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  "type": "article",
  "title": "शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन हुआ तेज, विपक्ष भी प्रदर्शन में शामिल",
  "summary": "जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में जारी छात्र आंदोलन 36वें दिन भी जारी रहा, जहां राहुल गांधी ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही मौत की अफवाहों का खंडन किया है।",
  "content": "दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे इस शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को आज 36 दिन पूरे हो चुके हैं। देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और हाल ही में सामने आए परीक्षा लीक मामलों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक टकराव में तब्दील हो चुका है। शनिवार, 25 जुलाई 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शन स्थल का दौरा कर आंदोलनकारी छात्रों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। राहुल गांधी की इस भागीदारी ने प्रदर्शन को एक नई राष्ट्रीय दिशा दे दी है, जिससे सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है। इसी बीच, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता का दौर भी शुरू होने की उम्मीद है, हालांकि समय और स्थान को लेकर दोनों पक्षों में अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने इस पूरे आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों और भ्रामक जानकारियों के खिलाफ एक व्यापक अभियान शुरू कर दिया है, जिसमें सैकड़ों फर्जी खातों को ब्लॉक किया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है और नकल माफियाओं के खिलाफ एक अत्यंत सख्त कानून लाने की घोषणा की है।\n\nराहुल गांधी की जंतर-मंतर यात्रा और तीन प्रमुख गैर-समझौतावादी मांगें\nशनिवार, 25 जुलाई 2026 को कांग्रेस सांसद और संसद के निचले सदन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अचानक जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने वहां अनशन पर बैठे छात्रों और युवाओं के साथ जमीन पर बैठकर उनकी चिंताओं को सुना और देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली में व्याप्त विसंगतियों पर गंभीर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों की तीन प्रमुख मांगों को दोहराया और स्पष्ट किया कि ये मांगें पूरी तरह से 'नॉन-नेगोशिएबल' यानी गैर-समझौतावादी हैं, जिन पर सरकार के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी ने छात्रों को आश्वस्त किया कि पूरी विपक्षी ताकत उनके इस संघर्ष में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और संसद से लेकर सड़क तक इस आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा।\n\nविपक्ष के नेता ने छात्रों की पहली मांग पर जोर देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत उनके पद से बर्खास्त करने की मांग की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकारी गलियारों में धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी अन्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपने की चर्चा चल रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश का छात्र समुदाय इस तरह के किसी भी फेरबदल को स्वीकार नहीं करेगा। राहुल गांधी के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ और परीक्षा प्रणाली में व्याप्त गहरे भ्रष्टाचार के प्रतीक बन चुके हैं। इसलिए, केवल उनका विभाग बदलना कोई समाधान नहीं है, बल्कि उन्हें केंद्रीय कैबिनेट से पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए।\n\nउनकी दूसरी प्रमुख मांग पिछले दिनों प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई से संबंधित थी। राहुल गांधी ने मांग की कि 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हजारों छात्रों पर जो लाठीचार्ज किया गया था, उसके लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और नीति-निर्माताओं की पहचान की जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की इस हिंसक कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिसकी पूरी जवाबदेही तय होनी चाहिए। तीसरी और अंतिम मांग के रूप में उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद सामने आकर इन लगातार हो रहे पेपर लीक और छात्रों के मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न के लिए देश के युवा समुदाय से सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।\n\nसोनम वांगचुक का भावुक संदेश और अनशन का गंभीर शारीरिक प्रभाव\nइस पूरे आंदोलन का एक सबसे संवेदनशील और प्रेरक पहलू सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन रहा है। सोनम वांगचुक ने NEET परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार 26 दिनों तक कठोर भूख हड़ताल की। इस भीषण अनशन ने उनके स्वास्थ्य को बेहद गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अनशन समाप्त करने के बाद, शुक्रवार की रात को उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल X पर एक अत्यंत भावुक और दर्दभरा वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने आंदोलन के अनुभवों और अपनी वर्तमान शारीरिक स्थिति के बारे में विस्तार से बात की।\n\nअपने इस वीडियो में सोनम वांगचुक ने बेहद दुखी और हैरान मन से अपनी बात रखी। उन्होंने अपनी शारीरिक लाचारी का वर्णन करते हुए कहा, \n \"हड़ताल के अंदर एक और हड़ताल करके, जमीन पर लेटकर जो ताकत 20वें दिन मुझमें बची थी, वो ताकत लगाकर मुझे बाहर निकलना पड़ा।\"\n उन्होंने नोट किया कि लद्दाख की अत्यधिक ठंडी वादियों से निकलकर दिल्ली की तपती धूप और भीषण गर्मी में 26 दिनों तक भूखा रहने के कारण उनके शरीर का 11 किलोग्राम वजन कम हो गया है। इस लंबी अवधि में उनके शरीर की मांसपेशियां लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं और उनके आंतरिक अंगों तथा मस्तिष्क को भी गंभीर क्षति पहुंचने की आशंका जताई गई है।\n\nसोनम वांगचुक ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि देश के भविष्य और छात्रों के अधिकार के लिए अपनी जान जोखिम में डालने के बाद भी आज उन्हें लोगों से अपने अनशन की पवित्रता का प्रमाण पत्र लेना पड़ रहा है। उन्होंने समाज के एक वर्ग द्वारा की जा रही टिप्पणियों पर गहरी निराशा जताई, जहां लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि उन्होंने अपना अनशन क्यों तोड़ा, किसके हाथों से तरल पदार्थ ग्रहण किया और इसके पीछे क्या कोई गुप्त सौदा हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अभी केवल तरल आहार पर हैं और लगातार आ रहे उन फोन कॉल्स से आहत हैं जो उनकी निष्ठा पर सवाल उठा रहे हैं। CJP के कार्यकर्ताओं ने भी सोनम वांगचुक के खिलाफ सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी गुटों द्वारा किए जा रहे ट्रोलिंग की तीखी निंदा की है और इसे देश के एक सच्चे नायक का अपमान बताया है।\n\nCJP और सरकार के बीच वार्ता का दौर और अनिश्चितता\nजैसे-जैसे जंतर-मंतर पर गतिरोध गहराता जा रहा है, समाधान के लिए बातचीत के प्रयास भी तेज हो गए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के उच्च अधिकारियों के बीच दूसरे दौर की औपचारिक बातचीत प्रस्तावित है। हालांकि, इस बैठक के समय और सटीक स्थान को लेकर दोनों पक्षों के बयानों में कुछ विरोधाभास देखने को मिला है। जहां एक ओर दोपहर 2 बजे बैठक होने की खबरें थीं, वहीं दूसरी ओर आंदोलन से जुड़े प्रमुख सदस्य आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा उन्हें दोपहर बाद 3:30 से 4:00 बजे के बीच का समय दिया गया था।\n\nआशुतोष रांका ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि बैठक की अंतिम रूपरेखा और स्थान अभी तक तय नहीं हो पाया है, लेकिन उनकी टीम का एजेंडा पूरी तरह से स्पष्ट है। आंदोलनकारी छात्र उन दो प्रमुख मांगों पर सरकार से लिखित पुष्टि चाहते हैं, जिन पर सरकार ने सैद्धांतिक रूप से अपनी सहमति (इन-प्रिंसिपल एग्रीमेंट) दे दी है। CJP का मानना है कि जब तक सरकार इन मांगों पर लिखित प्रतिबद्धता जाहिर नहीं करती, तब तक बातचीत के इन बिंदुओं को पूरी तरह से बंद नहीं माना जा सकता। इसके अतिरिक्त, सबसे बड़ा पेंच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर फंसा हुआ है।\n\nरांका ने दोटूक लहजे में कहा, \n \"धर्मेंद्र प्रधान पर हमें क्लैरिटी चाहिए कि आप इस्तीफा देंगे, लेंगे या नहीं लेंगे?\"\n उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर अब किसी भी प्रकार के विचार-विमर्श या टालमटोल की कोई गुंजाइश नहीं बची है। उन्होंने इस बात पर भी रोष व्यक्त किया कि जो छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अपनी जान दांव पर लगा रहे हैं, उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाया जा रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यद्यपि वे कांग्रेस की आंतरिक रणनीति से पूरी तरह अवगत नहीं हैं, लेकिन विपक्ष ने इस आंदोलन को संसद के भीतर और बाहर मजबूत आवाज देकर बहुत बड़ा योगदान दिया है।\n\nयोगी आदित्यनाथ का तीखा हमला और संसद में आने वाला सख्त कानून\nदिल्ली में चल रहे इस छात्र आंदोलन के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा सुधारों और विपक्ष की राजनीति को लेकर एक बेहद आक्रामक बयान जारी किया है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकारों के कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा, \n \"साल 2012 से लेकर 2017 के बीच में जितनी भर्तियां निकलीं, सब विवादित हुईं।\"\n उन्होंने आरोप लगाया कि उन सरकारों में योग्यता और ईमानदारी का कोई सम्मान नहीं था, और केवल चहेतों को ही अवैध तरीके से नौकरियां बांटी जाती थीं।\n\nयोगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि साल 2017 के बाद उत्तर प्रदेश की पूरी प्रशासनिक और भर्ती प्रणाली में एक ऐतिहासिक और पारदर्शी बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले सवा नौ वर्षों में उनकी सरकार ने उत्तर प्रदेश के 9 लाख से अधिक योग्य नौजवानों को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना शासते हुए कहा कि जिन लोगों ने अपने शासनकाल में युवाओं के अधिकारों का हनन किया और उनके सुनहरे भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, आज वही दल राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।\n\nइसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा लिए गए एक ऐतिहासिक फैसले की जानकारी दी। योगी आदित्यनाथ ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने देश की परीक्षा प्रणाली को नकल मुक्त बनाने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक अत्यंत कड़ा कानून बनाने की मंजूरी दी है। इस नए कानून के तहत, पेपर लीक करने वाले और परीक्षाओं में धांधली करने वाले नकल माफियाओं को कम से कम 10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने घोषणा की कि यह ऐतिहासिक विधेयक सोमवार को संसद में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि परीक्षा माफियाओं को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें कानून के बल पर 'मिट्टी में मिला दिया जाएगा', क्योंकि ये नकल माफिया वास्तव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ही देन हैं जिन्हें उन्होंने सालों तक पाला-पोसा था।\n\nदिल्ली पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस: भ्रामक प्रचार और विदेशी साजिश का पर्दाफाश\nजंतर-मंतर पर जारी तनाव के बीच दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया। नई दिल्ली के सेंट्रल जिले के पुलिस उपायुक्त (DCP) रोहित राजबीर सिंह ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन सोशल मीडिया पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता तक केवल सत्यापित, तथ्यात्मक और सही खबरें ही पहुंचें, ताकि किसी भी तरह की अफवाह के कारण शांति व्यवस्था भंग न हो।\n\nDCP रोहित राजबीर सिंह ने खुलासा किया कि जांच के दौरान पुलिस ने अब तक 400 से अधिक ऐसे संदिग्ध और भ्रामक सोशल मीडिया हैंडल की पहचान की है, जो इस छात्र आंदोलन की आड़ में लगातार झूठी और भड़काऊ सामग्री का प्रसार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इनमें से कई खाते सीमा पार यानी पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे थे, जिनका उद्देश्य भारत में अशांति फैलाना और आंदोलन को हिंसक रूप देना था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ऐसे कई फर्जी और भ्रामक खातों को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया है। डीसीपी ने कहा कि इन खातों के माध्यम से पुरानी तस्वीरों और वीडियो के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की जा रही थी और उन्हें गलत संदर्भ में प्रस्तुत कर युवाओं को भड़काने की कोशिश की जा रही थी।\n\nपुलिस ने विशेष रूप से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस दावे का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि हालिया प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बर्बरता के कारण एक महिला प्रदर्शनकारी की मौत हो गई है। दिल्ली पुलिस ने इस दावे को पूरी तरह से आधारहीन और कोरी अफवाह करार देते हुए स्पष्ट किया कि प्रदर्शन स्थल पर ऐसी कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई है और किसी भी व्यक्ति या महिला की मृत्यु नहीं हुई है। इसके अलावा, पुलिस ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी एक फर्जी और एडिटेड वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा था ताकि लोगों के बीच भ्रम पैदा किया जा सके। दिल्ली पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी असत्यापित खबर पर विश्वास न करें और आश्वस्त किया कि पुलिस आगे भी नियमित रूप से सही जानकारी साझा करती रहेगी।\n\nपुलिस बर्बरता के आरोप और आंदोलन स्थलों पर हिंसा भड़काने की आशंका\nहालांकि दिल्ली पुलिस अपनी कार्रवाई को कानून सम्मत बता रही है, लेकिन आंदोलनकारियों ने पुलिस प्रशासन पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। CJP के सक्रिय सदस्य आशुतोष रांका ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी टीम जल्द ही उन दोषी पुलिसकर्मियों की एक विस्तृत सूची तैयार कर दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपने जा रही है, जिन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और स्वयंसेवकों के साथ कथित रूप से हिंसक मारपीट की है। उन्होंने दावा किया कि कुछ पुलिसकर्मियों ने बर्बरता की सारी सीमाएं लांघते हुए छात्रों के सिर फोड़े, महिला स्वयंसेवकों को सड़कों पर घसीटा, उनकी पसलियां तोड़ीं और कम उम्र की बच्चियों को थप्पड़ मारे।\n\nरांका ने स्पष्ट किया कि वे इन दोषी पुलिसकर्मियों की पहचान के लिए सरकार के फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) पर निर्भर नहीं रहेंगे, क्योंकि उन्हें इसकी निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है। इसके बजाय, वे आम जनता, चश्मदीदों और प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वास्तविक वीडियो की मदद से इन पुलिसकर्मियों की पहचान स्थापित कर रहे हैं। पहचान पूरी होने के बाद इस सूची को पूरी तरह से सार्वजनिक किया जाएगा ताकि जनता के सामने पुलिस का असली चेहरा आ सके।\n\nइस बीच, CJP के एक अन्य प्रमुख सदस्य सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक चिंताजनक पोस्ट साझा करते हुए आने वाले दिनों में आंदोलन को दबाने के लिए अत्यधिक दमनकारी और कुटिल रणनीतियों के इस्तेमाल की आशंका जताई है। दास ने लिखा कि उन्हें अंदेशा है कि प्रशासन केवल प्रत्यक्ष पुलिस बल का प्रयोग करने के बजाय कुछ बाहरी और किराए के तत्वों का सहारा ले सकता है। ये किराए के गुंडे प्रदर्शनकारियों का भेष धरकर जंतर-मंतर और उसके आसपास के प्रदर्शन स्थलों में घुसपैठ कर सकते हैं और वहां जानबूझकर हिंसक झड़पें, तोड़फोड़ या भगदड़ जैसी अप्रिय घटनाएं पैदा कर सकते हैं। सौरव दास के अनुसार, इस प्रायोजित हिंसा का उपयोग बाद में सरकार द्वारा आंदोलनकारियों पर बड़े पैमाने पर बल प्रयोग करने, जंतर-मंतर को खाली कराने और प्रमुख छात्र नेताओं की गिरफ्तारी को सही ठहराने के लिए एक मजबूत आधार के रूप में किया जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: पेपर लीक के खिलाफ आने वाले सख्त कानून (10 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये जुर्माना) से देश भर के लाखों परीक्षार्थियों को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली का लाभ मिलेगा।\n• दिल्ली में: जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शन और सुरक्षा घेराबंदी के कारण मध्य दिल्ली और कनॉट प्लेस के आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित हो सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है और यह कितने दिनों से चल रहा है?\nइस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही है और यह विरोध-प्रदर्शन पिछले 36 दिनों से लगातार जारी है।\n\n2. आंदोलनकारी छात्रों की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं जिनका राहुल गांधी ने समर्थन किया है?\nछात्रों की तीन मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बर्खास्तगी, 20 जुलाई के लाठीचार्ज के जिम्मेदार अधिकारियों को सजा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सार्वजनिक माफी शामिल है।\n\n3. सोनम वांगचुक ने कितने दिनों का अनशन किया और उनकी शारीरिक स्थिति क्या है?\nसोनम वांगचुक ने NEET पेपर लीक के विरोध में 26 दिनों तक आमरण अनशन किया, जिसके कारण उनका वजन 11 किलोग्राम कम हो गया और उनकी मांसपेशियों में भारी कमी आई है।\n\n4. पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ नया केंद्रीय विधेयक क्या सजा प्रस्तावित करता है?\nसोमवार को संसद में पेश होने वाले इस विधेयक के तहत पेपर लीक करने वालों को न्यूनतम 10 वर्ष की जेल और अधिकतम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।\n\n5. दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैल रही किस मुख्य अफवाह का खंडन किया है?\nदिल्ली पुलिस ने उन दावों को पूरी तरह खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से एक महिला प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी।\n\n6. CJP के सौरव दास ने सोशल मीडिया पर किस बात की आशंका व्यक्त की है?\nसौरव दास ने आशंका जताई है कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों का भेष धरकर हिंसा भड़काने के लिए किराए के लोगों का उपयोग कर सकते हैं ताकि बड़े पैमाने पर पुलिस कार्रवाई को सही ठहराया जा सके।",
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  "category": "दिल्ली",
  "publishedAt": "2026-07-25",
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