जहानाबाद के राज मिस्त्री बैजू कुमार की सलाह, डीपीसी के ऊपर वॉटरप्रूफिंग घोल लगाने से नहीं आएगी दीवारों में सीलन मकान निर्माण के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भविष्य में दीवारों की सुंदरता बिगाड़ सकती है। जहानाबाद के अनुभवी राज मिस्त्री बैजू कुमार ने घर को सीलन से हमेशा बचाए रखने का आसान तरीका बताया है। अपना घर बनाना हर इंसान का सबसे बड़ा सपना होता है। लोग अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी और मेहनत की कमाई एक सुंदर मकान खड़ा करने में लगा देते हैं। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि गृह निर्माण में जल्दबाजी या सही जानकारी न होने की वजह से लोग कुछ बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं। मकान बनकर तैयार होते ही प्लास्टर और पेंट कराकर लोग गृह प्रवेश कर लेते हैं, लेकिन कुछ ही समय बाद दीवारों पर नमी और सीलन की पपड़ी दिखाई देने लगती है। इससे न केवल घर का सुंदर लुक खराब होता है, बल्कि मकान मालिक को दोबारा मरम्मत पर भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है। फाउंडेशन के स्तर पर ध्यान देना है बेहद जरूरी घर की दीवारों को जीवनभर सीलन और नमी से सुरक्षित रखने के लिए निर्माण के शुरुआती चरण यानी नींव (फाउंडेशन) के दौरान ही विशेष ध्यान देना होता है। बिहार के जहानाबाद जिले स्थित घोसी के रहने वाले राज मिस्त्री बैजू कुमार, जिनके पास भवन निर्माण का 11 साल का लंबा अनुभव है, बताते हैं कि सीलन रोकने का सबसे प्रभावी काम नींव भरते समय ही किया जा सकता है। उनके अनुसार, अगर फाउंडेशन बनाते समय सही प्रक्रिया अपनाई जाए तो मकान में सीलन की समस्या कभी पैदा नहीं होगी। डीपीसी के बाद वॉटरप्रूफिंग घोल का इस्तेमाल बैजू कुमार के अनुसार, जब मकान का निर्माण जमीन के स्तर से 3 फीट ऊपर तक पहुंच जाए, तो वहां सबसे पहले डीपीसी (डैम प्रूफ कंक्रीट) की परत बिछानी चाहिए। लेकिन केवल डीपीसी कराना ही काफी नहीं होता। अधिकांश लोग डीपीसी का काम पूरा होते ही तुरंत उसके ऊपर ईंटों की जुड़ाई शुरू कर देते हैं, जो एक बड़ी भूल है। सही तरीका यह है कि डीपीसी की कंक्रीट सेट होने के बाद उसके ऊपर वॉटरप्रूफिंग रसायन या वॉटरप्रूफ घोल की एक अच्छी कोटिंग की जाए। बाजार में किसी भी निर्माण सामग्री की दुकान पर वॉटरप्रूफिंग केमिकल आसानी से उपलब्ध हो जाता है। घोल सूखने के बाद ही शुरू करें ईंटों की जुड़ाई राज मिस्त्री का कहना है कि डीपीसी पर वॉटरप्रूफिंग घोल लगाने के बाद उसे पूरी तरह सूखने देना चाहिए। जब यह कोटिंग अच्छी तरह सूखकर एक मजबूत परत बना ले, तभी उसके ऊपर आगे की ईंट जुड़ाई का काम शुरू करना चाहिए। यह वॉटरप्रूफ परत जमीन की नमी को ऊपर की दीवारों तक चढ़ने से पूरी तरह रोक देती है। यदि इस चरण को छोड़ दिया जाता है, तो जमीन की नमी ईंटों के जरिए धीरे-धीरे पूरे मकान की दीवारों में फैल जाती है और पपड़ी बनकर पेंट को उखाड़ देती है। थोड़ी सी बचत भविष्य में पड़ती है भारी मकान बनवाते समय अक्सर लोग थोड़े से पैसे बचाने के चक्कर में डीपीसी पर वॉटरप्रूफिंग का घोल नहीं लगवाते। लेकिन यह छोटी सी बचत बाद में बेहद महंगी साबित होती है। नमी के कारण दीवारों का प्लास्टर झड़ने लगता है, पेंट खराब होता है और बार-बार मरम्मत करानी पड़ती है। इसलिए शुरुआत में ही सही तकनीक और वॉटरप्रूफिंग में थोड़ा सा अतिरिक्त निवेश करके हमेशा के लिए सीलन से मुक्ति पाई जा सकती है और मकान को मजबूत व टिकाऊ बनाया जा सकता है। इसका आप पर असर फाउंडेशन के समय डीपीसी पर सही वॉटरप्रूफिंग तकनीक अपनाने से मकान मालिकों को दीवारों में सीलन की गंभीर समस्या से स्थाई राहत मिलती है। • भारत में: देश भर में नया घर बनवा रहे लोग इस साधारण तकनीक को अपनाकर अपने मकान को नमी से बचा सकते हैं। इससे इमारतों की उम्र बढ़ती है और भविष्य में होने वाले मरम्मत खर्च से बचा जा सकता है। • जहानाबाद और बिहार में: जहानाबाद सहित बिहार के विभिन्न जिलों में स्थानीय जलवायु और नमी के कारण घरों में सीलन की समस्या आम है। घोसी के राज मिस्त्री बैजू कुमार की यह सलाह स्थानीय लोगों को अपने सपनों के घर को सुरक्षित रखने में मदद करेगी। • मकान मालिकों के लिए: निर्माण के दौरान सही प्रक्रिया का पालन करने से दीवारों की फिनिशिंग और पेंट सालों-साल सुरक्षित रहता है। इससे बार-बार प्लास्टर या पेंट कराने की झंझट खत्म हो जाती है। • लागत और बजट पर असर: फाउंडेशन के स्तर पर वॉटरप्रूफिंग केमिकल में बहुत मामूली खर्च आता है। शुरुआत में किया गया यह छोटा सा निवेश भविष्य के बड़े वित्तीय नुकसान को रोकता है। • घर की सुंदरता और सुरक्षा: दीवारों पर सीलन की पपड़ी न जमने से घर की आंतरिक और बाहरी खूबसूरती बरकरार रहती है। साथ ही नमी से संरचना की मजबूती पर भी कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता। सवाल-जवाब 1. मकान की दीवारों में सीलन की समस्या क्यों आती है? नींव निर्माण के दौरान डीपीसी पर वॉटरप्रूफिंग घोल न लगाने से जमीन की नमी ईंटों के जरिए दीवारों में चढ़ जाती है, जिससे सीलन आती है। 2. सीलन रोकने के लिए डीपीसी का काम किस ऊंचाई पर करना चाहिए? मकान का निर्माण जमीन के स्तर से 3 फीट ऊपर पहुंचने पर डीपीसी (डैम प्रूफ कंक्रीट) का काम करना चाहिए। 3. डीपीसी कराने के बाद क्या करना जरूरी है? डीपीसी की परत बिछाने के बाद उसके ऊपर वॉटरप्रूफिंग रसायन या घोल की अच्छी कोटिंग लगाना और उसे पूरी तरह सूखने देना जरूरी है। 4. डीपीसी के ऊपर वॉटरप्रूफिंग घोल लगाने के बाद ईंट जुड़ाई कब शुरू करनी चाहिए? वॉटरप्रूफिंग का घोल पूरी तरह सूखकर एक मजबूत परत बनने के बाद ही उसके ऊपर ईंटों की जुड़ाई शुरू करनी चाहिए। 5. क्या डीपीसी पर लगाया जाने वाला वॉटरप्रूफिंग केमिकल आसानी से मिल जाता है? हां, वॉटरप्रूफिंग रसायन किसी भी स्थानीय भवन निर्माण सामग्री (बिल्डिंग मटेरियल) की दुकान से आसानी से खरीदा जा सकता है। https://trendkia.com/diy/jehanabad-ke-raja-mistri-baiju-kumar-ki-salaha-dpc-ke-upara-votarapruphinga-ghola-lagane-se-nahin-aegi-divaron-men-silana-23418 TrendKia — Har trend, sabse pehle.