# विपक्षी गठबंधन की बैठक में चुनाव आयोग पर बरसीं ममता बनर्जी, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की रणनीति पर चर्चा

> दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाया।

**Type:** article · **Category:** दिल्ली · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/delhi/vipakshi-gathabndhana-ki-baithaka-men-election-commission-para-barasin-mamata-banerjee-chief-election-commissioner-ko-hatane-ki-ra-40316 · **Language:** Hindi
**Tags:** इंडिया गठबंधन, ममता बनर्जी, ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग, राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, एसआईआर, संसद

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश की चुनावी व्यवस्था, चुनावी निष्पक्षता और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर बेहद गहन विमर्श हुआ। कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में जुटे विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने मतदान प्रक्रिया और हालिया चुनावी गतिविधियों की समीक्षा की। इस जमावड़े में सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कड़े रुख की रही। ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सीधा हमला बोला और कहा कि वह पूरी तरह गायब हैं। उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर की समूची प्रक्रिया को बेहद लचर और अव्यवस्थित बताते हुए चुनाव के बाद बने जमीनी हालात पर गहरी चिंता जताई। ममता बनर्जी ने यह तक कहा कि अब वह अपने घर से बाहर नहीं निकल सकतीं, साथ ही भारतीय जनता पार्टी पर तानाशाही और अधिनायकवादी तौर-तरीके अपनाने का आरोप मढ़ दिया।

## चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठे सवाल
विपक्षी गठबंधन की इस बैठक का केंद्रीय एजेंडा ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर से जुड़े तमाम विवाद थे। विपक्षी खेमा काफी समय से मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने के प्रशासनिक तरीकों पर ऐतराज जताता रहा है। बैठक के भीतर ममता बनर्जी ने न सिर्फ संशोधन के अंतिम परिणामों पर अपनी बात रखी, बल्कि जिस ढर्रे पर इसे जमीन पर उतारा गया, उसकी बदहाली को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस पूरी कवायद को बेहद खराब और गैर-जिम्मेदाराना ढंग से अंजाम दिया गया है। विपक्षी दलों का मानना है कि इस तरह की प्रशासनिक खामियां चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। बैठक में मौजूद विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण के नाम पर अपनाई गई लचर व्यवस्था के खिलाफ एक साझा और ठोस रुख अपनाना बेहद जरूरी हो चुका है।

## मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर ममता बनर्जी की तल्ख टिप्पणी
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए बेहद तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपनी जिम्मेदारियों से नदारद हैं और मौजूदा हालात में गायब बने हुए हैं। ममता बनर्जी की यह टिप्पणी ऐसे संवेदनशील समय में आई है जब विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की औपचारिक मांग को लेकर अपनी आगामी रणनीति तैयार कर रहे हैं। बैठक में इस बात पर गंभीर विमर्श हुआ कि क्या संसद के पटल पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कोई प्रस्ताव पेश किया जा सकता है और इस पर सभी विपक्षी पार्टियां किस प्रकार एकजुट होकर कदम बढ़ा सकती हैं। यद्यपि ऐसे किसी भी बड़े कदम को उठाने से पहले गठबंधन के सभी दलों के बीच आम सहमति बनना जरूरी है, लेकिन ममता बनर्जी के आक्रामक रुख ने इस विमर्श को खासा तेज कर दिया है।

## चुनाव बाद के हालात और घर से बाहर न निकलने की बात
चुनावी प्रक्रियाओं पर चर्चा के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव के बाद पैदा हुई स्थितियों को लेकर बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव संपन्न होने के बाद के माहौल के कारण अब वह घर से बाहर नहीं निकल सकतीं। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि शासन में तानाशाही और अधिनायकवादी मानसिकता हावी हो चुकी है। ममता बनर्जी की ओर से साझा की गई यह चिंता बैठक में मौजूद नेताओं के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गई। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्र राजनीतिक गतिविधियों पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा। इस बयान ने बैठक में मौजूद दलों को यह सोचने पर विवश किया कि चुनावी तंत्र की निष्पक्षता बहाल करने के लिए जमीनी स्तर से लेकर संसद तक किस तरह की लड़ाई लड़ी जानी चाहिए।

## तेजस्वी यादव के गंभीर आरोप और नियमों में बदलाव का दावा
इस संयुक्त बैठक से ठीक पहले राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी चुनाव आयोग और समूची चुनावी प्रक्रिया पर कई गंभीर आरोप लगाए। तेजस्वी यादव ने सीधे तौर पर मतदान प्रणाली में भारी गड़बड़ी का दावा किया और कहा कि खुद दो चुनाव आयुक्तों ने भी इस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने यह भी आरोप मढ़ा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव करने के लिए कानूनी नियमों में पहले ही फेरबदल कर दिए गए थे। अपने दावों को विस्तार देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि मतदान के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की अनिवार्य समय-सीमा को एक वर्ष से घटाकर महज 45 दिन कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान खत्म होने के पश्चात आवश्यकता के अनुरूप वोटिंग प्रतिशत के आंकड़ों को घटाया या बढ़ाया जाता है। तेजस्वी यादव के इन दावों ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता और चुनावी पारदर्शिता को लेकर विपक्षी खेमे के संदेहों को और ज्यादा गहरा कर दिया।

## संसद में संयुक्त प्रस्ताव लाने की तैयारी और गठबंधन का इतिहास
विपक्षी गठबंधन की इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद के भीतर एक औपचारिक प्रस्ताव लाने की संभावनाओं को पूरी गंभीरता से खंगाला गया। विपक्षी नेता इस दिशा में एक साझा रणनीति के तहत कानूनी और विधायी विकल्पों की पड़ताल कर रहे हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो पिछले तीन वर्षों के दौरान विपक्षी गठबंधन की यह कुल आठवीं बैठक रही। वहीं चालू वर्ष के भीतर यह ऐसा दूसरा मौका था जब गठबंधन के शीर्ष नेता एक मेज पर एकत्र हुए। इससे पूर्व आठ जून को विपक्षी नेताओं का ऐसा ही समागम हुआ था, जिसमें एसआईआर और चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता का मसला सबसे प्रमुखता से उठाया गया था। लगभग साढ़े तीन महीने के अंतराल के बाद बुलाई गई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पूर्व में उठाए गए उन्हीं बुनियादी सवालों को और मजबूती से आगे बढ़ाना था। संसद में संभावित प्रस्ताव और आंदोलन की रूपरेखा पर आने वाले दिनों में अंतिम संयुक्त निर्णय लिए जाने की संभावना है।

## बैठक में दलों की मौजूदगी और अनुपस्थिति का सियासी समीकरण
दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित इस अहम बैठक में कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी पहुंचे, जबकि पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी और बिहार से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने शिरकत की। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इस चर्चा का हिस्सा बने। इसके अलावा वामपंथी नेता दीपांकर भट्टाचार्य और समाजवादी पार्टी का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी विमर्श में शामिल हुआ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए और उनके स्थान पर पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने प्रतिनिधित्व किया। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने जानकारी दी कि इस बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी-एसपी, शिवसेना यूबीटी, आरजेडी, वामपंथी दलों सहित अन्य सहयोगी पार्टियां शामिल रहीं। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी और डीएमके की ओर से इस बैठक में किसी भी प्रतिनिधि ने भाग नहीं लिया, जिससे विपक्षी एकता के इस मंच पर कुछ राजनीतिक दूरी भी साफ नजर आई।

## इसका आप पर असर
चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं और मतदाता सूची संशोधन पर विपक्षी दलों के रुख का आम नागरिकों की चुनावी भागीदारी पर सीधा असर पड़ता है।

- **मतदाता सूची में नाम:** मतदाता सूची के विशेष संशोधन से जुड़े विवादों के बीच नागरिकों को अपने मतदान कार्ड और वोटर लिस्ट में प्रविष्टियों की नियमित जांच करनी चाहिए। यदि सूची में कोई विसंगति या नाम हटने की आशंका हो, तो समय रहते संबंधित निर्वाचन कार्यालय या ऑनलाइन पोर्टल पर सुधार के लिए आवेदन करना जरूरी है।
- **चुनावी पारदर्शिता और विश्वास:** चुनावी प्रक्रिया और नियमों में किसी भी तरह के बदलाव पर नजर रखना हर नागरिक के लिए आवश्यक है। चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच संवाद से नियमों की स्पष्टता बढ़ती है जिससे निष्पक्ष मतदान का माहौल सुदृढ़ होता है।
- **संसदीय और विधायी कदम:** मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में किसी भी प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा देश के संवैधानिक ढांचे को प्रभावित करती है। आम जनता के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि चुनाव संचालन से जुड़ी संस्थाओं में जवाबदेही किस तरह तय होती है।
- **राजनीतिक दलों की एकजुटता:** विभिन्न दलों के एक मंच पर आने से सार्वजनिक नीतियों और चुनावी सुधारों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज होगी। इससे भविष्य के चुनावों में मतदाताओं को अधिक जागरूक और सतर्क रहकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने की प्रेरणा मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
विपक्षी गठबंधन की यह बैठक चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची संशोधन की खामियों और हालिया चुनावी अनुभवों को लेकर उपजे असंतोष के कारण बुलाई गई। विपक्षी दल काफी समय से चुनावी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियां दर्ज करा रहे थे।

- **मतदाता सूची संशोधन में कथित खामियां:** स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर की प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर बेहद अव्यवस्थित और पक्षपातपूर्ण तरीके से लागू करने के आरोप लगे। ममता बनर्जी सहित कई नेताओं का मानना है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूचियों की शुचिता प्रभावित हुई है।
- **चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल:** विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष संस्थागत जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ रहे हैं। इसी असंतोष के चलते उन्हें पद से हटाने और संसद में संयुक्त प्रस्ताव लाने की रणनीति पर विचार किया गया।
- **नियमों में बदलाव और रिकॉर्ड सुरक्षा:** तेजस्वी यादव ने दावा किया कि मतदान रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की अवधि एक साल से घटाकर 45 दिन कर दी गई और मतदान प्रतिशत में विसंगतियां देखी गईं। इन आरोपों ने चुनाव आयोग की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए।
- **विपक्षी समन्वय की निरंतरता:** इससे पहले 8 जून को हुई बैठक में भी चुनाव आयोग का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। करीब साढ़े तीन महीने बाद हुई इस बैठक का उद्देश्य चुनावी सुधारों पर एक साझा और आक्रामक मंच तैयार करना था।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली में आयोजित विपक्षी गठबंधन की बैठक का मुख्य एजेंडा क्या था?
इस बैठक का मुख्य एजेंडा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर में कथित गड़बड़ियां और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर आगे की रणनीति बनाना था।

### 2. ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बारे में क्या कहा?
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए कहा कि वह गायब हैं और उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

### 3. ममता बनर्जी ने चुनाव बाद की स्थिति पर क्या बयान दिया?
ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव के बाद बने माहौल की वजह से अब वह अपने घर से बाहर नहीं निकल सकतीं और भाजपा पर तानाशाही का आरोप लगाया।

### 4. तेजस्वी यादव ने मतदान रिकॉर्ड को लेकर क्या दावा किया?
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि मतदान के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की निर्धारित अवधि एक साल से घटाकर 45 दिन कर दी गई है।

### 5. विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में क्या कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं?
विपक्षी पार्टियां मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर संसद में संयुक्त प्रस्ताव पेश करने की संभावनाओं पर विचार कर रही हैं।

### 6. इस बैठक में कौन-कौन से प्रमुख विपक्षी दल शामिल हुए और कौन अनुपस्थित रहे?
बैठक में कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, सपा, वाम दल, एनसीपी-एसपी और शिवसेना यूबीटी शामिल हुए, जबकि आप और डीएमके से कोई नेता नहीं पहुंचा।

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