावित हो सकती है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों को सलाह दी जाती है कि वे घटनास्थल के आसपास संभावित ट्रैफिक डायवर्जन को ध्यान में रखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। • भारत में: सार्वजनिक स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने के नियमों पर प्रशासनिक सख्ती का यह बड़ा उदाहरण है। शहरी क्षेत्रों में धार्मिक और सार्वजनिक संरचनाओं से जुड़े कानूनी विवादों पर नागरिक सुरक्षा और नगर निगम के नियम समान रूप से लागू हो रहे हैं। • कानून व्यवस्था की स्थिति: रात के समय हुई कार्रवाई के कारण सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा सकती है। आसपास रहने वाले नागरिकों को आधिकारिक सूचनाओं और शांति व्यवस्था के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। • यातायात और मार्ग विस्तार: सड़क चौड़ीकरण पूरा होने के बाद लंबे समय में इस मार्ग पर जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण और मलबा हटाने का कार्य पूरा होने तक लोगों को कुछ दिनों की असुविधा का सामना करना पड़ेगा। ऐसा क्यों हुआ दिल्ली के शालीमार बाग में यह कार्रवाई सड़क के विस्तार और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के प्रशासनिक उद्देश्य के तहत की गई। • सड़क चौड़ीकरण परियोजना: शालीमार बाग इलाके में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए संबंधित एजेंसी ने सड़क चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित किया था। इस मार्ग विस्तार के दायरे में आ रहे निर्माण को हटाने के लिए प्रशासन ने बुलडोजर का इस्तेमाल किया। • देर रात की समय-सीमा: दिन के समय संभावित भारी विरोध, भीड़ के जमावड़े और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए अधिकारियों ने अक्सर अपनाई जाने वाली रणनीति के तहत रात 3 बजे का समय चुना। हालांकि, इस अचानक कार्रवाई ने स्थानीय लोगों और राजनीतिक नेताओं में रोष पैदा कर दिया। • राजधानी में अतिक्रमण विरोधी अभियान: दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में सार्वजनिक रास्तों और पार्कों से अनधिकृत निर्माण हटाने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। इससे पूर्व जामा मस्जिद के पास पार्कों में बनी गैरकानूनी दुकानों को भी इसी तरह की कार्रवाई में हटाया गया था। सवाल-जवाब 1. दिल्ली के शालीमार बाग में मस्जिद पर बुलडोजर क्यों चलाया गया? प्रशासन ने शालीमार बाग इलाके में सड़क चौड़ीकरण की योजना को पूरा करने के लिए मस्जिद के ढांचे पर बुलडोजर कार्रवाई की। 2. कार्रवाई किस समय की गई और किसने विरोध किया? एआईएमआईएम दिल्ली के अध्यक्ष शोएब जमई के अनुसार यह कार्रवाई देर रात करीब 3 बजे की गई, जिसका स्थानीय लोगों और उनकी पार्टी ने विरोध किया। 3. शोएब जमई ने इस मामले में क्या मुख्य आरोप लगाए हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कोई पूर्व मोहलत नहीं दी, 100-200 मीटर का दायरा सील कर दिया और उन्हें मस्जिद के इमाम से मिलने नहीं दिया गया। 4. शोएब जमई ने प्रशासन से क्या विशेष अपील की? जमई ने अधिकारियों से अपील की कि उन्हें मस्जिद के अंदर से पवित्र कुरान को सुरक्षित बाहर निकालने की इजाजत दी जाए। 5. क्या दिल्ली में हाल ही में कोई अन्य बुलडोजर कार्रवाई हुई थी? हाल ही में पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के पास सार्वजनिक पार्कों में बनी अवैध दुकानों को भी बुलडोजर से हटाया गया था। https://trendkia.com/delhi/shalimar-bagh-men-saraka-chaurikarana-ke-lie-masjida-para-adhi-rata-chala-buladojara-aimim-ne-jataya-kara-virodha-36796 TrendKia — Har trend, sabse pehle.