उत्तर भारत से मॉनसून की रवानगी शुरू, कई राज्यों में बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर दिल्ली और पड़ोसी मैदानी इलाकों से मॉनसून वापसी की कगार पर है, जबकि देश के पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी हिस्सों में अगले छह दिनों तक झमाझम बारिश और ऊंचे पर्वतों पर बर्फबारी के आसार हैं। अक्टूबर महीने के आगाज के साथ ही देश भर में मौसमी गतिविधियों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। जहां एक तरफ उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों में आसमान साफ होने और मौसम शुष्क होने की प्रक्रिया तेज हो गई है, वहीं दूसरी तरफ देश के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला अभी थमा नहीं है। हिमालय के उच्च शिखरों पर हल्की बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे ठंड की शुरुआती आहट मिलने लगी है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के अधिकांश भागों से मॉनसून का विदाई दौर लगभग तय माना जा रहा है, मगर पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के तमाम राज्यों में अगले एक सप्ताह तक बादलों की आवाजाही और तेज बौछारों का दौर बना रहने वाला है। उत्तर भारत से मॉनसून की वापसी और पहाड़ों में हिमपात मौसम विभाग के ताजा आकलन के अनुसार आने वाले दो से तीन दिनों में राजधानी दिल्ली समेत पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बचे हुए इलाकों से मॉनसून पूरी तरह रुखसत हो जाएगा। इसके उलट जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में फिलहाल मॉनसून की वापसी के संकेत नहीं दिख रहे हैं। पर्वतीय हलचलों की बात करें तो 1 अक्टूबर को उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों, विशेषकर चमोली और हेमकुंड साहिब के आसपास हल्की बर्फबारी या सफेद चादर बिछने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश के किन्नौर, लाहौल स्पीति और कुल्लू की चोटियों पर पहले ही हल्की बर्फबारी दर्ज की जा चुकी है, जिससे घाटी क्षेत्रों में तापमान गिरा है। पहाड़ी और मध्य भारत के क्षेत्रों में वर्षा का पूर्वानुमान आगामी छह दिनों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में मौसमी गतिविधियां अलग-अलग रूप में सक्रिय रहेंगी। जम्मू कश्मीर, लद्दाख, गिलगित, बाल्टिस्तान और मुज़फ़्फ़राबाद के इलाकों में 5 से 6 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। उत्तराखंड राज्य में 1 से 2 अक्टूबर और फिर 5 से 6 अक्टूबर के बीच छिटपुट स्थानों पर वर्षा की संभावना जताई गई है। मध्य भारत की तरफ रुख करें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में 1 से 3 अक्टूबर के दौरान बादलों के बरसने का अनुमान है। इसके अलावा विदर्भ में 5 से 6 अक्टूबर के मध्य और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में 2 से 6 अक्टूबर तक रुक-रुक कर वर्षा दर्ज की जा सकती है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बादलों का पहरा पूर्वी भारत के मैदानी और तटीय इलाकों में मौसमी सक्रियता लगातार बनी रहेगी। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा उप हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 1 से 6 अक्टूबर तक छिटपुट बारिश के आसार बने हुए हैं। झारखंड में 1 और 2 अक्टूबर को तथा बिहार में 3 से 6 अक्टूबर के बीच कई जगहों पर बारिश होने का अनुमान है। ओडिशा में 1 अक्टूबर को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, जहां गरज-चमक के साथ आंधी-तूफान, आकाशीय बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है, जो झोंकों में 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी मौसमी उथल-पुथल जारी रहेगी। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 1 से 6 अक्टूबर के दौरान कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और बारिश होने की संभावना है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी 1 से 6 अक्टूबर के बीच ऐसी ही मौसमी हलचल बनी रहेगी। भारी बारिश की चेतावनी के तहत अरुणाचल प्रदेश में 3 से 4 अक्टूबर के दौरान मूसलाधार बारिश हो सकती है, जबकि नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के विभिन्न इलाकों में 1 अक्टूबर को भारी बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। पश्चिम और दक्षिण भारत में भारी बारिश और आंधी की स्थिति पश्चिमी भारत में कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के क्षेत्रों में 1 से 6 अक्टूबर के बीच छिटपुट बारिश का दौर जारी रहेगा, वहीं गुजरात क्षेत्र, सौराष्ट्र और कच्छ में 1 अक्टूबर को कहीं-कहीं हल्की वर्षा संभव है। दक्षिण भारत के राज्यों में मानसूनी बादल काफी मेहरबान रहने वाले हैं। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, लक्षद्वीप, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 1 से 6 अक्टूबर तक छिटपुट वर्षा के संकेत हैं। केरल और तटीय कर्नाटक में 3 से 6 अक्टूबर, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 2 से 6 अक्टूबर और तेलंगाना में 2 से 3 अक्टूबर के बीच बारिश का अनुमान है। दक्षिण प्रायद्वीप में भारी वर्षा का मुख्य केंद्र केरल और कर्नाटक के इलाके बने रहेंगे। केरल और माहे में 1 से 6 अक्टूबर तक, तटीय कर्नाटक में 1 से 2 अक्टूबर तक और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 1 अक्टूबर को व्यापक स्तर पर जोरदार बारिश देखने को मिलेगी। तटीय कर्नाटक में 1 अक्टूबर को आकाशीय बिजली चमकने और आंधी की संभावना है, जबकि केरल और माहे में 3 से 4 अक्टूबर के बीच तूफान व वज्रपात के आसार हैं। इसके अतिरिक्त 1 अक्टूबर को तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि केरल और माहे में 1, 2 और 4 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। इसका आप पर असर अक्टूबर की शुरुआत में अलग-अलग राज्यों में मौसम के इस बदलाव से कृषि कार्यों, यात्रा और दैनिक आवागमन पर सीधा असर पड़ेगा। • उत्तर भारत में: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में मॉनसून विदाई से उमस घटेगी और मौसम शुष्क रहेगा। किसान धान की कटाई और रबी फसलों की तैयारी बिना बारिश की रुकावट के कर सकेंगे। • पर्वतीय राज्यों में: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी से सुबह और शाम की ठंड बढ़ जाएगी। ऊंचाई वाले तीर्थस्थलों और दर्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों को गर्म कपड़ों और फिसलन से बचाव की तैयारी रखनी होगी। • पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में: ओडिशा, बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में 6 अक्टूबर तक बारिश और तेज हवाएं चलने से बिजली आपूर्ति और स्थानीय आवागमन प्रभावित हो सकता है। ओडिशा में 1 अक्टूबर को 50 किमी/घंटा तक की तेज हवाओं के मद्देनजर खुले में निकलने से बचें। • दक्षिण भारत में: केरल, तटीय कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में भारी बारिश से जलभराव और यातायात में देरी हो सकती है। बिजली गिरने की चेतावनी को देखते हुए आंधी के दौरान पेड़ों और कमजोर ढांचों के नीचे शरण न लें। ऐसा क्यों हुआ उत्तर-पश्चिम भारत पर शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाओं के हावी होने से मॉनसून पीछे हट रहा है, जबकि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी अन्य राज्यों में बारिश करा रही है। • मॉनसून की वापसी रेखा: राजस्थान, पंजाब और दिल्ली के ऊपर से मानसूनी हवाओं का दबाव कमजोर पड़ चुका है और हवा की दिशा बदलने से नमी का स्तर गिर गया है। इसके चलते अगले दो से तीन दिनों में इन मैदानी राज्यों से मॉनसून पूरी तरह पीछे हट जाएगा। • दक्षिण और पूर्व में नमी का प्रवाह: बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के निकटवर्ती हिस्सों में निम्न वायुमंडलीय प्रणालियां सक्रिय हैं। इस कारण प्रायद्वीपीय भारत, पूर्वी राज्यों और पूर्वोत्तर में अगले छह दिनों तक लगातार बादल छाए रहने और बारिश की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। • पहाड़ों पर पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव: हिमालयी क्षेत्र के ऊपरी वायुमंडल में ठंडी हवाओं के गुजरने से चमोली, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कुल्लू की ऊंची चोटियों पर तापमान शून्य के करीब पहुंच गया है। इसके परिणामस्वरूप बारिश की जगह हल्की बर्फबारी दर्ज की गई है। सवाल-जवाब 1. दिल्ली और पंजाब से मॉनसून कब तक पूरी तरह विदा हो जाएगा? मौसम विभाग के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बचे हिस्सों से मॉनसून की वापसी हो जाएगी। 2. पहाड़ों पर किन स्थानों पर बर्फबारी देखी गई है या इसकी संभावना है? हिमाचल प्रदेश के किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कुल्लू की ऊंचाई पर हल्की बर्फबारी दर्ज हुई है, जबकि 1 अक्टूबर को उत्तराखंड के चमोली और हेमकुंड साहिब के आसपास बर्फ गिरने के आसार हैं। 3. ओडिशा में 1 अक्टूबर को हवाओं की रफ्तार कितनी रह सकती है? ओडिशा में 1 अक्टूबर को 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और झोंकों में गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है। 4. दक्षिण भारत के किन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है? 1 अक्टूबर को तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी बारिश का अनुमान है, जबकि केरल और माहे में 1, 2 और 4 अक्टूबर को भारी वर्षा हो सकती है। 5. पूर्वोत्तर राज्यों में किस दिन भारी वर्षा की संभावना जताई गई है? नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 1 अक्टूबर को भारी बारिश हो सकती है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में 3 और 4 अक्टूबर को भारी बारिश का पूर्वानुमान है। https://trendkia.com/delhi/uttara-bharata-se-monsoon-ki-ravanagi-shuru-kai-rajyon-men-barisha-aura-paharon-para-barphabari-ka-daura-40977 TrendKia — Har trend, sabse pehle.