# त्योहारी सीजन में रामलीला मैदान में विपक्षी शक्ति प्रदर्शन से सहमे व्यापारी, तारीख बदलने या बुराड़ी शिफ्ट करने की मांग

> दिवाली से ठीक पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित विपक्षी महारैली को लेकर कारोबारियों ने गहरी चिंता जताते हुए इंडिया गठबंधन के बड़े नेताओं को पत्र लिखा है। व्यापारियों का कहना है कि भारी भीड़ और यातायात बंदिशों से मध्य व पुरानी दिल्ली के 20 बड़े बाजारों का अरबों रुपये का कारोबार ठप पड़ सकता है।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/tyohari-sijana-men-ramlila-maidan-men-vipakshi-shakti-pradarshana-se-sahame-vyapari-tarikha-badalane-ya-burari-shiphta-karane-ki-m-53728 · **Language:** Hindi
**Tags:** रामलीला मैदान, सीटीआई, दिवाली व्यापार, दिल्ली बाजार, बृजेश गोयल, चांदनी चौक, सदर बाजार, इंडिया गठबंधन

दीपावली और धनतेरस के बड़े कारोबारी दौर से ठीक पहले देश की राजधानी में सियासी सरगर्मी ने दुकानदारों की नींद उड़ा दी है। मध्य दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आगामी 1 नवंबर को आयोजित होने वाली 10 लाख लोगों की विशाल राजनीतिक सभा को लेकर व्यापारिक वर्ग में जबरदस्त बेचैनी फैल गई है। कारोबारियों का कहना है कि धनतेरस और दिवाली के ऐन वक्त पर अगर शहर के दिल में इस कदर जनसैलाब उमड़ेगा, तो खरीद-फरोख्त पूरी तरह चरमरा जाएगी। इसी संकट को भांपते हुए व्यापारियों के प्रमुख संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री, जिसे संक्षेप में सीटीआई कहा जाता है, ने विपक्षी गठबंधन के शीर्ष दिग्गजों का दरवाजा खटखटाया है। संगठन ने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को औपचारिक खत भेजकर इस मामले में तुरंत दखल देने का आग्रह किया है।

व्यापारिक प्रतिनिधियों ने साफ किया है कि उनका किसी भी राजनीतिक दल या उनके लोकतांत्रिक कार्यक्रमों से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। चैंबर के चेयरमैन बृजेश गोयल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि व्यापारी केवल अपने परिवारों की आजीविका बचाने के लिए गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि 6 नवंबर को धनतेरस का महापर्व है और उसके दो दिन बाद 8 नवंबर को दीपावली मनाई जानी है। ऐसे में 1 नवंबर की तारीख वह नाजुक वक्त है जब सालभर की सबसे बड़ी खरीदारी होती है, खुदरा दुकानों में स्टॉक पहुंचाया जाता है और देशभर से थोक खरीदार यहां आते हैं। यदि उस दिन 15 से 20 हजार गाड़ियों का काफिला और दस लाख की भीड़ मध्य दिल्ली की संकरी सड़कों पर पहुंचेगी, तो ग्राहकों और माल दोनों की आवाजाही पर ताला लग जाएगा।

## वाहनों के लिए पार्किंग का घोर अभाव और चक्काजाम का डर
व्यापारी संगठन द्वारा भेजे गए पत्र में चार सबसे बड़े खतरों को प्रमुखता से दर्ज किया गया है। इनमें सबसे पहली और विकट चुनौती पार्किंग व्यवस्था की है। ऐतिहासिक मैदान के मौजूदा बुनियादी ढांचे के अनुसार, वहां दो सौ बड़ी बसों को खड़ा करने की भी पर्याप्त जगह मौजूद नहीं है। ऐसे हालात में जब दस लाख समर्थकों को लाने के लिए 15 से 20 हजार चार पहिया वाहनों, बसों और मिनी ट्रकों के आने का अनुमान है, तो उन्हें कहां खड़ा किया जाएगा, यह एक अनुत्तरित सवाल बना हुआ है। यदि इन अनगिनत वाहनों को आसपास के सार्वजनिक रास्तों पर भी खड़ा करने का प्रयास किया गया, तो पूरी जगह कम पड़ जाएगी।

नतीजतन, इलाके की मुख्य धमनी माने जाने वाले जवाहरलाल नेहरू मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट चौराहे और चांदनी चौक मुख्य मार्ग पर वाहनों का अभूतपूर्व दबाव बनना तय है। इस भारी जमावड़े से मध्य दिल्ली के साथ-साथ पुरानी दिल्ली का संपूर्ण ट्रैफिक तंत्र ध्वस्त हो सकता है। संगठन ने अंदेशा जताया है कि अगर स्थिति बिगड़ी तो दिल्ली के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में लॉकडाउन जैसी भयानक बंदी के हालात बन सकते हैं, जिससे आम खरीदारों का दुकानों तक पहुंचना असंभव हो जाएगा।

## बीस ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्र और रोजाना 12 हजार करोड़ का दांव
रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में राजधानी का सबसे सघन व्यापारिक गलियारा स्थित है, जहां करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा मंडियां मौजूद हैं। इस विशाल सूची में चांदनी चौक, एशिया का सबसे बड़ा थोक बाजार सदर बाजार, ऐतिहासिक कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस की बिजली मंडी, खारी बावली का किराना बाजार, कश्मीरी गेट ऑटोमोबाइल मार्केट, नया बाजार का अनाज व्यापार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार का पेपर मार्केट, किनारी बाजार, दरीबा कलां का सर्राफा, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट का इलेक्ट्रॉनिक्स केंद्र और अजमेरी गेट व पहाड़गंज का इलाका शामिल हैं।

इन बाजारों की हैसियत केवल स्थानीय दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ये समूचे हिंदुस्तान के सप्लाई नेटवर्क की रीढ़ हैं। यहां हर रोज दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों, जिनमें नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर और मंगोलपुरी शामिल हैं, से करीब पांच हजार कमर्शियल वाहन माल की डिलीवरी करने पहुंचते हैं। इसके अलावा लगभग तीन हजार भारी ट्रक रोजाना इन मंडियों से तैयार माल लादकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के 25 शहरों, जैसे गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत के साथ-साथ देश के दूरदराज राज्यों में ले जाते हैं। संगठन का आकलन है कि इन बाजारों में प्रतिदिन 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये का लेन-देन होता है। यदि पाबंदियों के चलते यह आपूर्ति चक्र रुका, तो दिल्ली ही नहीं बल्कि अन्य सूबों के व्यापारियों को भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

## एक दिन पहले से ही दिल्ली की सीमाओं पर आपूर्ति थमने की आशंका
व्यापारियों की चिंता सिर्फ रैली वाले दिन तक सीमित नहीं है। सीटीआई ने आगाह किया है कि इस भारी जमावड़े के दुष्परिणाम 31 अक्टूबर की दोपहर से ही धरातल पर दिखने लगेंगे। देश के विभिन्न कोनों से आने वाले कार्यकर्ताओं के वाहन 31 अक्टूबर से ही दिल्ली के सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर जैसे प्रमुख सीमा चौकियों पर जमा होने शुरू हो जाएंगे। जैसे ही सीमाओं पर वाहनों की कतारें लंबी होंगी, पुलिस शाम होते-होते मध्य दिल्ली के मुख्य चौराहों पर बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन लागू कर देगी।

व्यापारियों के अनुसार, माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर्स ने भी 31 अक्टूबर से दिल्ली के अंदर मालवाहक ट्रक भेजने को लेकर हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं। अगर त्योहार के ठीक पहले सामान से लदी गाड़ियां बाजारों तक नहीं पहुंच पाईं, तो दुकानों के रैक खाली रह जाएंगे और खुदरा व्यापारी ग्राहकों की भारी मांग पूरी करने से चूक जाएंगे। इसका सीधा फायदा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स या दिल्ली से बाहर के बाजारों को मिल सकता है, जो स्थानीय दुकानदारों की कमर तोड़ देगा।

## दस अक्टूबर के प्रदर्शन की नजीर और सीटीआई के दो ठोस सुझाव
अपनी चिंताओं को तर्कसंगत साबित करने के लिए व्यापारी संगठन ने हाल ही में जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन का ब्योरा दिया है। संगठन ने याद दिलाया कि उस दिन महज पांच से सात हजार लोग जुटे थे, इसके बावजूद मध्य दिल्ली का ट्रैफिक लगभग आठ घंटे तक पूरी तरह रेंगता रहा और लोग जाम में फंसे रहे। जब चंद हजार लोगों में यह हाल हुआ, तो दस लाख की भीड़ के समय दिल्ली की सड़कों का क्या हश्र होगा, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है। त्योहारों में ग्राहकों का समय पर दुकानों तक पहुंचना सबसे अहम होता है, और जाम के डर से यदि खरीदार दूसरी जगहों पर चले गए तो नुकसान की भरपाई नामुमकिन होगी।

इन सभी गंभीर वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए सीटीआई ने विपक्षी नेताओं के सामने समाधान के दो स्पष्ट विकल्प रखे हैं। पहला विकल्प यह दिया गया है कि 1 नवंबर को होने वाली इस महारैली को स्थगित करके दिवाली के बाद, यानी 10 या 11 नवंबर अथवा उसके बाद आयोजित किया जाए। इससे धनतेरस और दीपावली का पीक बिजनेस बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकेगा। दूसरा विकल्प यह सुझाया गया है कि यदि तारीख बदलना कतई मुमकिन नहीं है, तो आयोजन स्थल को रामलीला मैदान से बदलकर बाहरी दिल्ली के बुराड़ी मैदान में स्थानांतरित कर दिया जाए। संगठन के अनुसार, बुराड़ी मैदान में करीब 15 हजार वाहनों को व्यवस्थित तरीके से पार्क करने की पर्याप्त जगह उपलब्ध है, जिससे मध्य दिल्ली के घने बाजारों और आम नागरिकों को भारी ट्रैफिक जाम से बचाया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
दिवाली से ठीक पहले दिल्ली के मध्य इलाके में 10 लाख लोगों की प्रस्तावित राजनीतिक सभा से आम नागरिकों, दुकानदारों और त्योहार की खरीदारी करने वालों की आवाजाही पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **भारत में:** दिल्ली के थोक बाजारों से देशभर के छोटे कारोबारियों को मिलने वाली त्योहारी माल की सप्लाई बाधित हो सकती है। अगर ट्रकों की आवाजाही रुकी तो दूसरे राज्यों के बाजारों में भी सामान की कमी और कीमतों में तेजी आ सकती है।
- **दिल्ली में:** चांदनी चौक, सदर बाजार और करोल बाग जैसे 20 बड़े बाजारों में खरीदारी के लिए जाने वाले आम लोगों को 31 अक्टूबर से 1 नवंबर तक भीषण ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ सकता है। जो ग्राहक त्योहार की खरीदारी करने निकलने वाले हैं, उन्हें सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने या वैकल्पिक रास्तों की योजना पहले से बनाने की जरूरत होगी।
- **व्यापारियों के लिए:** मध्य और पुरानी दिल्ली की दुकानों में रोजाना होने वाले 10 से 12 हजार करोड़ रुपये के कारोबार पर सीधा ताला लगने का जोखिम पैदा हो गया है। अगर मालवाहक गाड़ियां समय पर नहीं पहुंचीं तो व्यापारियों का त्योहारी स्टॉक दुकानों तक पहुंचना अटक जाएगा।
- **परिवहन और यात्रियों के लिए:** नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास जाने वाले रेल यात्रियों को कई घंटे पहले घर से निकलना पड़ सकता है। बहादुर शाह जफर मार्ग और जवाहरलाल नेहरू मार्ग जैसे प्रमुख मार्गों पर भारी बैरिकेडिंग के कारण घंटों तक चक्काजाम रहने की आशंका है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह टकराव इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि राजनीतिक दलों द्वारा चुनी गई महारैली की तारीख और जगह सीधे तौर पर साल के सबसे व्यस्त त्योहारी कारोबारी कैलेंडर से टकरा रही है।

- **त्योहारी समय और स्थान का टकराव:** कांग्रेस और विपक्षी दलों ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में 10 लाख समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन तय किया है, जो 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली से ठीक पहले का समय है। इस मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में 20 सबसे बड़े थोक बाजार स्थित हैं, जहां इसी समय माल की लोडिंग और ग्राहकों की भीड़ सबसे चरम पर होती है।
- **पार्किंग ढांचे की बुनियादी कमी:** रामलीला मैदान के परिसर में 200 बड़ी बसों की पार्किंग तक की समुचित जगह नहीं है, जबकि रैली के लिए 15 से 20 हजार भारी और हल्के वाहनों के दिल्ली पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इस भारी असंतुलन की वजह से सभी वाहनों के मुख्य सड़कों पर खड़े होने और भीषण चक्काजाम लगने की सीधी आशंका बन गई है।
- **सप्लाई चेन की संवेदनशीलता:** दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना 5 हजार गाड़ियां इन बाजारों में माल लाती हैं और 3 हजार ट्रक एनसीआर के 25 शहरों में माल ले जाते हैं। 31 अक्टूबर की शाम से ही सीमाओं पर सुरक्षा जांच और बैरिकेडिंग लगने के कारण इस पूरी लॉजिस्टिक चेन के टूटने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
- **समाधान की तलाश:** सीटीआई ने संकट से बचने के लिए इंडिया गठबंधन के नेताओं को पत्र लिखकर कार्यक्रम को 10-11 नवंबर तक टालने या इसे विशाल पार्किंग वाले बुराड़ी मैदान में शिफ्ट करने का विकल्प दिया है, जिस पर राजनीतिक दलों के निर्णय का इंतजार है।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली के व्यापारी रामलीला मैदान की महारैली का विरोध क्यों कर रहे हैं?
व्यापारी रैली का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि दिवाली और धनतेरस के व्यस्त समय में भारी भीड़ व ट्रैफिक जाम के कारण अपनी आजीविका और करोड़ों रुपये के कारोबार को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।

### 2. महारैली की प्रस्तावित तारीख क्या है और त्योहार कब पड़ रहे हैं?
रैली 1 नवंबर को प्रस्तावित है, जबकि धनतेरस 6 नवंबर को और दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी।

### 3. व्यापारी संगठन सीटीआई ने विपक्षी नेताओं के सामने क्या दो मुख्य विकल्प रखे हैं?
सीटीआई ने मांग की है कि या तो रैली को दिवाली के बाद 10-11 नवंबर को कराया जाए, या फिर इसे रामलीला मैदान से बदलकर बुराड़ी मैदान में आयोजित किया जाए जहां 15 हजार गाड़ियों की पार्किंग है।

### 4. इस प्रस्तावित रैली से दिल्ली के कितने बाजारों और कितने कारोबार पर असर पड़ सकता है?
रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित चांदनी चौक और सदर बाजार समेत 20 प्रमुख बाजारों का रोजाना 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।

### 5. रामलीला मैदान में वाहनों की पार्किंग को लेकर क्या मुख्य समस्या है?
मैदान में 200 बसों के लिए भी पर्याप्त पार्किंग नहीं है, जबकि रैली में 10 लाख लोगों के लिए 15 से 20 हजार बसें, कारें और टेम्पो आने का अनुमान है।

### 6. व्यापारियों ने किन प्रमुख राजनीतिक नेताओं को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है?
व्यापारियों ने अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे समेत इंडिया गठबंधन के विभिन्न शीर्ष घटक दलों के नेताओं को पत्र भेजा है।

### 7. माल की आवाजाही 1 नवंबर से पहले 31 अक्टूबर से ही क्यों प्रभावित हो सकती है?
31 अक्टूबर की दोपहर से ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर सीमाओं पर कार्यकर्ताओं के वाहनों का पहुंचना शुरू हो जाएगा, जिसके चलते शाम से ही मध्य दिल्ली में बैरिकेडिंग और ट्रैफिक रोक लग सकती है।

### 8. सीटीआई ने अपनी चिंताओं के समर्थन में किस पिछले प्रदर्शन का उदाहरण दिया?
सीटीआई ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का उदाहरण दिया, जहां केवल पांच से सात हजार लोगों की मौजूदगी के बावजूद मध्य दिल्ली में 8 घंटे तक भीषण जाम लग गया था।

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