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  "title": "विपक्षी विरोध और अदालत परिसर में इंटरनेट पाबंदी पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, कानूनी सलाहकारों पर उठे सवाल",
  "summary": "दिल्ली में विपक्षी प्रदर्शनों के बीच अदालत परिसर के निकट इंटरनेट बंद करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन प्रेसिडेंट एडवोकेट प्रदीप राय ने प्रतिक्रिया दी है।",
  "content": "देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट सेवाओं को निलंबित किए जाने के मामले ने अब न्यायिक और राजनीतिक गलियारों में तूल पकड़ लिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से अदालत का रुख करने के फैसले के बाद कानूनी बिरादरी से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस ताजा याचिका में यह गुहार लगाई गई है कि सुप्रीम कोर्ट तथा अन्य अदालती परिसरों के आसपास किसी भी विरोध प्रदर्शन के वक्त इंटरनेट संचार को ठप नहीं किया जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अदालती प्रक्रिया, प्रशासनिक सीमाओं और विपक्षी नेताओं की रणनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है।\n\nकानूनी समझ और सलाहकारों की भूमिका पर सवाल\nइस याचिका के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट एडवोकेट प्रदीप राय ने कांग्रेस नेता के रुख पर सीधी टिप्पणी की। एडवोकेट प्रदीप राय ने राहुल गांधी के राजनीतिक कद की चर्चा करते हुए कहा कि वे एक बड़े राजनेता हैं और उनका संबंध एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से है। हालांकि, उनके वर्तमान कदमों पर चिंता जताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग राहुल गांधी को कानूनी राय दे रहे हैं, वे उन्हें सही राह नहीं दिखा रहे हैं। एडवोकेट प्रदीप राय ने कहा कि उनके सलाहकारों को कानून की बुनियादी समझ ही नहीं है, जिसके चलते इस प्रकार के अनुचित कदम उठाए जा रहे हैं।\n\nसीजेआई का प्रशासनिक दायरा और मुलाकात से इनकार\nइससे पहले मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के मुलाकात के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। सीजेआई सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया था कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर नागरिक के लिए खुले हैं, लेकिन न्यायपालिका सरकार के प्रशासनिक क्षेत्र में सीधा हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने नेताओं से स्पष्ट कहा था कि यदि उन्हें किसी प्रकार की कानूनी राहत चाहिए, तो वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक खंड के समक्ष विधिवत अपील दायर कर सकते हैं। राहुल गांधी से मिलने से इनकार किए जाने के संदर्भ में सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी स्पष्ट किया कि वे पहले ही उन कारणों से अवगत करा चुके हैं जिनकी वजह से यह औपचारिक मुलाकात संभव नहीं हो सकी।\n\nचुनाव निष्पक्षता पर सवाल और तीन बजे याचिका दाखिल करने का ऐलान\nलोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने रुख को सार्वजनिक करते हुए बताया कि उन्होंने और कांग्रेस अध्यक्ष ने सीजेआई सूर्यकांत को पत्र भेजकर देश में लोकतंत्र और चुनावों की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं दर्ज कराई थीं। राहुल गांधी ने कहा कि सीजेआई की ओर से जवाब मिलने और याचिका दायर करने के निर्देश के बाद ही यह कानूनी कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि विपक्षी गठबंधन के साथी नेताओं के साथ वे स्वयं सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर करीब तीन बजे याचिका प्रस्तुत करेंगे। अपने वक्तव्य में राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्तों के संदर्भ में उठे सवालों को दोहराते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और उन पर अतीत के भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी।\n\nइसका आप पर असर\nइस अदालती याचिका से विरोध प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों के संचार अधिकारों और अदालती कामकाज पर सीधा असर पड़ सकता है।\n\n• नागरिक अधिकारों पर प्रभाव: यदि अदालत परिसर के आसपास इंटरनेट पाबंदी पर रोक लगती है तो आम जनता और प्रदर्शनकारियों के डिजिटल संचार अधिकार सुरक्षित रहेंगे। इससे आपात स्थिति में वकीलों और वादियों को इंटरनेट बंद होने से होने वाली असुविधा से राहत मिल सकती है।\n• अदालती कामकाज की सुरक्षा: अदालतों में ऑनलाइन फाइलिंग और डिजिटल सुनवाई के दौर में निर्बाध नेटवर्क का होना बेहद आवश्यक माना जाता है। इस मामले पर आने वाला कोई भी न्यायिक आदेश भविष्य में होने वाले प्रशासनिक फैसलों के लिए नजीर बनेगा।\n• विपक्षी राजनीति की रणनीति: राजनीतिक दलों के लिए यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासनिक मुलाकातों के बजाय औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया ही एकमात्र वैध रास्ता है। विपक्षी गठबंधन को अब अपने सारे मुद्दे सार्वजनिक मुलाकातों के बदले कानूनी याचिकाओं के जरिए रखने होंगे।\n• प्रशासनिक नियंत्रण पर सीमा: राजधानी में कानून व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस और गृह मंत्रालय के इंटरनेट बंद करने के अधिकारों पर न्यायिक समीक्षा तय हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियां बिना ठोस आधार के अदालत परिसरों के पास संचार तंत्र ठप नहीं कर पाएंगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कानूनी और राजनीतिक विवाद प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट निलंबन और विपक्षी नेताओं की चीफ जस्टिस से मुलाकात की मांग के बाद पैदा हुआ।\n\n• इंटरनेट निलंबन के खिलाफ याचिका: प्रदर्शनों के दौरान अदालत परिसर के निकट संचार सेवाएं बाधित होने से वकीलों और नागरिकों की परेशानियां बढ़ी हैं। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक गुहार लगाई गई कि कोर्ट क्षेत्र के पास इंटरनेट न रोका जाए।\n• चीफ जस्टिस द्वारा मुलाकात से इनकार: विपक्षी नेताओं ने चुनाव और लोकतंत्र के मुद्दे पर सीजेआई सूर्यकांत से मिलने का समय मांगा था जिसे उन्होंने प्रशासनिक मर्यादाओं के तहत खारिज कर दिया। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत भेंट के बदले केवल न्यायिक खंड के जरिए ही राहत मांगी जा सकती है।\n• चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोप: राहुल गांधी और सहयोगी दल चुनाव आयुक्तों की भूमिका और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार हमलावर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में औपचारिक याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट में किस मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई है?\nयाचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट तथा अन्य अदालती परिसरों के आसपास विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवा को न रोका जाए।\n\n2. एडवोकेट प्रदीप राय ने राहुल गांधी को लेकर क्या बयान दिया?\nसुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट एडवोकेट प्रदीप राय ने कहा कि राहुल गांधी को कानूनी सलाह देने वाले सही सलाह नहीं दे रहे हैं और उन्हें कानून की समझ नहीं है।\n\n3. सीजेआई सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं की मुलाकात पर क्या कहा?\nसीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के प्रशासनिक क्षेत्र में दखल नहीं दे सकता और कानूनी मदद के लिए न्यायिक खंड में अपील की जानी चाहिए।\n\n4. राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका कितने बजे दायर करने की बात कही?\nराहुल गांधी ने कहा कि वे विपक्षी गठबंधन के नेताओं के साथ मिलकर करीब तीन बजे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।\n\n5. राहुल गांधी ने किस चुनाव अधिकारी के इस्तीफे का सवाल उठाया?\nराहुल गांधी ने अपने बयान में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाते हुए उन पर अतीत के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।",
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  "category": "दिल्ली",
  "publishedAt": "2026-10-12",
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