# सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आ सकते हैं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, 2027 के इस्लामाबाद दौरे पर बढ़ी कूटनीतिक चर्चा

> नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने जा रहे ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना है, जिसके साथ ही 2027 में पाकिस्तान में होने वाले एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति को लेकर भी अटकलें शुरू हो गई हैं।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-07-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/sitnbara-men-brics-shikhara-sammelana-ke-lie-delhi-a-sakate-hain-china-ke-rashtrapati-xi-jinping-2027-ke-islamabad-daure-para-barh-12336 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिक्स 2026, शी जिनपिंग, नरेंद्र मोदी, भारत चीन संबंध, एससीओ समिट 2027, पाकिस्तान कूटनीति, विदेश नीति

राजधानी नई दिल्ली में 12 से 13 सितंबर तक आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर कूटनीतिक तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बहुपक्षीय मंच पर दुनिया भर के कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष शिरकत करेंगे, जिनमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम भी शामिल है। यदि शी जिनपिंग इस सम्मेलन में भाग लेने भारत आते हैं, तो वर्ष 2019 के बाद यह उनकी पहली नई दिल्ली यात्रा होगी। सीमा पर हुए सैन्य तनाव और गलवान घाटी की घटना के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में आई खटास के बीच इस संभावित दौरे को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी घटनाक्रम के साथ एशियाई राजनीति में एक और अहम सवाल तैरने लगा है कि क्या भारत द्वारा चीनी राष्ट्रपति की अगवानी के बाद वर्ष 2027 में पाकिस्तान में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस्लामाबाद का रुख करेंगे।

## छह वर्षों के बाद शी जिनपिंग का भारत दौरा और गलवान के बाद का कूटनीतिक परिदृश्य
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2019 में महाबलीपुरम में आयोजित दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की यात्रा की थी। हालांकि, वर्ष 2020 के मध्य में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पैदा हुए गंभीर सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत ठप पड़ गई थी। इसके बाद के वर्षों में दोनों नेताओं की आमने-सामने बातचीत केवल ब्रिक्स, जी20 और एससीओ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के इतर ही सीमित रही। संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली थी, जब सैन्य गतिरोध को कम करने के समझौते के तुरंत बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक की थी। इसके पश्चात, 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक चीन के तियानजिन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया था, जो वुहान (2018) और ब्रिक्स (2019) के बाद लगभग सात वर्षों में उनकी पहली चीन यात्रा थी। तियानजिन में भी दोनों प्रमुखों के बीच सकारात्मक वार्ता हुई थी।

## द्विपक्षीय वार्ता के संभावित मुद्दे और सीमा प्रबंधन
भारत और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद पूरी तरह हल नहीं हुआ है, लेकिन दोनों पक्षों ने सैन्य और कूटनीतिक चैनलों के जरिए संवाद कायम रखा है। यदि सितंबर में नई दिल्ली में यह मुलाकात होती है, तो इसका दायरा केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगा। वार्ता की मेज पर सीमा प्रबंधन, एलएसी पर शांति बनाए रखने के तंत्र, आपसी व्यापारिक संतुलन, निवेश के अवसर और बहुपक्षीय वैश्विक मंचों पर सहयोग जैसे जटिल विषय प्रमुखता से शामिल हो सकते हैं। वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि एशियाई महाद्वीप की इन दो बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्तियों के बीच संवाद का सुधरना पूरे क्षेत्र के भू-राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

## 2027 में पाकिस्तान में एससीओ सम्मेलन और इस्लामाबाद का आधिकारिक रुख
शी जिनपिंग के संभावित भारत आगमन की खबरों के बीच पाकिस्तान में 2027 में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन को लेकर भी चर्चाएं छिड़ गई हैं। मनीला में आयोजित आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ) की बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और पाकिस्तानी विदेश मंत्री के बीच किसी मुलाकात के अनुरोध पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अनभिज्ञता जताई। हालांकि, 2027 के इस्लामाबाद एससीओ सम्मेलन के संदर्भ में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि संगठन के स्थापित नियमों और प्रोटोकॉल के तहत मेजबान देश का यह दायित्व है कि वह सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को औपचारिक निमंत्रण भेजे। इस व्यवस्था के तहत भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस्लामाबाद आने का न्योता भेजा जाएगा।

## भारत का रुख और एससीओ की रणनीतिक अहमियत
पाकिस्तान की ओर से निमंत्रण भेजने की मंशा के बावजूद भारत सरकार ने इस पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी या निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, किसी देश द्वारा निमंत्रण दिया जाना एक प्रक्रियात्मक दायित्व है, लेकिन उसमें भागीदारी का फैसला उस समय की क्षेत्रीय सुरक्षा स्थितियों, सीमा पार आतंकवाद की स्थिति और भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों के माहौल पर निर्भर करेगा। शंघा‌ई सहयोग संगठन वर्तमान में दुनिया के सबसे प्रभावशाली और बड़े क्षेत्रीय संगठनों में से एक है, जो राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में 2027 का यह आयोजन दक्षिण एशियाई राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह राजनयिक हलचल भारत की सीमा सुरक्षा, द्विपक्षीय व्यापार और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक स्थिरता पर सीधा असर डाल सकती है।

**अंतरराष्ट्रीय स्तर पर:** भारत, चीन और रूस के शीर्ष नेताओं की मुलाकात वैश्विक आर्थिक नीतियों और बहुपक्षीय कूटनीति की दिशा तय करेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में कब आयोजित होगा?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में 12 से 13 सितंबर तक आयोजित होने जा रहा है।

### 2. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आखिरी बार भारत का दौरा कब किया था?
शी जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2019 में महाबलीपुरम अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा किया था।

### 3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में चीन की यात्रा कब की थी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक तियानजिन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए चीन की यात्रा की थी।

### 4. क्या प्रधानमंत्री मोदी 2027 में पाकिस्तान जाएंगे?
पाकिस्तान 2027 के एससीओ सम्मेलन के लिए सभी सदस्य देशों को निमंत्रण भेजेगा, लेकिन भारत ने अभी इसमें शामिल होने पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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