खराब मौसम में बिजली के झटकों से घर के महंगे उपकरण कैसे बचाएं आंधी-तूफान के दौरान वोल्टेज में आने वाले अचानक उछाल से फ्रिज, एसी और टीवी खराब हो सकते हैं। कुछ आसान और बुनियादी सावधानियां बरतकर घरेलू उपकरणों को बड़े नुकसान से सुरक्षित रखा जा सकता है। आंधी, तेज हवाओं और बिजली कड़कने के दौरान घरों में बिजली की सप्लाई अक्सर बाधित होती है। कई बार बिजली बार-बार आती-जाती है और तारों में वोल्टेज का स्तर अचानक बढ़ या घट जाता है। ज्यादातर लोग केवल बिजली कटने को असुविधा मानते हैं, जबकि सबसे गंभीर जोखिम बिजली वापस आने के समय पैदा होता है। जब आसमान में बिजली कड़कती है या पावर ग्रिड में अचानक कोई बदलाव आता है, तो बिजली की मुख्य लाइनों में अचानक अत्यधिक वोल्टेज का प्रवाह उत्पन्न हो जाता है। यह हाई वोल्टेज स्पाइक केवल कुछ सेकंड के लिए ही रहता है, लेकिन इसका झटका इतना तीव्र होता है कि यह एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन, कंप्यूटर और अन्य संवेदनशील घरेलू उपकरणों के भीतरी इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को तुरंत नष्ट कर सकता है। रिमोट से बंद करना पर्याप्त नहीं, सॉकेट से प्लग बाहर निकालना जरूरी मौसम बिगड़ने पर बहुत से लोग टेलीविजन या एसी को केवल रिमोट की मदद से बंद कर देते हैं। इस आदत को तकनीकी तौर पर एक बड़ी लापरवाही माना जाता है। रिमोट से बंद करने पर डिवाइस केवल स्टैंडबाय मोड में जाता है, जबकि उसका सीधा संपर्क विद्युत धारा और सॉकेट से बना रहता है। जब बाहर तेज आंधी चल रही हो या बादलों में बिजली चमक रही हो, तब उपकरण का मुख्य पावर स्विच बंद करने के साथ-साथ उसका थ्री-पिन प्लग दीवार के सॉकेट से पूरी तरह बाहर निकाल देना चाहिए। जब प्लग अलग कर दिया जाता है, तो वायरिंग के रास्ते आने वाले किसी भी अचानक करंट या हाई वोल्टेज के झटके का उपकरण तक पहुंचना असंभव हो जाता है, जिससे महंगे गैजेट्स पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। कंप्रेसर वाले उपकरणों के लिए वोल्टेज स्टेबलाइजर का इस्तेमाल रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर जैसे भारी उपकरणों के संचालन में कंप्रेसर सबसे मुख्य और संवेदनशील घटक होता है। विद्युत आपूर्ति में होने वाले उतार-चढ़ाव का सबसे सीधा और बुरा असर इसी कंप्रेसर यूनिट पर पड़ता है। जिन इलाकों में वोल्टेज बार-बार घटता या बढ़ता रहता है, वहां उपकरण के साथ उच्च गुणवत्ता वाला वोल्टेज स्टेबलाइजर जोड़ना बेहद आवश्यक कदम है। स्टेबलाइजर आने वाली अनियमित बिजली को संतुलित करता है और उपकरण तक एक तय सीमा में नियंत्रित करंट भेजता है। इससे कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और भारी रिपेयरिंग खर्च या उपकरण के पूरी तरह फुंक जाने का जोखिम टल जाता है। संवेदनशील गैजेट्स के लिए सर्ज प्रोटेक्टर बोर्ड अपनाएं कई घरों में डेस्कटॉप कंप्यूटर, वाई-फाई राउटर, गेमिंग कंसोल और होम थिएटर सिस्टम को सामान्य प्लास्टिक एक्सटेंशन बोर्ड के जरिए चलाया जाता है। साधारण बोर्ड बिजली के अचानक तेज बहाव को रोकने में असमर्थ होते हैं। तकनीकी जानकार सलाह देते हैं कि ऐसे कीमती और नाजुक उपकरणों को हमेशा खास सर्ज प्रोटेक्टर वाले एक्सटेंशन बोर्ड से ही जोड़ना चाहिए। सर्ज प्रोटेक्टर में विशेष घटक लगे होते हैं, जो मुख्य लाइन से आने वाले अचानक हाई वोल्टेज को पहचानते ही उसे रोक लेते हैं या अवशोषित कर लेते हैं। इस तरह घातक वोल्टेज उपकरण के नाजुक मदरबोर्ड तक नहीं पहुंच पाता। वर्क फ्रॉम होम और पढ़ाई के लिए यूपीएस की भूमिका घरों से काम करने वाले पेशेवरों और ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्टिविटी लगातार चालू रहना अनिवार्य होता है। ऐसे सेटअप के लिए यूपीएस यानी अनइंटरप्टिबल पावर सप्लाई सबसे सुरक्षित ढाल बनता है। अचानक बिजली कटने पर यह तुरंत बैटरी बैकअप प्रदान करता है, जिससे काम बीच में नहीं रुकता और डेटा सुरक्षित रहता है। इसके साथ ही यूपीएस बिजली की अनियमितताओं और तरंगों को फिल्टर करके उपकरणों को एक समान बिजली देता है, जिससे हार्डवेयर के खराब होने का डर समाप्त हो जाता है। बिजली वापस आते ही उपकरण तुरंत चालू करने से बचें अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही बिजली गुल होने के बाद दोबारा आती है, लोग तुरंत भागकर एसी, टीवी या फ्रिज का स्विच ऑन कर देते हैं। यह जल्दबाजी उपकरणों के लिए भारी पड़ सकती है। बिजली बहाल होने के शुरुआती दो से तीन मिनट तक ग्रिड का वोल्टेज पूरी तरह स्थिर नहीं होता और उसमें कई बार झटके आते रहते हैं। इसलिए बिजली आने के बाद कम से कम 2 से 3 मिनट का धैर्य रखना चाहिए। जब लाइन में करंट पूरी तरह स्थिर हो जाए, तभी बड़े पावर लोड वाले उपकरणों को ऑन करना चाहिए ताकि उनके मोटर और कंप्रेसर पर कोई अतिरिक्त खिंचाव न आए। वायरिंग और अर्थिंग सिस्टम की नियमित जांच खराब मौसम के दौरान घर के बाहर या खुले में मौजूद बिजली के तारों और केबल पर नजर रखना जरूरी है। यदि घर की आंतरिक वायरिंग काफी पुरानी हो चुकी है, तो समय पर किसी पेशेवर इलेक्ट्रिशियन से उसकी सर्विसिंग और जांच करानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, घर का अर्थिंग सिस्टम पूरी तरह दुरुस्त होना अनिवार्य है। यदि अर्थिंग में खराबी होगी, तो आंधी-तूफान के समय बिजली के अप्रत्याशित झटकों का पूरा प्रभाव सीधे घरेलू उपकरणों पर पड़ेगा। मौसम के पूर्वानुमान के बीच सतर्कता ही बचाव मौसम विभाग द्वारा आने वाले दिनों में तेज हवाएं चलने और बारिश होने की संभावना जताई गई है। ऐसे हालात में चंद मिनट निकालकर अपने घरेलू उपकरणों की सुरक्षा जांच लेना एक समझदारी भरा फैसला है। मुख्य सॉकेट से प्लग अलग करना, सर्ज प्रोटेक्टर और स्टेबलाइजर की व्यवस्था करना तथा बिजली आने पर 2 से 3 मिनट इंतजार करने जैसी बुनियादी आदतें उपकरणों की उम्र बढ़ाती हैं और बेवजह के बड़े आर्थिक नुकसान से बचाती हैं। इसका आप पर असर आंधी-तूफान के दौरान सही सावधानियां न बरतने से घर के महंगे उपकरण खराब हो सकते हैं और जेब पर अचानक भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है। • भारत में: मौसम खराब होने पर केवल रिमोट से उपकरण बंद करने के बजाय सॉकेट से प्लग निकालना जरूरी है। इससे देश भर के उपभोक्ताओं को अचानक वोल्टेज सर्ज के कारण हजारों रुपये के रिपेयरिंग खर्च से बचने में मदद मिलती है। • दिल्ली-एनसीआर में: आगामी दिनों में तेज हवाओं और बारिश की चेतावनी के बीच स्थानीय निवासियों को अपनी वायरिंग और अर्थिंग की तुरंत जांच करानी चाहिए। वोल्टेज में होने वाले बार-बार उतार-चढ़ाव से एसी और फ्रिज के कंप्रेसर को बचाने के लिए स्टेबलाइजर का इस्तेमाल सुनिश्चित करें। • वर्क फ्रॉम होम करने वालों के लिए: कंप्यूटर और इंटरनेट राउटर को साधारण बोर्ड के बजाय यूपीएस से जोड़कर रखें। ऐसा करने से अचानक पावर कट होने पर जरूरी डेटा सुरक्षित रहेगा और हार्डवेयर खराब नहीं होगा। • बिजली आने के बाद: बिजली बहाल होते ही तुरंत भारी उपकरण चालू करने की गलती से बचें। कम से कम 2 से 3 मिनट इंतजार करने के बाद ही स्विच ऑन करें ताकि उपकरण स्थिर वोल्टेज पर काम कर सकें। ऐसा क्यों हुआ आंधी-तूफान और खराब मौसम के दौरान पावर ग्रिड और वितरण लाइनों पर अचानक असामान्य दबाव पड़ता है, जिसके चलते बिजली के वोल्टेज में तीव्र उछाल आ जाता है। • सीधा कारण: बादलों में बिजली चमकने और तारों के आसपास डिस्चार्ज होने से मुख्य विद्युत लाइन में तीव्र वोल्टेज सर्ज पैदा होता है। यह सर्ज कुछ ही पलों में तारों के माध्यम से घरों के सॉकेट तक पहुंच जाता है। • ग्रिड में अचानक बदलाव: तेज हवाओं के कारण जब पेड़ या शाखाएं तारों पर गिरती हैं तो लाइनें ट्रिप हो जाती हैं। बिजली कटने और ग्रिड द्वारा दोबारा लोड संभालने के दौरान वोल्टेज का संतुलन बिगड़ जाता है। • कमजोर अर्थिंग और पुरानी वायरिंग: कई मकानों में अर्थिंग की उचित व्यवस्था नहीं होती या आंतरिक तार पुराने होते हैं। सही अर्थिंग न होने पर अतिरिक्त करंट जमीन में समाने के बजाय सीधे उपकरणों के संवेदनशील मदरबोर्ड में घुस जाता है। • बहाली के तुरंत बाद का झटका: बिजली जाने के बाद जब आपूर्ति दोबारा शुरू होती है, तो शुरुआती कुछ सेकंड तक करंट का प्रवाह पूरी तरह स्थिर नहीं रहता। यही अस्थिरता कंप्रेसर और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट पर घातक दबाव डालती है। सवाल-जवाब 1. आंधी-तूफान में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को केवल रिमोट से बंद करना गलत क्यों है? रिमोट से बंद करने पर उपकरण सिर्फ स्टैंडबाय मोड में रहता है और उसका सर्किट सॉकेट से जुड़ा रहता है, जिससे वोल्टेज सर्ज सीधे उपकरण तक पहुंच सकता है। 2. बिजली आने के तुरंत बाद एसी या फ्रिज क्यों नहीं चालू करना चाहिए? बिजली लौटने के शुरुआती 2 से 3 मिनट तक वोल्टेज स्थिर नहीं होता, जिससे कंप्रेसर और मोटर पर अचानक अत्यधिक दबाव पड़ सकता है। 3. एसी और फ्रिज के लिए वोल्टेज स्टेबलाइजर लगाना क्यों जरूरी है? स्टेबलाइजर वोल्टेज के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करता है और कंप्रेसर तक सुरक्षित बिजली पहुंचाकर महंगे नुकसान से बचाता है। 4. साधारण एक्सटेंशन बोर्ड के बजाय सर्ज प्रोटेक्टर क्यों चुनना चाहिए? सर्ज प्रोटेक्टर अचानक आने वाले अत्यधिक हाई वोल्टेज को उपकरण तक पहुंचने से पहले ही रोक या अवशोषित कर लेता है। 5. कंप्यूटर और इंटरनेट राउटर के लिए यूपीएस किस तरह मददगार है? यूपीएस अचानक बिजली कटने पर बैटरी बैकअप देता है, जिससे डेटा सुरक्षित रहता है और बिजली की अनियमितताएं फिल्टर होकर हार्डवेयर सुरक्षित रहता है। 6. घर के अर्थिंग सिस्टम की जांच क्यों आवश्यक है? खराब अर्थिंग होने पर बिजली के झटके और अतिरिक्त वोल्टेज का सीधा असर उपकरणों पर पड़ता है, जिससे उनके जलने का खतरा बढ़ जाता है। https://trendkia.com/diy/kharaba-mausama-men-bijali-ke-jhatakon-se-ghara-ke-mahnge-upakarana-kaise-bachaen-52866 TrendKia — Har trend, sabse pehle.