घर की बालकनी में बिना बाजार के बीज उगाएं रसीले टमाटर, जानिए कटिंग से लेकर कटाई तक का आसान तरीका मानसून के मौसम में बिना बाजार से बीज खरीदे भी घर पर गमले में टमाटर उगाए जा सकते हैं। जानिए रसोई के टमाटर और पौधों की कटिंग का उपयोग करके 90 से 100 दिनों में भरपूर फसल पाने का पूरा तरीका। मानसून का मौसम घर की बालकनी या छत पर हरी-भरी सब्जियां उगाने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इस दौरान मौसम में नमी रहने के कारण पौधरोपण में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। लौकी और कद्दू की तरह टमाटर भी गमलों में बहुत आसानी से पनप जाते हैं। अक्सर भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण नर्सरी या बाजार जाकर सब्जियों के बीज खरीदने का समय नहीं मिल पाता। हालांकि, घर पर ताजे और रसीले टमाटर उगाने के लिए बाजार से पैकेट वाले बीज लाना बिल्कुल जरूरी नहीं है। आप रसोई में रखे ताजे टमाटर या किसी पुराने पौधे की कटिंग का इस्तेमाल करके भी शानदार टमाटर का पौधा तैयार कर सकते हैं। बेकार पड़ी प्लास्टिक की बोतलों और साधारण गमलों में भी टमाटर की अच्छी पैदावार ली जा सकती है। इसके लिए बस गमले का सही आकार चुनने, मिट्टी का पौष्टिक मिश्रण तैयार करने और समय-समय पर सही खाद देने की बुनियादी तकनीक पता होनी चाहिए। गमले का चुनाव और टमाटर उगाने के उपयुक्त मौसम टमाटर एक ऐसी सब्जी है जिसकी खेती पूरे वर्ष के दौरान तीन अलग-अलग चक्रों में की जा सकती है। इसे मानसून के मौसम में, सर्दियों की शुरुआत में और गर्मी के दिनों में आसानी से बोया जा सकता है। हर मौसम के अनुसार टमाटर की अलग-अलग किस्मों का चयन किया जाता है। यदि आपके पास बीज खरीदने का समय नहीं है या आसपास कोई कृषि स्टोर उपलब्ध नहीं है, तब भी आप बिना बीज के टमाटर उगा सकते हैं। टमाटर का पौधा कलम यानी कटिंग के माध्यम से भी बहुत तेजी से बढ़ता है। घर पर गमला चुनते समय इस बात का ध्यान रखें कि गमले की गहराई कम से कम 12 से 14 इंच होनी चाहिए। टमाटर की जड़ें गहराई में फैलती हैं, इसलिए छोटा गमला पौधे के विकास को रोक सकता है। बिना बीज के टमाटर उगाने की दो मुख्य और बेहद असरदार विधियां मौजूद हैं, जिनका पालन करके कोई भी व्यक्ति अपने घर पर जैविक सब्जी उगा सकता है। पहला तरीका: पौधे की कटिंग से नया पौधा तैयार करना पौधे की कटिंग से टमाटर उगाना एक बेहद सरल और तेज प्रक्रिया है। इसके लिए किसी पुराने और स्वस्थ टमाटर के पौधे से एक मजबूत शाखा लें। इस शाखा या कटिंग को हमेशा 45 डिग्री के कोण पर ही काटें। कटिंग के ऊपरी हिस्से पर केवल एक या दो पत्तियां रहने दें और बाकी सभी निचली पत्तियों को हटा दें। यदि कटिंग में कोई छोटे फूल लगे हों, तो उन्हें भी काटकर अलग कर देना चाहिए ताकि पौधे की ऊर्जा नई जड़ें विकसित करने में लगे। इसके बाद 8 से 10 इंच का एक छोटा गमला लें और उसमें मिट्टी भरकर कटिंग को लगा दें। कटिंग उगाने का एक और बेहतरीन तरीका यह है कि आप इसे 5 से 7 दिनों तक पानी से भरे कांच के गिलास में रख दें। कुछ ही दिनों में कटिंग के निचले हिस्से से सफेद जड़ें निकलने लगेंगी। जब जड़ें दिखाई देने लगें, तो इस कटिंग को बड़े गमले में रोपित कर दें। कटिंग लगाने की एक सीधी तकनीक भी काफी प्रचलित है। इसमें शाखा की कलम बनाकर उसे बिना देर किए तुरंत तैयार गमले की नम मिट्टी में लगा दिया जाता है। कलम लगाने के तुरंत बाद गमले में पर्याप्त पानी दें ताकि पौधा सूखे नहीं और उसे नए वातावरण में ढलने में कोई झटका न लगे। कलम को मिट्टी में कम से कम 3 इंच गहराई तक दबाना आवश्यक होता है। कटिंग लगाने के बाद गमले को कम से कम 10 दिनों तक किसी छायादार स्थान पर रखें, जहां सीधी और तेज धूप न आती हो। कटिंग विधि का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इसमें बीज की तुलना में फूल बहुत जल्दी आते हैं और फल भी कम समय में मिलने लगते हैं। पौधे के विकास के लिए पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी की तैयारी गमले में टमाटर उगाने के लिए मिट्टी की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक आदर्श मिट्टी का मिश्रण बनाने के लिए 50 प्रतिशत साधारण बगीचे की मिट्टी लें। इसमें 30 प्रतिशत अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मिकम्पोस्ट मिलाएं। बाकी 20 प्रतिशत हिस्से में कोकोपीट या साफ रेत मिलाएं ताकि मिट्टी हल्की और भुरभुरी बनी रहे। इन तीनों सामग्रियों को आपस में अच्छी तरह मिला लें। पौधे को कीटों से बचाने और अतिरिक्त पोषण देने के लिए इस मिश्रण में थोड़ी सी सरसों की खली और थोड़ी सी नीम की खली भी मिला दें। गमले के निचले हिस्से में जल निकासी का छिद्र होना अनिवार्य है ताकि फालतू पानी आसानी से बाहर निकल सके और जड़ें सड़ने से बच सकें। मिट्टी को अधिक उपजाऊ बनाने के लिए उसमें थोड़ा सा चूना मिलाया जा सकता है। चूना मिलाने से मिट्टी में कैल्शियम की मात्रा बढ़ती है, जिससे टमाटर के पौधे का तना मजबूत होता है और फलों में सड़न की समस्या नहीं आती। इस तैयार मिट्टी के मिश्रण को गमले में भरकर हल्का दबाएं। यह संतुलित मिट्टी पौधे को शुरुआती चरण से लेकर फल आने तक सभी आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करती है। दूसरा तरीका: बाजार के ताजे टमाटर से बीज निकालकर बोना यदि आपके पास पुरानी कटिंग उपलब्ध नहीं है, तो आप बिना बाजार से बीज खरीदे भी घर में रखे टमाटर का उपयोग कर सकते हैं। यह विधि घरेलू गार्डनिंग के लिए सबसे सुलभ मानी जाती है। इसके लिए बाजार से लाए गए टमाटरों में से सबसे बड़ा, लाल और पूरी तरह पका हुआ टमाटर चुनें। बड़े आकार के टमाटर में स्वस्थ और मजबूत बीज मिलते हैं। टमाटर को बीच से काटकर उसके बीजों को एक कटोरी में निकाल लें। बीजों के चारों ओर लगे गूदे को हाथों से हल्का मसलकर अलग कर लें। अब गमले में पहले से तैयार की गई भुरभुरी मिट्टी के ऊपर इन बीजों को समान रूप से बिखेर दें। बीज बिखेरने के बाद उनके ऊपर मिट्टी की एक बहुत हल्की परत बिछा दें ताकि बीज ढक जाएं। इसके बाद गमले में स्प्रे की मदद से हल्का पानी दें। गमले में दोबारा पानी तभी डालें जब ऊपर की मिट्टी सूखी दिखाई दे। अत्यधिक पानी देने से बीज सड़ सकते हैं। इस विधि से 10 से 15 दिनों के भीतर बीजों का अंकुरण शुरू हो जाता है और छोटे-छोटे पौधे बाहर निकलने लगते हैं। जब ये पौधे थोड़े बड़े हो जाएं और उनमें 4 से 5 पत्तियां आ जाएं, तो उन्हें सावधानी से उखाड़कर अलग-अलग 12 से 14 इंच के गमलों में लगा देना चाहिए। इसी विधि का एक और आसान विकल्प भी है। आप बड़े आकार के टमाटर से बीजों को निकालकर सीधे गमले की भुरभुरी मिट्टी पर डाल सकते हैं। मिट्टी से ढककर पानी देने पर लगभग 10 दिनों के अंदर ही छोटे पौधे उग आते हैं। पौधों के थोड़ा बड़ा होने पर उन्हें अलग गमलों में स्थानांतरित कर दें। पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए हर 10 दिन के अंतराल पर गमले में सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मिकम्पोस्ट डालते रहें। चूंकि टमाटर का तना शुरुआत में काफी नाजुक और कमजोर होता है, इसलिए जैसे-जैसे पौधा बड़ा हो, उसे लकड़ी की छड़ी का सहारा देना चाहिए। यह सहारा पौधा लगाने के 20 से 25 दिन बाद या फूल आने से ठीक पहले देना आवश्यक होता है। प्रूनिंग, रूट फिलिंग और कीट नियंत्रण की तकनीक पौधा रोपने के लगभग 1 माह बाद उसमें सुंदर पीले फूल आने लगते हैं। यदि आप चाहते हैं कि टमाटर के एक ही पौधे से आपको प्रचुर मात्रा में फल मिलें, तो पौधे को घना बनाना जरूरी है। इसके लिए पौधे के सबसे निचले हिस्से में निकलने वाली छोटी और अनावश्यक शाखाओं को काट दें। इस छंटाई प्रक्रिया को प्रूनिंग कहा जाता है। निचले हिस्से की शाखाएं हटने से पौधे का मुख्य तना मजबूत होता है और ऊपर की ओर नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं। इसके बाद रूट फिलिंग की विशेष तकनीक अपनाएं। पौधे को अतिरिक्त पोषण देने के लिए जड़ों के आसपास की ऊपरी मिट्टी को किसी छोटे औजार से हल्का सा खोदकर हटा दें। जड़ों के पास हल्का सा चूना या कैल्शियम पाउडर छिड़कें और ऊपर से वर्मिकम्पोस्ट की एक परत डाल दें। इस प्रक्रिया को रूट फिलिंग कहते हैं। रूट फिलिंग करने के तुरंत बाद गमले में पानी न डालें, बल्कि कुछ घंटों बाद ही हल्का पानी दें। पौधे में नियमित फल पाने के लिए हर 20 से 25 दिनों के अंतर पर सरसों की खली और नीम खली का जैविक घोल डालते रहें। इसके अलावा, पौधे को फंगल इन्फेक्शन और कीड़ों से बचाने के लिए नियमित अंतराल पर नीम के तेल का छिड़काव करते रहना चाहिए। सिंचाई का ध्यान और 90 से 100 दिनों का कटाई चक्र टमाटर के पौधे की देखभाल में सिंचाई का नियम सबसे महत्वपूर्ण होता है। जब पौधे में फूल आ रहे हों, तो मिट्टी में नमी का संतुलन बनाए रखें। यदि इस दौरान पौधे को पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा या मिट्टी पूरी तरह सूख जाएगी, तो फूल झड़ने लगेंगे और फल नहीं बन पाएंगे। फूल आने से लेकर छोटे टमाटर बनने में लगभग 1 माह का समय लग जाता है। फल बनने के बाद उन्हें आकार में बड़ा होने और पूरी तरह लाल होकर पकने में 10 से 15 दिनों का अतिरिक्त समय लगता है। इस प्रकार, यदि पूरे चक्र का हिसाब लगाया जाए, तो बीज बोने या कटिंग लगाने से लेकर पौधे पर लाल टमाटर पकने में कुल 90 से 100 दिनों का समय लगता है। इस तरह थोड़ी सी समझदारी, नियमित देखभाल और सही पोषक तत्वों का प्रयोग करके आप बिना कोई पैसा खर्च किए अपने घर की बालकनी में ही पूरे परिवार के लिए ताजे, रसीले और रसायन-मुक्त टमाटर उगा सकते हैं। इसका आप पर असर घर पर सब्जी उगाने वाले पाठकों के लिए: • बचत और शुद्धता: बाजार से नए बीज खरीदे बिना रसोई में मौजूद टमाटर या कटिंग से बिल्कुल मुफ्त में रासायनिक खाद-मुक्त ऑर्गेनिक टमाटर उगाए जा सकते हैं। • आसान गार्डनिंग: मानसून के दौरान कम मेहनत और 12 से 14 इंच के सामान्य गमले या बेकार प्लास्टिक बोतलों में भी भरपूर पैदावार हासिल की जा सकती है। सवाल-जवाब 1. क्या बिना बाजार से बीज खरीदे घर पर टमाटर उगाए जा सकते हैं? हाँ, रसोई में रखे पके टमाटर से बीज निकालकर या किसी पुराने पौधे की कटिंग लगाकर घर पर आसानी से टमाटर उगाए जा सकते हैं। 2. टमाटर का पौधा लगाने के लिए गमले का आकार कितना होना चाहिए? टमाटर के पौधे की अच्छी बढ़वार और जड़ों के फैलाव के लिए गमला कम से कम 12 से 14 इंच गहरा होना चाहिए। 3. टमाटर के लिए गमले की मिट्टी किस अनुपात में तैयार करनी चाहिए? आदर्श मिट्टी मिश्रण के लिए 50 प्रतिशत बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत गोबर की खाद या वर्मिकम्पोस्ट और 20 प्रतिशत कोकोपीट या रेत मिलाएं। इसमें थोड़ी सरसों और नीम की खली भी मिला सकते हैं। 4. पौधे की कटिंग से टमाटर उगाने में कितना समय लगता है और इसे कैसे लगाएं? पुराने पौधे की कटिंग को 45 डिग्री के कोण पर काटकर 3 इंच गहरा लगाएं या 5-7 दिन पानी में रखकर जड़ें आने पर गमले में लगाएं। कटिंग से फूल और फल जल्दी आते हैं। 5. टमाटर के पौधे में चूना या कैल्शियम पाउडर क्यों डाला जाता है? मिट्टी में चूना या जड़ों के पास कैल्शियम पाउडर डालने से पौधे को आवश्यक कैल्शियम मिलता है, जिससे तना मजबूत होता है और फल स्वस्थ बनते हैं। 6. पौधे को बोने से लेकर टमाटर पकने तक कुल कितना समय लगता है? कटिंग या बीज लगाने के बाद टमाटर पकने और कटाई के योग्य होने में पूरे 90 से 100 दिनों का समय लगता है। https://trendkia.com/diy/ghara-ki-balakani-men-bina-bajara-ke-bija-ugaen-rasile-tamatara-janie-katinga-se-lekara-katai-taka-ka-asana-tarika-19187 TrendKia — Har trend, sabse pehle.